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Feb 1, 2014

मैं शायर बदनाम-नमक हराम १९७३

फिल्म नमक हराम में एक दारुड़ीये शायर की भूमिका में हैं
रज़ा मुराद. उनको इतना मासूम दिखाया गया है कि दर्शकों
को उनसे सहानुभूति हो जाती है. अपने अंतिम चरण पर
पहुँच चुके शायर की इच्छा है नायक उसका लिखा गीत गाये.

गीत सुनते सुनते कुछ तृप्ति कुछ अतृप्ति के भाव के साथ
शायर इस संसार से विदा ले लेता है. अदायगी, गीत संगीत
के लिहाज़ से ये हिंदी फिल्मों के नायब नमूनों में से एक है
और दर्शक इस गीत से बांध जाता है. किशोर के गाये दर्दीले
गीतों में से एक आज भी सुनो वही प्रभाव पैदा करता है जैसा
बरसों पहले किया करता था.आनंद बक्षी की लेखनी का कमाल
है और राहुल देव बर्मन के संगीत का जादू  जिसके मिश्रण
से ये गीत बना और किशोर ने इसे अमर कर दिया.




गीत के बोल:

मैं शायर बदनाम
मैं शायर बदनाम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला
महफ़िल से नाकाम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला
मैं शायर बदनाम

मेरे घर से तुमको कुछ सामान मिलेगा
दीवाने शायर का एक दीवान मिलेगा
और एक चीज़ मिलेगी
टूटा खली जाम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला

मैं शायर बदनाम

शोलों पे चलना था काँटों पे सोना था
और अभी जी भर के किस्मत पे रोना था
जाने ऐसे कितने
बाकी छोड़ के काम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला

मैं शायर बदनाम

रस्ता रोक रही है
थोड़ी जान है बाकी
जाने टूटे दिल में
क्या अरमान हैं बाकी
जाने भी दे ऐ दिल
सबको मेरा सलाम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला

मैं शायर बदनाम
मैं शायर बदनाम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला
महफ़िल से नाकाम
हो ओ ओ मैं चला मैं चला
………………………………
Main shayar badnaam-namak Haram 1973

Artists-Rajesh Khanna, Raza Murad

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Dec 16, 2013

सूनी रे सजरिया-नमक हराम १९७३

दो वक्त की रोटी का चक्कर बड़ा बुरा. किया क्या जाए इसके बिना
काम नहीं चलता है. बोलने की बक बक इतनी हो गयी पिछले दिनों
कि इधर से ध्यान न चाहते हुए भी हट गया. हिन्दुस्तान की सरज़मीं
पर मौजूद कई इन्टरनेट कनेक्शन इतने तेज चला करते हैं कि आज
एड्रेस टाइप करो, साईट कल खुलने की फुल गारंटी.

पाठकों से क्षमा याचना सहित अगली प्रस्तुति हाज़िर है. सन १९७३
की फिल्म नमक हराम से. हृषिकेश  मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म में
दो सुपर स्टार मौजूद हैं। हृषिकेश मुखर्जी क हिसाब से इसे अलग हट
के बनी फिल्म कहा जा सकता है.
हृषिकेश  मुखर्जी  हलकी फुलकी फिल्मों के लिए ज्यादा पहचाने गए हैं.
ये थोड़ी गंभीर किस्म की फिल्म है . फिल्म के बाकी गेटों के लिहाज़ से
प्रस्तुत गीत भी थोडा अलग है. पुरानी अनेक फिल्मों में आपको मुजरा
ज़रूर मिलेगा मानो बिना उसके फिल्म बनाना असंभव हो. ऐसा ही कुछ
मुझे इस फिल्म को देख के महसूस हुआ.

बहरहाल जो भी हो गीत सुनिए जो एक महिला युगल गीत है आशा भोंसले
और उषा मंगेशकर का गाया हुआ. आशा क आवाज़ पर जयश्री टी होंठ हिला
रही हैं दूसरी अभिनेत्री को मैं पहचान नहीं पा रहा हूँ.






गीत के बोल:

सूनी, सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

हो भई मैं बाँवरिया हाय राम
भई मैं बाँवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे


रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

रिमझिम काहे को
रिमझिम हाँ
रिमझिम काहे को बरसे रे बदरा
बह गया धुल के नैनों से कजरा

अबके बरस सावन से पूछो
छाई क्यूँ बदरिया हाय राम

छाई क्यूँ बदरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन ते

लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
लोग न जाने ऐसे
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न हाँ हाँ हाँ
लोग न जाने ऐसे जीते हैं कैसे
तुमसे बिछड के हम तो मर गए जैसे
ऐसे निगोडी बिरहा की रैना 
बीते न सांवरिया हाय राम
बीते न सांवरिया साजन बिन तेरे

सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे
सूनी रे सजरिया साजन बिन तेरे

_____________________________
Sooni re sajariya-Namak Haram 1973

Artists-Amitabh Bachchan, Rajesh Khanna, Jayshri T, 

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Jul 5, 2009

नदिया से दरिया-नमक हराम १९७३

सुनते हैं राजेश खन्ना पर फिल्माया गया किशोर कुमार का
एक और चर्चित गीत। फ़िल्म का नाम है नमक हराम और
ये गीत होली के अवसर पर गाया जा रहा है। ये बात अलग है
कि भांग पीने के बाद जो गीत है उसमे जाम का जिक्र है। हम
मान लेते हैं कि कोई भी नशीली चीज़ जो तरल अवस्था में हो
उसको जाम कहा जा सकता है। बोल आनंद बक्षी के हैं और संगीत
राहुल देव बर्मन का।



गाने के बोल:

नदिया से दरिया, दरिया से सागर
सागर से गहरा जाम
सागर से गहरा जाम

हो हो हो, जाम में डूब गयी यारों मेरे, जीवन की हर शाम

नदिया से दरिया, दरिया से सागर
सागर से गहरा जाम
सागर से गहरा जाम

हो हो हो, जाम में डूब गयी यारों मेरे, जीवन की हर शाम

जो ना पिये वो क्या जाने, पीते है क्यों हम दीवाने यार आ हा
जब से हमने पीना सीखा, जीना सीखा मरना सीखा यार आ हा
जो ना पिये वो क्या जाने, पीते है क्यों हम दीवाने यार आ हा
जब से हमने पीना सीखा, जीना सीखा मरना सीखा यार आ हा
ओ हम जब यूँ नशे में डगमगाने लग गये
हो हो हो, दिल की बेचैनी को आया थोड़ा सा आराम

नदिया से दरिया ........

मेरा क्या मैं ग़म का मारा, नशे में आलम है सारा यार, आ हा
किसी को दौलत का नशा, कहीं मुहब्बत का नशा यार, आ हा
मेरा क्या मैं ग़म का मारा, नशे में आलम है सारा यार, आ हा
किसी को दौलत का नशा, कहीं मुहब्बत का नशा यार, आ हा
हो ,कहकर ऐ शराबी सब पुकारें अब मुझे
हो हो हो, और कोई था, ये तो नहीं था, पहले मेरा नाम

नदिया से दरिया, दरिया से सागर
सागर से गहरा जाम
सागर से गहरा जाम

हो हो हो, जाम में डूब गयी यारों मेरे, जीवन की हर शाम
जाम में डूब गयी यारों मेरे, जीवन की ....
....................................................................
Nadiya se dariya-Namak Haram 1973

Artists-Rajesh Khanna, Asrani, Rekha

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