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Sep 1, 2014

बीती न बिताई रैना-परिचय १९७२

सन १९७२ की फिल्म परिचय से एक युगल गीत सुनते हैं आज.
भूपेंद्र और लता मंगेशकर का गाया ये गीत राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त
गीत है. ये राष्ट्रीय पुरस्कार हालाँकि केवल लता मंगेशकर को मिला.
गुलज़ार ने इस गीत में भी कुछ करिश्माई बोल फिट किये हैं-
बुझाई रैना और मनाई रैना. मुझे इस गीत को सुन कर सुरेश रैना
और मोहित रैना की याद भी आ जाती है आजकल, जबसे सुरेश
भारतीय टीम का हिस्सा बने हैं और मोहित सीरियल महादेव के .

गीत गंभीर प्रकृति का है और कर्णप्रिय भी. इसे दो संजीदा कलाकारों
पर फिल्माया गया है-संजीव कुमार और जया भादुड़ी. जया को इस
फिल्म में अपनी प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर मिले. उन्होंने किसी
भी फ्रेम में निराश नहीं किया होगा दर्शकों को, ऐसा मेरा मानना है.
हर गीत सुरों पर ही आधारित होता है. विशेष क्रम में लगे सुरों को
हम राग पर आधारित गीत कहते हैं. इन्टरनेट पर उपलब्ध विवरणों
के अनुसार ये गीत राग खमाज और यमन का मिश्रण है.

आप कुछ भी कह लें, मगर शाश्वत सत्य यही है कि गुलज़ार के बोलों
पर बेहतर धुनें केवल राहुल देव बर्मन ने ही बनाई और बाद में शायद
थोड़ी बहुत रहमान ने. लेकिन जिस निरंतरता और अनूठेपन से पंचम
ने बनाई वो शायद रहमान के लिए भी संभव नहीं. ये अलग बात है कि
आर डी को उत्तम कोटि के गायकों की सेवाएं प्राप्त थीं, रहमान इस
निर्भरता से परे हैं. रहमान किसी भी गायक को लेकर गाना बना सकते
हैं.






गीत के बोल:

बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
भीगी हुयी अंखियों ने लाख बुझाई रैना

बीती हुई बतियाँ कोई दोहराए
भूले हुए नामों से कोई तो बुलाए
चादं चाँद
हो ओ ओ ओ ओ 

हो ओ,  चाँद की बिंदी वाली, बिंदीवाली रतियां
जागी हुई अखियों में रात ना आयी रैना

बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
बीती न बिताई रैना

युग आते है और युग जाए
छोटी छोटी यादों के पल नहीं जाए
झूठ से काली लागे लागे काली रतिया
रूठी हुई अखियों ने लाख मनाई रैना


बीती न बिताई रैना बिरहा की जाई रैना
बीती न बिताई रैना
.........................................
Beeti na bitayi raina-Parichay 1972

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Jun 15, 2009

सा रे के सारे गा मा को लेकर गाते चले-परिचय १९७२

अगर आपको अच्छी फ़िल्में देखने का शौक है तो पहले इसको
देखिये -Sound of Music . उसके बाद आप परिचय फ़िल्म देखेंगे
तो आपको बहुत आनंद आएगा । कुछ बिगडैल बच्चे और जीतेंद्र
की कशमकश से भरपूर फ़िल्म परिचय से एक गीत आपके लिए
पेश है। इस गीत में एक लाइन है- "धानी सी दीदी" । इसके पहले तक
मैं समझता था कि केवल चुनरी ही धानी हुआ करती है। याद कीजिये
फ़िल्म 'हरे कांच की चूड़ियाँ' का गीत
-"धानी चुनरी पहन, सज के बन के दुल्हन ......"
धानी का अर्थ है-हरा। अब हरी साड़ी पहने अभिनेत्री पूरी हरी नज़र
आए तो क्या किया जाए :P

जो भी हो, ये गीत गुलज़ार का लिखा हुआ है और इसकी धुन बनाई है
राहुल देव बर्मन ने। गायक कलाकार हैं -किशोर, आशा और कुछ बच्चे।
इस गीत में सभी कलाकारों के परिधान ठीक हैं सिवाय बच्ची के
आसमानी रंग के परिधान के , शायद उसके नाप की ड्रेस नहीं मिली
होगी शूटिंग के समय। इसके अलावा गरीब हीरो का काफ़ी चौड़ी कार
चलाते देखना एक विचित्र सा अनुभव है । क्रिकेट भी खेली गई है गाने में ।



गाने के बोल:

सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले
सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले
पापा नहीं हैं धनी सी दीदी, दीदी के साथ हैं सारे

सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले

तुम भी गाओ

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ऐसे नहीं बोलों में गाओ

सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले
पापा नहीं हैं धानी सी दीदी, दीदी के साथ हैं सारे

सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले

सा से निकले रोज़ सवेरा, दूर करे अँधियारा
रे से रेशमी किरणों ने खूब किया उजिअरा
सा से निकले रोज़ सवेरा, दूर करे अँधियारा
रे से रेशमी किरणों ने खूब किया उजिअरा

ला ला ला ला, ला ला ला ला
ला ला ला ला, ला ला ला ला

रमा तुम भी गाओ न

सूरज की रोशन किरणों पे सारे गाते चलें
ला ला ला ला
ला ला ला ला

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हः हः हः
पापा नहीं हैं धानी सी दीदी, दीदी के साथ हैं सारे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ग से गुन गुन ग ग ग ,
म से मद्धम म म म , प से एक पुजारी

आप जानती हैं हम क्या गा रहे हैं ?
मैं इतना भी नहीं समझूँगी
आप इन्हे सरगम सिखा रहे थे
आपको तो नहीं सिखा रहा हूँ
आपने तो अपने बाबूजी से सीखा होगा
उं हम्म
हाँ तो कहाँ तक पहुंचे थे हम ?
पंचम तक
कैसे ?
सा सा रे ग, ग म प , प म ग, ग म प, प म रे म ग
सा सा रे ग, ग म प , प म ग, ग म प, प म रे ग सा
हाँ

ग से गुनगुन करता है , घूमे क्यारी क्यारी
म से मीठे बोलों में, प से एक पुजारी
ग से गुनगुन करता है , घूमे क्यारी क्यारी
म से मीठे बोलों में, प से एक पुजारी

ला ला ला ला, ला ला ला ला
ला ला ला ला, ला ला ला ला

भँवरे के जैसे फूलों पे सारे गाते चलें

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
पापा नहीं हैं धानी सी दीदी, दीदी के साथ हैं सारे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ध म ध प, ग प ध
ध से धुप सुनहरी है,ये नील नशीली लागे,
ध से धुप सुनहरी है,ये नील नशीली लागे,

सरगम हो गई पूरी
अब क्या होगा आगे
अरे, सरगम हो गई पूरी
अब क्या होगा आगे

हाँ, सा सा रे ग, ग म प प म ग, म प ध ध प म प ध नि सा प
सा सा रे ग, ग म प प म ग, म प ध ध प म प ध नि सा प सा

सरगम से साथी सरगम की धुन पर गाते चले
सरगम से हाथी सरगम की धुन पर गाते चले

पापा नहीं हैं धानी सी दीदी, दीदी के साथ हैं सारे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले
गाते चले
सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले
गाते चले
सा रे के सारे ग म को लेकर गाते चले
गाते चले
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Saare ke saare ga ma ko lekar-Parichay  1972

Artists: Jaya Bhaduri, Jeetendra, Master Raju

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