Showing posts with label Munawwar Sultana. Show all posts
Showing posts with label Munawwar Sultana. Show all posts

May 28, 2017

आ गए मोरे पिया-नवेली १९५२

हर चीज़ जब नयी नयी आती है तब जनता उसे नयी नवेली
कहती है. नवेली शब्द अक्सर नयी नवेली दुल्हन के साथ ही
प्रयुक्त होता है. अंग्रेजी के शब्द नॉवेल और नवेली के बीच कुछ
कनेक्शन सा है.

गीत सुनते हैं सन १९५२ की फिल्म नवेली से जिसे नजीर जाफरी
ने लिखा और इकबाल कुरैशी ने स्वरबद्ध किया. मुनव्वर सुल्ताना
ने इसे गाया है.

एक डिक्लेरेशन सोंग जैसा कुछ है जिसमें बताया जा रहा है कि
पिया आ गए, मानो ये नहीं बताया जाता तो जनता को पता
चलता ही नहीं.



गीत के बोल:

आ गये मोरे पिया
नाच रहा है मोरा जिया
प्यार ने दिल ले लिया
जीने न दिया
हाय लूट लिया
आ गये मोरे पिया
नाच रहा है मोरा जिया
प्यार ने दिल ले लिया
जीने न दिया
हाय लूट लिया

आ गये मोरे पिया

आ गई हैं काली रातें काली रातें
झूम रही हैं बरसातें बरसातें
आ गई हैं काली रातें काली रातें
झूम रही हैं बरसातें बरसातें
भोलेपन की बातें याद आयें पिया
हाय लूट लिया
भोलेपन की बातें याद आयें पिया
हाय लूट लिया

जान लगी घबराने
प्यार लगा पछताने
कौन हमारा ग़म जाने
याद ना तूने किया
हाय लूट लिया

आ गये मोरे पिया
……………………………………………..
Aa gaye more piya-Naveli 1952

Read more...

May 25, 2016

जवानी मस्तानी है-धमकी १९४५

जवानी सन १९४५ के गीत में भी उतनी ही मस्तानी
हुआ करती थी जितनी के आज के गीतों में होती है.
धमकी नाम से तकरीबन ३ फ़िल्में बन चुकी हैं. एक
तो वो है जिसमें गणेश का संगीत है सन १९७३ की,

इसको सुन कर आपको गर कोई दूसरा गीत याद आने
लगे तो आश्चर्य बिलकुल मत कीजियेगा. दुनिया बहुत
ही गोल है और संगीत के मामले में भी ये ज्यादा गोल
है. आपको केवल एक गीत का हिंट देते हैं बाकी के दो
खुद आप तलाशिये. इसकी दूसरी पंक्ति और पिया गए
रंगून की दूसरी पंक्ति भाई-बहन जैसी सुनाई देती है.

मेरे कान थोड़े क्या बहुत पाक गए हैं और पुराने गीतों
के बोल पकड़ने में मैं मैं थोडा पिछड़ा हुआ हूँ, मेरे कान
वो क्या कहते हैं ६/६ नहीं हैं न इसलिए बोल सही होने
की कोई गारंटी नहीं दे सकता.



गीत के बोल:

जवानी मस्तानी है
पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है
पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

एक थी लैला एक था मजनू
दोनों की आपस में हो गयी कुछ यूँ यूँ
दोनों की आपस में हो गयी कुछ यूँ यूँ
इश्क का रोग लगा के दोनों बिन आई ले आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है
इश्क का रोग लगा के दोनों बिन आई ले आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है

हीर की सुनो कहानी
रांझा को देखा मुंह में भर आया पानी
हीर की सुनो कहानी
रांझा को देखा मुंह में भर आया पानी
हंस के बोली प्यार करन की रूत है प्यार करेंगे
हंस के बोली प्यार करन की रूत है प्यार करेंगे
हम भी डूबेंगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे
हम भी डूबेंगे सनम तुम को भी ले डूबेंगे
फिर फिल्म से निकली हाय बाज़ न आये
हाय रे हाय
हाय जवानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जबानी मस्तानी है

पग पग ठोकर खाए बाज़ न आये
हाय रे हाय
जवानी मस्तानी है
........................................................................
Jawani mastani hai-Dhamki 1945

Read more...

Aug 10, 2015

दिल धड़के आँख मोरी फड़के-दर्द १९४७

सुनते हैं सन १९४७ से एक गीत फिल्म दर्द का. दिल धड़काने
वाला और आँख फड़काने वाला ये गीत लिखा है शकील बदायूनीं
ने और इसका संगीत तैयार किया नौशाद ने. सुरैया की सुरीली
आवाज़ है.

वियोग या बिछडना स्वतः संयोगवश भी हो सकता है और जबरन
भी. जबरन की बिछडन को “छोड़ के जाना “ भी कहा जाता है.
दिल धड़कता है या तो घबराहट के मारे या किसी संकट की
आशंका से. यही हाल आँख फडकने का भी है, अक्सर ऐसे होने
से किसी संभावित अप्रियता की आशंका जताई जाती है.

दर्द सन १९४७ की फिल्म है और इसका निर्देशन कारदार ने किया
है. कारदार एक चर्चित निर्देशक थे फिल्म जगत के. उनकी सभी
फिल्मों का संगीत बेहतर हुआ करता था. फिल्म में सुरैया के
गाये गीत भी हैं मगर उमा देवी का गाया गीत “अफसाना लिख रही
हूँ” सबसे ज्यादा पोपुलर हुआ और इतना हुआ कि सर्वाधिक लोकप्रिय
गीतों में शामिल हो गया. ऐसे उदाहरण आपको आगे भी बतलायेंगे
जब मुख्य धारा के गायकों को पीछे छोड़ कर अनजान गायक का
गीत प्रसिद्ध हुआ. फिल्म में श्याम और मुनव्वर सुल्ताना की प्रमुख
भूमिकाएं हैं.



गीत के बोल:

दिल धड़के आँख मोरी फड़के
चले जाना न देखो जी बिछड़ के

कहीं बीते न दुःख में जवानी
कहीं सुन ले न दुनियाँ कहानी
कहीं बन जाऊँ मैं न दीवानी

कहीं ठहरे न उल्फ़त का धारा
कहीं पा ले न कोई इशारा
कहीं टूटे न दिल क सहारा

कहीं जाना न कर के बहाना
न बने दो दिलों का फ़साना
देखो नाज़ुक बहुत है ज़माना

दिल धड़के आँख मोरी फड़के
चले जाना न देखो जी बिछड़ के

………………………………………………..
Dil Dhadke Aankh Mori-Dard 1947

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP