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Jul 29, 2017

ओ बाबू कैसे दिल करूँ-सगाई १९५१

गायिकाओं वाला युगल गीत सुनते हैं फिल्म सगाई से.
सन १९५१ की फिल्म सगाई में कुछ बेहतरीन नगमे हैं.
इसमें रेहाना, कुक्कू, विजयलक्ष्मी और पूर्णिमा नामक
अभिनेत्रियां हैं. गीत में कम से कम दो मौजूद हैं.




गीत के बोल:

ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू

तेरी जान की क़सम मेरा दिल नहीं बस में
जाओ जाओ जाओ ना खाओ झूठी क़समें
तेरी जान की क़सम मेरा दिल नहीं बस में
जाओ जाओ जाओ ना खाओ झूठी क़समें
तेरी जान की क़सम है ईमान की क़सम
मुझको है तुझसे प्यार मेरा जिया बेक़रार
मुझको अपना बनाये जा
ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू

हटो हटो बड़े देखे प्यार जताने वाले
अँखियाँ नचा के नखरे दिखा के
जिया भरमाने वाले
ओ ओ ओ ओ
जवानी की क़सम ज़िन्दगानी की क़सम
मैं हूँ तेरी ग़ुलाम
तुझे मेरा है सलाम
मुझको दिल में बसाये जा
ओ बाबू ओ बाबू
कैसे दिल करूँ क़ाबू समझाये जा
ओ जानी ओ जानी
तेरी बड़ी मेहरबानी बतलाये जा
ओ बाबू

…………………………………………………….
O baboo kaise dil karoon-Sagai 1951

Artists: Cuckoo, Rehana

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May 1, 2017

एक दिन लाहौर की ठंडी सड़क-सगाई १९५१

ये है इन संभावित श्रेणियों वाला गीत-ठंडी गीत, सड़क गीत,
शहर के नाम वाला गीत, साइकिल गीत और कुछ ना समझ
आये तो ‘एक दिन’ गीत. वैसे गीत में जूते का भी जिक्र है
दो तीन पंक्तियों बाद, अतः इसे जूता गीत भी कह सकते हैं.

इस ब्लॉग के गुप्त पाठकों में वे श्रेणी बनाने वाले भी हैं जो
किसी ज़माने में ऑरकुट इत्यादि फोरम में श्रेणियों की पोस्ट
बना बना के खूब पकाया करते थे. उनका उद्देश्य अलग होता
था मगर आम जनता की दिमाग चटाई हो जाया करती थी.
उनके पोस्ट के वजन में बाकी पोस्ट कहीं दब जाया करते थे.

हम तो बस ये कर रहे हैं-तेरा तुझको अर्पण. तुमने हमें पकाया
थोडा हम भी तुम्हें पकायेंगे.

गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखा है और इसे शमशाद बेगम, रफ़ी और
स्वयं सी रामचंद्र ने गाया है जिन्होंने इस गीत की धुन भी तैयार
की है.





गीत के बोल:

एक दिन लाहौर की ठण्डी सड़क पर शाम को
जा रहे थे साइकल पर हम ज़रूरी काम को
अजी सामने से आ रही थीं बुलबुलों की टोलियाँ
रोक कर साइकल लगे हम सुनने मीठी बोलियाँ

उठ तेरी
बिगड़ गई बनते-बनते बात
हुई वो जूतों की बरसात
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी
साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी साफ़
बिगड़ गई बनते-बनते बात
हुई वो जूतों की बरसात
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़

चले थे करने कारोबार
सड़क पर कर बैठे क्यों प्यार
हो गया पल भर में ये हाल
के उड़ गये सर के सारे बाल
के उड़ गये सर के सारे बाल
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी
साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी साफ़
बिगड़ गई बनते-बनते बात
हुई वो जूतों की बरसात
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़

मिला ये उलफ़त का ईनाम
मिला ये उलफ़त का ईनाम
हो गये घर-घर में बदनाम
हो गये घर-घर में बदनाम
गये थे बन के ये गुलफ़ाम
वापिस आये घुटना थाम
ये वापिस आये घुटना थाम
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी
साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी साफ़
बिगड़ गई बनते-बनते बात
हुई वो जूतों की बरसात
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़

कहूँ मैं एक पते की बात
कहूँ मैं एक पते की बात
ये ज़ालिम दिल है बड़ा बदज़ात
ये ज़ालिम दिल है बड़ा बदज़ात
इसी दिल की थी करतूत
इसी ने पड़वाये हैं जूत
इसी ने पड़वाये हैं जूत
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी
साफ़ हो गयी साफ़
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़ हो गयी साफ़
बिगड़ गई बनते-बनते बात
हुई वो जूतों की बरसात
तबीयत साफ़ हो गयी साफ़
…………………………………………………….
Ek din Lahore ki thandi sadak-Sagai 1951

Artists: Gope, Yakub, Rehana

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Apr 19, 2017

डैडी जी मम्मी जी को सताना नहीं अच्छा-सगाई १९५१

हिंदी सिनेमा और उसके संगीत के आशीर्वाद स्वरुप हमें
मम्मी-डैडी हिट्स, चाचा-भतीजा हिट्स और इसी तरह की
कई श्रेणियों वाले गीत सुनने को मिले. हिंदी सिनेमा ने
माँ, मम्मी और अम्मी को ज्यादा याद किया है.

सी रामचंद्र के संगीत में आपको दोनों को याद करने वाले
गीत मिल जायेंगे. फिल्म पायल की झंकार में लोकप्रिय
गीत है-अब्बा कहें ना.

सुनते हैं फिल्म सगाई से लाता मंगेशकर का गाया गीत.
इसे राजेंद्र कृष्ण ने लिखा है. फिल्म सन १९४९ की है
अर्थात इसे रिलीज़ हुए पूरे ६८ साल हो चुके हैं. प्रयोगधर्मी
गीत है. घरेलू थीम वाला गीत क्लब में गाया जा रहा है.
धुन आकर्षक है इसकी.



गीत के बोल:

डैडी जी ओ डैडी जी
डैडी जी
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
सताना रुलाना जलाना नहीं अच्छा
हो डैडी जी
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा

दिन भर में तुम पी जाते हो सिगरेट के दो टीन
कभी रसोई में भी देखो बरतन हैं कुल तीन
कभी रसोई में भी देखो बरतन हैं कुल तीन
देखो जी
घर को आग लगाना नहीं अच्छा
घर को आग लगाना नहीं अच्छा
सताना रुलाना जलाना नहीं अच्छा

हो डैडी जी
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा

सुबह सवेरे आठ बजे तुम घर से दफ़तर जाते
सुबह सवेरे आठ बजे तुम घर से दफ़तर जाते
शाम को छुट्टी होती है घर आधी रात को आते
शाम को छुट्टी होती है घर आधी रात को आते
देखो जी
इतनी देर से आना नहीं अच्छा
इतनी देर से आना नहीं अच्छा
सताना रुलाना जलाना नहीं अच्छा

हो डैडी जी
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा

बीवी घर में चूल्हा फूंके नन्हा शोर मचाये
बीवी घर में चूल्हा फूंके नन्हा शोर मचाये
बाप हमारा बाप रे बाप क्लब में नाचे गाये
बाप हमारा बाप रे बाप क्लब में नाचे गाये
देखो जी
बीवी बच्चों को भुलाना नहीं अच्छा
बीवी बच्चों को भुलाना नहीं अच्छा
सताना रुलाना जलाना नहीं अच्छा

हो डैडी जी
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
हो डैडी जी
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
मेरी मम्मी को सताना नहीं अच्छा
......................................................................
Daddy ji meri mummy ko satana-Sagai 1951

Artists: Premnath, Rehana, Gope, Poornima, Unknown fat woman

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Dec 17, 2016

आँखों से जो भी आंसू-सगाई १९५१

आज सुनते हैं एक मधुर गीत ५० के दशक से. आम जनता
की सोनचिरैया और संगीत रसिकों की स्वर-कोकिला लता ने
इतने मधुर गीत गाये हैं कि आने वाली कई पीढियां उसे
सुन सुन के खुश होती रहेंगी.

