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Mar 21, 2020

कमरे में बंद सोनिये-ओ बेवफा १९८०

८० के दशक में कुछ गीत खूब गूंजा करते थे. उन्हीं
में से एक आज सुनते हैं. सुरेश वाडकर ने काफी सारे
गीत गा लिए हैं अपने फ़िल्मी कैरियर में. उनके फेमस
गीतों की लिस्ट तैयार करें तो इस गीत को भी उसमें
जगह मिल जायेगी.

ओह बेवफा फिल्म के गीत सावन कुमार टाक ने लिखे
हैं. संगीत है वेदपाल वर्मा का जो पंजाबी और हरयाणवी
फ़िल्मी गैर फ़िल्मी गीत-लोकगीत क्षेत्र में जाना पहचाना
नाम है.



गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
कमरे में बंद सोणिये
तुझे जिस घडी रब ने बनाया
ते सोचा विच रब पे गया
दूजा चाँद कहा से चढ़ आया
कमरे में बंद सोणिये
तुझे जिस घडी रब ने बनाया
ते सोचा विच रब पे गया
दूजा चाँद कहा से चढ़ आया
हो कमरे में बंद सोणिये

आँखें हैं या फूल कमल के
होंठ है या दो शेर गज़ल के
हो हो हो हो हो
आँखें हैं या फूल कमल के
होंठ है या दो शेर गज़ल के
शेर गज़ल के
मेहमान बन के मेरा
देखो यार मेरे घर आया

ते सोचा विच रब पे गया
दूजा चाँद कहा से चढ़ आया
हो कमरे में बंद सोणिये

तुमको कही अब जाने न दूंगा
गैर को हाथ लगाने न दूंगा
होए होए होए ओए ओए
तुमको कही अब जाने न दूंगा
गैर को हाथ लगाने न दूंगा
लगाने न दूंगा
देखा है जबसे तुम्हें मैंने
सपना यही है सजाया
ते सोचा विच रब पे गया
दूजा चाँद कहा से चढ़ आया

हो कमरे में बंद सोणिये
तुझे जिस घडी रब ने बनाया
ते सोचा विच रब पे गया
दूजा चाँद कहा से चढ़ आया
हो कमरे में बंद सोणिये
……………………………………..
Kamre mein band soniye-Oh bewafa 1980

Artists: Anil Dhawan, Yogita Bali

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Jun 28, 2016

अब वफ़ा का नाम न ले कोई-ओ बेवफा १९८०

कभी कभी किसी गीत को सुन कर लगता है किसी दिलजले ने
लिखा है. ऐसा ही एक किस्सा है खूबसूरत अल्फाजों में फिल्म
ओ बेवफा से. ये कारनामा किया है सावन कुमार टाक ने. इन्हें
आप कम मत समझिए, इन्होने एक से बढ़ कर एक गीत लिखे
हैं. पार्ट टाइम गीतकार बन कर इन्होने जो गज़ब ढाया है अपनी
कलम से वो किसी के लिए भी जलन का सबब बन सकता है.

बेवफा शब्द से उनका इश्क पुराना है और पुरानी शराब सर चढ
कर बोलती है. इनके जीवन में ज़रूर कोई ऐसा वाकया हुआ होगा
जिससे उनकी अभिव्यक्ति पर दीर्घ कालिक असर हुआ और उन्होंने
अपनी फिल्मों और गीतों के माध्यम से उसे व्यक्त किया.

फिल्म का निर्देशन भी सावन कुमार ने किया है और इस फिल्म
का संगीत तैयार किया है वेदपाल ने. फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं
राजेंद्र कुमार, अनिल धवन, योगिता बाली, नाजनीन, टी पी जैन,
पिंचू कपूर, सुन्दर, आई एस जौहर और पेंटल. फिल्म से आपको
दो गीत इसके पहले सुनवाए जा चुके हैं. इसे हेमलता ने गाया है.
गीत राजेंद्र कुमार और योगिता बाली पर फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

अब वफ़ा का नाम न ले कोई
अब वफ़ा का नाम न ले कोई
हमें बेवफा की तलाश है
पत्थर का दिल सीने में हो
हमें उस खुदा की तलाश है
अब वफ़ा का नाम न ले कोई
हमें बेवफा की तलाश है

मारे ज़माना ठोकरें
तरसा करें हम प्यार को
तरसा करें हम प्यार को
कभी देखे मुंह न बहार का
हमें उस दुआ की तलाश है

अब वफ़ा का नाम न ले कोई
हमें बेवफा की तलाश है

हमें गम नहीं उस पार था
तूफ़ान हमको अज़ीज़ है
तूफ़ान हमको अज़ीज़ है
जो डुबो दे साहिल पर हमें
उस नाखुदा की तलाश है

अब वफ़ा का नाम न ले कोई
हमें बेवफा की तलाश है

लगे आग अपने करार को
रोये तो रोने दो प्यार को
रोये तो रोने दो प्यार को
जो न भर सके कभी ज़ख्म को
हमें उस दवा की तलाश है

अब वफ़ा का नाम न ले कोई
हमें बेवफा की तलाश है
पत्थर का दिल सीने में हो
हमें उस खुदा की तलाश है
अब वफ़ा का नाम न ले कोई.
...............................................
Ab wafa ka naam na le koi-Oh Bewafa 1980

Artists-Rajendra Kumar, Yogita Bali

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Jun 23, 2016

अरे देख ली तेरी बम्बई-ओ बेवफा १९८०

इस फिल्म से आपको एक बरसाती गीत सुनवाया था पहले.
आज सुनेंगे बम्बई शहर की मुश्किलों पर किशोर कुमार क्या
कहते हैं. गीत की स्क्रिप्ट लिखी है सावन कुमार ने और
इसके संगीतकार हैं वेदपाल.

