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Jul 29, 2017

ये दिल है मुहब्बत का-दिल ने फिर याद किया १९६६

मदन मोहन के संगीत वाला गीत सुनने के बाद सुनते है
सोनिक ओमी के संगीत वाला एक गीत. सोनिक ओमी ने
काफी समय मदन मोहन के सहायक के रूप में काम किया
था.

जी एल रावल के लिखे गीत को गाया है मुकेश ने. फिल्म
के नायक धर्मेन्द्र इसे परदे पर गा रहे हैं.



गीत के बोल:

ये दिल है मुहब्बत का प्यासा
इस दिल का तड़पना क्या कहिये
ये दिल है मुहब्बत का प्यासा
इस दिल का तड़पना क्या कहिये
मायूस हैं हम मग़रूर हो तुम
और तुमपे ही मिटना क्या कहिये
ये दिल है मुहब्बत का प्यासा
इस दिल का तड़पना क्या कहिये
ये दिल है

ये शौक हमें के उठा ले उन्हें
वो शर्मो हया के मारे हैं
ये शौक
ये शौक हमें के उठा ले उन्हें
वो शर्मो हया के मारे हैं
वो शर्मो हया के मारे हैं
ये हद से गुज़र जाना अपना
और उनका सिमटना क्या कहिये
ये दिल है मुहब्बत का प्यासा
इस दिल का तड़पना क्या कहिये
ये दिल है

किस सोच में हो कुछ होश नहीं
ये घबराहट भी कैसी है
किस सोच में हो कुछ होश नहीं
ये घबराहट भी कैसी है
ये घबराहट भी कैसी है
बल खा के हमीं से हट जाना
फिर हमसे लिपटना क्या कहिये

ये दिल है मुहब्बत का प्यासा
इस दिल का तड़पना क्या कहिये
ये दिल है

आ जाओ हमारी बाहों में
हाय ये है कैसी मजबूरी
आ जाओ
आ जाओ हमारी बाहों में
हाय ये है कैसी मजबूरी
हाय ये है कैसी मजबूरी
हम आपके हैं कोई गैर नहीं
अपनों से उलझना क्या कहिये

ये दिल है मुहब्बत का प्यासा
इस दिल का तड़पना क्या कहिये
मायूस हैं हम मग़रूर हो तुम
और तुमपे ही मिटना क्या कहिये
ये दिल है
…………………………………………………….
Ye dil hai mohabbat ka-Dil ne phir yaad kiya 1966

Artists: Dharmendra, Nutan

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Aug 28, 2016

आपसे प्यार हुआ आप खफा-आबरू १९६८

सन १९६८ की फिल्म आबरू से एक गीत सुनते हैं आशा भोंसले का
गाया हुआ. ये गीत फिल्म में दो वर्ज़न में उपलब्ध है, दूसरा रफ़ी
की आवाज़ में है.

फिल्म के प्रमुख कलाकार है दीपक कुमार, विम्मी, अशोक कुमार,
शशिकला, रहमान और जीवन.

अजीब उलझी हुई फिलिम है फिल्म आबरू की.  कुछ फिल्मों का
कथानक ऐसा मालूम होता है मानो ४-५ उपन्यास खा के किसी ने
जुगाली कर के मसाला बनाया हो उसका. मिक्सर में घोटना त्वरित
प्रक्रिया है जबकि जुगाली एक धीमा कार्य.

फिल्म के गीत लोकप्रिय हैं विशेषकर मुकेश का गाया हुआ गीत-जिन्हें
हम भूलना चाहें. प्रस्तुत गीत के रचयिता हैं जी एस रावल और इसका
संगीत तैयार किया है सोनिक ओमी ने.



