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Jun 7, 2011

तुम अगर साथ देने का वादा करो-हमराज़ १९६७

फिल हमराज़ का एक खूबसूरत गीत हम सुन चुके हैं। आइये दूसरा
ज़बरदस्त हिट गीत सुनें इसी फिल्म से। पता नहीं किस जगह की
(शायद काश्मीर या चंबा) सुन्दर वादियों में गीत फिल्माया गया है।
one film wonder-विम्मी के साथ सुनील दत्त नायक हैं इस गीत में।
विम्मी के हिस्से का मुस्कुराने का काम भी सुनील दत्त कर रहे हैं इस
गीत में। गीत साहिर का लिखा हुआ है और धुन बनाई है संगीतकार
रवि ने। गीत दमदार है और एक्टिंग की इस गीत में ज्यादा ज़रुरत नहीं
समझी निर्देशक ने अतः कैमरा इधर उधर घुमा कर इतिश्री कर ली गई
है।



गीत के बोल:

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ
तुम मुझे देख कर मुस्कुराती रहो
में तुम्हे देख कर गीत गाता रहूँ

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कितने जलवे फिजाओं में बिखरे मगर
मैंने अब तक किसी को पुकारा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें यह कहने लगीं
हमको चेहरे से हटना गवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
में हर एक शय से नज़रें चुराता रहूँ

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ

मैंने ख्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संगमरमर की तस्वीर हो

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

तुम न समझो तुम्हारा मुक़दर हूँ में
में समझता हूँ तुम मेरी तकदीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
में बहारों की महफ़िल सजाता रहूँ

तुम अगर साथ देने का वादा करो
में यूँ ही मस्त नगमे लुटाता रहूँ

हा आ आ आ आ आ आ आ आ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ
................................
Tum agar saath dene ka wada karo-Hamraaz 1967

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Apr 12, 2011

किसी पत्थर की मूरत से-हमराज़ १९६७

बॉलीवुड ने 'बेबी डॉल' से लगाकर 'उड़द दाल' तक सब कुछ देख लिया है
और शायद दर्शकों ने भी। बस लिफाफे समय के साथ बदलते जाते हैं
ख़त का मजमून वही रहता है जिसका अंदेशा अक्सर होता है।

कुछ अभिनेत्रियों को दर्शक देख कर असमंजस में पढ़ जाते हैं कि उनके
खूबसूरत चेहरे से नज़र हटे तो अभिनय हो रहा है या नहीं इसके बारे में
सोचें। इस पशोपेश में पड़े दर्शक की जब तक कुछ समझ में आये पिक्चर
का "the end" परदे पर प्रकट हो जाता है। जिनके जल्दी समझ आ जाता
है वे मानने लगते हैं कि ऐसी अभिनेत्रियाँ तो साबुन-तेल के विज्ञापनों के
लिए ही सबसे उपयुक्त हैं ।

अब साहब प्रस्तुत गीत एक साहित्यकार-कम-गीतकार की कलम से निकला
है तो हमें भी थोड़ी भाषाई माथापच्ची अवश्य करनी होगी वरन मज़ा नहीं
आएगा।

इस गीत में अभिनय जैसी कोई चीज़ ढूँढने की ज्यादा कोशिश ना ही करें तो
बेहतर होगा। गाने वाला ऐसे हाव भाव दर्शा रहा है जैसे उसे जबरन गाना पढ़
रहा हो , बीच बीच में वो मुस्कुरा के कन्फ्यूज़ कराता है जैसे उसे आनंद आ रहा
हो , और सुनने वाला ऐसे सुन रहा है जैसे बोटनी की क्लास में केमिस्ट्री का
प्रवचन चालू हो गया हो।

अब गीत का विवरण भी हो जाये-गीत गाया है महेंद्र कपूर ने और इसे फिल्माया
गया है अभिनेता सुनील दत्त और नायिका विम्मी पर। गीत साहिर लुधियानवी का
है जिसकी उतनी ही खूबसूरत तर्ज़ के जिम्मेदार हैं संगीतकार रवि।

ये महेंद्र कपूर के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है। फिल्म हमराज़ के सभी गीत
लोकप्रिय हैं और सुपर-डुपर हिट की श्रेणी में आते हैं। इस सुपर डुपर के बीच
मैं क्यों लपर-लपर कर रहा हूँ भाई



