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Dec 31, 2015

नये पुराने साल में-रक्षा १९८१

फिर से एक बार वो घडी आ गयी जिसका सबको बड़ी बेसब्री
से इंतज़ार रहता है. ये है नए साल के पहले का वक्त. अंग्रेजी
नए साल शुरू होने के पहले का समय. रंगीन बुद्धू बक्से के
पहले के आगमन तक ऐसा कुछ हंगामा नहीं होता था. वही
रूटीन होता था आम आदमी का-३१ दिसम्बर को खाया और
१ जनवरी को लोटा ले के दिशा मैदान हो आये. आम दिनों
और इस दिन कोई विशेष अंतर नहीं पढता था.

टी वी ने सब बदल दिया क्यूँ की बदलाव समय की मांग है.
कुछ समय पहले तक जो काम एस एम् एस से होता था वो
अब फेसबुक और वाट-लगा-एप की मदद से हो रहा है-संदेशों
का आदान प्रदान. भले ही आपकी और दिनों में खैर-खबर न
पूछे मगर इस दिन यकायक ही कोई कब्र में से प्रकट हुआ
सा आपको नए वर्ष का सन्देश दे देता है.

आइये सुनें फिल्म रक्षा से एक गीत जिसे आशा भोंसले और
किशोर कुमार ने गाया है. आनंद बक्षी और आर डी बर्मन इसके
क्रमशः गीतकार और संगीतकार हैं. जीतेंद्र और परवीन बॉबी
आपको विशेष अंदाज़ में हिलते डुलते नज़र आयेंगे गीत में.
इस हिलने डुलने के अंदाज़ को हम नृत्य भी कहते हैं.



गीत के बोल:


नये पुराने साल में एक रात बाकी है
बाकी बातें हो चुकी, एक बात बाकी है
नये पुराने साल में

कहीं है कोई अपना, कहीं कोई बेगाना
कैसे अपनी बात कहें आखिर दिल दीवाना
जल्दी क्या है, कह लेना मुलाकात बाकी है
नये पुराने साल में

रात बनी है दुल्हन, खुश है चाँद सितारे
महफिल में आ बैठे, दुश्मन-दोस्त हमारे
अरे आने वाले दूल्हा की बारात बाकी है
नये पुराने साल में

सबका दिल धड़काये, साल का आना जाना
हमसे बिछड़ रहा है, साथी एक पुराना
बस अब थोड़ी देर का, ये साथ बाकी है
नये पुराने साल में
..........................................................................................
Naye purane saal mein-Raksha 1981

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Dec 28, 2015

धरती अपनी माँ-कामयाब १९८४

बहुत दिन हुए आपको कोई जीतेंद्र का गाना सुनवाए हुए. आज
कर के जैक की ज़रूरत पड़ी तो शब्द याद आया-जम्पिंग जैक.

आपको आज फिल्म कामयाब से दूसरा गीत सुनवा रहे हैं. पहला
गीत काफी रोचक विवरण के साथ आप सुन चुके हैं.

गीत जीतेंद्र और शबाना आज़मी पर फिल्माया गया है. जीतेंद्र को
उत्तर और दक्षिण दोनों दिशाओं की काफी सारी अभिनेत्रियों के साथ
काम करने का मौका मिला. वे शायद कुछ खुशकिस्मत सितारों
में से एक हैं.

ये वही जीतेंद्र हैं जिन्होंने एक बार वी शांताराम की फिल्म में
मुमताज़ के साथ काम करने से मना किया था जिस पर
शांताराम ने कहा था-नायिका तो यही रहेगी फिल्म की, तुम्हें
काम करना हो तो करो. शायद वे जीवन के उत्तरार्ध में इस बात
को अच्छी तरह समझ गए कि सीमित प्रतिभा के चलते वे तभी
सफल हो सकते हैं जब नखरे अपने नियंत्रण में रखें. नखरे तो
ठीक, उन्होंने अपना शरीर भी नियंत्रण में रख कर अपने समय
के नायकों के लिए मिसाल कायम की. उनकी फिटनेस के लोग
कायल हुआ करते थे.

प्रस्तुत गीत धरती माँ को समर्पित है जिसे इन्दीवर ने लिखा है
और एस पी बालू संग लता मंगेशकर ने गाया है.



गीत के बोल:

धरती अपनी माँ धरती अपनी माँ
धरती अपनी माँ धरती अपनी माँ
धरती माता दया करो मोती खेतों में भर दो
सोने की हमें फसलें दो और खुशियों के हमें आंसू दो
धरती अपनी माँ धरती अपनी माँ
धरती माँ धरती माँ धरती माँ

मेघों के रजा पानी दो धरती को चुनर धानी दो
रेट जहाँ वहाँ खेत बने मित्तो को नयी जवानी दो
बोया खून पसीना है हर एक बूँद नगीना है
म्हणत ही दौलत अपनी म्हणत के बल जीना है
धरती अपनी माँ धरती अपनी माँ

खेतों में हरियाली है घर घर में खुशहाली है
खलिहानों में धूम मची गोरी के गालों पे लाली है
धान के देखो ढेर लगे बनते बात न देर लगे
भाग्य लक्ष्मी आये तुम तुमसे घर के भाग जगे
धरती अपनी माँ धरती अपनी माँ
धरती माता दया करो मोती खेतों में भर दो
सोने की हमें फसलें दो और खुशियों के हमें आंसू दो
धरती अपनी माँ धरती अपनी माँ
धरती माँ धरती माँ धरती माँ
.......................................................................................
Dharti apni maa-Kaamyab 1984

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Nov 4, 2015

हम तो हैं राही दिल के–कारवाँ १९७१

हिंदी फिल्मों में ऐसे गीत भी हैं जिनका प्रेमी-प्रेमिका से
कोई लेना देना नहीं होता. आज एक टी वी चैनल पर
लगभग गुत्थम गुत्था से दिखाई दे रहे ६ वक्ताओं के
प्रलाप सुन के मुझे ये गीत याद आ गया जो सर्वधर्म
सद्भाव का सन्देश भी देता है.

