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Dec 15, 2017

करा ले साफ़ करा ले-कैद १९७५

किसी भी संस्कृति में कुछ सेन्स वाली कृतियाँ होती हैं तो कई
सेन्सलेस कृतियाँ भी होती हैं. आदमी की अपने को पहचानने
वाली प्रवृत्ति के चलते वो अपने शरीर के सभी पुर्जों को पहचानने
की कोशिश करता है. इसी उपक्रम में उसने कब कान खुजाना
और उससे मैल निकालना शुरू किया ये शोध का विषय हो
सकता है. उसके लिए साधन भी जुटा लिए उसने. हाट बाजार
या मेले में लगने वाले बाजारों में आज भी आपको इसके लिए
बनाये गए औज़ार मिल जायेंगे. एक सेट आता है जिसमें जीभ,
दांत और कान साफ़ करने के औजार होते हैं और ये सेट
ताम्बे का बना होता है.

वैसे आधुनिक आयुष विज्ञानं या अंग्रेजी दवाई पद्धति अनुसार
कान साफ़ करने के ज़रूरत नहीं होती. वो जो मैल नाम का
कुछ कुछ होता है वो दरअसल वैक्स होता है जो कान के परदे
को सुरक्षा प्रदान करने का सामान होता है उसके अलावा परदे
के लिए डैम्पिंग का कार्य भी करता है. ये जब ज्यादा बन जाता
है तो अपने आप बाहर आ जाता है.




गीत के बोल:

करा ले साफ़ करा ले
मेरी जान साफ़ करा ले

..................................................................
Kara le saaf kara le-Qaid 1975

Artists: Mehmood, Jayshri T

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May 5, 2017

यहाँ कौन है असली-क़ैद १९७५

हिंदी फिल्मों के इनोवेटिव मैथड्स मौजूद होते हुए भी ना
जाने क्यूँ जनता रोते-झींकते काम करती है. गौर फरमाएं
कपडे धुलाई, बर्तन धुलाई, खाना बनाना, कपडे सीना और
जो कुछ भी मुझे याद नहीं आ रहा है अभी, वो सब फिल्मों
में संगीतमय तरीके से करना बतला दिया गया है. ९०  के
दशक में इंडीपॉप वीडियो के ज़रिये इला अरुण ने भी गा के
और झूम झूम के झाड़ू लगाना सिखा दिया जनता को.

ये गाना अपने समय का एक हिट और खूब बजने वाला गीत
रहा है, जो हम आज आपको सुनवा रहे हैं. पहले फरमाईशी
कार्यक्रम काफी आया करते थे जिससे जनता क्या सुनना
चाहती है इसका काफी हद तक सही अनुमान लगता था. अभी
आजकल के अधिकांश कार्यक्रमों में रेडियो जॉकी(जोकर) की
व्यक्तिगत पसंद भी शामिल हो जाती है.




गीत के बोल:

यहाँ कौन है असली कौन है नकली
अपने हैं या बेगाने
ये तो राम जाने ये तो राम जाने

…………………………………………………………..
Yahan kaun hai asli-Qaid 1975

Artist: Leena Chandavarkar

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Nov 26, 2016

ये तो ज़िन्दगी है-कैद १९७५

किशोर कुमार के आवाज़ युवा पीढ़ी को क्यूँ पसंद आती है उसका
जवाब आपको इस गीत में भी मिल सकता है. काफी उर्जा वाला ये
गीत है फिल्म क़ैद में. फिल्म के गीत अपने ज़माने में काफी ज्यादा
बजा करते थे और उस समय की युवा पीढ़ी को खूब भाते थे.

नायक नायिका एक ट्रक पर सवार हैं जिसका पीछा एक मुशटंडा सा
खलनायक कर रहा है अपनी गाडी से. थोड़ी देर में ट्रक चालक उसको
चकमा देने में कामयाब हो जाता है और नायक नायिका के साथ जो
जनता ट्रक में सवार है वो उतर कर गीत गाने का कार्यक्रम करती
है. नायिका का नाम प्रीत है और गीत में उसका नाम लिया जा रहा
है. गीत का दूसरा अन्तरा सन्देश देता है उसे ध्यान से सुनें.

गीत माया गोविन्द का है और संगीत नितिन मंगेश का. गीत में जो
अतिरिक्त आवाजें कोरस के अलावा निकाली गई हैं वो स्वयं संगीतकार
की हैं.




