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Dec 18, 2016

आज पुरानी राहों से-आदमी १९६८

कभी मैं सोचता हूँ दिलीप कुमार की राम और श्याम के हंसमुख
किरदार को याद रखूँ या फिल्म आदमी वाले दिलीप कुमार को.
दिलीप कुमार अपने कैरियर में जल्दी ही ट्रेजेडी किंग के रूप में
पहचाने जाने लगे. उन्होंने सभी किस्म के किरदार बखूभी निभाए
हैं एक कुशल आलराउंडर की तरह.

कुछ दिन पहले ही हमने मीडिया पर कवरेज में दिलीप कुमार के
स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मालूम की. सामान्य जान पड़ताल
के लिए वे अस्पताल पनुंचे थे. इ भले ही फिल्मों से दूर हों कई
वर्षों से मगर उनके फैन्स के मन में उनके बारे में जाने की
उत्सुकता बनी रहती है. उनके फैन्स में बॉलीवुड के कई बड़े बड़े
सितारे शामिल हैं.

सुनते हैं फिल्म आदमी से एक काफी मेलन्कली किस्म का गीत.
शकील के बोल है, नौशाद का संगीत और रफ़ी की संजीदा आवाज़.
फिल्म में इससे भी ज्यादा दर्दीला एक और गीत है जिसे हम सुन
चुके हैं पहले. गीत तीसरे अंतरे में आशावादी हो जाता है मगर
तब तक सुनने वाला कोलेप्स होने लगता है.






गीत के बोल:

ओ हो हो ओ ओ हो हो हो
आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे
आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे
दर्द में डूबे गीत न दे गम का सिसकता साज़ न दे
दर्द में डूबे गीत न दे गम का सिसकता साज़ न दे
ओ हो हो ओ ओ हो हो हो

बीते दिनों की याद थी जिनमें मैं वो तराने भूल चुका
आज नई मंज़िल है मेरी कल के ठिकाने भूल चुका
न वो दिल न सनम न वो दीन-धरम
अब दूर हूँ सारे गुनाहों से

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे

टूट चुके सब प्यार के बंधन आज कोई ज़ंजीर नहीं
शीशा-ए-दिल में अरमानों की आज कोई तस्वीर नहीं
अब शाद हूँ मैं आज़ाद हूँ मैं कुछ काम नहीं है आहों से

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे
दर्द में डूबे गीत न दे गम का सिसकता साज़ न दे
ओ हो हो ओ ओ हो हो हो

जीवन बदला दुनिया बदली मन को अनोखा ज्ञान मिला
आज मुझे अपने ही दिल में एक नया इनसान मिला
पहुँचा हूँ वहाँ नहीं दूर जहाँ भगवान भी मेरी निगाहों से
.........................................................................
Aaj purani rahon se-Aadmi 1968

Artist: Dilip Kumar

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Sep 8, 2016

नसीब में जिसके जो-दो बदन १९६६

फिल्म का नाम है दो बदन. ‘एक जान’ शब्द साइलेंट है नाम
में. फिल्म की कहानी दो ऐसे प्रेमियों की है जो एक साथ दम
तोड़ देते हैं आखिर में.

मनोज कुमार और आशा पारेख प्रमुख कलाकार हैं. कहानी में
जो विलन है उसका किरदार निभाने वाले कलाकार हैं प्राण.
मनमोहन कृष्ण मरहम लगाने वाले बुजुर्ग के रोल में हैं फिल्म
में.

संगीतकार रवि ने सबसे ज्यादा काम साहिर और शकील के साथ
किया. फिल्म चौदहवीं का चाँद और दो बदन दो ऐसी फ़िल्में हैं
जिनके गीत काफी लोकप्रिय हैं आज भी. दोनों फिल्मों के गीत
शकील बदायूनीं ने लिखे हैं.



गीत के बोल:

नसीब में जिसके जो लिखा था
वो तेरी महफ़िल में काम आया
नसीब में जिसके जो लिखा था
वो तेरी महफ़िल में काम आया
किसी के हिस्से में प्यास आई
किसी के हिस्से में जाम आया
नसीब में जिसके जो लिखा था

मैं इक फ़साना हूँ बेकसी का
ये हाल है मेरी ज़िंदगी का
मैं इक फ़साना हूँ बेकसी का
ये हाल है मेरी ज़िंदगी का
ये हाल है मेरी ज़िंदगी का
न हुस्न ही मुझको रास आया
न इश्क़ ही मेरे काम आया

नसीब में जिसके जो लिखा था

बदल गईं तेरी मंज़िलें भी
बिछड़ गया मैं भी कारवां से
बदल गईं तेरी मंज़िलें भी
बिछड़ गया मैं भी कारवां से
बिछड़ गया मैं भी कारवां से
तेरी मुहब्बत के रास्ते में
न जाने ये क्या मकाम आया

नसीब में जिसके जो लिखा था

तुझे भुलाने की कोशिशें भी
तमाम नाकाम हो गई हैं
तुझे भुलाने की कोशिशें भी
तमाम नाकाम हो गई हैं
तमाम नाकाम हो गई हैं
किसी ने ज़िक्र-ए-वफ़ा किया जब
ज़ुबाँ पे तेरा ही नाम आया