सन १९७१ की फिल्म कारवां में ये गीत जीतेंद्र परदे पर
गा रहे हैं. गायक कलाकार हैं किशोर कुमार जिन्होंने इसे
अनूठा बना दिया है. काफी उर्जावान गीत है और इसे सुन
के स्फूर्ति सी आ जाती है.

फिल्म से आपको दो गीत पूर्व में सुनवाए जा चुके हैं. इस
गीत को लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसका संगीत
तैयार किया है आर डी बर्मन ने.  



गीत के बोल:

हम तो हैं राही दिल के पहुंचेंगे रुकते-चलते
मंज़िल है किसको प्यारी हो
अरे हम तो हैं मन के राजा राजा की चली सवारी
अरे हो सुनो ज़रा
हम तो हैं राही दिल के

हम वो अलबेले हैं सारी दुनिया झेले हैं
अपने तो सब लाखों बस कहने को अकेले हैं
अरे सबका बोझा लई के चलती है अपनी लारी
अरे हो सुनो ज़रा
हम तो हैं राही दिल के

जब तक चलते जाएँ सबका ही दिल अपनाएँ
जब रोए कोई दूजा नैना अपने छलक आएँ
प्यारे काम आएगी सुनता जा बात हमारी
अरे हो सुनो ज़रा

हम तो हैं राही दिल के

हरे हरे शंकर जय शिव शंकर भूषण वल्लभ जय महेश्वर
अल्लाह हु अकबर, अल्लाह हु अकबर.....................
.............................................................

पंडित मुल्ला डाँटें पर हम सबका दुख बाँटें
सारे हैं अपने प्यारे बोलो किसका गला काटें
रामू या रमजानी अपनी तो सबसे यारी
अरे ओ सुनो ज़रा
हम तो हैं राही दिल के पहुंचेंगे रुकते-चलते
मंज़िल है किसको प्यारी हो
अरे हम तो हैं मन के राजा राजा की चली सवारी
अरे हो सुनो ज़रा
हम तो हैं राही दिल के पहुंचेंगे रुकते-चलते
……………………………………………….
Ham to hain rahi dil ke-Caravan 1971

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Sep 27, 2015

हरी हरी वसुंधरा पे-बूँद जो बन गई मोती १९६७

आम आदमी के लिए साहित्यिक गीत का मतलब है जिसमें
थोड़े अलग से सुनाई देने वाले अच्छे अच्छे शब्द हों और उसे
जिनका उसे मतलब मालूम नहीं. ऐसे कई गीत हैं फिल्म जगत
के खजाने में जिनके सभी शब्दों का मतलब हम से कईयों ने
टटोलने की कोशिश नहीं की मगर उन्हें बरसों से सुनते आ रहे
हैं. गीतों पर ज्यादा रिसर्च ज्यादा दिमाग वाले लोग किया
करते हैं. कई तो गीत के अस्तित्व पर सवालिया निशान भी
लगा दिया करते हैं. कोई मीटर पर बहस करता मिल जायेगा
आपको तो कोई किलोमीटर पर. किसी के लिए ग्रामर महत्त्व
रखती है तो किसी के लिए राग रागिनी. खैर जहाँ तक रोमांस
का और रोमांटिक गीतों का सवाल है वे किसी भी तरीके से
गाये जाएँ, सुनाये जाएँ, मजमून सुनने वाले के समझ आ ही
जाता है.

आज आपको साहित्यिक गीत ही सुनवाते हैं जो एक १९६७ की
फिल्म-बूँद जो बन गई मोती से लिया गया है. इसे मुकेश ने
गाया है. बोल लिखे हैं भारत व्यास ने और इसकी धुन बनायीं
है सतीश भाटिया ने. इसमें आपको एक शब्द का अर्थ बतला देते
है-वसुंधरा जिसका अर्थ है- पृथ्वी, धरा. गीत हरियाली और प्रकृति
के अद्भुत दृश्यों को समर्पित है




गीत के बोल:

हरी हरी वसुंधरा पे नीला नीला ये गगन
के जिसपे बादलों की पालकी उड़ा रहा पवन
दिशायें देखो रंगभरी, चमक रही उमंग भरी
ये किसने फूल फूल पे किया सिंगार है
ये कौन चित्रकार है, ये कौन चित्रकार है
ये कौन चित्रकार है...

तपस्वीयों सी हैं अटल ये पर्वतों की चोटियाँ
ये सर्प सी घूमेरदार, घेरदार घाटियाँ
ध्वजा से ये खड़े हुये हैं वृक्ष देवदार के
गलीचे ये गुलाब के, बगीचे ये बहार के
ये किस कवि की कल्पना का चमत्कार है
ये कौन चित्रकार हैं

कुदरत की इस पवित्रता को तुम निहार लो
इसके गुणों को अपने मन में तुम उतार लो
चमका लो आज लालिमा, अपने ललाट की
कण-कण से झाँकती तुम्हें, छबि विराट की
अपनी तो आँख एक है, उसकी हज़ार है
ये कौन चित्रकार है
.....................................................................
Hari hari vasundhara pe-Boond jo ban gayi moti 1967

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Jul 23, 2013

धक्कम धक्का हुआ-कामयाब १९८४

गीतों में विज्ञान के प्रयोग पर चर्चा हो जाए. एक शब्द है-बल .कोई
भी कार्य करने के समय इसकी याद अवश्य आती है. यहाँ तात्पर्य
रस्सी में पड़े बल से कतई नहीं है जी और न ही बल-प्रयोग से.व्हाट
एन आईडिया सर जी

धक्का मुक्की करना-इसमें बल का प्रयोग होता है. इस गीत को
सुन लीजिए आपको भौतिकी के सिद्धांत याद आना शुरू हो जायेंगे.

फिल्म का नाम है कामयाब . ये जब रिलीज़ हुयी थी तब उस समय
चूने पुते पोस्टरों पर लिखा होता था-काम्याब, जिसे पढ़ कर सहज
ही अनुमान हो जाता था कि कामयाब होने के लिए पढाई लिखाई की
ज़रूरत नहीं वरन माथे पर चमकते सितारे होना आवश्यक है. जनाब
इस फिल्म का निर्देशन काफी पढ़े लिखे निर्देशक ने किया था जो नाम
के आगे अपनी बी. ए. की डिग्री लगाते थे.

