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Jul 17, 2018

तुमने मुझे देखा-तीसरी मंजिल १९६६

शम्मी कपूर पर फिल्माए गए गीतों का ऊर्जा स्तर अलग किस्म का
होता था विशेषकर वे गीत जो रफ़ी द्वारा गाये गए. आज एक गीत
सुनते हैं फिल्म तीसरी मंजिल से जो मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा
हुआ है.

पोस्ट लिखते समय मुझे सबसे पहले गीतकार की ही याद आती है,
उसके बाद संगीतकार और उसके बाद गाने वाले की. हालांकि ज़्यादा
पोपुलरिटी गायक के हिस्से में ही आती है. कई किस्मों के संगीत
रसिक होते हैं, अधिकांश ऐसे होते हैं जिन्हें गीत के निर्माण और राग
इत्यादि में कोई दिलचस्पी नहीं होती. सुनने में अच्छा है इसलिए
सुनते हैं. वैसे सही भी है जो चीज़ अपने आप अच्छी लगे बिना किसी
टेक्निकलिटी में उलझे, वो निस्संदेह कोई बेहतर चीज़ ही है इसलिए
कानों को लुभाती है.


सुनते हैं रफ़ी का गाया गीत जिसका संगीत आर डी बर्मन ने तैयार
किया है. गीत के साथ ही रफ़ी के लाइव शो में गाये इस गीत की
क्लिप की लिंक भी है.



…..




गीत के बोल:

तुमने मुझे देखा हो कर मेहरबान
रुक गई ये ज़मीन थम गया आसमान
जानेमन जानेजां
तुमने मुझे देखा हो कर मेहरबान
रुक गई ये ज़मीन थम गया आसमान
जानेमन जानेजां
तुमने मुझे देखा

ओ कहीं दर्द के सेहरा में .
रुकते चलते होते
इन होंठों की हसरत में
तपते जलते होते
मेहरबान हो गयीं ज़ुल्फ़ की बदलियाँ
जानेमन जानेजां
तुमने मुझे देखा हो कर मेहरबान
रुक गई ये ज़मीन थम गया आसमान
जानेमन जानेजां
तुमने मुझे देखा

ओ ले कर ये हसीं जलवे
तुम भी ना कहाँ पहुंचे
आखिर को मेरे दिल तक
क़दमों के निशाँ पहुंचे
खत्म से हो गए रास्ते सब यहाँ
जानेमन जानेजां
तुमने मुझे देखा हो कर मेहरबान
रुक गई ये ज़मीन थम गया आसमान
जानेमन जानेजां
तुमने मुझे देखा
..................................................................................
Tumne mujhe dekha-Teesri Manzil 1966

Artists: Shammi Kapoor, Asha Parekh

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Jun 28, 2017

ओ मेरे सोना रे-तीसरी मंजिल १९६६

नायक नायिका का एक दूसरे को सोना चांदी बुलाना
पुरानी परंपरा है. किसी प्रदेश विशेष में आपको सोणा
या सोणी शब्द ज़रूर सुनने को मिलते हैं. ये गीत वाला
शब्द भी कुछ ऐसा ही है.

कोई अगर सोना चांदी च्यवनप्राश खाए तो उसको सोना
चांदी बुलाना अजीब नहीं लगना चाहिए.

तीसरी मंजिल का ये गीत बेहद लोकप्रिय है आज भी.
मजरूह के बोल हैं और रफ़ी-आशा की आवाजें. संगीत
आपको मालूम ही है किसका है.



गीत के बोल:

ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे
दे दूंगी जान जुदा मत होना रे
मैंने तुझे ज़रा देर में जाना
हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे
मैंने तुझे ज़रा देर में जाना
हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे
ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना

ओ मेरी बाँहों से निकल के
तू अगर मेरे रस्ते से हट जाएगा
तो लहरा के हो बलखा के
मेरा साया तेरे तन से लिपट जाएगा
तुम छुड़ाओ लाख दामां
छोड़ते हैं कब ये अरमां
के मैं भी साथ रहूँगी रहोगे जहाँ
ओ मेरे सोन्ना रे सोन्ना रे सोना रे
दे दूंगी जान जुदा मत होना रे
मैंने तुझे ज़रा देर में जाना
हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे
ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना

ओ मियां हमसे न छिपाओ
हो बनावट की सारी अदाएं लिये
के तुम इसपे हो इतराते
के मैं पीछे हूँ सौ इल्तिज़ाएं लिये
जी मैं खुश हूँ मेरे सोना
झूठ है क्या सच कहो ना
के मैं भी साथ रहूँगी रहोगे जहाँ
ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे
दे दूंगी जान जुदा मत होना रे
मैंने तुझे ज़रा देर में जाना
हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे
ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना

ओ फिर हमसे न उलझना
नहीं लट और उलझन में पड़ जायेगी
ओ पछताओगी कुछ ऐसे
के ये सुरखी लबों की उतर जायेगी
ये सज़ा तुम भूल न जाना
प्यार को ठोकर मत लगाना
के चला जाऊंगा फिर मैं न जाने कहाँ

ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे
दे दूंगी जान जुदा मत होना रे
मैंने तुझे ज़रा देर में जाना
हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे
मैंने तुझे ज़रा देर में जाना
हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे
………………………………………………
O mere sona re-Teersi manzil 1966

Artists: Shammi Kapoor, Asha Parekh

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Apr 21, 2017

आ जा आ जा मैं हूँ प्यार-तीसरी मंजिल १९६६

हिंदी फिल्म संगीत में वो क्या है जिसे सयाने बोलते हैं
माईल स्टोन सोंग्स जिन्हें सुन सुन के कितने माईल स्टोन
तक पहुँच गए. कुछ गाने तो खुद माईल स्टोन हो गए कुछ
माईल स्टोन बनते बनते रह गए. अंग्रेजी का अंदाज़े-बयां और
हिंदी की अभिव्यक्ति में थोडा अंतर है. कहने का तात्पर्य यह
है कि कई गीत प्रसिद्धि और लोकप्रियता की चरम अवस्था
तक पहुंचे.

तीसरी मंजिल के सबसे ज्यादा बजे गीतों में एक तो यही
है और दूसरा गीत है ‘ओ मेरे सोना रे’. मजरूह सुल्तानपुरी
के गीत को रफ़ी और आशा ने गाया है जिसकी तर्ज़ बनाई
है आर डी बर्मन ने. नायक नायिका को आप पहचान ही
लेंगे.



गीत के बोल:

आ जा आ जा मैं हूँ प्यार तेरा
अल्लाह अल्लाह इन्कार तेरा
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ

ओ तुमपे हज़ारों की आँखें चाहिये तुमको सहारा
पल्कों मैं आओ छुपा लूं नाज़ुक तन है तुम्हारा
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ
आ जा आ जा मैं हूँ प्यार तेरा
अल्लाह अल्लाह इन्कार तेरा
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ

आ जा आ जा देखूं प्यार तेरा
अल्लाह अल्लाह इकरार तेरा
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ

हो मेरा ख़याल तुझे है मैंने अभी यही जाना
सच्चा है प्यार की झूठा ये है मुझे आज़माना
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ

आ जा आ जा देखूँ प्यार तेरा
अल्लाह अल्लाह इकरार तेरा
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ

ओ रखना था दिल पे हमारे हाथ छुड़ा के चली हो
ओ जी हाँ ज़रा ये भी कहिये आग लगा के चली हो ओ
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ

आ जा आ जा मैं हूँ प्यार तेरा
अल्लाह अल्लाह इन्कार तेरा
ओ आ जा आह आह आ जा आ आ आ
.............................................................
Aa ja aa ja main hoon-Teesri manzil 1966

Artists: Shammi Kapoor, Asha Parekh

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Jan 4, 2017

दीवाना मुझसा नहीं-तीसरी मंजिल १९६६

इस गाने के मुखड़े से एक फिल्म का नाम निकल आया था.
उस फिल्म का नायक आमिर खान हैं. आज का गीत हमने
चुना है आपके लिए शम्मी कपूर अभिनीत सन १९६६ की एक
म्यूजिकल हिट फिल्म तीसरी मंजिल से. फिल्म का ये गीत
लंबे समय तक सुना जाने लायक है. रूटीन लव सॉंग्स से
हट कर है ये गीत जिसमें आपको ज्यादा लल्लो चप्पो नहीं
मिलेगी.

नासिर हुसैन निर्मित इस फिल्म का निर्देशन विजय आनंद ने
किया था. सस्पेंस फिल्म है ये जिसमें अंत तक सस्पेंस बना
रहता है.