गीत के बोल:

आप से प्यार हुआ आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे
और जुदा हाय जुदा हो बैठे
आप से प्यार हुआ आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे
और जुदा हाय जुदा हो बैठे
आप से प्यार हुआ

हो ओ ओ हाय
प्यार से दिल के नशेमन को सजाया हमने
प्यार से दिल के नशेमन को सजाया हमने
और फिर जिनको था इस घर में बसाया हमने
इस घर में बसाया हमने
हाय किस्मत के वही
हाय किस्मत के वही सर के बला हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे
और जुदा हाय जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ

यूँ न चुप रहिये के होंठों को शिकायत होगी
यूँ न चुप रहिये के होंठों को शिकायत होगी
खुल के हंस दीजिए के हमपे इनायत होगी
ऐजी हम पे इनायत होगी
ऐसी ख़ामोशी भी क्या
ऐसी ख़ामोशी भी क्या कोई फ़ना हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे
और जुदा हाय जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ

हो ओ ओ ओ ओ ओ हाय
आप हँसते तो हम जाने गम कहाँ होता है
आप हँसते तो हम जाने गम कहाँ होता है
आप रूठे तो हमें
आप रूठे तो हमें ऐसा गुमान होता है
जैसे बन्दों से अलग
जैसे बन्दों से अलग उनका खुदा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे
और जुदा हाय जुदा हो बैठे
आप से प्यार हुआ आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे
और जुदा हाय जुदा हो बैठे
आप से प्यार हुआ
………………………………………………………..
Aap se pyaar hua(Asha)-Aabroo 1968

Artist: Vimmi

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Aug 11, 2016

आ जा रे प्यार पुकारे-दिल ने फिर याद किया १९६६

सन १९६६ की फिल्म दिल ने फिर याद किया एक म्यूजिकल
ब्लाकबस्टर फिल्म है. संगीतकार जोड़ी सोनिक ओमी की पहली
फिल्म और उनके संगीत कैरियर का मील का पत्थर फिल्म.
फिल्म के सभी गीत जनता द्वारा पसंद किये गए. सभी रंगों
के गीत हैं इस फिल्म में.

नूतन हिंदी सिनेमा इतिहास की ऐसी अभिनेत्रियों में से एक हैं
जिनका अभिनय जनता के आंसू टपकवाने की ज़बरदस्त क्षमता
से भरपूर था. इस गीत पर ही कितने लोगों ने आंसू बहाए होंगे
इसकी गिनती नहीं है. सिनेमा हॉल में इस गीत को देखना
एक अलग प्रभाव पैदा करता था. यूट्यूब पर तो इसे हम छोटी
स्क्रीन पर देखते हैं. अब सिनेमा हॉल वाले भी पुरानी फ़िल्में
नहीं दिखाया करते.

‘आ जा रे’ बोलों से शुर होने वाला लता का गाया ये एक और
लोकप्रिय गीत है फिल्म मधुमति के गीत-‘आ जा रे’ के बाद.

गीत लिखा है जी एल रावल ने जिन्होंने सोनिक ओमी के साथ
कई और फिल्मों के लिए भी काम किया.



आ जा रे प्यार पुकारे
नैना तो रो रो हारे
कोई ना जाने दर्द मेरा
हो ओ ओ कोई ना जाने दर्द मेरा
आ जा रे प्यार पुकारे
नैना तो रो रो हारे
कोई ना जाने दर्द मेरा
हो ओ ओ कोई ना जाने दर्द मेरा
आ जा रे

लूटा दे के सहारा तेरे प्यार ने
हो ओ ओ बैरी हम को तो मारा तेरे प्यार ने
लूटा दे के सहारा तेरे प्यार ने
हो ओ ओ बैरी हम को तो मारा तेरे प्यार ने
तेरी याद तो हम को रुलाये रे
कहा भी ना जाये रे

आ जा रे प्यार पुकारे
नैना तो रो रो हारे
कोई ना जाने दर्द मेरा
हो ओ ओ कोई ना जाने दर्द मेरा
आ जा रे

चंदा बिछड़ न जाये तेरी चाँदनी
आ जा तुझको बुलाये तेरी चाँदनी
चंदा बिछड़ न जाये तेरी चाँदनी
आ जा तुझको बुलाये तेरी चाँदनी
अब आव़ाज दो दिल घबराये रे
चैन ना पाये रे

