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Sep 14, 2015

कितने दिन आँखें तरसेंगी-नया ज़माना १९७१

अलौकिकता भरपूर है चहुँ और. देखने वाले और महसूस
करने वाले की नज़र चाहिए बस. हिंदी फिल्मों में वे
अभिनेत्रियां ज्यादा मशहूर हुई हैं जिनके चेहरे पर थोड़ी
मासूमियत दिखाई देती है/थी. हेमा मालिनी उनमे से
एक हैं. ये बात दीगर है समय के साथ वो भाव कम
होता चला मगर उनकी शुरूआती फिल्मों में हमें अलग
कोमल भाव देखने को मिले.

लाता के गाये और हेमा के ऊपर फिल्माए गीतों में से
मुझे कुछ बेहद पसंद हैं. आज आपको एक ऐसा ही गीत
सुनवा रहा हूँ जो अतिरिक्त माधुरी वाला है और बर्मन
दादा को एक बार फिर से धन्यवाद इतनी उम्दा धुन के
लिए. धन्यवाद के हक़दार आनंद बक्षी भी हैं जिनके बोल
भी इस गीत में चार चाँद लगाते हैं. गीत को हम फिल्म
का शीर्षक गीत कह सकते हैं क्यूंकि इसमें फिल्म का
नाम आता है.



गीत के बोल:

कितने दिन आँखें तरसेंगी
कितने दिन आँखें तरसेंगी,
कितने दिन यूँ दिल तरसेंगे
एक दिन तो बदल बरसेंगे ऐ मेरे प्यासे दिल
आज नहीं तो कल महकेगी ख्वाबों की महफ़िल
कितने दिन आँखें तरसेंगी

सूने सूने से मुरझाये से हैं क्यूँ उम्मीदों के चेहरे
काँटों के सर पे ही बांधे जायेंगे फूलों के सेहरे
सूने सूने से मुरझाये से हैं क्यूँ उम्मीदों के चेहरे
काँटों के सर पे ही बांधे जायेंगे फूलों के सेहरे
नया ज़माना आयेगा, नया ज़माना आयेगा
कितने दिन, कितने दिन यूँ दिल तरसेंगे
एक दिन तो बदल बरसेंगे ऐ मेरे प्यासे दिल
आज नहीं तो कल महकेगी ख्वाबों की महफ़िल

जिंदगी पर सब का एक सा हक है सब तसलीम करेंगे
सारी खुशियाँ सारे दर्द बराबर हम तकसीम करेंगे
जिंदगी पर सब का एक सा हक है सब तसलीम करेंगे
सारी खुशियाँ सारे दर्द बराबर हम तकसीम करेंगे
नया ज़माना आयेगा, नया ज़माना आयेगा
कितने दिन यूँ दिल तरसेंगे
एक दिन तो बदल बरसेंगे ऐ मेरे प्यासे दिल
आज नहीं तो कल महकेगी ख्वाबों की महफ़िल
कितने दिन आँखें तरसेंगी
....................................................................
Kitne din aankhen tarsengi-Naya Zamana 1971

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Nov 21, 2010

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर-नया ज़माना १९७१

फिल्म नया ज़माना(१९७१) से एक मीठा गीत और सुनवाया जाए आपको।
फिल्म में एक गरीब बाला पर चोरी का इलज़ाम लगाया जाता है। वो गीत
गा कर जवाब दे रही है। गरीब बाला का रोल किया है अरुणा ईरानी ने।
आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है और इस फिल्म में संगीत है सचिन देव
बर्मन का। १९७१ की फिल्म है और संगीतकार अपने पूरे यौवन के जौहर दिखला
के संगीत दे रहे हैं और अपने पुत्र पंचम को ज़बरदस्त टक्कर देते से प्रतीत
होते हैं। फिल्म नया ज़माना का संगीत काफी सराहा गया और सुना गया।



गीत के बोल:

सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
हूँ, चुप क्यूँ हो गए
कहिये कुछ और

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया
हाँ, मेहरबानी शुक्रिया
घर बुला के बेईज्ज़त किया

मेरी तलाशी तो ले ली सरकार
अपने गिरेबान में भी झांकिए एक बार

इस बात पर पे ज़रा कीजिये गौर

के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब
क्यूँ कि मैं हूँ एक गरीब
बेसहारा और बदनसीब

ताने हजारों सहे हो के मजबूर
पर मैं अब न चुप रहूंगी ऐ हुज़ूर
हाँ हाँ मचा दूँगी आज शोर

के, चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

सौ इलज़ाम लगाये
ओ मेरे नाम लगाये
आपने सौ इलज़ाम लगाये
कहिये कुछ और

चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर
चोरों को सारे नज़र आते हैं चोर

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Aug 23, 2009

दुनिया ओ दुनिया-नया ज़माना १९७१

धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी की जोड़ी की सफल फिल्मों में से एक है
नया ज़माना। इस फ़िल्म में अरुणा ईरानी, महमूद , प्राण और ललिता पवार
अन्य कलाकार हैं। समाजवाद और बेरोजगारी पर प्रकाश डालती ये फ़िल्म
एक अच्छा प्रयास था फिल्मकार प्रमोद चक्रवर्ती का। गरीबों के शोषण का
मुद्दा इस गाने के जरिये भी उठाया गया है। सुनिए और सोचिये। इसको लिखा
है आनंद बक्षी ने और संगीत से संवारा है सचिन देव बर्मन ने। लेखक की किताब
एक अमीर आदमी के नाम से छाप जाती है। जिसका जिक्र तीसरे अंतरे में आया है।
"आपसे तो मुझको कोई शिकवा......"



गाने के बोल :

दुनिया ओ दुनिया, तेरा जवाब नहीं
तेरी जफ़ाओं का, बस कोई हिसाब नहीं

तू छांव है या धूप है खबर किसको
क्या है तेरा असली रूप खबर किसको
आये नज़र कैसे तू आँसू है, ख़्वाब नहीं

दुनिया ओ दुनिया ...

तेरी ज़ुबां पे है, ज़िक्र सितारों का,
तेरे लबों पे है, नाम बहारों का
पर तेरे दामन में, काँटे हैं, गुलाब नहीं

दुनिया ओ दुनिया ...

ये किन खयालों में, खो गये हैं आप,
क्यों कुछ परेशान से, हो गये हैं आप
आपसे तो मुझको कुछ शिक़वा जनाब नहीं

दुनिया ओ दुनिया ...

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