नसीब में जिसके जो लिखा था
वो तेरी महफ़िल में काम आया
किसी के हिस्से में प्यास आई
किसी के हिस्से में जाम आया
नसीब में जिसके जो लिखा था
…………………………………………………….
Naseeb mein jiske jo-Do Badan 1966

Artists:Manoj Kumar, Asha Parekh

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Aug 31, 2016

मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये-कन्हैया १९५९

आइये एक गीत सुनें सन १९५९ की कन्हैया से. मुकेश का गाया
ये सैड सॉंग काफी फेमस है. हिंगलिश फ़िल्में देख देख के और
उनके अर्ध-अंग्रेजी अर्ध हिंदी बोलों को सुनते सुनते थोड़े कीटाणु
हमारे दिमाग में भी घुस गए हैं. पिछली कुछ पोस्ट में आपने
देखा होगा अंग्रेजी के शब्द आलेख में प्रविष्ट होने लगे हैं. टाइम
की डिमांड का ध्यान रखना बहुत नैसेसरी है.

प्रस्तुत गीत शैलेन्द्र ने लिखा है और इसकी धुन शंकर जयकिशन
द्वारा निर्मित है. मुकेश इसे गा रहे हैं राज कपूर के लिए. बढ़िया
सितार और सरोद के टुकड़ों से गीत शुरू होता है.



गीत के बोल:


मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
मेरा दिल अगर कोई दिल न था
उसे मेरे सामने तोड़ दो
उसे मेरे सामने तोड़ दो

मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये

मैं ये भूल जाऊँगा ज़िंदगी
कभी मुस्कुराई थी प्यार में
मैं ये भूल जाऊँगा ज़िंदगी
कभी मुस्कुराई थी प्यार में
मैं ये भूल जाऊँगा मेरा दिल
कभी खिल उठा था बहार में
जिन्हें इस जहाँ ने भुला दिया
मेरा नाम उन में ही जोड़ दो
मेरा नाम उन में ही जोड़ दो

मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये

तुम्हें अपना कहने की चाह में
कभी हो सके न किसी के हम
तुम्हें अपना कहने की चाह में
कभी हो सके न किसी के हम
यही दर्द मेरे जिगर में है
मुझे मार डालेगा बस ये ग़म
मैं वो गुल हूँ जो न खिला कभी
मुझे क्यूँ न शाख़ से तोड़ दो
मुझे क्यूँ न शाख़ से तोड़ दो

मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो
मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये
..............................................................................
Mujhe tumse kuchh bhi naa chahiye-Kanhaiya 1959

Artists:Raj Kapoor, Nutan

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Aug 6, 2016

चल दिया कारवां-लैला मजनू १९५३

सन १९५३ की लैला मजनू में मधुर गीत है जिन्हें संगीतकार
गुलाम मोहम्मद ने कम्पोज किया है. गुलाम मोहम्मद नौशाद
के असिस्टेंट के तौर पर काम करते रहे साथ साथ ही उन्होंने
कई फिल्मों में बतौर स्वतंत्र संगीतकार भी संगीत दिया और
उनका संगीत काफी रेंज वाला है जिसे आम संगीत प्रेमी शायद
नहीं समझ पाता. उन्होंने सोफ्ट किस्म के गीत बहुत उम्दा
किस्म के बनाये जिनकी तुलना आप किसी भी नामचीन और
ज्यादा सुने गए संगीतकार की धुनों से कम्पेयर कर सकते हैं.

इस फिल्म के बेहद चर्चित गीतों में से एक आपको सुनवाते
हैं जो शम्मी कपूर पर फिल्माया गया है. शकील बदायूनीं के
बोल है और आवाज़ तलत महमूद की.



गीत के बोल:

चल दिया कारवां लुट गए हम यहाँ तुम वहाँ
चल दिया कारवां लुट गए हम यहाँ तुम वहाँ
गिर पड़ी बिजलियाँ जल गया आशियां
उठ रहा है धुआँ
चल दिया कारवां

ओ जाने वाले ठहर ज़रा
फ़रियाद हमारी सुनता जा
दामन पे लिखी है अश्कों ने
रूदाद हमारी सुनता जा
जी सकेंगे न हम तुमसे होकर जुदा
जा मेरी ज़िंदगी तेरा हाफ़िज़ ख़ुदा
तेरा महमिल चला
आश्ते दिन चला
रह गई दास्ताँ

चल दिया कारवां लुट गए हम यहाँ तुम वहाँ
चल दिया कारवां
..........................................................................
Chal diya karwaan-Laila Majnu 1953

Artist: Shammi Kapoor, Nutan

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Jul 20, 2016

ज़ालिम ज़माना मुझको-दिल्लगी १९४९

आपको दिल्लगी से दो गीत सुनवा चुके हैं. जब आपने
औने ही लिए हैं तो तीसरा भी सुन लीजिए. श्याम और
सुरैया का गाया युगल गीत है ये जिसे शकील बदायूनीं
ने लिखे है. फिल्म के संगीतकार नौशाद हैं.

दिल्लगी का अर्थ है हंसी मजाक. दिल लगाना या लगने
को भी इससे जोड़ा जाता है. दिल्लगी फिल्म का निर्माण
कारदार प्रोडक्शनस ने किया था और इसके निर्देशक भी
कारदार हैं. श्याम, सुरैया, अमीर बानू, शारदा, अमर और
चंदा बाई जैसे कलाकारों ने इसमें काम किया.



गीत के बोल:

ज़ालिम ज़माना मुझको तुमसे छुड़ा रहा है
ए ए ए ज़ालिम ज़माना मुझको तुमसे छुड़ा रहा है
अंजाम ज़िंदगी का
अंजाम ज़िंदगी का नज़दीक आ रहा है
ज़ालिम ज़माना मुझको तुमसे छुड़ा रहा है

बीते दिनों के नगमें दिल आज गा रहा है
दुनिया में जैसे अपनी
दुनिया में जैसे अपनी कोई बुला रहा है
बीते दिनों के नगमें दिल आज गा रहा है

तुझको क़सम है आकर सूरत ज़रा दिखा जा
सूरत ज़रा दिखा जा
दीवाना देख तेरा दुनिया से जा रहा है

बरबादियों का अपनी शिकवा नहीं किसी से
शिकवा नहीं किसी से
मेरा नसीब मुझको ये दिन दिखा रहा है
हे ए ए बीते दिनों के नगमें दिल आज गा रहा है
........................................................................
Zalim zamana-Dillagi 1949

Artists-Shyam, Suraiya

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Jun 13, 2016

दो हंसों का जोड़ा बिछड गयो-गंगा जमुना १९६१

फिल्म: गंगा जमुना
वर्ष: १९६१
गीतकार: शकील बदायूंनी
संगीत: नौशाद
गायिका: लता मंगेशकर




गीत के बोल:

दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे

मोरा सुख चैन भी  जीवन भी मोरा छिन लिया
पापी संसार ने साजन भी मोरा छिन लिया
पिया बिन तड़पे जिया  रतिया बिताऊं कैसे
बिरहा की अगनी को अंसुवन से बुझाऊँ कैसे
जिया मोरा मुश्किल में पड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे

रात की आस गयी  दिन का सहारा भी गया
मोरा सूरज भी गया  मोरा सितारा भी गया
प्रीत कर के कभी प्रीतम से ना बिछड़े कोई
जैसी उज़डी हूँ मैं  ऐसे भी ना उजड़े कोई
बना खेल मोरा बिगड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे

जीते जी छोडूँगी सैयां ना डगरिया तोरी
बीत जाएगी यूँ ही सारी उमरिया मोरी
नैनों से होती रहेगी यूँ ही बरसात बलम
याद में रोती रहूंगी तेरी दिन-रात बलम
नगर मोरे मन का उजड़ गयो रे
गजब भयो रामा  जुलम भयो रे
…………………………………………………………..
Do hanson ka joda-Ganga Jamuna 1961

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सौ बार जनम लेंगे-उस्तादों के उस्ताद १९६३

जनम जन्मान्तरों के बातें हमने फ़िल्मी दुनिया से बहुत सुनी हैं
गीतों के माध्यम से तो फिल्मों के कथानक के माध्यम से. जो
गीत बने हैं जनम जनम के साथ पर उनमें एक उल्लेखनीय गीत
है असद भोपाली का लिखा हुआ फिल्म उस्तादों के उस्ताद से.
सन १९६३ की फिल्म का निर्देशन बृज ने किया था. अशोक कुमार
प्रदीप कुमार, शकीला, शेख मुख्तार, हेलन जॉनी वॉकर के ने इस
फिल्म में काम किया.

गीत प्रदीप कुमार पर फिल्माया गया है. फिल्म में प्रदीप कुमार
ने एक गरीब इंजिनीयर की भूमिका निभाई है जो एक अमीर
युवती से प्रेम करता है. गीत का संगीत थोडा रहस्यमयी होने की
वजह है-परिस्थितिवश अकेला हुआ नायक अकेले में इसे गा रहा
है. जैसा की फिल्मों में होता आया है नायिका उसकी आवाज़ को
पहचान लेती है और जिसे वो मरा हुआ समझ रही थी, वो उसके
सामने जिंदा खड़ा मिलता है मगर ये सब गाने के अंत में. श्रेणी
बनाने का शौक़ीन इसे ‘झरना गीत’ कह सकते हैं. दृश्यावली अति
सुन्दर है इस गीत की. नायिका के विस्मृत, भौंचक और आश्चर्य
मिश्रित भावों के साथ गीत की समाप्ति होती है.





