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Oct 17, 2016

चंदा को ढूँढने सभी तारे-जीने की राह १९६९

आपको ढेर सारे गायकों के गाये कुछ गीत सुनवा चुके हैं. ऐसे
गीत भी जिनमें ३  या ४ गायकों की आवाजें हैं आप सुन चुके
हैं इधर. काफी दिनों बाद फिर आपके लिए चार गायक कलाकारों
का गाया गीत सुनवा रहे हैं. ये है फिल्म जीने की राह से जो कि
सन १९६९ की फिल्म है.

फिल्म जीने की राह से आप ३ गीत सुन चुके हैं पहले जो लोकप्रिय
गीत हैं. ये कम सुना गया अनूठा गीत है. इस गीत के रचयिता भी
आनंद बक्षी हैं. बच्चों पर फिल्माया गया ये गीत मधुर है. गीत के
दोनों हिस्से वीडियो में मौजूद हैं.



गीत के बोल:

एक समय की बात सुनो
अंधियारी थी रात सुनो
दीपक चोरी हो गया
चाँद कहीं पर खो गया
फिर क्या हुआ

चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े
गलियों में वो नसीब के मारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े

चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े
गलियों में वो नसीब के मारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े

उनकी नज़र का जिसने नज़ारा चुरा लिया
उनके दिलों का जिसने सहारा चुरा लिया
उस चोर की तलाश में सारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े

ग़म की अंधेरी रात में जलना पड़ा उन्हें
फूलों के बदले काँटों पे चलना पड़ा उन्हें
धरती पे जब गगन के दुलारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े

उनकी पुकार सुन के ये दिल डगमगा गया
हमको भी कोई बिछड़ा हुआ याद आ गया
भर आई आँख आंसू हमारे निकल पड़े

चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े
गलियों में वो नसीब के मारे निकल पड़े
चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े
.........................................................................
Chanda ko dhoondhne sabhi-Jeene ki raah 1969

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Aug 11, 2016

एक बंजारा गाए-जीने की राह १९६९

सन १९६९ की फिल्म जीने की राह के गीत सुपरहिट गीतों में
गिने जाते हैं. आप फिल्म से दो गीत सुन चुके हैं. आज तीसरा
गीत सुनवाते हैं आपको. रफ़ी का गाया ये गीत परदे पर जीतेंद्र
गा रहे हैं.

गीत प्रेरणादायी है विशेषकर इसका दूसरा अन्तरा. जीवन का सार
है उसमें.




गीत के बोल:

सुनो एक तराना नया एक फ़साना
के आंगन में मेरे सवेरे सवेरे

एक बंजारा गाए जीवन के गीत सुनाए
हम सब जीने वालों को जीने की राह बताए
एक बंजारा गाए हो ओ
एक बंजारा गाए जीवन के गीत सुनाए
हम सब जीने वालों को जीने की राह बताए
एक बंजारा गाए हो ओ ओ

ज़माने वालो किताब-ए-ग़म में
खुशी का कोई फ़साना ढूँढो
ज़माने वालो किताब-ए-ग़म में
खुशी का कोई फ़साना ढूँढो
अगर जीना है ज़माने में तो
हंसी का कोई बहाना ढूंढो
हो ओ ओ ओ ओ
आँखों में आँसू भी आए
तो आ कर मुस्काए

एक बंजारा गाए जीवन के गीत सुनाए
हम सब जीने वालों को जीने की राह बताए
एक बंजारा गाए हो ओ ओ

सभी को देखो नहीं होता है
नसीबा रौशन सितारों जैसा
सभी को देखो नहीं होता है
नसीबा रौशन सितारों जैसा
सयाना वो है जो पतझड़ में भी
सजा ले गुलशन बहारों जैसा
हो ओ ओ ओ ओ
कागज़ के फूलों को भी
जो महका कर दिखलाए

एक बंजारा गाए जीवन के गीत सुनाए
हम सब जीने वालों को जीने की राह बताए
एक बंजारा गाए हो ओ ओ
हो ओ ओ हो ओ ओ
…………………………………………………………..
Ek banjara gaaye-Jeene ki raah 1969

Jeetendra, Tanuja

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Jul 24, 2015

आने से उसके आये बहार-जीने की राह १९६९

इस फिल्म को सत्तर के दशक के उत्तरार्ध में देखा था
मैंने. एक ज़माना था जब फ़िल्में सिनेमा हाल में दुबारा
देखने को मिल जाया करती थी. जब वितरक, निर्माता
या निर्देशक की बीवी रोटी पर घी चुपड़ना बंद कर देती
तब फिल्म दुबारा प्रदर्शन के लिए भेज दी जाती और
दर्शकों का भी भला हो जाता.

उस समय चूने से पोस्टर पुताई का युग था. जीने के राह
कुछ यूँ लिखा होता नील से- जिने कि राह/जिने की राह
‘र’ को खींच के इतना लंबा बनाया जाता कुछ पुताईकारों
द्वारा कि वो पोस्टर की बाउंड्री से बाहर चार रन के लिए
निकल पढ़ने को उत्सुक सा दिखलाई देता. किसी बाप की
बनियान पकड़ छोटा बच्चा लटक जाए तो बनियान का
क्या हश्र होता है वैसा ही कुछ कुछ शब्दों का होता उस
अक्षरों की नीली पुताई में.

आइये सुनें इस फिल्म का एक गीत जिसे रफ़ी ने गाया है,
नायक हैं जीतेंद्र.. अपने ज़माने का सुपरहिट गीत है ये
और आज भी सुनाई देता है नियमित रूप से.

