Showing posts with label Ghar. Show all posts
Showing posts with label Ghar. Show all posts

Jul 6, 2017

तेरे बिना जिया जाए ना-घर १९७८

आपको फिल्म घर से चार गीत सुनवा दिए हैं. आज
सुनते हैं पांचवा गीत जो लता मंगेशकर की आवाज़
में है. गीत फिल्माया गया है विनोद मेहरा और रेखा
पर.

गीतकार और संगीतकार वही हैं जिहोने पिछले चार गीतों
पर काम किया था.



गीत के बोल:

तेरे बिना जिया जाए ना
तेरे बिना जिया जाए ना
बिन तेरे तेरे बिन साजना
साँस में साँस आए ना
तेरे बिना जिया जाए ना

जब भी ख़यालों में तू आए
मेरे बदन से ख़ुश्बू आए
महके बदन में रहा न जाए
रहा जाए ना
तेरे बिना जिया जाए ना

रेशमी रातें रोज़ न होंगी
ये सौगातें रोज़ न होंगी
ज़िंदगी तुझ बिन रास न आए
रास आए ना
तेरे बिना जिया जाए ना
……………………………………………
Tere bina jiya jaaye na-Ghar 1978

Artists:Vinod Mehra, Rekha

Read more...

Jul 4, 2017

फिर वही रात है-घर १९७८

फिर वही दिन है, फिर वही रात है ऐसा हमें कई बार
लगता है जब किसी घटनाक्रम की पुनरावृत्ति होती है.
किसी घटना विशेष के होने पर भी दिमाग सोचता है
ऐसा तो उस दिन भी हुआ था !

फिल्म घर से एक गीत सुनते हैं किशोर कुमार का गाया
हुआ. गुलज़ार के बोल हैं और आर डी बर्मन का संगीत.
गीत के बोल कुछ अलग हट के हैं. लोकप्रिय होने की
एक वजह ये भी है कि आम जनता ने इसे बार बार सुना
ताकि बोलों का पूरा अर्थ समझ में आये.



गीत के बोल:

फिर वही रात है
फिर वही रात है ख्वाब की
हो रात भर ख्वाब में देखा करेंगे तुम्हें
फिर वही रात है
फिर वही रात है ख्वाब की
हो रात भर ख्वाब में देखा करेंगे तुम्हें
फिर वही रात है

हो मासूम सी नींद में फिर कोई सपना चले
हमको बुला लेना तुम  पलकों के पर्दे तले
ये रात है ख्वाब की  ख्वाब की रात है
फिर वही रात है
फिर वही रात है ख्वाब की

काँच के ख्वाब हैं  आँखों में चुभ जायेंगे
हो पलकों पे लेना इन्हें  आँखों में रुक जायेंगे
हो ये रात है ख्वाब की  ख्वाब की रात है

फिर वही रात है
फिर वही रात है ख्वाब की
हो रात भर ख्वाब में देखा करेंगे तुम्हें
फिर वही रात है
रात है रात है
………………………………………………………..
Phir wahi raat hai-Ghar 1978

Artist: Vinod Mehra, Rekha

Read more...

Jan 6, 2017

आपकी आँखों में कुछ–घर १९७८

लोकप्रिय युगल गीत है और आज ही इसे किसी प्राइवेट
रेडियो चैनल पर सुना है. आप भी सुन लीजिए. फिल्म
घर से इस युगल गीत को लता और किशोर ने गाया है.
फुर्सत में तैयार किया गया बेहद रोमांटिक युगल गीत.

इस गाने के मुरीद करोड़ों की संख्या में होंगे ऐसा मेरा
अनुमान है. गुलज़ार का गीत है और आर डी बर्मन का
संगीत. इस कोम्बिनेशन ने हमें कई अविस्मरणीय गीत
दिए हैं.



गीत के बोल:

आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं
आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं
आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं
आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं

लब हिलें तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं
लब हिलें तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं
आपकी आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं
आपकी खामोशियाँ भी आप की आवाज़ हैं

आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं
आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं
आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं

आपकी बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं
आपकी बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं
बेवजह तारीफ़ करना आपकी आदत तो नहीं
आपकी बदमाशियों के ये नये अंदाज़ हैं

आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं
हो ओ ओ आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं
आपकी आँखों में कुछ महके हुये से राज़ हैं
..........................................................
Aapki aankhon mein kuchh-Ghar 1978

Artists: Vinod Mehra, Rekha

Read more...