गीत के बोल:

दीवाना मुझसा नहीं इस अम्बर के नीचे
दीवाना मुझसा नहीं इस अम्बर के नीचे
आगे है क़ातिल मेरा और मैं पीछे-पीछे
दीवाना मुझसा नहीं इस अम्बर के नीचे
आगे है क़ातिल मेरा और मैं पीछे-पीछे

पाया है दुश्मन को जब से प्यार के क़ाबिल
तब से ये आलम है रस्ता याद न मंज़िल
नींद में जैसे चलता है कोई
चलना यूँ ही आँखें मींचे

दीवाना मुझसा नहीं इस अम्बर के नीचे
आगे है क़ातिल मेरा और मैं पीछे-पीछे

हमने भी रख दी हैं कल पे कल की बातें
हमने भी रख दी हैं कल पे कल की बातें
जीवन का हासिल है पल दो पल की बातें
दो ही घड़ी को साथ रहेगा
करना क्या है तन्हा जी के

दीवाना मुझसा नहीं इस अम्बर के नीचे
आगे है क़ातिल मेरा और मैं पीछे-पीछे
दीवाना मुझसा नहीं इस अम्बर के नीचे
...............................................................
Deewana mujhsa nahin-teesri manzil 1966

Artists: Shammi Kapoor, Asha Parekh

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Nov 8, 2009

ओ हसीना ज़ुल्फोंवाली-तीसरी मंजिल १९६६

सीखने के सबके अलग अलग तरीके होते हैं। कोई देख देख के
सीखता है, कोई सुन सुन के। इसके अलावा सीखना का दौर
चलता रहता है जिसमे आप पहले से समझे हुए मसले को थोड़ा
थोड़ा समय के साथ संशोधित करते चलते हैं। एक नाम पट्टिका
देखते थे सालों पहले जिसपे लिखा था पी. इमरत । उसको देखते
देखते एक दिन ये गाना सुनाई दिया ओ हसीना।

तो साहेब हमारे दिमाग ने उसको यूँ समझा ओ. हसीना । फ़िल्म
भी जल्द ही देखने को मिल गई।
फ़िल्म देखने के बाद मालूम पड़ा की ओ .हसीना किसी हिरोइन का
नाम नहीं बल्कि सुंदर स्त्री को संबोधन दिया जा रहा है। ये गाना है
फ़िल्म तीसरी मंजिल का जो १९६६ में आई।

इस गाने में आशा भोंसले और रफी की आवाजें हैं, राहुल देव बर्मन
का संगीत है। इस गाने की सुंदरी हैं हेलन। गाने में आशा पारेख भी
दिखाई देंगी आपको जो कुछ सक्रिय, कुछ अक्रिय सी होटल की एक
टेबल पर कुर्सी के सहारे टिकी हुई हैं।



गाने के बोल:

ओ हसीना जुल्फों वाली जाने जहाँ
ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशाँ
ओ हसीना जुल्फों वाली जाने जहाँ
ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशाँ
महफिल महफिल ए शमा, फिरती हो कहाँ
महफिल महफिल ए शमा, फिरती हो कहाँ

वो अनजाना ढूँढती हूँ, वो दीवाना ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप गया है, वो परवाना ढूँढती हूँ

गर्म है, तेज़ है यह निगाहें मेरी
काम आ जायेगी सर्द आहें मेरी
अरे तुम किसी राह में तो मिलोगे कहीं
अरे इश्क हूँ, मैं कहीं ठहरता ही नहीं
मैं भी हूँ गलियों की परछाई, कभी यहाँ कभी वहां
शाम ही से कुछ हो जाता है मेरा भी जादू जवान

ए, ओ हसीना ज़ुल्फोंवाली जाने जहाँ
ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशाँ
महफिल महफिल ए शमा, फिरती हो कहाँ
महफिल महफिल ए शमा, फिरती हो कहाँ

वो अनजाना ढूँढती हूँ, वो दीवाना ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप गया है, वो परवाना ढूँढती हूँ

हाँ दिल विल प्यार व्यार यूँही बदनाम है
ऐसी बदनामियों का वफ़ा नाम है
ओह ओह ओह, क़त्ल कर के चले, यह वफ़ा खूब है
हाय नादाँ तेरी यह अदा खूब है
मैं भी हूँ गलियों की परछाई, कभी यहाँ कभी वहां
शाम ही से कुछ हो जाता है मेरा भी जादू जवान

हे, ओ हसीना ज़ुल्फोंवाली जाने जहाँ
ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशाँ
ओ हसीना ज़ुल्फोंवाली जाने जहाँ
ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशाँ
महफिल महफिल ए शमा, फिरती हो कहाँ
महफिल महफिल ए शमा, फिरती हो कहाँ

वो अनजाना ढूँढती हूँ, वो दीवाना ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप गया है, वो परवाना ढूँढती हूँ
...............................................................
O haseena Zulfon wali-Teesri manzil 1966

Artists: Shammi Kapoor, Asha Parekh, Helen

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