आपने दुमदार दोहे अवश्य सुने या पढ़े होंगे. दुम लगायी
जाती है उसका सौंदर्य निखारने के लिए. प्रस्तुत गीत की
पंक्तियों में भी दुम लगी है “मेरी महबूबा” की. आपको तो
ऐसा ही लगेगा जैसे इसके बिना गीत में आनंद नहीं आता.
वैसे तो ये शब्द महबूबा कैसी है उसके वर्णन के लिए प्रयोग
में लाये गए हैं मगर सुनने में अलग से लगते हैं.




गीत के बोल:

आने से उसके आए बहार
जाने से उसके जाए बहार
बडी मस्तानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी ज़िन्दगानी है, मेरी मेहबूबा

गुनगुनाए ऐसे
जैसे बजते हो घुँघरू कहीं पे
आ के परबतों से
जैसे गिरता हो झरना ज़मीं पे
झरनों की मौज है वो,
मौजों की रवानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी ज़िन्दगानी है, मेरी मेहबूबा

बन संवर के निकले,
आए सावन का जब जब महीना
हर कोई ये समझे,
होगी वो कोई चंचल हसीना
पूछो तो कौन है वो,
रुत ये सुहानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी ज़िन्दगानी है, मेरी मेहबूबा

इस घटा को मैं तो,
उसकी आँखों का काजल कहूँगा
इस हवा को मैं तो,
उसका लहराता आंचल कहूँगा
कलियों का बचपन है,
फूलों की जवानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी ज़िन्दगानी है, मेरी मेहबूबा

बीत जाते हैं दिन,
कट जाती हैं आँखों में रातें
हम ना जाने क्या क्या,
करते रहते हैं आपस में बातें
मैं थोड़ा दीवाना,
थोड़ी सी दीवानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी ज़िन्दगानी है, मेरी मेहबूबा

सामने मैं सबके नाम उसका नही ले सकूंगा
वो शरम के मारे रुठ जाए तो मैं क्या करुंगा
हूरों की मलिका है,
परियों की रानी है, मेरी मेहबूबा
मेरी ज़िन्दगानी है, मेरी मेहबूबा
....................................................
Aane se uske aaye bahaar-Jeene ki raah 1969

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Feb 25, 2010

आ मेरे हमजोली आ-जीने की राह १९६९

जीने की राह फिल्म जो सन १९६९ में आई थी, में कुछ लोकप्रिय गीत हैं।
जी हाँ ये वही गीत हैं जिसके बोल इस प्रकार सुनाई देते हैं- मियाऊँ , मियाऊँ।
क्यूँ सुनाई देते हैं इसके लिए गीत सुनिए। जैसा की हिंदी गीतों में होता आया है
की नायक नायिका ख्यालों में खो जाते हैं, (क्यूँ ना हो ये सफल फार्मूला जो है फिल्मों
का) इस गीत में भी व्हील चेयर पर बैठी नायिका और भ्रमित, अचंभित सा बैठा नायक
दोनों गीत का आनंद लेते लेते खुद नाचने का आभास करने लगते हैं। नायिका का
केश विन्यास अनूठा है जिसको देख कर पगोडा की आकृति ध्यान में आती है।

गीत के अंत में बिना किसी दावा के जादुई छड़ी के असर से नायिका कुर्सी से उठ के
नाचने लगती है। किसी जगह पर एक संगीत प्रेमी ने लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल के
संगीत पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि उनके डांस संगीत में दवाई का असर है जिससे
अपाहिज व्यक्ति ठीक हो सकता है। संभव है ऐसा हो ! जब हिंदी फिल्मों का हीरो बिना
चूरन खाए ३०० फीट ऊंची दीवार फांद सकता है तो कुछ भी संभव है फिल्मों में । उसमे
लता, रफ़ी, आनंद बक्षी और लक्ष्मी प्यारे क्या कर लेंगे।



गीत के बोल

हो ओ, हो ओ ओ
हो ओ, हो ओ ओ

आ मेरे हमजोली आ
खेलें आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो
ओ मैं ढूँढू तू छुप जा

आ मेरे हमजोली आ
खेले आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो
मैं ढूँढू तू चुप जा

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊँ
ना
मैं आऊं
आ जा

पीपल के ऊपर जा बैठा
चुप से मेरा साथी
धक् से लेकिन धड़क गया दिल
गिर गयी हाथ से लाठी
ओ पकड़ा गया
ओ पकड़ा गया

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊं
ना
मैं आऊं
आ जा

पनघट के पीछे जा बैठी
ओ छुप के मेरी सजनिया
झन से लेकिन अनजाने में
झनक गयी पैजनिया
ओ पकड़ी गयी
ओ पकड़ी गयी

आ मेरे हमजोली आ
खेलें आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में
हो
मैं ढूँढू तू चुप जा

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊं
ना
मैं आऊं
आ जा

ओ मेरे नैनों से तू छुप सकता है
ओ मेरे रसिया
लेकिन मेरे मन से छुपना मुश्किल है
मन बसिया
ए पकड़ा गया
ओ पकड़ा गया

मैं आऊं
ना ना
मैं आऊं
ना ना ना
आऊं
ना
मैं आऊं
आ जा

काहे लुकछुप के खेल में छेड़े तू
प्रेम की बतियाँ
देख तमाशा देख रहीं हैं
सारे शहर की अँखियाँ
ए पकड़ी गयी
ओ पकड़ी गयी

आ मेरे हमजोली आ
खेले आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो

ओ मैं ढूंढूं तू छुप जा
आ मेरे हमजोली आ
खेले आँख मिचोली आ
गलियों में चौबारों में
बागों में बहारों में, हो

मैं ढूँढू तू चुप जा
मैं ढूँढू तू चुप जा
मैं ढूँढू तू चुप जा

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