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Aug 11, 2020

कहाँ जा के ये नैना लड़े-शिव भक्त १९५५

आज के दिन फिल्म जगत में काफी सारे कलाकार पैदा
हुए. हीरो और हीरोईन को तो सभी याद कर लेते हैं किन्तु
गीतकार और संगीतकार को याद करने वाले कुछ लोग ही
मिलते हैं.

गोपाल सिंह नेपाली ने श्वेत श्याम युग में काफी गीत लिखे.
राष्ट्रीय धारा के जनप्रिय कवि गोपाल सिंह नेपाली बिहार के
चम्पारन जिले में जन्मे. उन्होंने बतौर पत्रकार भी काम
किया. उन्होंने सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के साथ एक मासिक
पत्रिका में भी काम किया.

आज  हम आपको सुनवायेंगे फिल्म शिवभक्त से एक गीत
जिसका संगीत बिहार मूल के ही प्रसिद्ध संगीतकार चित्रगुप्त
ने तैयार किया है. इसे परदे पर पद्मिनी पर फिल्माया गया
है जिसे लता मंगेशकर ने गाया है.




गीत  के बोल:

कहाँ जा के ये नैना लड़े
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Kahan ja ke ye naina lade-Shiv bhakt 1955

Artist: Padmini

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Aug 22, 2016

घड़ी घड़ी पूछो ना-अनोखा प्यार १९४८

आइये सुनें घड़ी हिट्स श्रृखंला से एक गीत. इसमें दो बार घड़ी
शब्द आया है अतः ये हुआ घड़ी-घड़ी हिट गीत. इन्हीं शब्दों से
फिल्म मधुमती का एक लोकप्रिय गीत भी है वो गीत भी लता
का गाया हुआ है.

गीत में घडी से तात्पर्य है समय से. थोड़ी थोड़ी देर में बार बार
कोई बात हो तो उसे कहते हैं घड़ी-घड़ी घटित होना. जैसे बारिश
की झड़ी भी कभी-कभी घड़ी-घड़ी लग जाती है.

गोपाल सिंह नेपाली का लिखा गीत है जिसे अनिल बिश्वास ने
संगीत से सजाया है. ये सजाना संवारना शब्द हमने रेडियो सुन
के ही तो सीखे हैं. आखिर को मीडिया से भी हम बहुत कुछ सीख
सकते हैं जैसे ये वाक्य बोलना-सवाल उठना, सवाल खड़ा होना
इत्यादि. गीत फिल्माया गया है नलिनी जयवंत पर जिन्होंने इस
फिल्म में मालन की भूमिका निभाई है.




गीत के बोल:

घड़ी घड़ी पूछो ना जी
किनसे मेरी प्रीत है
घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना जी
किनसे मेरी प्रीत है
घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना जी
किनसे मेरी प्रीत है
घड़ी घड़ी पूछो ना

नैनों में वो हैं ऐसे
नैनों में वो हैं ऐसे
सावन में रिमझिम जैसे
रिमझिम रिमझिम झिम
नैनों में वो हैं ऐसे
आँखों आँखों में समझो
कौन मेरा मीत है
आँखों आँखों में समझो
कौन मेरा मीत है

घड़ी घड़ी पूछो ना जी
किनसे मेरी प्रीत है
घड़ी घड़ी पूछो ना

जब तक बलम न बोलूं
जब तक बलम न बोलूं
आ के न घूँघट खोले बलमा मोरे
आ के न घूँघट खोले
प्रीत की कलियाँ छुपा रखने की रीत है
प्रीत की कलियाँ छुपा रखने की रीत है
घड़ी घड़ी पूछो न जी
किनसे मेरी प्रीत है
घड़ी घड़ी पूछो ना

घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना
घड़ी घड़ी पूछो ना जी
किनसे मेरी प्रीत है
घड़ी घड़ी पूछो ना
......................................................................
Ghadi ghadi poochho na-Anokha Pyar 1948

Artist: Nalini Jaywant

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Mar 23, 2009

दर्शन दो घनश्याम -नरसी भगत १९५७

फिल्म नरसी भगत से एक मधुर भजन प्रस्तुत है।
कहते हैं सच्चे मन की पुकार को परमात्मा जरूर
सुनता है। इस गीत का संगीत तैयार किया है रवि ने
जो हेमंत कुमार के सहायक रहे हैं। शाहू मोड़क और
निरूपा रॉय इस फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं। भजन
गाया है सुधा मल्होत्रा, मन्ना डे और हेमंत कुमार ने।
दुर्लभ संयोग है गायकों का। सुधा मल्होत्रा और हेमंत
कुमार के युगल गीत भी शायद १-२ ही हैं।




गीत के बोल:

दरशन दो घनश्याम नाथ मोरी, अँखियाँ प्यासी रे
मन मंदिर की ज्योति जगा दो, घट घट बासी रे

मंदिर मंदिर मूरत तेरी
फिर भी ना दीखे सूरत तेरी
युग बीते ना आई मिलन की
पूरणमासी रे

द्वार दया का जब तू खोले
पंचम सुर में गूंगा बोले
अंधा देखे लंगड़ा चल कर
पहुँचे कासी रे

पानी पी कर प्यास बुझाऊँ
नैनों को कैसे समझाऊँ
आँख मिचौली छोड़ो अब
मन के बासी रे

निर्बल के बल धन निर्धन के
तुम रखवाले भक्त जनों के
तेरे भजन में सब सुख पाऊँ
मिटे उदासी रे

नाम जपे पर तुझे ना जाने
उनको भी तू अपना माने
तेरी दया का अंत नहीं है
हे दुख नाशी रे

आज फैसला तेरे द्वार पर
मेरी जीत है तेरी हार पर
हार जीत है तेरी मैं तो
चरण उपासी रे

द्वार खड़ा कब से मतवाला
मांगे तुम से हार तुम्हारी
नरसी की ये बिनती सुनलो
भक्त विलासी रे

लाज ना लुट जाये प्रभु तेरी
नाथ करो ना दया में देरी
तीन लोक छोड़ कर आओ
गंगा निवासी रे
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Darshan do ghanshyam nath mori-Narsi Bhagat 1957

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