प्यार पक्का करने के लिए किसी मजबूत जोड़ वाले चिपकाऊ पदार्थ की
ज़रूरत नहीं धक्का मुक्की से भी ये पक्का हो सकता है.

क्या गीत है, वाह. ऑंखें हरी हो जाती हैं ऐसे गीत देख कर. दो
चोटी वाली नायिकाएं, नारियल के पेड़, हरे भरे खेत.

नायिका शायद संगीतकार से प्रेरित है. उसने भी गहनों का काफी वजन
लाद रखा है. उम्मीद है संगीतकार को आप पहचान ही गए होंगे.
गायक गायिका हैं-आशा और किशोर.

मोटे चश्मे वाले कृपया अपना चश्मा लगा कर वीडियो देखने अन्यथा ऐसा
महसूस होगा कि सरसों से भरी और राई से भरी बोरियां उछल रही हों. 



गीत के बोल:

धक्कम धक्का हुआ
प्यार बड़ा पक्का हुआ
धक्कम धक्का हुआ
प्यार बड़ा पक्का हुआ
....................

Dhakkam dhakka hua-Kaamyab 1984

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Jan 30, 2012

कोमल मधुर चतुर -कैदी १९८४

आज आपको बप्पी दा का कम्पोज़ किया एक गीत सुनवाने का मन कर रहा था
अपनी सूची देखने पर पता चला आप सुन चुके हैं एक बार फिल्म कैदी का गीत
कोई बात नहीं इस फिल्म का दूसरा गीत सुन लेते हैं । गीतकार इन्दीवर को इस
गीत में साहित्यिक शब्द प्रयोग करने के लिए काफी जगह मिली है।

बप्पी लहरी को वर्तमान पीढ़ी "डर्टी पिक्चर" के संगीत निर्देशक के रूप में
पहचानती है। चलिए एक बार फिर से स्वर्ण युक्त(तकरीबन ९-१० किलो)
संगीत निर्देशक के सोने की झंकार वाला संगीत श्रोताओं को एक बार फिर से
सुनने को मिला।

नायक नायिका हैं जीतेंद्र और माधवी। गायक गायिका हैं-किशोर और लता।
नायक जीतेंद्र को चुस्त दुरुस्त रखने में ३०+ का जितना हाथ है उतना ऐसे
फुर्तीले नृत्य वाले गीतों को भी हाथ है। इसको हम कैलोरी जलाने वाला गीत
कह सकते हैं। इसको देख कर आपकी आँखों की भी अच्छी कसरत हो जावेगी।



गीत के बोल:

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
स्वर्ग के लोक से आई तेरे लिए
तू भी आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी

तन तेरा मन्दिरम मन तेरा सुन्दरम
अर्पणं तुझपे है जीवनं यौवनम
तन तेरा मन्दिरम मन तेरा सुन्दरम
अर्पणं तुझपे है जीवनं यौवनम
नैन को नैन से प्राण को प्राण से तू मिला
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी

जब भी लूं मैं जनम तू बने वल्लभं
जप किये ताप किये तब मिले दर्शनं
जब भी लूं मैं जनम तू बने वल्लभं
जप किये ताप किये तब मिले दर्शनं
ये हमारा मिलन देगा धरती को
नाम एक नया

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
स्वर्ग के लोक से आई तेरे लिए
तू भी आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ

कोमल मधुर चतुर चपल तेरा हर अंग
सर्वांग सुंदरी
.............................
Komal madhur chatur-Qaidi 1984

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Oct 18, 2011

बड़े बेवफा हैं ये हुस्न वाले-रूप तेरा मस्ताना १९७२

आज एक गीत स्वतः दिमाग में आया सोचा आपको सुनवा दिया जाये और तो,
संयोगवश ये आपको स्मार्ट इंडियन सुनवा चुके हैं अपने ब्लॉग पर कुछ ही दिन
पहले । इस फिल्म का नाम सुन कर आपको शायद १९६९ की आराधना के किशोर
के गाये गीत की याद अवश्य ही आएगी।

इस गीत में भाव लगभग वही हैं पत्थर के सनम वाले गीत के-'पत्थर के सनम
तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना
'। फर्क इतना है कि वो गीत मजरूह का लिखा
हुआ है और परदे पर मनोज कुमार पर फिल्माया गया है और इस गीत के गीतकार
आनंद बक्षी हैं और इसे परदे पर जीतेंद्र गा रहे हैं। दोनों गीतों में आपको मुमताज़
नामक अभिनेत्री दिखाई देती हैं। ये उस दौर की फिल्म है जिसमें अभिनेत्री मुमताज़
प्रथम श्रेणी कि सफल अभिनेत्रियों कि कतार में शामिल हो चुकी थीं।

गायक दोन ही गीतों के हैं-रफ़ी और संगीत भी दोनों गीतों का संगीतकार जोड़ी
लक्ष्मीकान्य प्यारेलाल ने तैयार किया है। गौर तलब है कि १९६७(पत्थर के सनम )
और १९७२ (रूप तेरा मस्ताना) तक लक्ष्मी प्यारे उसी शैली को बरकरार रख पाने
में सफल रहे। ये फिल्म अलबत्ता ज्यादा नहीं चली मगर फिल्म का ये गीत बेहद
लोकप्रिय हुआ।

गीत को आप निस्संदेह जीतेंद्र पर फिल्माए रफ़ी के सर्वश्रष्ठ गीतों में गिन सकते
हैं। गीत में आपको प्राण और अरुणा ईरानी नाम के कलाकार भी दिखाई देंगे।
प्राण तो स्वाभाविक तौर पर फिल्म के खलनायक ही हैं।



गीत के बोल:


हो ओ ओ ओ ओ ओ

बड़े बेवफा है ये हुस्न वाले
बड़े बेवफा है ये हुस्न वाले
पर तेरी बात कुछ और है

बड़े बेखबर है ये इश्क वाले
पर मेरी बात कुछ और है

बड़े बेवफा है ये हुस्न वाले

मिट गया जिस पे ये हो गए मेहरबान
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
मिट गया जिस पे ये हो गए मेहरबान
हुस्न वालो की है बस यही दास्ता
कैसे कैसे न जाने दीवाने दिल
इन्ही बेवफाओ ने तोड़ डाले

बड़े बेवफा है ये हुस्न वाले

तू कही जानेमन रूठ जाना नही
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तू कही जानेमन रूठ जाना नही
ज़िक्र तेरा ये तेरा फ़साना नही
भोली भाली है इनकी सूरत मगर
बड़े संगदिल है यह भोले भाले

बड़े बेवफा है ये हुस्न वाले
पर तेरी बात कुछ और है

बड़े बेवफा है ये हुस्न वाले
........................................
Bade bewafa hain ye husn waale-Roop tera mastana १९७२

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Aug 10, 2011

अटका अटका दिल मेरा-होशियार १९८४

बिना विवरण के भी एक गीत सुन लीजिए आज। ये होशियार सा गीत
है फिल्म होशियार से। कैलोरी कैसे कम की जाये इस गीत से सीख सकते
हैं आप.



गीत के बोल:

अगर आप वाकई इस गीत को सुन रहे हैं तो बोलों के लिए
लिए चटका(कमेन्ट) लगा दें एक
.................................
Atka atka dil mera-Hoshiyar 1984

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Jul 11, 2011

चोली तेरे तन पर-होशियार १९८४

सेब सौ रूपये किलो हैं आजकल ? मीडिया का बस चले तो दो सौ
रूपये भी बिकवा दे. किसी एक जगह कोई चीज़ महंगी मिलने लगती
है तो चैनल वाले उसका ढोल पीट पीट कर पूरे देश को बतला देते हैं .
इस प्रचार का मकसद क्या है समझ नहीं आता, इतना ज़रूर होता है
कि बाकी सब जगह उस चीज़ का भाव दूसरे दिन से बढ़ जाता है.

यू -ट्यूब पर गीत में जिस फल को जनता सेब के रूप में पहचान
रही है, मुझे तो वो संतरा या मौसंबी नज़र आ रही है. अगर वाकई
सेब है तो किसी पीलिया ग्रस्त बगीचे के होंगे.

दक्षिण भारत की कुछ ८० के दशक की फिल्मों से ये ट्रेंड शुरू हुआ
जिसमें कुछ तो सब्जी फल उछलते हैं, कुछ नायक नायिकाएं. ये भी
एक दक्षिण भारत में निर्मित फिल्म है जिसमें नायक जीतेंद्र के साथ
मीनाक्षी शेषाद्री हैं. इस फिल्म के निर्देशक हैं-के. राघवेन्द्र राव(बी. ऐ.)
और फिल्म का नाम है होशियार. सन १९८४ में ये फिल्म रिलीज़ हुई थी.
काफी होशियारी से ये फिल्म बनायीं गयी थी जिसने कम समय में ही
निर्माण की लागत वसूल ली.



गीत के बोल:

चोली तेरे तन पर, तन पर कसी कसी
रहती है तू मन में, मन में बसी बसी

जाए न असर तेरी आँखों का
उतरे न ज़हर तेरी बातों का
जाए न असर तेरी आँखों का
उतरे न ज़हर तेरी बातों का
ज़िन्दगी डसी डसी डसी डसी

तेरे तेरे मुख पर मुख पर हंसी हसनी
तेरी छबि दिल में दिल में बसी बसी
घेरा है मुझे तेरी राहों में
जकड़ा है मुझे तेरी बाँहों ने
घेरा है मुझे तेरी राहों में
जकड़ा है मुझे तेरी बाँहों ने
जवानी हंसी हंसी हंसी हंसी

चोली तेरे तन पर, तन पर कसी कसी
आ आ आ आ आ
...............................
Choli tere tan par-Hoshiyar 1984

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May 28, 2011

तेरे लिए मैंने जनम लिया-सिंहासन १९८६

आपको इसी श्रेणी से अगला गीत सुनवाते हैं फिल्म सिंहासन से। अंग्रेजी
में इस फिल्म का नाम सिंघासन पढने में आता है। अब थोड़ी सी बी ऐ से
बी. एड. तो हो ही जाती है ना जी नाम रखने में। ढेर सारे कलाकारों को
रोज़गार देने वाला ये पर्ववारण प्रेमी गीत भी एक आकर्षक धुन में बंधा है।
नृत्य भी इसका मनोरंजक है। आनंद उठाइए किशोर कुमार और दक्षिण
भारत की नामचीन और बढ़िया गायिका पी. सुशीला के युगल गीत का जिसे
फिल्माया गया है जीतेंद्र और जया प्रदा पर। संगीत एक बार फिर से वही,
जी हाँ, बप्पी लहरी का है और बोल इन्दीवर के हैं। इस गीत में नायक और
नायिका ने फुगडी वाला पुराना खेल भी खेला है।



गीत के बोल:

हा आ आ आ, हा आ आ आ आ आ

छूम नाना छूम, छूम नाना छूम
छूम नाना छूम, छूम नाना छूम

हो हो हो हो हो, हा हा हा हा
हा आ आ आ आ, हा आ आ आ

तेरे लिए मैंने जनम लिया
मेरे लिए तूने जनम लिया

तेरे लिए मैंने जनम लिया
मेरे लिए तूने जनम लिया

महलों को मैंने छोड़ा
गलियों से नाता जोड़ा
महलों को मैंने छोड़ा
गलियों से नाता जोड़ा

लाखों का दिल तोडा मैंने
एक तेरे लिए

झूम झूम झूम, झूम ताना झूम
झूम झूम झूम, झूम ताना झूम

तेरे लिए मैंने जनम लिया
मेरे लिए तूने जनम लिया

हो हो हो हो, ला ला ला ला
हा हा हा हा, ला ला ला ला

बिन मांगे खुद को ही तोहफे में तुझको दे दूं
दुःख तेरा, तेरी बला सर पर अपने ले लूं

झूम झूम झूम, झूम ताना झूम
झूम झूम झूम, झूम ताना झूम

बिन मांगे खुद को ही तोहफे में तुझको दे दूं
दुःख तेरा, तेरी बला सर पर अपने ले लूं
दुश्मन हो दुनिया सारी तोड़ेंगे हम ना यारी
दुश्मन हो दुनिया सारी तोड़ेंगे हम ना यारी