गीत के बोल:

वफ़ा के दीप जलाए हुए निगाहों में
भटक रही हो भला क्यों उदास राहों में
तुम्हें ख्याल है तुम मुझसे दूर हो लेकिन
मैं सामने हूँ, चली आओ मेरी धुन में

सौ बार जनम लेंगे, सौ बार फ़ना होंगे
ऐ जाने वफ़ा फिर भी हम तुम ना जुदा होंगे

किस्मत हमें मिलने से रोकेगी भला कब तक
इन प्यार की राहों में भटकेगी वफ़ा कब तक
कदमों के निशाँ खुद ही मंजिल का पता होंगे
सौ बार जनम लेंगे

ये कैसी उदासी है, जो हुस्न पे छाई है
हम दूर नहीं तुमसे, कहने को जुदाई है
अरमान भरे दो दिल, फिर एक जगह होंगे
सौ बार जनम लेंगे, सौ बार फ़ना होंगे
ऐ जाने वफ़ा फिर भी हम तुम ना जुदा होंगे
.........................................................................
Sau baar janam lenge-Ustadon ke ustad 1963

Artists-Shakila, Pradeep Kumar

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May 31, 2016

दिल तुझे दिया था रखने को-मल्हार १९५१

बांसुरी और वाइलिन इंसान के सुरों के सबसे नज़दीक मानी
जाती है. वैसे ये स्थान सारंगी को हासिल है मगर सामान्यतः
संगीत के क्षेत्र में बांसुरी और वाइलिन का प्रयोग ज्यादा होता
है.

कुछ गीत ऐसे बने हैं फिल्म संगीत क्षेत्र में जिनकी कि बिना
बांसुरी के स्वर के कल्पना मुश्किल है, यूँ कहें बांसुरी की जो
आवाज़ है उन गीतों में वह गीत का अभिन्न अंग सुनाई देती
हैं. ऐसा एक गीत है फिल्म मल्हार से मुकेश का गाया हुआ
जो आज आप सुनेंगे और देखेंगे. कैफ इरफानी के बोल हैं और
रोशन का संगीत है.

उजड़े चमन जैसा जो शख्स इस गीत में दिख रहा है उसका
नाम अर्जुन है और वो नायिका शम्मी के लिए दुःख बाहर
निकाल रहा है. पत्ता नई मल्हार फिल्म के गाने याद आते ही
कुछ फिलोसोफी झाड़ने का मन करने लगता है, आज नहीं !
ये संगीत का जादू ही तो है जो दिमाग पर झाड़ू चला देता
है.



गीत के बोल:

दिल तुझे दिया था रखने को
तूने दिल को जला के रख दिया
किस्मत ने दे के प्यार मुझे
मेरा दिल तड़पा के रख दिया

दिल तुझे दिया था रखने को
तूने दिल को जला के रख दिया
किस्मत ने दे के प्यार मुझे
मेरा दिल तड़पा के रख दिया

भँवरे के लबों पर फरियादें
कलियों के लबों पर मुस्कानें
भँवरे के लबों पर फरियादें
कलियों के लबों पर मुस्कानें
भँवरे का कलेजा कलियों में
हाय किसने छुपा के रख दिया

किस्मत ने दे के प्यार मुझे
मेरा दिल तड़पा के रख दिया
दिल तुझे दिया था रखने को

जिस दर्द से दुनिया डरती है
जिस गम से किनारा करती है
जिस दर्द से दुनिया डरती है
जिस गम से किनारा करती है
तेरी नज़र ने मेरे सीने में
वो दर्द छुपा के रख दिया


किस्मत ने दे के प्यार मुझे
मेरा दिल तड़पा के रख दिया
दिल तुझे दिया था रखने को

जब दिल में तुम्हें बसाया था
आशा का दीप जलाया था
जब दिल में तुम्हें बसाया था
आशा का दीप जलाया था
तकदीर के एक ही झोंके ने
वो दीप बुझा के रख दिया

किस्मत ने दे के प्यार मुझे
मेरा दिल तड़पा के रख दिया

दिल तुझे दिया था रखने को
तूने दिल को जला के रख दिया
किस्मत ने दे के प्यार मुझे
मेरा दिल तड़पा के रख दिया
दिल तुझे दिया था रखने को
............................................................................
Dil tujhe diya tha rakhne ko-Malhar 1951



Artists-Shammi, Arjun

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Apr 22, 2016

कह दो कोई ना करे यहाँ प्यार-गूँज उठी शहनाई १९५९

विजय भट्ट निर्देशित फिल्म गूँज उठी शहनाई एक एक एक
गीत नायब हीरा है संगीत के खजाने का. आज सुनते हैं रफ़ी
की आवाज़ में टॉप क्लास दर्द भरा गीत. विजय भट्ट ने इससे
पहले एक पीरियड फिल्म पटरानी(५६) का निर्माण किया था जो
ज्यादा चली नहीं. फिल्म अलबत्ता अच्छे गीतों से भरी पड़ी है.
सन १९५२ की बैजू बावरा तो शायद उनके निर्देशन कैरियर
की सबसे बड़ी हिट फिल्म रही.

गूँज उठी शहनाई उल्लेखनीय होने की वजह है एक-उस समय
न तो राजेंद्र कुमार कोई बड़े सितारे थे ना ही फिल्म की नायिका
अमीता. राजेंद्र कुमार के कैरियर को तो पंख लग गए फिल्म के
बाद, अमीता को कुछ खास फायदा न हुआ.

गीत है भरत व्यास का और इसकी धुन बनाई है वसंत देसाई
ने.