Jul 17, 2011

बोतल से इक बात चली है-घर १९७८

गाने के लिए किसी सिचुएशन का होना ज़रूरी नहीं है किसी फिल्म में.
कभी कभी जबरन भी गीत ठूंसे जाते हैं किसी व्यक्ति विशेष की फ़रमाइश
पर. एक ऐसा ही गीत सुनवाते हैं आपको फिल्म घर से.

गीत फिल्माया गया है विनोद महरा और रेखा पर. गुलज़ार के लिखे बोलों
को सुरों में ढाला है आर डी बर्मन ने. आशा और रफ़ी इस गीत के गायक
हैं. जैसा की गुलज़ार के अधिकांश गीतों में होता है चाँद की विशेष सेवा
इस गीत में भी की गयी है.

कोका कोला की पुरानी बोतल कैसी दिखती थी ये कोका कोला प्रेमी जान
पाएंगे इस गीत से.



गीत के बोल:

बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है

बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है ,हो
तु रु रु तु, तु रु रु तु ,तु रु तु तु
तु रु रु तु, तु रु रु तु, तु रु तु तु

हो, बोतल से इक बात चली है
तू रु रु तू
काग उड़ा के रात चली है

आज की मय बहुत मीठी है
आज तो आँख मिला के पीना
चांद की मिसरी घुल जायेगी
चाँद से होंठ लगा के पीना

हो
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
हो, बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है
हो, बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है

वादों वाली रात आयी है
आज की रात इनकार ना करना
अपने दिन और रात ना पूछो
तुमसे जीना तुमपे मरना

तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु
तु रु रु तु तु रु रु तु तु रु तु तु

हो, बोतल से इक बात चली है
तू रु रु तू
काग उड़ा के रात चली है
बोतल से इक बात चली है
काग उड़ा के रात चली है
ल ल ल ल ल ल ल ल

.....................................
Botal se ek baat chali hai-Ghar 1978

Read more...

Apr 3, 2011

आजकल पांव ज़मीन पर-घर १९७५

बल्ले बल्ले हो गया जी, ये शब्द सुने मैंने कल जब भारत की
टीम ने विश्व कप जीता। तमाम प्रकार के नारे स्लोगन सुनाई दे
गये जिन्हें सुने हुए एक अरसा हो गया था । ये सब नारे सुनने को
मेरे भी कान सन १९८३ के बाद से तरस रहे थे।

मित्रों, क्षमा चाहूँगा होली के अवसर पर आपसे मुखातिब नहीं
हो पाया। रोजी रोटी कभी कभी ज्यादा चक्कर खिला दिया करती है।
इस चक्कर घिन्निये दौर में से कुछ समय निकाल कर आज जंग
लगे दिमाग को कुछ साफ़ करने की कोशिश करता हूँ।

तो साहब मार्च का पूरा महीना वर्ल्ड कप फीवर में गुज़रा। अब
भाफ्रत की टीम ने कप जीत लिया है तो कई दर्शक भी फूले
नहीं समा रहे। ऐसे में एक गीत पेश है जो खिलाडियों और
दर्शकों दोनों की भावनाओं को शायद समझा सके। ये मौका
ज़बरदस्त दिया टीम इंडिया ने देश की सवा अरब आबादी को
जश्न मनाने का।

गुलज़ार का लिखा ये गीत लता मंगेशकर ने गाया है और धुन
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।



गीत के बोल:

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
जब भी थामा है तेरा हाथ तो देखा है
लोग कहते हैं की बस हाथ की रेखा है
हमने देखा है जो तकदीरों को जुड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

नींद सी रहती है हल्का सा नशा रहता है
रात दिन आँखों में एक तेरा पता रहता है
पर लगी आँखों को देखा है कभी उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

जाने क्या होता है हर बात पे कुछ होता है
दिन में कुछ होता है और रात में कुछ होता है
थाम लेना जो कभी देखो हमें उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे
बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

आजकल पांव ज़मीन पर नहीं पढ़ते मेरे

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP