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Nov 1, 2016

किसी दिन ज़रा देख-अमरदीप १९५८

आशा भोंसले का जन्मदिन है ८ सितम्बर को. हमने आपको उस
दिन एक भी आशा का गीत नहीं सुनवाया. उस दिन हर चैनल
चाहे वो टी वी का हो या रेडियो का सब पर आशा भोंसले के
गाये गीतों पर आधारित कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहा था. अगले
दिन एक खूबसूरत गीत सुनवाया था आपको फिल्म सन १९५४
की फिल्म अधिकार से.

आशा भोंसले के लम्बे कैरियर में उन्हें पहला फिल्मफेयर पुरस्कार
मिला सन १९७४ की फिल्म प्राण जाए पर वचन ना जाए के गीत
के लिए. फिल्म में ओ पी नैयर का संगीत है. नैयर की वजह से
ही आशा भोंसले मुख्य धारा में आ कर नायिकाओं के गीत गाने
को मिलना शुरू हुए. संगीतकार रवि ने भी उनसे प्रमुख गीत
गवाए. उसके अलावा नियंमित रूप से प्रमुख गीत उन्हें गाने के
लिए देने वाले संगीतकार कम रहे. फागुन और नया दौर के गीत
अविस्मरणीय हैं.

आज सुनते हैं फिल्म अमरदीप से देव आनंद और पद्मिनी पर
फिल्माया गया एक मधुर गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ जिसे
संगीत से संवारा है सी रामचंद्र ने.


गीत के बोल:

आराम से दिल दूर है और दर्द से मजबूर
क्यूँ फिर भी नहीं मेरी मोहब्बत तुझे मंज़ूर
किसी दिन ज़रा देख मेरा भी हो के
किसी दिन ज़रा देख मेरा भी हो के
कहाँ तक दिए जायेगा दिल को धोखे
कहाँ तक दिए जायेगा दिल को धोखे
किसी दिन ज़रा देख मेरा भी हो के
किसी दिन ज़रा

वो आराम जिसकी ज़रूरत है तुझको
ज़रूरत है तुझको
वो आराम जिसकी ज़रूरत है तुझको
ज़रूरत है तुझको
मिलेगा तुझे
हो मिलेगा तुझे मेरी बाहों में खो के

किसी दिन ज़रा देख मेरा भी हो के
किसी दिन ज़रा

तेरा दिल ही खुद तेरा दुश्मन है वरना
तेरा दिल ही खुद तेरा दुश्मन है वरना
तुझे मुस्कुराने से क्यूँ कोई रोके
कहाँ तक दिये जायेगा दिल को धोखे

किसी दिन ज़रा देख मेरा भी हो के
किसी दिन ज़रा

मेरी इल्तिजा है समा भी जा इनमें
हो समा भी जा इनमें
मेरी इल्तिजा है समा भी जा इनमें
खुले हैं इन आखों में कब से झरोखे

किसी दिन ज़रा देख मेरा भी हो के
किसी दिन ज़रा
...........................................................................
Kisi din zara-Amardeep 1958

Artists: Dev Anand, Padmini

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Jun 21, 2011

दिल की दुनिया बसा के सांवरिया-अमरदीप १९५८

फिल्म अमरदीप से तीसरा गीत पेश है लता मंगेशकर की
आवाज़ में। बोल लिखे हैं रेजेंद्र कृष्ण ने और संगीतकार
हैं सी रामचंद्र। गीत फिल्माया गया है वैजयंतीमाला पर।
गीत विडियो मिक्सिंग के प्रभाव के कारण मुझे बारम्बार
याद आ जाता है। थोड़ा दुखी करने वाला गीत है लेकिन सुनने
में अच्छा लगता है इसलिए इसे सुन लेते हैं कभी कभी।

अब हर गीत में लोजिक, मैजिक और झिक झिक ज़रूरी नहीं
हैं ना जी ? फिर भी आपको सी रामचंद्र और दूसरे संगीतकारों
में फर्क बताये देते हैं-सी रामचंद्र ने गायकों को ज्यादा मौका
दिया बजाये वाद्य यंत्रों के। साजों की बाजीगरी उन्होंने लगभग
हमेशा ही नियंत्रण में रखी। सन ५८ के दूसरे संगीतकारों के बनाये
और लता के गाये गीत सुन लीजिये। फर्क आप खुद ब खुद
समझ जायेंगे। गीत में लता की आवाज़ के अलावा आप बांसुरी की
आवाज़ को ज्यादा स्पष्ट सुन पाएंगे। इसके अलावा रामचंद्र का
पसंदीदा साज़ मैन्डोलिन की झलक भी कहीं कहीं सुनाई देगी।
वायलिन के अनावश्यक शोर में शायद सी रामचंद्र का ज्यादा
विश्वास नहीं रहा ।



गीत के बोल:

दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये
साथ रहना था सारी उमरिया
दूर नज़रों से दूर क्यूँ हो गये, हो गये

जाने वाले, जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
जाने वाले पता तेरा मैंने
आती जाती बहारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा
चुप रहे जब ज़मीन के नज़ारे
आसमान के सितारों से पूछा

सुन के बादल भी मेरी कहानी
सुन के बादल भी मेरी कहानी
बेबसी पर मेरी रो गये, रो गये

दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये

हंस रहा है
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये
हंस रहा है ये ज़ालिम ज़माना
अपनी खुशियों की महफ़िल सजाये

मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
मैं अकेली मगर रो रही हूँ
तेरी यादों को दिल से लगाये
बहते बहते ये आंसू भी हारे
बहते बहते ये आंसू भी हारे
आ के पलकों पे हैं सो गये, सो गये

दिल की दुनिया बसा के सांवरिया
तुम ना जाने कहाँ खो गये, खो गये

......................................
Dil ki duniya basa ke sanwariya-Amardeep 1958

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Mar 6, 2010

मेरे मन का बावरा पंछी-अमर दीप १९५८

टी प्रकाश राव एक लम्बी पारी खेलने वाले निर्देशक है बॉलीवुड के।
उन्होंने ८० के दशक तक हिंदी, तमिल और तेलुगु में सफल फ़िल्में
बनायीं।

एक फिल्म है सन १९५८ की -सितमगर जिसमे निसार बज्मी का
संगीत है उसके निर्देशक प्रकाश राव थे। उसमे जैमिनी गणेशन और
पद्मिनी की प्रमुख भूमिकाएं हैं। प्रकाश राव ने अपने फ़िल्मी करियर में
कई संगीतकारों की सेवाएँ ली जिनमें सी. रामचंद्र, शंकर जयकिशन
और चित्रगुप्त के नाम प्रमुख हैं।

१९५८ में ही एक हिंदी फिल्म आई अमर दीप जिसमे देव आनंद और
वैजयान्तिमाला नायक नायिका हैं। पद्मिनी दूसरी नायिका हैं इस
फिल्म की जिनपर इस फिल्म का सबसे कर्णप्रिय गीत फिल्माया गया
है। गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में है और इसके संगीतकार
सी. रामचंद्र हैं जिनका जादुई असर सन १९५८ में भी बरकरार है।
राजेंद्र कृष्ण के सरल बोलों को एक आकर्षक धुन पर तैराता ये गीत
गुनगुनाने में आसान है। गीत में नायिका के गीत से नायक कुछ
याद करने की कोशिश कर रहा है।



गीत के बोल:

आ आ आ, आ आ आ, आ आ, आ आ आ

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
अंखियों में आज किसका
राह राह के प्यार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

किस के ख्याल में ये
नज़रें झुकी झुकी हैं
किस के ख्याल में ये
नज़रें झुकी झुकी हैं
देखो इधर भी लब पर
आहें रुकी रुकी हैं
देखो इधर भी लब पर
आहें रुकी रुकी हैं
तुम हो करार जिस दिल का
तुम हो करार जिस दिल का
वही बेक़रार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

दिल को लगन है उसकी
मीठी नज़र है जिसकी
दिल को लगन है उसकी
मीठी नज़र है जिसकी
हम पास हैं तुम्हारे
फिर दिल में याद है किस की
हम पास हैं तुम्हारे
फिर दिल में याद है किस की
तुम जो नज़र मिलाओ
तुम जो नज़र मिलाओ
दिल में बहार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

कब से खड़े हुए हैं
कह दो तो लौट जाएँ
कब से खड़े हुए हैं
कह दो तो लौट जाएँ
तुम्हे दूर ही से देखें
हर दिन ना पास आये
तुम्हे दूर ही से देखें
हर दिन ना पास आये
आँखों में ज़िन्दगी भर तक
आँखों में ज़िन्दगी भर तक
तेरा इंतज़ार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

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Apr 24, 2009

देख हमें आवाज़ न देना-अमर दीप १९५८

१९५८ के फ़िल्म अमरदीप में लता मंगेशकर के गाये
कुछ एकल गीत हैं। युगल गीत जो है वो आशा और
रफ़ी की आवाज़ में है। ये मधुर गीत है और छाया गीत
छाप गीत है जिसका आनंद रात्रि के समय ज्यादा आता
है। देव आनंद और वैजयंतीमाला के ऊपर फिल्माया गया
ये गीत दूरदर्शन के कार्यक्रम चित्रहार में कई बार दिखलाया
गया। बोल हैं राजेंद्र कृष्ण के और संगीत है सी रामचंद्र का ।



गीत के बोल:


देख हमें आवाज़ न देना
देख हमें आवाज़ न देना
ओ बेदर्द ज़माने, ओ बेदर्द ज़माने
आज चले हम छोड़के तुझको
दुनिया नई बसाने, ओ बेदर्द ज़माने

चमका शाम का पहला तारा
चमका शाम का पहला तारा
गगन दुलारा
सबसे पहले उसने देखा प्यार हमारा
सबसे पहले उसने देखा प्यार हमारा
आने वाली रात सुनेगी
आने वाली रात सुनेगी
तेरे मेरे तराने
ओ बेदर्द ज़माने
देख हमें आवाज़ ना देना
ओ बेदर्द ज़माने, ओ बेदर्द ज़माने

दूर कहीं एक पंछी गाये
ये समझाये
दूर कहीं एक पंछी गाये
ये समझाये
प्यार में हो जातें हैं अपने दर्द पराये
प्यार में हो जातें हैं अपने दर्द पराये
दिल की धड़कन क्या होती है
दिल की धड़कन क्या होती है
प्यार करें तो जाने
ओ बेदर्द ज़माने

देख हमें आवाज़ ना देना
ओ बेदर्द ज़माने, ओ बेदर्द ज़माने
आज चले हम छोड़ के तुझको
दुनिया नई बसाने, ओ बेदर्द ज़माने
हम ...

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