गीत के बोल:

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से

जो दिल की धडकनें समझे ना आँखों की जुबां समझे
जो दिल की धडकनें समझे ना आँखों की जुबां समझे
नज़र की गुफ्तगूँ समझे ना ज़ज्बों का बयां समझे
नज़र की गुफ्तगूँ समझे ना ज़ज्बों का बयां समझे
उसी के सामने उसकी शिकायत का इरादा है
उसी के सामने उसकी शिकायत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से

सुना है हर जवान पत्थर के दिल में आग होती है
सुना है हर जवान पत्थर के दिल में आग होती है
मगर जब तक ना छेड़ो शर्मगी परदे में सोती है
ये सोचा है दिल की बात उसके रूबरू कह दें
नतीजा कुछ भी निकले आज अपनी आरज़ू कह दें
हर एक बेजान तकल्लुफ से बगावत का इरादा है
हर एक बेजान तकल्लुफ से बगावत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से

मोहब्बत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें
मोहब्बत बेरुखी से और भड़केगी वो क्या जानें
तबियत इस अदा पे और फडकेगी वो क्या जानें
तबियत इस अदा पे और फडकेगी वो क्या जानें
वो क्या जाने की अपना किस क़यामत का इरादा है
वो क्या जाने की अपना किस क़यामत का इरादा है

किसी पत्थर की मूरत से मोहब्बत का इरादा है
परस्तिश की तमन्ना है इबादत का इरादा है
किसी पत्थर की मूरत से
......................................
Kisi patthar ki moorat se-Hamraaz 1967

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Jan 3, 2011

ये दिल नहीं है-आबरू १९६८

फिल्म आबरू के ३ गीत आपको सुनवा चुके हैं। अब सुनते हैं एक
गीत जो शायद ही आपको कभी सुनाई दिया हो। इस गीत के बोल
अच्छे हैं इसलिए इसको एक बार ज़रूर सुन लिया जाए। जी एस रावल
के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है सोनिक ओमी ने। गायक हैं रफ़ी। कोई
दीपक कुमार साहब पर इसे फिल्माया गया है। गीत में आपको विम्मी
नाम की नायिका भी दिखाई देंगी।



गीत के बोल:


ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है

छुपाया लाख मगर इश्क़ है नहीं छुपता
छुपाया लाख मगर इश्क़ है नहीं छुपता
ये अश्क़ आँख में आया हुआ नहीं रुकता
कि आग लगती है
कि आग लगती है जब आँसुओं को पीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है

कभी क़रार न आएगा हमको जीने से
कभी क़रार न आएगा हमको जीने से
इलाज ज़हर का होता है ज़हर पीने से
कि सर पे मौत का
कि सर पे मौत का साया है फिर भी जीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है
...................................
जो अंतरा विडियो से गयाबं है वो इस प्रकार है:

तड़प-तड़प के निकालेंगे दिल के अरमाँ हम
तड़प-तड़प के निकालेंगे दिल के अरमाँ हम
करेंगे रंज से पैदा ख़ुशी के समाँ हम
कि ग़मों की नोक से
कि ग़मों की नोक से दिल के ज़ख़्म सीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं
ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं

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Ye dil nahin hai-Aabroo 1968

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May 1, 2010

हर चेहरा यहाँ चाँद-आबरू १९६८

फिल्म आबरू के २ गीत हम पहले सुन चुके हैं। आइये अब तीसरा गीत
सुना जाए। रफ़ी का गाया हुआ ये गीत लिखा है जी एल रावल ने । धुन
है सोनिक-ओमी की। जब आप किसी भी चेहरे को ना पहचानें तो साहब
विडियो गीत को डॉक्युमेंट्री समझ के देख लीजिये। समझ लीजिये कश्मीर
के पर्यटन वालों ने एक डॉक्युमेंट्री बनाई है। कमेंट्री की जगह रफ़ी का गीत
बज रहा है। वैसे मैं बता दूं संजय खान और धीरज कुमार के चेहरों के मिश्रण
वाले चेहरे के मालिक इन जनाब का नाम दीपक कुमार है और जो रोतला सा
सुन्दर चेहरा आपको दिखाई देगा वो नायिका विम्मी का है। जी हाँ वही फिल्म
हमराज़ वाली।