गीत के बोल:

बिखर गए बचपन के सपने
अरमानों की शाम ढले
कहीं सजे बारात किसी की
कहीं किसी का प्यार जले

कह दो कोई न करे यहाँ प्यार
इसमें ख़ुशियाँ हैं कम, बेशुमार हैं ग़म
इक हँसी और आँसू हज़ार
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार

प्रीत पतंगा दिये से करे
उसकी ही लौ में वो जल-जल मरे
मुश्किल राहें यहाँ, अश्क और आहें यहाँ
इसमें चैन नहीं, ना करार
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार

हमने तो समझा था फूल खिले
चुन-चुन के देखा तो काँटे मिले
ये अनोखा जहां, हरदम धोखा यहाँ
इस वीराने में कैसी बहार

कह दो कोई न करे यहाँ प्यार
इसमें ख़ुशियाँ हैं कम, बेशुमार हैं ग़म
इक हँसी और आँसू हज़ार
कह दो कोई न करे यहाँ प्यार
.................................................................................
Keh do koi na kare yahan pyar-Goonj uthi shehnai 1959

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Apr 16, 2016

ख़ुदा निगेहबान हो तुम्हारा-मुग़ल-ए-आज़म १९६०

गीत संगीत जीवन का अभिन्न अंग है. चाहे कोई ध्वनियों पर
ध्यान दे या ना दे, इनका असर सभी पर पड़ा करता है. सृष्टि
के वरदानों में से एक है संगीत.

फिल्म मुग़ल-ए-आज़म का एक गीत है लता मंगेशकर का गाया
हुआ जिसमें कुछ पंक्तियाँ इस प्रकार से हैं-

उठे जनाज़ा जो कल हमारा, क़सम है तुमको, न देना काँधा

दर्द की इन्तेहा के आगे अगर कुछ है तो शायद ऐसी पंक्तियाँ
ही बयां कर पाती होंगी. दो अंतरों में ही नाउम्मीदी के ऐसे
बयान लिखने वाले की कल्पनाशक्ति की दाद देना पड़ेगी. वो
समय था जब गीतों के बोलों पर और फिल्मांकन पर मेहनत
की जाती थी. इस फिल्म के गीत, विशेषकर मधुबाला पर
फिल्माए गए अनूठे हैं और प्रस्तुत गीत भावाभिव्यक्ति में
एक कठिन परीक्षा जैसी थी अभिनेत्री के लिए. बैकग्राउंड
में गीत बज रहा है जैसे दिल से भाव निकल रहे हों शब्द
की शक्ल लेकर. यहाँ निगेहबान शब्द का अर्थ है- ईश्वर का
संरक्षण.



गीत के बोल:

वो आई सुबह के परदे से मौत की आवाज़
किसी ने तोड़ दिया जैसे ज़िन्दगी का साज़

ख़ुदा निगेहबान हो तुम्हारा
धड़कते दिल का पयाम ले लो
तुम्हारी दुनिया से जा रहें हैं
उठो हमारा सलाम ले लो

है वक़्त-ए-रुख़्सत, गले लगा लो
ख़ताएं भी आज बख्श डालो
बिछड़ने वाले का दिल न तोड़ो
ज़रा मोहब्बत से काम ले लो
तुम्हारी दुनिया से जा रहें हैं
उठो हमारा सलाम ले लो

उठे जनाज़ा जो कल हमारा
क़सम है तुमको, न देना काँधा
न हो मोहब्बत हमारी रुसवा
ये आँसुओं का पयाम ले लो

ख़ुदा निगेहबान हो तुम्हारा
धड़कते दिल का पयाम ले लो
तुम्हारी दुनिया से जा रहें हैं
उठो हमारा सलाम ले लो
.....................................................................
Khuda Nigehbaan ho tumhara- Mughal-e-azam 1960

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Mar 20, 2016

तेरे दर्द से दिल आबाद रहा-दीवाना १९९२

बहुत दिनों के बाद किसी की फरमाईश आई है ब्लॉग पर.
आइये सुना जाए ऋषि कपूर, दिव्या भारती, शाहरुख खान
अभिनीत फिल्म दीवाना से एक और गीत जो काफी बड़ा
हिट गीत है. 

फिल्म-दीवाना
साल-१९९२
गायक-कुमार सानू
गीत-समीर
संगीत-नदीम श्रवण
परदे पर-ऋषि कपूर, दिव्या भारती




गीत के बोल:

तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा
तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा

नसीबा भी क्या रंग लाया
कहाँ ला के हमको मिलाया
नसीबा भी क्या रंग लाया
कहाँ ला के हमको मिलाया

अपनी वफ़ा के गुल खिल ना पाए
मिल के भी तुझसे हम मिल ना पाए
दर्द-ए-दिल हम कैसे सहें
दूर भी हम कैसे रहें
तेरा गम तेरे जाने के बाद रहा
तेरा गम तेरे जाने के बाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा

जान-ए-वफ़ा तुझको क्या दे
दिल कह रहा है दुआ दे
जान-ए-वफ़ा तुझको क्या दे
दिल कह रहा है दुआ दे
अरमान बुझे है सपने धुंआ है
मर मर के हम तो जिंदा यहां है
बेखुदी मे हम खो गए
फिर जुदा तुझसे हो गए
चाहत का जहां बुर्बाद रहा
चाहत का जहां बुर्बाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा

तेरे दर्द से दिल आबाद रहा
कुछ भूल गए कुछ याद रहा
कुछ याद रहा
..........................................................
Tere dard se dil aabad raha-Deewana 1992

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Feb 28, 2016

दिल का खिलौना हाय टूट गया गूँज उठी शहनाई १९५९

एक उच्च कोटि का दर्द भरा गीत जो किसी भी प्रकार के
विवरण और सन्दर्भों का मोहताज़ नहीं है. फिल्म है १९५९
की गूँज उठी शहनाई. अमिता इसे परदे पर गा रही हैं .