आ जा रे प्यार पुकारे
नैना तो रो रो हारे
कोई ना जाने दर्द मेरा
हो ओ ओ ओ कोई ना जाने दर्द मेरा
आ जा रे
आ जा रे
आ जा रे
....................................................................
Aa ja re pyar pukare-Dil ne phir kiya 1966

Artists: Nutan, Dharmendra

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Mar 27, 2013

आई आई रे होली-आबरू १९६८

एक होली गीत सुनते हैं जी एल रावल के बोलों वाला. हमने सभी
नामचीन शायरों और गीतकारों के होली गीत सुन रखे हैं. ये कम
सुना हुआ मगर अच्छा गीत है.

और गीतों की तरह इसमें भी एक आवश्यक तत्व मोहन-राधा का
जिक्र है और उपमाओं और अलंकारों काभी इसमें सुन्दर प्रयोग है.

फिल्म आबरू से इसे लिया गया है. सन १९६८ की फिल्म आबरू में
सोनिक ओमी का संगीत है. आवाजें आशा भोंसले और मन्ना डे की
है.



गीत के बोल:

आई आई रे होली ओ रंग लाई रे होली
ओ नाचो नाचो
बहारें संग लायी रे होली

होंठ गुलाबी, नैन शराबी
मस्त जवानी छायी है
मुखड़े से जो बच गयी लाली
वो फूलों पे आई है

आज मेरे घर साजन आये
देख जिसे चंदा शरमाये
कहीं लगे न चाँद की नजरिया
बड़ी दुश्मन है जुल्मी नजरिया
हाय मैं तो रख लूँगा सारी उमरिया
प्यार में ऐसा शाम ना करना
राधा को बदनाम ना करना
मेरी कोरी है लाज की चुनरिया
हाय रंग डालो ना मुझपे सांवरिया
मैं तो आई हूँ रंग में तेरे हो के बावरिया
आज मेरे घर सजन आये
देख जिसे चंदा शरमाये

युग युग से है साथ हमारा
तु है नदिया मैं हूँ किनारा
भारत की चले रंग की धारा
तुझ बिन सूनी मेरी बांसुरिया
प्यार में ऐसे शाम ना करना

मर मर जाऊं लाज की मारी
ताने देंगी सखियाँ सारी
है गुलाल रंग झूमें नर नारी
क्यूँ रंग डारी मेरी चुनरिया
आज मेरे घर साजन आये
देख जिसे चंदा शरमाये

तु है राधा मेरी, मैं तेरा मोहन
टूटे ना ये प्यार का बंधन
होली आई है गले लगा लो सजना
आज मुझको तुम अपना बना लो सजना
……………………………………………………….
Aayi aayi re holi-Aabroo 1968

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Jan 3, 2011

ये दिल नहीं है-आबरू १९६८

फिल्म आबरू के ३ गीत आपको सुनवा चुके हैं। अब सुनते हैं एक
गीत जो शायद ही आपको कभी सुनाई दिया हो। इस गीत के बोल
अच्छे हैं इसलिए इसको एक बार ज़रूर सुन लिया जाए। जी एस रावल
के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है सोनिक ओमी ने। गायक हैं रफ़ी। कोई
दीपक कुमार साहब पर इसे फिल्माया गया है। गीत में आपको विम्मी
नाम की नायिका भी दिखाई देंगी।



गीत के बोल:


ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है

छुपाया लाख मगर इश्क़ है नहीं छुपता
छुपाया लाख मगर इश्क़ है नहीं छुपता
ये अश्क़ आँख में आया हुआ नहीं रुकता
कि आग लगती है
कि आग लगती है जब आँसुओं को पीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है