लाखों का दिल तोडा मैंने
एक तेरे लिए

झूम झूम झूम, झूम ताना झूम
झूम झूम झूम, झूम ताना झूम

तेरे लिए मैंने जनम लिया
मेरे लिए तूने जनम लिया

झूम ताना झूम, झूम ताना झूम
झूम ताना झूम, झूम ताना झूम

जीने को जैसे पवन तू मुझे ऐसे ज़रूरी
तेरे बिना रह ना सकूं, सह ना सकूं तेरी दूरी

झूम झूम झूम, झूम ताना झूम
झूम झूम झूम, झूम ताना झूम

जीने को जैसे पवन तू मुझे ऐसे ज़रूरी
तेरे बिना रह ना सकूं, सह ना सकूं तेरी दूरी
हर साथ मैंने छोड़, हर हाथ मैंने छोड़ा

लाखों का दिल तोडा मैंने
एक तेरे लिए

झूम झूम झूम, झूम ताना झूम
झूम झूम झूम, झूम ताना झूम

तेरे लिए मैंने जनम लिया
मेरे लिए तूने जनम लिया
महलों को मैंने छोड़ा
गलियों से नाता जोड़ा

लाखों का दिल तोडा मैंने
एक तेरे लिए

छूम छूम छूम, छूम नाना छूम
झूम झूम झूम, झूम नाना झूम
..............................
Tere liye maine janam liya-Singhasan 1986

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चांदनी रात ये सनम-कैदी १९८४

आइये बी. ए. , बी. एस. सी., ऍम, ए. योग्यता धारक निर्माता निर्देशकों
के दौर में वापस चला जाये। दक्षिण भारतीय निर्माता निर्देशक शैक्षणिक
योग्यता के मामले में उत्तर भारतीय भाइयों से बहुत आगे हैं। उनको अपने
नाम के साथ योग्यता लिखने में कोई परहेज़ नहीं है। उस दौर की फिल्मों
में जीतेंद्र, कदर खान या उनके संवाद, इन्दीवर के गीत और बप्पी लहरी
का संगीत आवश्यक तत्त्व जैसे हुआ करते थे। जीतेंद्र के साथ तकरीबन
१० दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों ने काम किया। उनमें से एक हैं माधवी
अपनी समकालीनों की तरह वे भी नृत्य कला में प्रवीण हैं। प्रस्तुत गीत
में नाग-नागिन डांस जैसा मसाला आप देख पाएंगे। काफी रोमांटिक किस्म
का गीत है। रोमांस के बाकी अर्थ भी आप सोच सकते हैं इस गीत को देख
कर। खैर, ये गीत अपनी आकर्षक धुन की वजह से बहुत ज्यादा बजा था।
आशा भोंसले और किशोर कुमार इस गीत के पार्श्व गायक हैं। इन्दीवर
के गीत में भी आपको उनकी छाप कहीं ना कहीं अवश्य मिल जाएगी।
उनका शब्दों का चयन एक स्वचालित प्रक्रिया जैसा था।



गीत के बोल:

चांदनी
चांदनी रात ये सनम
नहीं प्रेमियों को जन्नत से कम

चांदनी
चांदनी रात ये सनम
नहीं प्रेमियों को जन्नत से कम

आओ जी भर के प्यार करो
कोई देखे तो देखने दो

चांदनी
चांदनी रात ये सनम
नहीं प्रेमियों को जन्नत से कम

आओ जी भर के प्यार करो
कोई देखे तो देखने दो

आ जा, आ जा, हो हो हो, आ हा हा हा
जिनमें जान है, जिनमें दिल है
उन सबके अन्दर है प्यार
जिनमें जान है, जिनमें दिल है
उन सबके अन्दर है प्यार
हम क्या तुम क्या, प्यार में डूबा
सारा ये संसार
हम क्या तुम क्या, प्यार में डूबा
सारा ये संसार

चांदनी
चांदनी रात ये सनम
नहीं प्रेमियों को जन्नत से कम

आओ जी भर के प्यार करो
कोई देखे तो देखने दो

आ जा, आ जा, हो हो हो, आ हा हा हा

तारों के फेरे करती है धरती
धरती के फेरे चंदा
तारों के फेरे करती है धरती
धरती के फेरे चंदा
तेरे मिलन की चाह में घूमे
मेरा प्राण पतंगा
तेरे मिलन की चाह में घूमे
मेरा प्राण पतंगा

चांदनी
चांदनी रात ये सनम
नहीं प्रेमियों को जन्नत से कम

आओ जी भर के प्यार करो
कोई देखे तो देखने दो

आ जा, आ जा, हो हो हो, आ हा हा हा
..........................................
Chandni raat ye sanam-Qaidi 1984

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Nov 23, 2010

ओ मेरी जान-जानी दुश्मन १९७९

जम्पिंग जैक साहब का एक गीत और सुना जाए। थोडा तेज़ गति वाला ये
गीत कसा हुआ है फिल्मांकन में। फिल्म जानी दुश्मन के लगभग सारे गीत
देखने लायक हैं। इस गीत में भी उनकी जम्पिंग न्यूनतम है। लोग खामखाँ
उनके नाम के साथ जम्पिंग शब्द लगा देते हैं।

किशोर कुमार के साथ गीत गा रही हैं अनुराधा पौडवाल। संगीतकार जोड़ी
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने समय के साथ चलते हुए नए गायक, गायिकाओं को
अवसर दिया और उनकी ये स्ट्राटेजी सफल भी रही। अनुराधा पौडवाल के
कैरियर के पहले कुछ गीतों में से एक है ये।

परदे पर आपको जीतेंद्र और नीतू सिंह की जोड़ी दिखाई देगी जो पेड़ों के इर्द गिर्द
डांस डॉयरेक्टर के इशारों पर नाच रहे हैं।




गीत के बोल:

ओ हो हो हो हो हो
हो हो हो हे हे हे

ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया

ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
उस दिन से मुझे कुछ हो गया

ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया

प्यार जो किया तो भुलाना ना मुझे
छोड़ जाना ना मुझे तडपाना ना मुझे

ना छोड़ना मुझे, तडपाना ना मुझे
प्यार जो किया तो भुलाना ना मुझे
छोड़ जाना ना मुझे तडपाना ना मुझे

मेरे प्यार को है तेरा आसरा
आबाद तुझसे है मेरा जहान

ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
उस दिन से मुझे कुछ हो गया

हर घडी अब मुझे यही काम है
तेरी याद है या तेरा नाम है

या तेरी याद है या तेरा नाम है
हर घडी अब मुझे यही काम है
तेरी याद है या तेरा नाम है

तेरे मिलने से धड़कन ने अंगडाई ली
दिल की तमन्ना हुई है जवान

ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
अरे ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया

खुल गए ज़िन्दगी के नए रास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते

तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते
खुल गए ज़िन्दगी के नए रास्ते
तू मेरे वास्ते, मैं तेरे वास्ते

है मोहब्बत के मालिक तेरा शुक्रिया
समझो अगर मेरे दिल की जुबां

ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
ओ मेरी जान
बोल मेरी जान
तू नीदों में सपने पिरो गया
तेरी आँखों ने क्या जादू किया
मैं भी गया मेरा दिल भी गया
.........................................................................
 O meri jaan-Jaani dushman 1979

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Nov 22, 2010

तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ -जानी दुश्मन १९७९

एक सुपर डुपर हिट गीत सुना जाए। आप सोच रहे होंगे किसी
काली पीली फिल्म से होगा। नहीं जी, ये तो रंगीन युग वाला है जी।
शादी स्पेशल युग(९० का दशक) के बहुत पहले बना हुआ है जी ये तो।
१९७९ की फिल्म जानी दुश्मन में ये गीत है। सुनते ही आपको याद
आएगा की इसको खूब बजते सुना था जगह जगह। दूरदर्शन के
चित्रहार पर भी इसे खूब देखा गया था। उस समय एक ही तो गीत वाला
कार्यक्रम हुआ करता था-चित्रहार। उसेक अलावा विडियो गीत देखने का
कोई जरिया नहीं हुआ करता था। गीत अच्छी खासी कसरत करवा देता
है, सितारों की भीड़ जो है इसमें। राज कुमार कोहली निर्देशित फिल्म
में काफी भव्य सेट इस्तेमाल किये गए थे। इस गीत के फिल्मांकन में
सबसे ज्यादा व्यय हुआ होगा। इस गीत में 'जम्पिंग जैक' साहब ने जो
वस्त्र पहन रखे हैं उनकी नक़ल काफी देखने को मिली थी फिल्म के
रिलीज़ के कुछ समय बाद। एक बात तो तय है कि इस गीत में जीतू
भाई ने अपनी ट्रेड मार्क जम्पिंग बहुत कम की है ।

गीत में आपको जो कलाकार दिखाई देंगे उनके नाम इस प्रकार से हैं-
जीतेंद्र, नीतू सिंह, बिंदिया गोस्वामी, और सारिका।



गीत के बोल:

तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ, ओ चूड़ियाँ
हाथों में पहना के चूड़ियाँ
ओ तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ
के मौज बंजारा ले गया, हाय
के मौज बंजारा ले गया, ले गया

तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ

तूने दिल तक तो मेरा ले लिया, ओ ले लिया
दिल तक तो मेरा ले लिया
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया
के वो क्या बेचारा ले गया, हाय
के वो क्या बेचारा ले गया, ले गया
तूने दिल तक तो मेरा ले लिया

मेरे सामने ही कोई बेगाना
मेरे सामने ही कोई बेगाना
के रूप का नज़ारा ले गया, हाय
के रूप का नज़ारा ले गया ले गया

तू जलता है क्यों रे दीवाने
दीवाने,
तू जलता है क्यों रे दीवाने
के वो क्या तुम्हारा ले गया, हाय
के वो क्या तुम्हारा ले गया, ले गया

तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ

हो, इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
जवानी तेरे किस काम की
इसे मेरे ही तू नाम लगा दे
जवानी तेरे किस काम की

दिल लेगा मेरा कोई दिलवाला
दिल लेगा मेरा कोई दिलवाला
ये बात नहीं तेरे बस की, बस की
आज हुस्न का जलवा दे-दे
आज हुस्न का जलवा दे-दे
तो कल से मैं तौबा कर लूं हाय
तो कल से मैं तौबा कर लूं, कर लूं
आज हुस्न का जलवा दे-दे
साल सत्रह संभाला इसे मैंने
ओ मैंने
साल सत्रह संभाला इसे मैंने
रे ऐसे कैसे तुझे सौंप दूं, हाय
ऐसे कैसे तुझे सौंप दूं , सौंप दूं

तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ

तेरे होंठों से लिपट जाऊं सजनी
मैं सुर्खी का रंग बन के हाय
तेरे होंठों से लिपट जाऊं सजनी
मैं सुर्खी का रंग बन के
तेरे जैसे कई
तेरे जैसे कई लुट गए कुंवारे
पायल मेरी जब छनके जब छनके,
जब छनके
गोरा रंग ना किसी का होवे
गोरा रंग ना किसी का होवे
के सारा जग बैरी हो जाए
सारा जग बैरी हो जाए, हो जाए
सारे जग से निपट लूं अकेली, अकेली
सारे जग से निपट लूं अकेली
के पहले तू जो मेरा हो जाए, हाय
के पहले तू जो मेरा हो जाए, हो जाए

छोडो झगडे मिला लो दिल को
छोडो झगडे मिला लो दिल को
रहो ना ऐसे तन-तन के, हाय
ना रहो ऐसे तन तन के, तन तन के
तेरे घर में उजाला कर दे
तेरे घर में उजाला कर दे
तू ले जा इसे दूल्हा बन के हाय
तू ले जा इसे दुल्हन बन के
दूल्हा बन के

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Nov 19, 2010

अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर-स्वर्ग से सुन्दर १९८६

बॉलीवुड के निर्देशकों ने कौनसी विषय-वस्तु छोड़ी है
इस पर मैं काफी सोचता हूँ। शायद मंगल ग्रह की सैर
पर कोई गीत नहीं बना है अभी तक।

जीव जंतुओं और पशु-पक्षियों पर हिंदी सिने-जगत
काफी मेहरबान रहा है, हालाँकि अभी भी 'Anaconda'
या 'Jurassic Park' जैसी क्लासिक फिल्म का इंतज़ार
है।

आज हो गीत हम आपको सुना रहे हैं वो मच्छरों को
समर्पित है। फिल्म का नाम है स्वर्ग से सुन्दर। इसके
निर्देशक हैं के. बापैया । नटखट गीत के लिए गायक भी
उपयुक्त चुने गये हैं-किशोर कुमार और आशा भोंसले ।
लिखा है आनंद बक्षी ने और इसे धुन से सजाया है
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।

मच्छर गाथा परदे पर गाने वाले कलाकार हैं जीतेंद्र
और जया प्रदा।



गीत के बोल:

हो, ओ ओ ओ ओ
अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर, हो
अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर
अरे स्वर्ग में आये कहाँ से आये मच्छर,
हाय
ये मच्छर
स्वर्ग में आये कहाँ से आये मच्छर
अरे मच्छर भी आशिक हैं तुम पर क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं

अरे काट रहा है मुझको बिस्तर
अच्छा
ये बिस्तर
काट रहा है मुझको बिस्तर

अरे बिस्तर भी आशिक हैं तुम पर क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं

अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर

शादी से पहले की रातें
भूल गए तुम सारी बातें
हो ओ ओ ओ
शादी से पहले की रातें
भूल गए तुम सारी बातें

अरे नयी मोहब्बत हाय नयी जवानी
अरे नयी मोहब्बत नयी जवानी
हो गई अब हर चीज़ पुराणी
हो गई अब हर चीज़ पुराणी

याद वो दिन आते हैं अक्सर क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं

अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ऊं हूँ
ना ना ना ना
आ हा आ, आ आ आ
ऊं हूँ, हो

प्यार में ये गुस्सा अच्छा है
पर बीच में ये तकिया क्यूँ रखा है
प्यार में ये गुस्सा अच्छा है
पर बीच में ये तकिया क्यूँ रखा है

बात है लम्बी रात है थोड़ी
किसने बनाई थी ये जोड़ी
मैं हूँ शीशा तुम हो पत्थर क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं

अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर

जो होता है वो होने दो
जो होता है वो होने दो
मुझको थोडा सा सोने दो

घर आते ही आ गई निंदिया
काहे लगायी मैंने बिंदिया
घर आते ही आ गई निंदिया
काहे लगायी मैंने बिंदिया

बैठी रह गई मैं सज धज कर क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं

अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर
स्वर्ग में आये कहाँ से आये मच्छर
ये मच्छर
स्वर्ग में आये कहाँ से आये मच्छर
अरे मच्छर भी आशिक हैं तुम पर क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं
हाय मैं क्या करूं

अपना घर है स्वर्ग से सुन्दर
.................................
Apna ghar hai swarg se sunder-Swarg se sunder 1986

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Nov 14, 2010

कौन सी है चीज़ जो यहाँ-जैसे को तैसा १९७३

बाल दिवस के अवसर पर एक गीत पेश है ७० के दशक से।

फिल्म उद्योग ने पारंपरिक दिखने वाली माँ से लेकर
आधुनिक दिखने वाली माँ देखी है पिछले ७०-७५ सालों
में, जबसे हिंदी चलचित्र निर्माण प्रारंभ हुआ। माँ के पॉवर
को सभी बॉलीवुडियों ने माना और महसूस किया ।

एक गीत सुना जाए फिल्म जैसे को तैसा से, जो माँ की
महिमा का बखान कर रहा है। आनंद बक्षी इसके रचयिता
हैं और इसे गा रहे हैं किशोर और आशा। संगीत पंचम का है।
परदे पर जीतेंद्र और अनजान अभिनेत्री दिखाई देंगे आपको
साथ में माँ के रोल में हैं पुराने ज़माने की नामचीन अभिनेत्री
कामिनी कौशल।

इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी आगे, तब तक सुनते
और देखते रहिये मधुर गीत।



गीत के बोल:

हो, कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
माँ नहीं मिलती

याद किसी को हो तो
ऐसी बात सुनाएँ
जिसमे कहीं ना कहीं
माँ का नाम ना आये

दुनिया में कोई ऐसी दास्तां नहीं मिलती
हो, सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

जिनकी माँ होती है
खुशकिस्मत होते हैं
जिनकी माँ नहीं होती
जीवन भर रोते हैं
हो ओ ओ ओ ओ ,
जिनकी माँ होती है
खुशकिस्मत होते हैं
जिनकी माँ नहीं होती
जीवन भर रोते हैं

जिस्म उन्हें मिलते हैं लेकिन
जान नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

मंदिर पे भी ऐ मन
कुछ राही नहीं रुकते
ईश्वर के आगे भी
कितने सर नहीं झुकते

माँ को जो ना माने वो जुबां नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती

कौनसी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती
सब कुछ मिल जाता है लेकिन, हाँ
माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती
हाँ, माँ नहीं मिलती

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Nov 11, 2010

भैया रे भैया रे -जैसे को तैसा १९७३

'जैसे को तैसा' फिल्म का एक और गीत जो फिल्म में फिलर की तरह
इस्तेमाल किया गया है। 'फिलर' मतलब ऐसे गीत जो फिल्म में हों या
ना हों कोई फर्क नहीं पड़ेगा।



गीत के बोल:

भैया रे भैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

ओ दैया रे दैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

हे, भैया रे भैया रे
ओ दैया रे दैया रे

जो जैसा करता है, आ हा
वो वैसा भरता है , आ हा
के मरने वाला खुद भी मरता है
खुद भी मरता है, मरता है रे
जो जैसा, हाँ, करता है, हाँ
वो वैसा भरता है
के मरने वाला खुद भी मरता है, रे