गीत के बोल

टूट गया
टूट गया टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया, हाय
दिल का खिलौना हाय टूट गया

हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंयाँ हमारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा
उल्फ़त का तार तोड़ा
हमें मझधार छोड़ा
हम तो चले थे ले के तेरा ही सहारा
साथी हमारा हमसे छूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया

दिल का खिलौना हाय टूट गया

कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
चैन भी खोया हमने, नींद गँवाई
तेरा ऐतबार कर के
हाय इंतज़ार कर के
ख़ुशियों के बदले ग़म की दुनिया बसाई
ज़ालिम ज़माना हमसे रूठ गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया

दिल का दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
............................................................................
Dil ka khilona haye too gaya-Goonj uthi shehnai 1959

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Feb 25, 2016

दिल जलता है तो-पहली नज़र १९४५

गायक मुकेश का पहला हिंदी फ़िल्मी गीत है ये फिल्म
पहली नज़र से जिसे उस समय के मशहूर अभिनेता और
सुपरस्टार मोतीलाल पर फिल्माया गया था.

मुकेश का आगमन हिंदी फिल्मों में ४ साल पहले हो चुका
था फिल्म निर्दोष(१९४१) में उन्होंने अभिनय किया था.

इस गीत में सहगल प्रभाव स्पष्ट झलकता है. उस समय के
प्रमुख गायक सहगल के अंदाज़ में गाने की कोशिशें किया
करते थे. मुकेश ज़ल्द ही उस प्रभाव से मुक्त हो गए और
अपनी पहचान बना ली.




गीत के बोल:

दिल जलता है तो जलने दे
आँसू ना बहा फ़रियाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

तू परदा नशीं का आशिक़ है
यूं नाम-ए-वफ़ा बरबाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

मासूम नजर के तीर चला
बिस्मिल को बिस्मिल और बना
अब शर्म-ओ-हया के परदे में
यूं छुप छुप के बेदाद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे

हम आस लगाये बैठे हैं
तुम वादा करके भूल गये
या सूरत आ के दिखा जाओ
या कह दो हमको याद ना कर
दिल जलता है तो जलने दे
…………………………………………………….
Dil jalta hai to-Pehli nazae 1945

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Feb 22, 2016

कोई सागर दिल को-दिल दिया दर्द लिया १९६६

नौशाद मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ के कायल थे. वे मुक्त कंठ से
रफ़ी की प्रशंसा किया करते थे. उन्होंने रफ़ी के लिए कुछ बहुत
ही उम्दा किस्म की धुनें बनायीं जिनमें से एक है ६६ की फिल्म
दिल दिया दर्द लिए से-कोई सागर दिल को बहलाता नहीं. इस
गीत के बोल भी अनमोल है और शकील बदायूनी ने सरल से
शब्दों में एक टूटे हुए इंसान के दिल की बात कह दी है.

कभी आप जिंदगी में भंवर में उलझें हों तो गीत के कोई खास
हिस्सा याद हो जाता है और वो दीर्घकाल में आपका प्रिय भी हो
जाया करता है, कुछ ऐसा ही है गीत के दूसरे अंतरे में.

खमाज थाट के राग कलावती पर ये गीत आधारित है.






गीत के बोल:

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं
कोई सागर दिल को बहलाता नहीं

मैं कोई पत्थर नहीं इन्सान हूँ
मैं कोई पत्थर नहीं इन्सान हूँ
कैसे कह दूं गम से घबराता नहीं

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं

कल तो सब थे कारवाँ के साथ-साथ
कल तो सब थे कारवाँ के साथ-साथ
आज कोई राह दिखलाता नहीं

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं

ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो
ज़िन्दगी के आईने को तोड़ दो
इसमें अब कुछ भी नज़र आता नहीं

कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं
कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
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Koi sagar dil ko behlata nahin-DIl diya dard liya 1966

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May 15, 2011

ऐ मेरे दिल कहीं और चल २- दाग १९५२

"प्यासा हूँ मगर लोग समझते हैं पिया सा"- वाह साहब क्या पंक्तियाँ
हैं पिछले गीत की। आप सभी ने ये ज़रूर एक ना एक बार सुना होगा
कि कोई शराबी नाली में पड़ा है और कुत्ता उसका मुंह चाट रहा है।
मैंने २-३ बार देखा भी है। कुछ रोज़ पहले ध्यान से देखने पर
पाया कुत्ता उस व्यक्ति के होंठ भी चाट के साफ़ कर रहा है। अमूमन
ऐसे दृश्य केवल वहीँ देखे जा सकते हैं जहाँ कुत्ते पाले होते
हैं और कुत्तों को घर के सदस्य की तरह रखा जाता है। वैसी
जगहों पर उनकी चाटा-चाटी को भी खुली छूट होती है।

प्रस्तुत गीत एक प्रसिद्ध फिल्म दाग से है। सन १९५२ की दाग।
१९५२ की दाग शैलेन्द्र के गीतों के लिए याद की जाती है
तो सन १९७३ वाली साहिर के गीतों के लिए। प्रस्तुत गीत में
नायक कुत्ते को निमंत्रण देता सा प्रतीत होता है-आ जा मेरे
पीछे पीछे, मैं आगे चल के गिरने वाला हूँ उसके बाद तेरी जो
मर्ज़ी हो करना। इस फिल्म के लिए नायक को फ़िल्म फेयर
पुरस्कार मिला था। नायक को तो आप पहचान ही गए होंगे।
गीत गाया है तलत महमूद ने और इसकी धुन तैयार की है
शंकर जयकिशन ने।




गीत के बोल:

ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल
गम की दुनिया से दिल भर गया
ढूंढ ले अब कोई घर नया
ऐ मेरे दिल कहीं और चल

चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
चल जहां गम के मारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
झूठी आशा के तारे ना हों
इन बहारों से क्या फ़ायदा
जिस में दिल की कली जल गई
ज़ख्म फिर से हरा हो गया

ऐ मेरे दिल कहीं और चल

चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
चार आंसू कोई रो दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
फेर के मुंह कोई चल दिया
लुट रहा था किसी का जहाँ
देखती रह गई ये ज़मीन
चुप रहा बेरहम आसमान

ऐ मेरे दिल कहीं और चल
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Ae mere dil kahin aur chaal(Talat)-Daag 1952

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Dec 13, 2010

आ के अब आता नहीं दिल को करार-महबूबा १९५४

आपको इस ब्लॉग पर १९७६ की महबूबा फिल्म से
दो गीत सुनवाए जा चुके हैं। आइये अब सुना जाए
गीत जी की एक पसंद की अभिनेत्री पर फिल्माया गया
लता जी का गाया गीत। फिल्म में शम्मी कपूर और
नलिनी जयवंत की जोड़ी है।

उस ज़माने में नलिनी जयवंत एक नामी सितारा
थीं और शम्मी नए कलाकार। शम्मी को इस हिसाब
से सभी काल की सुन्दर अभिनेत्रियों के साथ अभिनय
का मौका मिल गया। स्वयं के निर्देशन में फिल्म
मनोरंजन में जीनत अमान के साथ अभिनय का भी
मौका मिला हालाँकि उस फिल्म के हीरो थे संजीव कुमार।




गाने के बोल:

आ के अब आता नहीं दिल को करार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार

आ के अब आता नहीं दिल को क़रार

किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
किस कदर बेचैन है दुनिया मेरी
दिल की हर धड़कन में है आहात तेरी
आरजुएँ हो रही हैं बेकरार

आ के अब आता नहीं दिल को करार

दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
दिल सदायें दे रहा है तू कहाँ
मुन्तजिर है चाँद तारे आसमान
ये हवाएं ये फज़ाएँ ये बहार

आ के अब आता नहीं दिल को करार

पास तेरे वो हसीं रातें गई
पास तेरे वो हसीं रातें गई
प्यार की रंगीं मुलाक़ातें गई
रह गया है दर्द दिल की यादगार

आ के अब आता नहीं दिल को क़रार
आ के अब आता नहीं दिल को करार
राह तकते थक गया है इंतज़ार

आ के अब आता नहीं दिल को क़रार

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Nov 27, 2009

एक वो भी दिवाली थी-नजराना १९६१

दर्द भरे गीतों की श्रृखला में अगला गीत फ़िल्म नजराना से।
संगीतकार रवि ने इस फ़िल्म में राज कपूर के लिए दो पार्श्व
गायकों की आवाज़ का इस्तेमाल किया है- मुकेश और रफ़ी।
ये मुकेश का गाया हुआ गीत है। बोल है राजेंद्र कृष्ण के और
दीवाली के दिन हीरो दुखी क्यूँ है उसका बयान करता है। इस
फ़िल्म के निर्देशक सी वी श्रीधर हैं और इसमे राज कपूर के
साथ वैजयंतीमाला अभिनेत्री हैं। ये जोड़ी बाद में राज कपूर की
स्वयं निर्देशित फ़िल्म संगम -१९६४ में दिखाई दी।



गाने के बोल:

एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है

एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है

बाहर तो उजाला है, मगर दिल में अँधेरा
समझो ना इसे रात, ये है ग़म का सवेरा
बाहर तो उजाला है मगर दिल में अँधेरा
समझो ना इसे रात, ये है ग़म का सवेरा
क्या दीप जलायें हम, तक़दीर ही काली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है

ऐसे न कभी दीप किसी दिल का बुझा हो
मैं तो वो मुसाफ़िर हूँ, जो रस्ते में लुटा हो
ऐसे न कभी दीप किसी दिल का बुझा हो
मैं तो वो मुसाफ़िर हूँ , जो रस्ते में लुटा हो
ऐ मौत तू ही आ जा, दिल तेरा सवाली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ माली है

एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है
उजड़ा हुआ गुलशन है, रोता हुआ गाली है
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Ek wo bhi diwali thi-Nazrana 1961

Artist-Raj Kapoor

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Oct 21, 2009

बरसों पुराना ये याराना-हेरा फेरी १९७६

पसंद अपनी अपनी ख्याल अपना अपना। हेरा फेरी नाम की एक
सुपर हिट फ़िल्म थी सन १९७६ की। इस फ़िल्म के दूसरे गीत ज्यादा
चले, बजाये इसके जो यहाँ प्रस्तुत है। कुछ भी हो, मुझे सबसे ज्यादा ये
गाना पसंद है और मेरे ख्याल से इसको किशोर कुमार के गाये चुनिन्दा
दर्दीले गीतों में शामिल किया जा सकता है। संगीतकार कल्याणजी
आनंदजी ने किशोर कुमार की प्रतिभा के साथ भरपूर न्याय करते हुए
उनको सभी तरह के गीत गाने को दिए जिसमे से अधिकतर पॉपुलर
हुए।




गाने के बोल:

दुश्मन ना करे दोस्त ने वो
काम कर दिया

के दोस्ती के नाम को
बदनाम कर दिया

बरसों पुराना यह याराना इक पल में क्यों टूटा

इक पल में क्यों टूटा

यार मेरे ,
यार मेरे तू ऐसे रूठा जैसे मेरा रभ रूठा

जैसे मेरा रब रूठा


तेरा जहाँ भी गिरा पसीना मैंने खून बहाया
तेरा लहू बना क्यों पानी यह कैसा दिन आया

वो तेरी दोस्ती
वो तेरी दोस्ती थी मेरी ज़िन्दगी

बन के पुजारी प्यार का तूने, यार का मन्दिर लूटा

जैसे मेरा रब रूठा
जैसे मेरा रब रूठा

बरसों पुराना ........

लहरों पर जो मिटें लकीरें टूटी क़समें सारी
रेत की इस दीवार सी मेरे यार की झूठी यारी

यह सितम क्या हुआ
यह सितम क्या हुआ, क्या लगी बद्दुआ

जिस्म से जैसे जान जुदा हो साथ तेरा यूँ छूटा

जैसे मेरा रब रूठा
जैसे मेरा रब रूठा
बरसों पुराना यह याराना इक पल में क्यों टूटा

इक पल में क्यों टूटा

यार मेरे ,
यार मेरे तू ऐसे रूठा जैसे मेरा रब रूठा

जैसे मेरा रब रूठा
.......................................................................
Barson purana ye yarana-Hera Pheri 1976

 Artists-Vinod Khanna, Amitabh Bachchan, Saira Bano

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Mar 9, 2009

जब दर्द नहीं था-अनुरोध १९७७

गाने की सिचुएशन ऐसी है- हीरो का मित्र अस्पताल में भर्ती
है, किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होकर। उसका ऑपरेशन होने
वाला है और उसी समय हीरो का स्टेज शो है। इस वजह से हीरो
दर्द भरा गीत गा रहा है ।

गीत लिखा है आनंद बक्षी ने और धुन बनाई है लक्ष्मी प्यारे ने।
हीरो हैं राजेश खन्ना और उनके मित्र की भूमिका में नायक हैं 
विनोद मेहरा । गाना अनुरोध फ़िल्म का है जो १९७७ में आई
थी।
गीत की लोकप्रियता के बारे में थोड़ी चर्चा की जाए. ये गीत फिल्म
रिलीज़ के वक्त बहुत ही कम सुना गया. इसे किशोर भक्त ज्यादा
सुना करते हैं. कम प्रचलित गीत है मगर इसके बोल बढ़िया हैं.
धुन थोड़ी बेहतर बनाई जाती तो ये लोकप्रिय होता. कभी कभी
फिल्म के सारे गानों के साथ न्याय कर पाना संगीतकार के बस
में नहीं होता है.



गाने के बोल:

न हँसना मेरे गम पे इन्साफ करना
जो मैं रो पडूं तो मुझे माफ़ करना

जब दर्द नहीं था सीने में
क्या ख़ाक मज़ा था जीने में
अब के शायद हम भी रोएँ ,सावन के महीने में

जब दर्द नहीं था सीने में .........

यारों का गम क्या होता है
मालूम न था अनजानों को
साहिल पे खड़े होकर अक्सर
देखा हमने तूफानों को
अब के शायद हम भी डूबें
मौजों के सफीने में

जब दर्द नहीं था सीने में
क्या ख़ाक मज़ा था जीने में

ऐसे तो ठेस न लगती थी
जब अपने रूठा करते थे
इतना तो दर्द न होता था
जब सपने टूटा करते थे
अब के शायद दिल भी टूटे
अब के शायद हम भी रोएँ सावन के महीने में

जब दर्द नहीं था सीने में
क्या ख़ाक मज़ा था जीने में

इस कदर प्यार तो कोई करता नहीं
मरने वालों के साथ कोई मरता नहीं
आपके सामने मैं न फिर आऊंगा
गीत ही जब न होंगे तो क्या गाऊँगा
मेरी आवाज़ प्यारी है तो दोस्तों
यार बच जाए मेरा, दुआ सब करो
दुआ सब करो
...................................................
Jab dard nahin tha-Anurodh 1977

Artists: Rajesh Khanna, Vinod Mehra

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