कभी क़रार न आएगा हमको जीने से
कभी क़रार न आएगा हमको जीने से
इलाज ज़हर का होता है ज़हर पीने से
कि सर पे मौत का
कि सर पे मौत का साया है फिर भी जीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं है
...................................
जो अंतरा विडियो से गयाबं है वो इस प्रकार है:

तड़प-तड़प के निकालेंगे दिल के अरमाँ हम
तड़प-तड़प के निकालेंगे दिल के अरमाँ हम
करेंगे रंज से पैदा ख़ुशी के समाँ हम
कि ग़मों की नोक से
कि ग़मों की नोक से दिल के ज़ख़्म सीते हैं
लहू का जाम है जो सुबह-ओ-शाम पीते हैं

ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं
ये दिल नहीं कि जिसके सहारे जीते हैं

.........................................................................
Ye dil nahin hai-Aabroo 1968

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May 1, 2010

हर चेहरा यहाँ चाँद-आबरू १९६८

फिल्म आबरू के २ गीत हम पहले सुन चुके हैं। आइये अब तीसरा गीत
सुना जाए। रफ़ी का गाया हुआ ये गीत लिखा है जी एल रावल ने । धुन
है सोनिक-ओमी की। जब आप किसी भी चेहरे को ना पहचानें तो साहब
विडियो गीत को डॉक्युमेंट्री समझ के देख लीजिये। समझ लीजिये कश्मीर
के पर्यटन वालों ने एक डॉक्युमेंट्री बनाई है। कमेंट्री की जगह रफ़ी का गीत
बज रहा है। वैसे मैं बता दूं संजय खान और धीरज कुमार के चेहरों के मिश्रण
वाले चेहरे के मालिक इन जनाब का नाम दीपक कुमार है और जो रोतला सा
सुन्दर चेहरा आपको दिखाई देगा वो नायिका विम्मी का है। जी हाँ वही फिल्म
हमराज़ वाली।



गीत के बोल:

हर चेहरा यहाँ चाँद
हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद

हंसती हैं जो कलियाँ तो हसीं फूल हैं खिलते
हंसती हैं जो कलियाँ तो हसीं फूल हैं खिलते
हैं लोग यहाँ जैसे उतर आये फ़रिश्ते
हो ओ हो ओ ओ ओ
हर दिल से निकलती है यहाँ प्यार की धारा
हर दिल से निकलती है यहाँ प्यार की धारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद

दिन रात हवा साज़ बजाती है सुहाने
दिन रात हवा साज़ बजाती है सुहाने
नदियों के लबों पर हैं मुहब्बत के तराने
हो ओ हो ओ ओ ओ
मस्ती में है डूबा हुआ बेहोश किनारा
मस्ती में है डूबा हुआ बेहोश किनारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद

ये जलवा-ए-रंगीं है किसी ख्वाब की ताबीर
ये जलवा-ए-रंगीं है किसी ख्वाब की ताबीर
या फूलों में बैठी हुई दुल्हन की है तस्वीर
हो ओ हो ओ ओ ओ
या थम गया चलता हुआ परियों का शिकारा
या थम गया चलता हुआ परियों का शिकारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा

हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
हर चेहरा यहाँ चाँद तो हर ज़र्रा सितारा
ये वादी-ए-कश्मीर है जन्नत का नज़ारा
जन्नत का नज़ारा
हर चेहरा यहाँ चाँद