गीत के बोल:

हर चेहरा यहाँ चाँद
हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद

हंसती हैं जो कलियाँ तो हसीं फूल हैं खिलते
हंसती हैं जो कलियाँ तो हसीं फूल हैं खिलते
हैं लोग यहाँ जैसे उतर आये फ़रिश्ते
हो ओ हो ओ ओ ओ
हर दिल से निकलती है यहाँ प्यार की धारा
हर दिल से निकलती है यहाँ प्यार की धारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद

दिन रात हवा साज़ बजाती है सुहाने
दिन रात हवा साज़ बजाती है सुहाने
नदियों के लबों पर हैं मुहब्बत के तराने
हो ओ हो ओ ओ ओ
मस्ती में है डूबा हुआ बेहोश किनारा
मस्ती में है डूबा हुआ बेहोश किनारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद

ये जलवा-ए-रंगीं है किसी ख्वाब की ताबीर
ये जलवा-ए-रंगीं है किसी ख्वाब की ताबीर
या फूलों में बैठी हुई दुल्हन की है तस्वीर
हो ओ हो ओ ओ ओ
या थम गया चलता हुआ परियों का शिकारा
या थम गया चलता हुआ परियों का शिकारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा
हर चेहरा यहाँ चाँद

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Feb 28, 2010

आपसे प्यार हुआ -आबरू १९६८

फिल्म आबरू के एक गीत पर हम चर्चा कर चुके हैं। आइये आपको
एक और कर्णप्रिय गीत सुनवाया जाए उसी फिल्म से। ये गीत रफ़ी का
गाया हुआ है। अनजान से चेहरे आपको देखने को मिलेंगे इस गीत में।
नायिका ज़रूर पहचानी सी है उसने फिल्म हमराज़ (राज कुमार वाली)
में काम किया था। फिल्म का निर्देशन सी एल रावल ने किया है। उन्होंने
दिल ही तो है(१९६३) और दिल ने फिर याद किया (१९६६) जैसी फिल्मों का
निर्देशन भी किया था। जैसी कि एक संगीत प्रेमी ने कहीं लिखा है कि ये गीत
ऐसा सुनाई पढता है मानो किसी नामचीन नायक पर फिल्माया गया हो।
नामचीन में-शम्मी कपूर, जोय मुखर्जी, विश्वजीत इत्यादि। विडियो देखने
पर शायद श्रोताओं और दर्शकों को अफ़सोस होगा क्यूंकि नायक बावजूद
अपने प्रयत्नों के अदाएं और हाव भाव प्रदर्शित करने में सफल नहीं हो पा रहा है।
वही हाल नायिका का भी है। विम्मी की प्रतिभा का पर्याप्त दोहन करने में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता असफल रहे। एक आध फिल्म वे बना सकते थे
दो बहनों की कहानी पर जिसमे वे बबीता को विम्मी के साथ ले सकते थे।



गीत के बोल:

आपसे प्यार हुआ, आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ, आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे

आपसे प्यार हुआ

हो ओ ओ ओ ओ हाय
सांस लेती हो तो क्या कहर की लू चलती है
सांस लेती हो तो क्या कहर की लू चलती है
यूं ये कहती है कोई दिल की सी शै जलती है
कोई दिल की सी शै जलती है
सुर्ख शोले की तरह
सुर्ख शोले की तरह आप ये क्या हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे

आपसे प्यार हुआ

जोश पे हुस्न का तूफ़ान नज़र आता है
जोश पे हुस्न का तूफ़ान नज़र आता है
इश्क की मौत का सामन नज़र आता है
सामन नज़र आता है
और कश्ती से किनारे
और कश्ती से किनारे भी खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ

हो ओ ओ ओ ओ हाय
हर नज़र तीर सही देखिये इक बार हमें
हर नज़र तीर सही देखिये इक बार हमें
मरना तकदीर सही मौत से है प्यार हमें
अब मौत से है प्यार हमें

खेंचिये यूँ ना कमान
खेंचिये यूँ ना कमान तीर खता हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे

आपसे प्यार हुआ
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 Aapse pyar hua(Rafi)-Aabroo 1968

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