गीत के बोल:

ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म
मेरी जाँ रोना नहीं दामन भिगोना नहीं
ज़ू ज़ू
होगी सहर
ज़ू ज़ू ज़ू ओ मेरे सनम
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म हे
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म

बिछुआ बिछुआ बिछुआ
बिछुआ बिछुआ बिछुआ

आँखों में जो आँसू भरे हैं
होंठों से अपने मैं इन्हें छीन लूँगा
राहों में जो काँटे बिछे हैं
पलकों से अपनी मैं इन्हें बीन लूँगा
मेरी प्रीत ये जान ले इतना सच मान ले
ज़ू ज़ू
हारेंगे ग़म
ज़ू ज़ू ज़ू जीतेंगे हम

ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म हे
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म

मोती अभी लुटाए हैं तुमने
ज़रा मुस्कुरा के कलियाँ लुटा दो
जिसको कभी ग़म ना मिला हो
उस आदमी का तुम पता तो बता दो
मेरे यार कुछ तो कहो
ज़ालिम अब तो हँसो
ज़ू ज़ू
मर जाऊँगा
ज़ू ज़ू ज़ू तुम्हारी क़सम

ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म हे
ये तो ज़िन्दगी है कभी ख़ुशी है कभी ग़म
मेरी जाँ रोना नहीं दामन भिगोना नहीं
ज़ू ज़ू
होगी सहर
ज़ू ज़ू ज़ू ओ मेरे सनम
......................................................................
Ye to zindagi hai-Qaid 1975

Artists: Vinod Khanna, Leena Chandavarkar

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Oct 27, 2016

दीवाना हूँ प्यार का-क़ैद १९७५

इस गीत का जलवा आप देखते सन १९७५ में. मोहल्ले
के टपोरी और सेमी-टपोरी किस्म के छोरे इसे बड़े चाव
के साथ गुनगुनाते थे.

फिल्म क़ैद एक सस्पेंस फिल्म है इसके निर्माता निर्देशक
आत्माराम हैं. वही आत्माराम जिन्हें शंकर जयकिशन के
संगीत से बड़ा लगाव था. इस फिल्म के लिए उन्होंने
नितिन मंगेश को बतौर संगीतकार लिया और कुछ अच्छी
धुनें तैयार करवा लीं.

विनोद खन्ना और लीना चंदावरकर की जोड़ी के साथ इस
फिल्म में महमूद और जयश्री टी की जोड़ी भी है. कम्प्लीट
मसाला फिल्म क़ैद एक पैसा वसूल फिल्म है.

माया गोविन्द का लिखा गीत किशोर कुमार ने गाया है.
इसमें जोर लगा के दी...वा....ना... आवाज़ किसने निकाली
है इसकी जानकारी मुझे नहीं है.



गीत के बोल:

दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना
दीवाना
दीवाना हूँ प्यार का मैं हूँ आशिक दिलदार का
दीवाना हूँ प्यार का मैं हूँ आशिक दिलदार का
एक बार आँखें हों चार तो तू भी यार बोल
क्या
महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
दीवाना

आँख लड़ा के जान लड़ी है
मौत भी सर पे आन खड़ी है
सुन ले सारा जहां इश्क की दास्तां
सुन ले सारा जहां इश्क की दास्तां
सूली पे जा के आंसू बहा के
यूँ आशिक ने जा के कहा
दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना
दीवाना हूँ प्यार का मैं हूँ आशिक दिलदार का
दीवाना हूँ प्यार का मैं हूँ आशिक दिलदार का
एक बार आँखें हों चार तो तू भी यार बोल
क्या
महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
दीवाना

एक था मजनू एक थी लैला
दुश्मनों का जाल था फैला
खतरे को झेल के जान पे खेल के
खतरे को झेल के जान पे खेल के
मजनू ने आ के कलेजे लगा के
नैना मिला के कहा
दीवाना दीवाना दीवाना दीवाना
दीवाना हूँ प्यार का मैं हूँ आशिक दिलदार का
दीवाना हूँ प्यार का मैं हूँ आशिक दिलदार का
एक बार आँखें हों चार तो तू भी यार बोल
क्या
महबूबा महबूबा महबूबा महबूबा
दीवाना
.................................................................
Deewana hoon pyar ka-Qaid 1975

Artists: Vinod Khanna, Leena Chandavarkar, Mehmood, Jayshri T

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