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Feb 28, 2010

आपसे प्यार हुआ -आबरू १९६८

फिल्म आबरू के एक गीत पर हम चर्चा कर चुके हैं। आइये आपको
एक और कर्णप्रिय गीत सुनवाया जाए उसी फिल्म से। ये गीत रफ़ी का
गाया हुआ है। अनजान से चेहरे आपको देखने को मिलेंगे इस गीत में।
नायिका ज़रूर पहचानी सी है उसने फिल्म हमराज़ (राज कुमार वाली)
में काम किया था। फिल्म का निर्देशन सी एल रावल ने किया है। उन्होंने
दिल ही तो है(१९६३) और दिल ने फिर याद किया (१९६६) जैसी फिल्मों का
निर्देशन भी किया था। जैसी कि एक संगीत प्रेमी ने कहीं लिखा है कि ये गीत
ऐसा सुनाई पढता है मानो किसी नामचीन नायक पर फिल्माया गया हो।
नामचीन में-शम्मी कपूर, जोय मुखर्जी, विश्वजीत इत्यादि। विडियो देखने
पर शायद श्रोताओं और दर्शकों को अफ़सोस होगा क्यूंकि नायक बावजूद
अपने प्रयत्नों के अदाएं और हाव भाव प्रदर्शित करने में सफल नहीं हो पा रहा है।
वही हाल नायिका का भी है। विम्मी की प्रतिभा का पर्याप्त दोहन करने में
बॉलीवुड के निर्देशक निर्माता असफल रहे। एक आध फिल्म वे बना सकते थे
दो बहनों की कहानी पर जिसमे वे बबीता को विम्मी के साथ ले सकते थे।



गीत के बोल:

आपसे प्यार हुआ, आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ, आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे

आपसे प्यार हुआ

हो ओ ओ ओ ओ हाय
सांस लेती हो तो क्या कहर की लू चलती है
सांस लेती हो तो क्या कहर की लू चलती है
यूं ये कहती है कोई दिल की सी शै जलती है
कोई दिल की सी शै जलती है
सुर्ख शोले की तरह
सुर्ख शोले की तरह आप ये क्या हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे

आपसे प्यार हुआ

जोश पे हुस्न का तूफ़ान नज़र आता है
जोश पे हुस्न का तूफ़ान नज़र आता है
इश्क की मौत का सामन नज़र आता है
सामन नज़र आता है
और कश्ती से किनारे
और कश्ती से किनारे भी खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ

हो ओ ओ ओ ओ हाय
हर नज़र तीर सही देखिये इक बार हमें
हर नज़र तीर सही देखिये इक बार हमें
मरना तकदीर सही मौत से है प्यार हमें
अब मौत से है प्यार हमें

खेंचिये यूँ ना कमान
खेंचिये यूँ ना कमान तीर खता हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय जुदा हो बैठे
आपसे प्यार हुआ आप खफा हो बैठे
मिल के बैठे भी ना थे और जुदा
हाय, जुदा हो बैठे

आपसे प्यार हुआ
.........................................................................
 Aapse pyar hua(Rafi)-Aabroo 1968

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Feb 26, 2010

मेरी आँखों के उजाले-आबरू १९६८

गायक रफ़ी का गाया एक बहुत कम सुना गया गीत सुनिए।
सन १९६८ की फिल्म आबरू से ये गीत लिया गया है। मदन मोहन
के संगीत अंदाज़ से प्रेरित सा ये गीत सुनने लायक है जिसे लिखा
जी एल रावल ने और संगीतबद्ध किया है सोनिक ओमी ने।

सोनिक ओमी मदन मोहन के सहायक रहे हैं और उनके संगीत में
कहीं कहीं मदन मोहन प्रभाव सुनाई पढता है या यूँ कहिये कि
मदन मोहन की कुछ रचनाओं में भी सोनिक ओमी की छाप सुनाई
देती है। सहायकों को श्रेय नहीं मिला करता है। जब गीतकार और
संगीतकार को लोग नहीं पूछते तो साजिंदों और सहायकों की बात
करना तो कुछ विलक्षण सा प्रलाप कहा जायेगा। गायकों के आम
उचक-कूदे किस्म के भक्त सारा श्रेय गायकों को देने को आतुर रहते
हैं। नेट की दुनिया में बहुतेरे उचक-कूदे आपको मिल जायेंगे।




गीत के बोल:

मेरी आँखों के उजाले मेरी राहत मेरे भाई
मेरे भाई
मेरी आँखों के उजाले मेरी राहत मेरे भाई
मेरे भाई
मेरी उम्मीद के तारे मेरी किस्मत मेरे भाई
मेरे भाई

तड़प रही है मोहब्बत मेरी तुम्हारे लिए
के बेपनाह थी उल्फत मेरी तुम्हारे लिए
सुनेगा कौन मेरा गम किसे सुनाएगा
बिना तुम्हारे लहू किसका जोश खायेगा
किसी का दर्द जो ले वो जिगर नहीं मिलता
के हर शै मिलती है भाई मगर नहीं मिलता
भाई मगर नहीं मिलता
मेरी बाहों के सहारे मेरी हिम्मत मेरे भाई
मेरे भाई

तुम्हें कलेजे लगाने ये बाहें तरसेंगी
चलेगी ठंडी हवाएं तो आहें बरसेंगी
चमन उदास रहेगा बहार रोयेगी
तुम्हें ना पा के खुशी बेकरार रोएगी
किसी का भाई जुदा ना हो कभी खुदा ना करे
नसीब इतना बुरा हो कभी खुदा ना करे
कभी खुदा ना करे
मेरी जान से मुझसे प्यारे मेरी चाहत मेरे भाई
मेरे भाई
मेरी आँखों के उजाले मेरी राहत मेरे भाई
मेरे भाई
…………………………………………………..
Meri ankhone ke ujale-Abroo 1968

Artists: Ashok Kumar, Shahikala

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Sep 12, 2009

जिन्हें हम भूलना चाहें-आबरू १९६८

ये शायद संगीतकार जोड़ी सोनिक ओमी की दूसरी हिंदी फिल्म
थी, मुझे अभी तक उपलब्ध जानकारी अनुसार। मुकेश का गाया
ये गीत बेहद चर्चित रहा। उस ज़माने में इन्दीवर के लिखे और
कल्याणजी आनंदजी के संगीत वाले मुकेश के गाये गीत कई गीत
सुनाई देते थे। पहले पहल मुझे यही लगा की इसकी धुन भी
कल्याणजी आनंदजी ने बनायीं है। एक दिन रेडियो की घोषणा ध्यान
से सुनने पर पाया कि ना तो इसके गीतकार इन्दीवर हैं और ना ही
इसके संगीतकार गुजरती बन्धु। गीतकार हैं जी एल रावल और
संगीतकार हैं पंजाबी मूल के सोनिक-ओमी। ये जो जी एल रावल
साहब हैं वो सी एल रावल के भाई हैं। सी एल रावल ने कई फिल्मों
का निर्देशन किया और उनकी फिल्मों में अक्सर संगीत सोनिक ओमी
का ही हुआ करता। रावल की १९६३ की दिल ही तो है(१९६३) में रोशन का
संगीत था।



गीत के बोल:

जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं
जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं
बुरा हो इस मोहब्बत का
बुरा हो इस मोहब्बत का
वो क्यूँ कर यद् आते हैं

जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं

बुलायें किस तरह उनको कभी पी थी उन आँखों से
बुलायें किस तरह उनको कभी पी थी उन आँखों से
कभी पी थी उन आँखों से
छलक जाते हैं जब आंसू
छलक जाते हैं जब आंसू
वो सागर याद आते हैं

जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं

किसी के सुर्ख लब थे या दिए कि लौ मचलती थी
किसी के सुर्ख लब थे या दिए कि लौ मचलती थी
दिए की लौ मचलती थी
जहाँ की थी कभी पूजा
जहाँ की थी कभी पूजा
वो मंज़र याद आते हैं
जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं

रहे ए शम्मा तू रोशन दुआ देता है परवाना
रहे ए शम्मा तू रोशन दुआ देता है परवाना
जिन्हें किस्मत में जलना है
जिन्हें किस्मत में जलना है
वो जल कर याद आते हैं

जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं
बुरा हो इस मोहब्बत का
बुरा हो इस मोहब्बत का
वो क्यूँ कर याद आते हैं

जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर याद आते हैं
जिन्हें हम भूलना चाहें

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