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Aug 29, 2018

सपेरा बीन बजायो रे-पद्मिनी १९४८

सपेरा और बीन इत्यादि को सही पहचान दिलाई फिल्म
नागिन ने. उसके पहले तक के गीत बजे ज़रूर मगर
रेकोर्ड तोड़, छत फाड लेवल तक नहीं.

सुनते हैं सन १९४८ की पद्मिनी फिल्म से अशोक कुमार
और गीता दत्त का गाया मधुर युगल गीत.

वली साहब रचनाकार हैं और गुलाम हैदर संगीतकार.

बेहतर सुनाई देने वाला सपेरा गीत है. अगर आप बेसुरे
गानों से परेशान हो जाते हों तो इसे सुन लिया करें एक
बार टॉनिक का काम करेगा.




सपेरा बीन बजायो रे तू तो म्हारे गली में आयो रे
मैं तो चलूँगी थारे साथ
तीर तोरे नैनों का हुआ कलेजवा के पार
तीर तोरे नैनों का
लागा रे तीर तोर नैनों का
लगा मन में तीर तोरे नैनों का

ओ ओ गोरी रे गोरी रे मोरे बाँध दे हाथ दोऊ राखे से
मोरी काट दे नार गँडासे से
मैं तो छुप जाऊँ थारे साँचे से
मैं तो छुप जाऊँ थारे साँचे से
मेरा जीना है दुश्वार
तीर तोरे नैनों का हुआ कलेजवा के पार

लागा रे तीर तोर नैनों का
लगा मन में तीर तोरे नैनों का


ओ ओ ओ तन का बाजे बाँसुरी रे
मोरे मन का बाजे साज़
साज़ मोरे मन का बाजे साज़
तार न तोड़ ये तार के रे तेरी
भगवन राखे लाज
आज मोहे दीपक राग सुनायो रे
तू तो म्हारो गली में आयो रे
मैं तो चलूँगी थारे साथ
तीर तोरे नैनों का हुआ कलेजवा के पार
तीर तोरे नैनों का
लागा रे तीर तोर नैनों का
लगा मन में तीर तोरे नैनों का
…………………………………………
Sapera been bajayo-Padmini 1948

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Aug 27, 2018

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के-पद्मिनी १९४८

सुनते हैं फिल्म पद्मिनी से लता मंगेशकर का गया हुआ
बेहतरीन गीत जिसे वली साहब ने लिखा है.

इसकी धुन तैयार की है गुलाम हैदर ने. गुलाम हैदर के
गानों में लता का उच्चारण साफ़ मिलता है. गाना समय
के हिसाब से अलग तरीके से गाया गया है. इसमें हर
अंतरे के बाद मुखडा पूरा रिपीट होता है. आधी पंक्ति,
आधा मुखडा जैसी इसमें कोई चीज़ सैंडविच नहीं है.

गीतों की उपयुक्त श्रेणी क्या हुई-बेदर्द हिट्स ऑफ कोर्स.



गीत के बोल:

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के
बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के

जब दूर थी उनसे मैं बहुत पास थी उनके
क्यूँ दूर किया था यूँ मुझे पास बुला के

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के

बरबाद भी हो के न करेंगे तेरा शिकवा
बरबाद भी हो के न करेंगे तेरा शिकवा
हँस लेंगे गये वक़्त को हम सामने ला के

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के

ठण्डक उन्हें मिलती है अगर मेरी जलन से
ठण्डक उन्हें मिलती है अगर मेरी जलन से
देखूँगी तमाशा मैं भरे घर को जला के

बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के
रो लेंगे तसव्वुर में तुझे पास बिठा के
........................................................
Bedard tere dard ko-Padmini 1948

Artist:

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May 27, 2016

ना दिर दिम ताना दे रे ना-परदेसी १९५७

दक्षिण भारत से आई अभिनेत्रियों में अधिकाँश नृत्य कला में
प्रवीण हैं. हमने वैजयंतीमाला, पद्मिनी, हेमा मालिनी, रेखा,
मीनाक्षी शेषाद्री जैसी अभिनेत्रयों का क्लासिकल डांस देखा है
कई फिल्मों में. इस कड़ी में और भी नाम हैं मगर आज चर्चा
होगी सिर्फ पद्मिनी की.

त्रावनकोर सिस्टर्स नाम से तीन बहनें सिनेमा के क्षेत्र में काफी
विख्यात हैं- पद्मिनी, ललिता और रागिनी. गुरु गोपीनाथ और गुरु
महालिंगम पिल्लई से इन्होने नृत्य की शिक्षा दीक्षा ली. १९४७
की तमिल फिल्म कनिका से अपना कैरियर शुरू करने वाली
पद्मिनी ने तकरीबन २५० फिल्मों में काम किया.

आज आपको भारत-रूस के संयुक्त प्रयासों से निर्मित फिल्म १९५७
के परदेसी(Journey Beyond Three Seas) से एक गीत सुनवा रहे
हैं. 

गीत राग गौड़ सारंग पर आधारित है. संगीतकार अनिल बिश्वास
ने लता के लिए जो अलौकिक धुनें बनायीं उनमें से एक ये भी
है.



गीत के बोल:

ना दिर दिम ताना दे रे ना
ना दिर दिम ताना दे रे ना
ना जा ना जा बलम,  बलम मेरे ना
ना दिर दिम ताना दे रे ना
ना दिर दिम ताना दे रे ना


तेरी आग लगा ली तन में पिया
तेरी सेज सजा ली मैंने मन में पिया
तेरी आग लगा ली तन में पिया
तेरी सेज सजा ली मैंने मन में पिया

तेरे नैन बसे नैनन में पिया
तेरे नैन बसे नैनन में पिया
कहीं तू ही मुझे नयन फेरे ना

ना दिर दिम ताना दे रे ना
ना दिर दिम ताना दे रे ना
........................................................
Na dir dim tana de re na-Pardesi 1957

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May 27, 2011

ओ शमा मुझे फूँक दे-आशिक १९६२

फिल्म आशिक(१९६२) के ३ मधुर गीत आपको सुनवा चुके हैं-
लता का गाया एक गीत झनन झनझना के अपनी पायल,
मुकेश के गाये दो गीत - ये तो कहो कौन हो तुम, और
तुम जो हमारे मीत ना होते । हर एक गीत इस फिल्म का
नायाब है। आइये अब चौथा गीत सुना जाये जो कि एक
युगल गीत है मुकेश और लता की आवाज़ में। इसे लिखा
है शैलेन्द्र ने और अलबेले बैले नृत्य जैसे कुछ-कुछ मसाले
पर नाचने वाले कलाकारों के नाम अगर आपको मालूम हो
तो बतलाएं। गौरतलब है फिल्म की नायिका पद्मिनी आपको
नाचती दिखाई दे जाएँगी भीड़ के बीच में। खुशनुमा अंदाज़
से गीत दर्दीला गीत बन जाता है। पुराने ओर्केस्ट्रा कार्यक्रमों
में इस गीत को कई बार सुना है। गाने का ध्वनि संयोजन ही
ऐसा है कि ओर्केस्ट्रा वाले इसको अपने कार्यक्रमों में शामिल
करना पसंद करते।




गीत के बोल:

ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर

शाम से लेकर रोज़ सहर तक
तेरे लिए मैं सारी रात जली
मैने तो हाय ये भी न जाना
कब दिन डूबा कब रात ढली
फिर भी हैं मिलने से मजबूर
फिर भी हैं मिलने से मजबूर

ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर

पत्थर दिल हैं ये जगवाले
जाने न कोई मेरे दिल की जलन
पत्थर दिल हैं ये जगवाले
जाने न कोई मेरे दिल की जलन
जब से है जनमी प्यार की दुनिया
तुझको है मेरी मुझे तेरी लगन
तुम बिन ये दुनिया है बेनूर
तुम बिन ये दुनिया है बेनूर

परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर


हाय री क़िस्मत अंधी क़िस्मत
देख सकी ना तेरी-मेरी ख़ुशी
हाय री उल्फ़त बेबस उल्फ़त
रो के थकी जल-जल के मरी
दिल जो मिले किसका था क़सूर
दिल जो मिले किसका था क़सूर

ओ शमा मुझे फूंक दे
मैं न मैं रहूँ, तू न तू रहे
यही इश्क़ का है दस्तूर
यही इश्क़ का है दस्तूर
परवाने जा है अजब चलन
यहाँ जीते जी अपना मिलन
क़िस्मत को नहीं मंजूर
क़िस्मत को नहीं मंजूर
...................................
O shama mujhe phoonk de-Aashiq 1962

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Mar 6, 2010

मेरे मन का बावरा पंछी-अमर दीप १९५८

टी प्रकाश राव एक लम्बी पारी खेलने वाले निर्देशक है बॉलीवुड के।
उन्होंने ८० के दशक तक हिंदी, तमिल और तेलुगु में सफल फ़िल्में
बनायीं।

एक फिल्म है सन १९५८ की -सितमगर जिसमे निसार बज्मी का
संगीत है उसके निर्देशक प्रकाश राव थे। उसमे जैमिनी गणेशन और
पद्मिनी की प्रमुख भूमिकाएं हैं। प्रकाश राव ने अपने फ़िल्मी करियर में
कई संगीतकारों की सेवाएँ ली जिनमें सी. रामचंद्र, शंकर जयकिशन
और चित्रगुप्त के नाम प्रमुख हैं।

१९५८ में ही एक हिंदी फिल्म आई अमर दीप जिसमे देव आनंद और
वैजयान्तिमाला नायक नायिका हैं। पद्मिनी दूसरी नायिका हैं इस
फिल्म की जिनपर इस फिल्म का सबसे कर्णप्रिय गीत फिल्माया गया
है। गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में है और इसके संगीतकार
सी. रामचंद्र हैं जिनका जादुई असर सन १९५८ में भी बरकरार है।
राजेंद्र कृष्ण के सरल बोलों को एक आकर्षक धुन पर तैराता ये गीत
गुनगुनाने में आसान है। गीत में नायिका के गीत से नायक कुछ
याद करने की कोशिश कर रहा है।



गीत के बोल:

आ आ आ, आ आ आ, आ आ, आ आ आ

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
अंखियों में आज किसका
राह राह के प्यार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

किस के ख्याल में ये
नज़रें झुकी झुकी हैं
किस के ख्याल में ये
नज़रें झुकी झुकी हैं
देखो इधर भी लब पर
आहें रुकी रुकी हैं
देखो इधर भी लब पर
आहें रुकी रुकी हैं
तुम हो करार जिस दिल का
तुम हो करार जिस दिल का
वही बेक़रार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

दिल को लगन है उसकी
मीठी नज़र है जिसकी
दिल को लगन है उसकी
मीठी नज़र है जिसकी
हम पास हैं तुम्हारे
फिर दिल में याद है किस की
हम पास हैं तुम्हारे
फिर दिल में याद है किस की
तुम जो नज़र मिलाओ
तुम जो नज़र मिलाओ
दिल में बहार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

कब से खड़े हुए हैं
कह दो तो लौट जाएँ
कब से खड़े हुए हैं
कह दो तो लौट जाएँ
तुम्हे दूर ही से देखें
हर दिन ना पास आये
तुम्हे दूर ही से देखें
हर दिन ना पास आये
आँखों में ज़िन्दगी भर तक
आँखों में ज़िन्दगी भर तक
तेरा इंतज़ार डोले

मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले
मेरे मन का बावरा पंछी
क्यूँ बार बार डोले

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Oct 28, 2009

ये तो कहो कौन हो तुम-आशिक १९६२

एक सुपर हिट गीत सुनें मुकेश की आवाज़ में। इस फ़िल्म
के सारे गाने हिट थे। वही है राज कपूर और पद्मिनी की
आशिक । इस गीत को शैलेन्द्र ने लिखा है और धुन है
शंकर जयकिशन की। सरल सी धुन है इस गीत की मगर
वाद्य यन्त्र इसकी जटिलता की कहानी कह देते हैं। शंकर
जयकिशन के गानों में वाद्य यन्त्र अपने चरम पर होते थे।
जब तक मुकेश की आवाज़ सुनाई देती है हमें ये आसानी से
गुनगुनाने लायक गाना लगता है, और, है भी एक तरह से।
ढोलक का ठेका लाजवाब है इस गाने में।



गाने के बोल:

किशन म्हारे हो जा

मुकेश: ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम
ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम
मुझसे पूछे बिना दिल में आने लगे
मुझसे पूछे बिना दिल में आने लगे

ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम
मीठी नज़रों से बिजली गिराने लगे
मीठी नज़रों से बिजली गिराने लगे

रात भी निराली, ये रुत भी निराली
रंग बरसाए, उमंग मतवाली
प्यार भरी आंखों ने जाल हैं बिछाए
कैसे करे कोई दिल की रखवाली
कैसे करे कोई दिल की रखवाली

ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम

हाँ,मीठी नज़रों से बिजली गिराने लगे
मीठी नज़रों से बिजली गिराने लगे

ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम

कोरस: किशन म्हारे हो जा.....

मस्तियों के मेले,ये खोई खोई रातें
आँखें करे आंखों से रंग भरी बातें
मुझसे क्या छुपेंगी ,ये लूटने की घातें
मुझसे क्या छुपेंगी ,ये लूटने की घातें

ये तो कहो,
ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम
मुझसे पूछे बिना दिल में आने लगे
मुझसे पूछे बिना दिल में आने लगे

तुम ही तो नहीं हो, तो सपनों में आके
छुप गए अपनी झलक दिखला के
तुम ही तो नहीं हो, मैं ढूँढा किया जिनको
फिर भी तुम न आए मैं थक गया बुला के
फिर भी तुम न आए मैं थक गया बुला के

ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम

कोरस : मुझसे पूछे बिना दिल में आने लगे
ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम
मीठी नज़रों से बिजली गिराने लगे
मीठी नज़रों से बिजली गिराने लगे

ये तो कहो, कौन हो तुम, कौन हो तुम
..................................
ye to kaho kaun ho tum-Aashiq 1962

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Oct 2, 2009

झनन झनझना के अपनी पायल-आशिक १९६२

संगीतकार शंकर जयकिशन के कैरियर का एक मील का पत्थर
है फ़िल्म आशिक। सुमधुर संगीत के ज़माने का एक गुलदस्ता।
सारे गाने सुपरहिट थे फ़िल्म के। हृषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित
इस फ़िल्म में राज कपूर और पद्मिनी की मुख्य भूमिकाएं हैं। इस
फ़िल्म में पद्मिनी थोडी दुबली पतली दिखाई देती हैं। जो गीत देखने
में आनंद देते हैं ये उनमे से एक है। नृत्य और मधुर संगीत का अनूठा
संगम। आनंद उठायें इसका। गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है ।



गाने के बोल:

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

छम छम अपनी डगर चलूंगी
छम छम अपनी डगर चलूंगी
कोई भी रोके मैं न रुकूंगी

मैं सावन की चंचल नदिया
बंध के रही न बंध के रहूंगी

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

अपनी उमंगों में लहराऊँ
अपनी उमंगों में लहराऊँ
गीत किसी के गाती जाऊं

धरती को बाहों में भर लूँ
झूम के अम्बर पे छा जाऊं

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

राह में खो कर मैं अपने को
राह में खो कर मैं अपने को
खोज रही हूँ सुख सपने को

तरस गए हैं नैन हमारे
जिसको पलकों में रखने को

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ

झनन झनझना के अपनी पायल
चली मैं आज मत पूछो कहाँ
..............................
Jhanan jhanjhana ke apni payal-Aashiq 1962

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