फिल्म ओ बेवफा का निर्देशन सावन कुमार टाक ने किया है.
वे सामाजिक और पारिवारिक फ़िल्में बनाते थे विशेषकर ऐसी
जो सौतन, बेवफा इत्यादि थीम के इर्द गिर्द केंद्रित हो. उनकी
फ़िल्में समस्या-पूर्ति कितनी करती थीं ये तो कहा नहीं जा
सकता मगर दर्शकों को उनकी फ़िल्में और फिल्मों का संगीत
बेहद भाता था. फिल्म में राजेंद्र कुमार, अनिल धवन, नाजनीन,
योगिता बाली, टी पी जैन, पिंचू कपूर, सुन्दर तनेजा, आई एस
जौहर और पेंटल प्रमुख कलाकार हैं. तांगे पर एक बच्चे को
लेकर एक कलाकार गीत गाता चला जा रहा है. पहचानिये इसे.
बीचबीच में नायिका योगिता बाली का मुखडा दिखाई देता है.






गीत के बोल:

अरे देख ली तेरी बम्बई
रोज मुसीबत यहाँ नई
अरे देख ली तेरी बम्बई
रोज मुसीबत यहाँ नई

पत्थर दिल इंसान यहाँ
जाने मोहब्बत कहाँ गयी
जाने मोहब्बत कहाँ गयी
अरे देख ली तेरी बम्बई
रोज मुसीबत यहाँ नई

जितने हैं दौलत वाले यहाँ
बम्बई है जन्नत उनके लिए
सामान है दिल बहलाने को
मजबूरों की इज्ज़त उनके लिए
इन इज्ज़त लूटने वालों की
इन इज्ज़त लूटने वालों की
जाने इज्ज़त कहाँ गई
अरे जाने इज्ज़त कहाँ गई

अरे देख ली तेरी बम्बई
रोज मुसीबत यहाँ नई

प्यार सभी करते हैं यहाँ
पर दिल में किसी के प्यार नहीं
बस वफ़ा की बात करते हैं
पर कोई किसी का यार नहीं
बेवफा है क्यूँ सब लोग यहाँ
बेवफा है क्यूँ सब लोग यहाँ
जाने मोहब्बत कहाँ गयी
जाने मोहब्बत कहाँ गयी
अरे देख ली तेरी बम्बई
रोज मुसीबत यहाँ नई
पत्थर दिल इंसान यहाँ
जाने मोहब्बत कहाँ गयी
जाने मोहब्बत कहाँ गयी
अरे देख ली तेरी बम्बई
रोज मुसीबत यहाँ नई
………………………………………………………….
Are dekh li teri Bambai-Oh Bewafa 1980

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Jan 15, 2015

भरी बरसात में दिल जलाया-ओ बेवफा १९८०

खुशकिस्मत हैं वो लोग जिन्हें सहयोग मिलता है जीवन में. सहयोग मिले
न मिले हर व्यक्ति को अपना काम करते रहना ज़रूरी है, चाहे इसे आप -नेकी
कर कुँए में डालना बोलें या खुले दिमाग वाली सोच, सहयोग और सौजन्य
सफलता की कुंजियाँ हैं.


मैं इस ब्लॉग के मित्र मंडल से पूछना चाहूँगा कि वो इस ब्लॉग पर किस तरह
की प्रस्तुतियाँ चाहता है. आपके जवाब मेरे लिए महत्त्वपूर्ण हैं. आप अपना
कीमती समय देते हैं इसे पढ़ने में. गुणवत्ता सुधार जीवन का आवश्यक तत्त्व
है. आशा है आप मुझे निराश नहीं करेंगे.

आइये आपको सुनवाते हैं एक करारा गीत, जी हाँ, सन ८० में मैंने अपने एक
मित्र को इसे करारा कहते ही सुना था. ये उस समय का लोकप्रिय गीत था.
फिल्म ओ बेवफा का "भरी बरसात में दिल लगाया " गीत लिखा है फिल्म के
निर्देशक सावन कुमार टाक ने और संगीत है वेदपाल का, गा रही हैं इसे
हेमलता. सावन कुमार के लिखे गीतों में "सावन" शब्द न हो ऐसा कैसे
हो सकता है भला ? उन्होंने गर्मी पर भी गीत लिखा होगा तो उसमें सावन
शब्द  ज़रूर आया होगा.



गीत के बोल:



भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
संग सावन के
मुझको रुलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
प्रीत न करियो सबने कहा था 
मैं निकली नादान
मैंने तुझपे किया भरोसा
तू निकला बेईमान
अपना तू निकला पराया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
मैं खुद को मीरा समझी थी 
तुझको समझा श्याम 
मैं खुद को मीरा समझी थी 
तुझको समझा श्याम 
पर तूने बेदर्दी मेरा 
प्यार किया बदनाम
तूने प्यार में ज़हर मिलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
तोड़ के मेरे दिल को ज़ालिम 
चैन कहाँ तू पायेगा 
तोड़ के मेरे दिल को ज़ालिम 
चैन कहाँ तू पायेगा 
मैं पछताई पाकर तुझको 
तू खो कर पछतायेगा 
बैरी काहे को ब्याह रचाया 
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
…………………………………………………….

Bhari barsaat mein dil jalaya-Oh bewafa 1980

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