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Mar 21, 2017

भेज कहार-माचिस १९९६

सन १९९६ की फिल्म माचिस से अगला गीत सुनते
हैं लता मंगेशकर का गाया हुआ. गुलज़ार के लिखे
गीत की धुन बनाई है विशाल भारद्वाज ने. फिल्म
का ये गीत थोडा कम सुना गया है.

जनता के अनुसार गुलज़ार के गीतों के साथ न्याय
आर डी बर्मन के बाद विशाल भारद्वाज ने किया है.
आजकल गुलज़ार बहुत सारे संगीतकारों के लिए
लिखते हैं, अब वो सब कितना न्याय करते हैं इस पर
ज्यादा चर्चा नहीं होती.



गीत के बोल:

भेज कहार  पिया जी बुला लो
कोई रात रात जागे
डोली पड़ी पड़ी द्योड़ी में
अर्थी जैसी लागे
भेज कहार  पाली जी बुला लो

साँझ ढले सूनी गली  दरवाजे तक आए
कोई नहीं आया अभी  इतनी खबर दे जाए
भेज कहार  पिया जी बुला लो
कोई रात रात जागे
भेज कहार  पाली जी बुला लो

आकाश में कागा उड़े  बैठे न मेरे बनेरे
ठंडी नमी जलती नहीं  फूँकूँ कहाँ तक अंधेरे
भेज कहार  पिया जी बुला लो
कोई रात रात जागे
भेज कहार  पाली जी बुला लो
………………………………………………..
Bheje kahaar-Machis 1996

Artists: Tabu, Chandrachud Singh

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Aug 21, 2011

छोड़ आए हम-माचिस १९९६

माचिस की अगली तीली प्रस्तुत है. मेरा मतलब; माचिस फिल्म का
अगला गीत सुनिए. जैसा कि गीत के नीचे लिखे कमेन्ट में जिक्र है-
गीत गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है. तनाव और चिंता के क्षणों
में भी कुछ देर आनंद किस तरह लिया जा सकता है, शायद यही
सन्देश देता सा सुनाई देता है ये गीत. गुलज़ार के लिखे इस गीत को
चार गायक गा रहे हैं -हरिहरन, सुरेश वाडकर, विनोद सहगल और के.के.
ये गीत भी काफी सुना गया जनता द्वारा.

गीत में ओम पुरी को भी दो पंक्तियाँ गाते दिखाया गया है.




छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे
जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे

हे, तेरी कमर के बल पे, नदी मुड़ा करती थी
हँसी तेरी सुन सुन के, फ़सल पका करती थी

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

हो, जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी-लिपटी, इक रात हुआ करती थी
हो,कभी कभी तकिये पे, वो भी मिला करती है

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है
इक अंधा कुआँ है या, इक बंद गली सी है
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता
मैं लाख जलाता हूँ, यह भस्म नहीं होता
यह भस्म नहीं होता

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
.............................
Chhod aaye hum-Maachis 1996

Artists: Chandachud Singh, Tabu, Om Puri

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Aug 3, 2011

पानी पानी रे -माचिस १९९६

गुलज़ार ने लंबे अरसे बाद हिंदी फिल्म बनाई-माचिस। अलग हट के किस्म
की फिल्म। पंजाब में पैदा हुई समस्या पर केंद्रित ये फिल्म भाग १ जैसे जल्द
ही समाप्त हो जाती है। कहानी अधूरी सी लगती है। बीच में फिल्म का कथानक
लंबा खींचा हुआ प्रतीत होता है। गुलज़ार के पुराने साथी राहुल देव बर्मन की
अनुपस्थिति में संगीत का काम विशाल भरद्वाज को सौंपा गया। उन्होंने इस काम
को ठीक ठाक अंजाम दिया। बहुमुखी प्रतिभा के विशाल भारद्वाज ने कई फ़िल्में
निर्देशित भी की हैं।

फिल्म के गीत काफी बजे थे. उनमें से एक है-पानी पानी रे। लता मंगेशकर की
आवाज़ में धीमा सा ये गीत फिल्म के कुछ बढ़िया हिस्सों में से एक है। गीत
फिल्माया गया है अभिनेत्री तब्बू पर जिन्होंने माचिस फिल्म के निर्माण के पहले
ही संवेदनशील कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना ली थी हिंदी फिल्म जगत
में।



गीत के बोल:

पानी पानी रे खारे पानी रे
पानी पानी रे खारे पानी रे
नैनों में भर जा
नींदें खली कर जा

पानी पानी रे खारे पानी रे
पानी पानी रे खारे पानी रे
नैनों में भर जा
नींदें खाली कर जा

पानी-पानी इन पहाड़ों की ढलानों से, उतर जाना
धुआँ-धुआँ कुछ वादियाँ भी आयेंगी, गुज़र जाना
एक गाँव आयेगा मेरा घर आयेगा
जा मेरे घर जा
नींदें खाली कर जा

ये रुदाली जैसी रातें जगरातों में, बिता देना
मेरी आँखों में जो बोले मीठे पाखी तो, उड़ा लेना
बर्फ़ों में लगे मौसम पिघले
मौसम हरे कर जा
नींदें खाली कर जा

पानी पानी रे खारे पानी रे
पानी पानी रे खारे पानी रे
नैनों में भर जा
नींदें खाली कर जा
................................
Paani paani re-Maachis 1996

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