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Jul 16, 2017

आ गए दिल में तुम-नाजनीन १९५१

गुलाम मोहम्मद के संगीत निर्देशन में लता का गाया एक गीत.

फिल्म:नाजनीन
वर्ष:१९५१
गीतकार:शकील बदायूनीं
गायिका:लता मंगेशकर
संगीतकार: गुलाम मोहम्मद




गीत के बोल:

आ गए दिल में तुम मेरी महफ़िल में तुम
बच के नज़रों से मेरी कहाँ जाओगे
आए मिलने के दिन फूल खिलने के दिन
हम पुकारेंगे और तुम चले आओगे

तेरी ख़ातिर यहाँ मुझको आना पड़ा
गीत गाया हुआ फिर से गाना पड़ा
देख ले है मुहब्बत में इतना असर
मिल गई फिर हमारी तुम्हारी नज़र
ज़िन्दगी है जवाँ अब जुदाई कहाँ
जिस जगह जाओगे तुम हमें पाओगे
आ गए दिल में तुम मेरी महफ़िल में तुम
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Aa gaye dil mein tum-Nazneen 1951

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Feb 14, 2017

चाँदनी रातों में जिस दम-नाजनीन १९५१

एक तलत महमूद का गाया गीत सुनते हैं नाजनीन फिल्म से .
संगीतकार गुलाम मोहम्मद के संगीत का खज़ाना तलाशो तो
उसमें एक से बढ़ कर एक नायाब मोती मिलते हैं.

गीत शकील बदायूनीं का लिखा हुआ है. शकील बदायूनीं ने
गुलाम मोहम्मद के साथ काफी काम किया. आल इण्डिया
पिक्चर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म के गीत आल इण्डिया
रडियो या रेडियो सीलों पर ही सुनने को मिला करते थे एक
समय. अब यू ट्यूब भी लाइन में खड़ा है गीत सुनवाने को.



गीत के बोल:

चाँदनी रातों में जिस दम याद आ जाते हो तुम
चाँदनी रातों में जिस दम याद आ जाते हो तुम
रोशनी बन कर मेरी आँखों पे छा जाते हो तुम
रोशनी बन कर मेरी आँखों पे छा जाते हो तुम
चाँदनी रातों में जिस दम

छेड़ कर तारो पे दिल के इक अधूरी रागिनी
छेड़ कर तारो पे दिल के इक अधूरी रागिनी
और दीवाने को दीवाना बना जाते हो तुम
रोशनी बन कर मेरी आँखों पे छा जाते हो तुम
चाँदनी रातों में जिस दम

शुक्रिया इस मेहरबानी का तुम्हारी शुक्रिया
शुक्रिया इस मेहरबानी का तुम्हारी शुक्रिया
जब ख़यालों में बुलाता हूँ तो आ जाते हो तुम
रोशनी बन कर मेरी आँखों पे छा जाते हो तुम
चाँदनी रातों में जिस दम
...........................................................................
Chandni raaton mein jis dam-Nazneen 1951

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Jan 15, 2015

भरी बरसात में दिल जलाया-ओ बेवफा १९८०

खुशकिस्मत हैं वो लोग जिन्हें सहयोग मिलता है जीवन में. सहयोग मिले
न मिले हर व्यक्ति को अपना काम करते रहना ज़रूरी है, चाहे इसे आप -नेकी
कर कुँए में डालना बोलें या खुले दिमाग वाली सोच, सहयोग और सौजन्य
सफलता की कुंजियाँ हैं.


मैं इस ब्लॉग के मित्र मंडल से पूछना चाहूँगा कि वो इस ब्लॉग पर किस तरह
की प्रस्तुतियाँ चाहता है. आपके जवाब मेरे लिए महत्त्वपूर्ण हैं. आप अपना
कीमती समय देते हैं इसे पढ़ने में. गुणवत्ता सुधार जीवन का आवश्यक तत्त्व
है. आशा है आप मुझे निराश नहीं करेंगे.

आइये आपको सुनवाते हैं एक करारा गीत, जी हाँ, सन ८० में मैंने अपने एक
मित्र को इसे करारा कहते ही सुना था. ये उस समय का लोकप्रिय गीत था.
फिल्म ओ बेवफा का "भरी बरसात में दिल लगाया " गीत लिखा है फिल्म के
निर्देशक सावन कुमार टाक ने और संगीत है वेदपाल का, गा रही हैं इसे
हेमलता. सावन कुमार के लिखे गीतों में "सावन" शब्द न हो ऐसा कैसे
हो सकता है भला ? उन्होंने गर्मी पर भी गीत लिखा होगा तो उसमें सावन
शब्द  ज़रूर आया होगा.



गीत के बोल:



भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
संग सावन के
मुझको रुलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
प्रीत न करियो सबने कहा था 
मैं निकली नादान
मैंने तुझपे किया भरोसा
तू निकला बेईमान
अपना तू निकला पराया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
मैं खुद को मीरा समझी थी 
तुझको समझा श्याम 
मैं खुद को मीरा समझी थी 
तुझको समझा श्याम 
पर तूने बेदर्दी मेरा 
प्यार किया बदनाम
तूने प्यार में ज़हर मिलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
तोड़ के मेरे दिल को ज़ालिम 
चैन कहाँ तू पायेगा 
तोड़ के मेरे दिल को ज़ालिम 
चैन कहाँ तू पायेगा 
मैं पछताई पाकर तुझको 
तू खो कर पछतायेगा 
बैरी काहे को ब्याह रचाया 
रे जा तेरा कुछ न रहे
 
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
भरी बरसात में दिल जलाया
रे जा तेरा कुछ न रहे
…………………………………………………….

Bhari barsaat mein dil jalaya-Oh bewafa 1980

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Jun 16, 2010

मेरा पढने में नहीं लागे दिल-कोरा कागज़ १९७४

बात सन १९७४ की हो या सन २०१० की, गाना आज भी प्रासंगिक
है। यूँ कहिये आज ज्यादा प्रासंगिक है। आश्चर्य है की इसका 'मसाला '
'दुशाला, 'ऊट पटांगो छींको खांसो' मिक्स अभी तक क्यूँ नहीं बना।

फिल्म कोरा कागज़ के लिए संगीतकार कल्याणजी भाई और आनंदजी भाई
को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था। गाना फिल्माया गया है जया भादुड़ी पर और
साथ में नाजनीन नाम की नायिका दिखलाई दे रही हैं। नाजनीन गाना शुरू
करती है और नायिका बाद में साथ देने लगती है। विजय आनंद अर्थात मास्टरजी
की शकल दिखाई देने के बाद सिट्टी पिट्टी गुम जैसे भाव के साथ गाना रुकता है
और क्षणिक अन्तराल के बाद फिर चल पढता है।

गीत अपने ज़माने का ज़बरदस्त हिट गीत है और इसे गाया है लता ने । इसको
हम नटखट गीतों की श्रेणी में गिन सकते हैं।



गीत के बोल:


मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ
मेरा पढने में नहीं लागे दिल
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल, उम्म्ह
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो ओ ओ ओ, बैठे बैठे मन मुस्काए
बैठे बैठे मन मुस्काए
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
किस्से बातें करती हूँ मैं
अरे किस्से बातें करती हूँ
चुपके चुपके हंसती हूँ
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो, दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
पास भी उसके जा ना सकूं मैं
अरे, पास भी उसके जा ना सकूं मैं
दूर भी उसके रह ना सकूं मैं

कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, क्यूँ
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ

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