इन धुनों को बनाने में गीतकारों और संगीतकारों का योगदान
भी कम नहीं है. सी रामचंद्र ने सभी प्रकार के गीत लता से
गवाए मगर जो बात उनके संगीत की जान है वो है सरलता.
कम वाद्य यंत्रों के साथ भी उन्होंने कमाल का संगीत तैयार
किया है जिसमें गाने वाले को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन का पूरा
मौका मिलता.

प्रस्तुत गीत लता मंगेशकर संग कोरस का गाया हुआ है जिसमें
किस्मत के लिखे कि बात बतलाई गई है.




गीत के बोल:

हम हैं यहाँ दिल साजन के पास है
आँखों में डोल रही मिलने की आस है

आँखों से जो भी आँसू बहेगा यही कहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा

आँखों से जो भी आँसू बहेगा यही कहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा

कहते हैं तुझसे ये बुलबुल के नाले
ओ सैयाद चाहे जितना सता ले
कहते हैं तुझसे ये बुलबुल के नाले
ओ सैयाद चाहे जितना सता ले
तेरे सितम दिल हँस के सहेगा और ये कहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा

आँखों से जो भी आँसू बहेगा यही कहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा

आज़ादियाँ मेरी लेनी है ले ले
क़ैद-ए-ग़ुलामी देनी है दे दे
आज़ादियाँ मेरी लेनी है ले ले
क़ैद-ए-ग़ुलामी देनी है दे दे
जिसका है ये दिल उसका रहेगा तुझसे कहेगा

किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
आँखों से जो भी आँसू बहेगा यही कहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
किस्मत का लिखा हो कर रहेगा
................................................................
Ankhon se job hi aansoo-Sagai 1951

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Nov 5, 2009

दिल की कहानी कहना तो चाहें- सगाई १९५१

मधुरतम गीतों में से एक है अगला गीत।
फ़िल्म सगाई का गीत १९५१ से आजतक अपनी ताजगी
बरकरार रखे हुए है। सी रामचंद्र की सबसे बढ़िया धुनों में से
एक कह सकते हैं आप इसको। राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं
और आवाज़ है लता मंगेशकर के। ये गाना पूर्णिमा नाम
की अभिनेत्री पर फिल्माया गया है जिन्होंने इस फ़िल्म में
शहज़ादी की भूमिका निभाई है।



गाने के बोल:

जरा सी देर थी बाकी ,बहार आने में ,
लगा दी आग मुक़द्दर ने आशियाने में

दिल की कहानी कहना तो चाहें
हाय री किस्मत कह ना सकें

दिल की कहानी कहना तो चाहें
हाय री किस्मत कह न सकें

आँखों से आंसू बहना तो चाहें,
हाय री किस्मत बह न सके

खामोश तारों शब् के नज़ारों
देखो मोहब्बत का अंजाम देखो

खामोश तारों शब् के नज़ारों
देखो मोहब्बत का अंजाम देखो

क़दमों में उनके रहना तो चाहें
हाय री किस्मत रह न सके
क़दमों में उनके रहना तो चाहें
हाय री किस्मत रह न सके

दिल की कहानी कहना तो चाहें
हाय री किस्मत कह न सकें

आँखों में पानी, होंठों पे नाले
मोहब्बत हुई है ग़मों के हवाले
आँखों में पानी, होंठों पे नाले
मोहब्बत हुई है ग़मों के हवाले

एक दिल हमारा, और गम हजारों
हाय री किस्मत, सह न सके
एक दिल हमारा, और गम हजारों
हाय री किस्मत, सह न सके

दिल की कहानी कहना तो चाहें
हाय री किस्मत कह न सकें

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