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Oct 20, 2016

कबीरा कहे ये जग अंधा-डा. बाबासाहेब अंबेडकर २०००

सन २००० में रिलीज़ एक और फिल्म का गीत सुनते हैं. ये
अलग फ्लेवर वाला है, उपदेशात्मक गीत है. जब्बार पटेल
निर्देशित फिल्म डा. बाबासाहेब अंबेडकर से ये गीत किया गया
है. परंपरागत बोलों को सुरों में ढाला है अमर हल्दीपुर ने.

रवींद्र साठे और विनोद सहगल इसे गा रहे हैं. रवींद्र साठे का
गाया एक गीत आप सुन चुके हैं पहले. विनोद सहगल गज़ल
गायन के लिए मशहूर हैं. जगजीत सिंह के संगीत निर्देशन
में उनका एक एल्बम १९८४ में आया था. गुलज़ार द्वारा निर्मित
मिर्ज़ा ग़ालिब पर बने सीरियल में भी कुछ गज़लों में आप
उनकी आवाज़ सुन सकते हैं. फिल्मों में भी उनके कुछ गीत
हैं जो हम आपको सुनवायेंगे आगे.

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कलाकार ममूटी ने फिल्म में अम्बेडकर
का रोल किया था जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय
पुरस्कार भी प्राप्त हुआ. फिल्म का निर्माण एन एफ डी सी ने
किया था. अंग्रेजी में बनी फिल्म को ९ भारतीय भाषाओँ में डब
किया गया था.




गीत के बोल:

कबीरा कहे ये जग अंधा
अंधी जैसी गाय बछड़ा था सो मर गया
अंधी जैसी गाय बछड़ा था सो मर गया
झूठी जाम चटाये
कबीरा कहे ये जग अंधा
कबीरा कहे ये जग अंधा

गगन घटा गहरानी साधो
गगन घटा गहरानी साधो
गगन घटा गहरानी
पूरब दिशा से उठी है बदरिया
हो पूरब दिशा से उठी है बदरिया
रिमझिम बरसात पानी रिमझिम बरसात पानी
पूरब दिशा से उठी है बदरिया
रिमझिम बरसात पानी हो रिमझिम बरसात पानी
अंधी जैसी गाय बछड़ा था सो मर गया
झूठी जाम चटाये
कबीरा कहे ये जग अंधा
कबीरा कहे ये जग अंधा
कबीरा कहे ये जग अंधा
कबीरा कहे ये जग अंधा
............................................................
Kabira kahe ye jag andha-Dr. Babasaheb Ambedkar 2000

Artist:Mamoothy

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Aug 21, 2011

छोड़ आए हम-माचिस १९९६

माचिस की अगली तीली प्रस्तुत है. मेरा मतलब; माचिस फिल्म का
अगला गीत सुनिए. जैसा कि गीत के नीचे लिखे कमेन्ट में जिक्र है-
गीत गंभीरता से सुनने की आवश्यकता है. तनाव और चिंता के क्षणों
में भी कुछ देर आनंद किस तरह लिया जा सकता है, शायद यही
सन्देश देता सा सुनाई देता है ये गीत. गुलज़ार के लिखे इस गीत को
चार गायक गा रहे हैं -हरिहरन, सुरेश वाडकर, विनोद सहगल और के.के.
ये गीत भी काफी सुना गया जनता द्वारा.

गीत में ओम पुरी को भी दो पंक्तियाँ गाते दिखाया गया है.




छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे
जहाँ तेरे पैरों के, कँवल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में, भँवर पड़ा करते थे

हे, तेरी कमर के बल पे, नदी मुड़ा करती थी
हँसी तेरी सुन सुन के, फ़सल पका करती थी

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

हो, जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
जहाँ तेरी एड़ी से, धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे, अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी-लिपटी, इक रात हुआ करती थी
हो,कभी कभी तकिये पे, वो भी मिला करती है

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ

दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है
इक अंधा कुआँ है या, इक बंद गली सी है
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता
मैं लाख जलाता हूँ, यह भस्म नहीं होता
यह भस्म नहीं होता

छोड़ आए हम, वो गलियाँ
वो गलियाँ
छोड़ आए हम, वो गलियाँ
.............................
Chhod aaye hum-Maachis 1996

Artists: Chandachud Singh, Tabu, Om Puri

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