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Jul 20, 2016

ज़ालिम ज़माना मुझको-दिल्लगी १९४९

आपको दिल्लगी से दो गीत सुनवा चुके हैं. जब आपने
औने ही लिए हैं तो तीसरा भी सुन लीजिए. श्याम और
सुरैया का गाया युगल गीत है ये जिसे शकील बदायूनीं
ने लिखे है. फिल्म के संगीतकार नौशाद हैं.

दिल्लगी का अर्थ है हंसी मजाक. दिल लगाना या लगने
को भी इससे जोड़ा जाता है. दिल्लगी फिल्म का निर्माण
कारदार प्रोडक्शनस ने किया था और इसके निर्देशक भी
कारदार हैं. श्याम, सुरैया, अमीर बानू, शारदा, अमर और
चंदा बाई जैसे कलाकारों ने इसमें काम किया.



गीत के बोल:

ज़ालिम ज़माना मुझको तुमसे छुड़ा रहा है
ए ए ए ज़ालिम ज़माना मुझको तुमसे छुड़ा रहा है
अंजाम ज़िंदगी का
अंजाम ज़िंदगी का नज़दीक आ रहा है
ज़ालिम ज़माना मुझको तुमसे छुड़ा रहा है

बीते दिनों के नगमें दिल आज गा रहा है
दुनिया में जैसे अपनी
दुनिया में जैसे अपनी कोई बुला रहा है
बीते दिनों के नगमें दिल आज गा रहा है

तुझको क़सम है आकर सूरत ज़रा दिखा जा
सूरत ज़रा दिखा जा
दीवाना देख तेरा दुनिया से जा रहा है

बरबादियों का अपनी शिकवा नहीं किसी से
शिकवा नहीं किसी से
मेरा नसीब मुझको ये दिन दिखा रहा है
हे ए ए बीते दिनों के नगमें दिल आज गा रहा है
........................................................................
Zalim zamana-Dillagi 1949

Artists-Shyam, Suraiya

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Jul 2, 2016

तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी–दिल्लगी १९४९

सदाबहार फ़िल्मी गीतों में से अगला पेश है आपके लिए.
इसे चुना गया है फिल्म दिल्लगी जो सन १९४९ की फिल्म
है. गीत गा रहे हैं श्याम और सुरैया. शकील बदायूनीं ने
इसे लिखा है और नौशाद का संगीत है.

आपको पूर्व में सन १९७८ की दिल्लगी से दो गीत सुनवाए
थे. १९४९ की दिल्लगी कारदार प्रोडक्शंस की फिल्म है जिसके
प्रमुख कलाकार हैं-श्याम, सुरैया, चंदाबाई, अमीर बानू, शारदा
और अमर. फिल्म में इसका एक और संस्करण मौजूद है जो
गीत गीता दत्त की आवाज़ में है. वो वाला वर्ज़न श्यामा पर
फिल्माया गया है.





गीत के बोल:

तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी
मैं तेरा राग तू मेरी रागिनी
नहीं दिल का लगाना कोई दिल्लगी
कोई दिल्लगी

साथ ही जीना साथ ही मरना
उल्फ़त की है रीत हाँ उल्फ़त की है रीत
प्यार की मुरली हरदम गाये तेरी लगन के गीत
मैं तेरा राग तू मेरी रागिनी
तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी
नहीं दिल का लगाना कोई दिल्लगी
कोई दिल्लगी


भूल न जाना रुत ये सुहानी
ये दिन और ये रात  हाँ ये दिन और ये रात
जब तक चमके चाँद सितारे देखो छूटे न साथ
तू मेरा चाँद मैं तेरी चाँदनी
मैं तेरा राग तू मेरी रागिनी
नहीं दिल का लगाना कोई दिल्लगी 
कोई दिल्लगी
...................................................................
Too mera chand-Dillagi 1949

Artists-Shyam, Suraiya

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Aug 10, 2015

दिल धड़के आँख मोरी फड़के-दर्द १९४७

सुनते हैं सन १९४७ से एक गीत फिल्म दर्द का. दिल धड़काने
वाला और आँख फड़काने वाला ये गीत लिखा है शकील बदायूनीं
ने और इसका संगीत तैयार किया नौशाद ने. सुरैया की सुरीली
आवाज़ है.

वियोग या बिछडना स्वतः संयोगवश भी हो सकता है और जबरन
भी. जबरन की बिछडन को “छोड़ के जाना “ भी कहा जाता है.
दिल धड़कता है या तो घबराहट के मारे या किसी संकट की
आशंका से. यही हाल आँख फडकने का भी है, अक्सर ऐसे होने
से किसी संभावित अप्रियता की आशंका जताई जाती है.

दर्द सन १९४७ की फिल्म है और इसका निर्देशन कारदार ने किया
है. कारदार एक चर्चित निर्देशक थे फिल्म जगत के. उनकी सभी
फिल्मों का संगीत बेहतर हुआ करता था. फिल्म में सुरैया के
गाये गीत भी हैं मगर उमा देवी का गाया गीत “अफसाना लिख रही
हूँ” सबसे ज्यादा पोपुलर हुआ और इतना हुआ कि सर्वाधिक लोकप्रिय
गीतों में शामिल हो गया. ऐसे उदाहरण आपको आगे भी बतलायेंगे
जब मुख्य धारा के गायकों को पीछे छोड़ कर अनजान गायक का
गीत प्रसिद्ध हुआ. फिल्म में श्याम और मुनव्वर सुल्ताना की प्रमुख
भूमिकाएं हैं.



गीत के बोल:

दिल धड़के आँख मोरी फड़के
चले जाना न देखो जी बिछड़ के

कहीं बीते न दुःख में जवानी
कहीं सुन ले न दुनियाँ कहानी
कहीं बन जाऊँ मैं न दीवानी

कहीं ठहरे न उल्फ़त का धारा
कहीं पा ले न कोई इशारा
कहीं टूटे न दिल क सहारा

कहीं जाना न कर के बहाना
न बने दो दिलों का फ़साना
देखो नाज़ुक बहुत है ज़माना

दिल धड़के आँख मोरी फड़के
चले जाना न देखो जी बिछड़ के

………………………………………………..
Dil Dhadke Aankh Mori-Dard 1947

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