कंस को मारे कन्हैया

भैया रे भैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

हे, भैया रे भैया रे
ऐ दैया रे दैया रे

कहते हैं दिलवाले
सुन ले सब धन वाले
ये दोस्तों को दुश्मन बना डाले
दुश्मन बना डाले
कहते हैं दिलवाले, आ हा
सुन ले सब धन वाले, आ हा
ये दोस्तों को दुश्मन बना डाले
आ हा आ

ऐसे में भेद रुपैया

दैया रे दैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

दैया रे दैया रे
भैया रे भैया रे

ऊपर से और है, आ हा
अन्दर से कुछ और है, आ हा
तू चोर है के ना जाने मोर है
मोर है
ऊपर से और है, हाँ
अन्दर से कुछ और है, हाँ
तू चोर है के ना जाने मोर है

तू है भंवर या खिवैया

भैया रे भैया रे
पाप की नैया रे
बीच तलैया रे
दुनिया कहती है
आज हो या कल
डूब के रहती है

हे, भैया रे भैया रे
दैया रे दैया रे
हे, भैया रे भैया रे
दैया रे दैया रे
हे, भैया रे दैया रे
भैया रे दैया रे
भैया रे दैया रे

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Oct 31, 2010

कज़ा पर्दा ज़फ़ा पर्दा - हिम्मत और मेहनत -१९८७

"घूंघट के पट खोल रे तुझे सैयां मिलेंगे ....." इसके आगे की पंक्तियाँ
मुझसे सुनिए - आगरा में मत डोल रे, वे तो मथुरा मिलेंगे
कभी कभी घासलेटी कवि ह्रदय हिलोरे लेने लगता है और तुकबंदी
निकल आती है। बादाम पिस्ता नसीब नहीं है, वो तो भला हो सयाने
चिट्ठाकारों का जिनके चिट्ठे पढ़ते पढ़ते दिमाग के लट्टू जल उठते हैं।

घूंघट यानि कि पर्दा; छोटा पर्दा, चेहरे पर डाला जा सकने वाला। इसमें
विशेष क्या है। क्यूँ नेताओं के चेहरे पर पड़े परदे को नकाब कहा जाता है
पर्दा नहीं। तो जनाब परदे और नकाब में फर्क है। पर्दा काली करतूतों पर
भी डाला जा सकता है जैसे कि जांच समितियां अक्सर डाला करती हैं ।

फिल्म को 'बड़ा पर्दा 'और टेलीविज़न को 'छोटा पर्दा'। वाह जनाब क्या
नामकरण किया है मीडिया ने।

पर्दा शब्द को लोकप्रिय बनाया फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' की क़व्वाली
ने। उसके पहले आम जन को परदे का मतलब अच्छे से मालूम नहीं था।
आम जनता के फंडे फ़िल्में देखने से ज्यादा क्लीयर हुआ करते हैं। हमदर्द
का टॉनिक वो असर नहीं करता जो फिल्म के हीरो के डॉयलॉग कर दिया
करते हैं।

आपने इतनी हिम्मत और मेहनत से ये पोस्ट पढ़ी है अतः आपको आज
'हिम्मत और मेहनत' नाम की एक फिल्म का गीत सुनवाते हैं। इस गीत
पे चटकऊ-मटकऊ डांस कर रहे हैं जीतेंद्र और श्रीदेवी। किसी टॉवेल बनाने
वाली कंपनी ने विशेष तौर पर नायिका के लिए ये ड्रेस मटेरिअल उपलब्ध
करवाया होगा।



गीत के बोल:

छुई मुई छुई मुई हो गई
दिल में सुई चुभो गई

अरे,छुई मुई छुई मुई हो गई
दिल में सुई चुभो गई

दिखला दे तू जलवा
उठा भी दे पर्दा

कज़ा पर्दा ज़फ़ा पर्दा
हटा भी दे ज़रा पर्दा

परदे का का क्या कहना
लड़की का ये गहना

अरे परदे का क्या कहना
लड़की का ये गहना
लड़की फिर कुछ भी नहीं
हुई जो बेपर्दा

हया पर्दा वफ़ा पर्दा
मोहब्बत की अदा पर्दा

हूँ हो हूँ हो


छुई मुई छुई मुई हो गई
दिल में सुई चुभो गई

हुस्न भी इतना
ना ना ना
इतनी जवानी
हं हं हं
उसको उम्र भर
देखे तो दिल ना भरे
हवास की मारी
हाय हाय हाय
नज़र तुम्हारी
होए होए होए
जहाँ मना है
वहां भी देखा करे

हुस्न भी इतना
इतनी जवानी
उसको उम्र भर
देखे तो दिल ना भरे
हवास की मारी
नज़र तुम्हारी
जहाँ मना है
वहां भी देखा करे

सिला उसको
मिला जिसने
हसीनों का
रखा पर्दा

छुई मुई छुई मुई हो गई
दिल में सुई चुभो गई

दिखला दे तू जलवा
उठा भी दे पर्दा

हया पर्दा वफ़ा पर्दा
मोहब्बत की अदा पर्दा

चिलमन डालो
ना ना ना
पर्द गिरा लो
हं हं हं
हुस्न का जादू
परदे से क्या छुप सका

लाज किसी की
हाय हाय हाय
कांच की चूड़ी
होए होए होए
टूट ना जाए
छू के ना देखो पिया

चिलमन डालो
पर्द गिरा लो
हुस्न का जादू
परदे से क्या छुप सका

हो,लाज किसी की
हाय हाय हाय
कांच की चूड़ी
होए होए होए
टूट ना जाए
छू के ना देखो पिया

है दिल में क्या
हो
पता हमको
हा
है चिलमन क्या
हटा पर्दा

परदे का क्या कहना
लड़की का ये गहना
लड़की फिर कुछ भी नहीं
हुई जो बेपर्दा

हया पर्दा वफ़ा पर्दा
मोहब्बत की अदा पर्दा

छुई मुई छुई मुई हो गई
अरे दिल में सुई चुभो गई

दिखला दे तू जलवा
उठा भी दे पर्दा

कज़ा पर्दा ज़फ़ा पर्दा
हटा भी दे ज़रा पर्दा

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Oct 28, 2010

फुलझड़ी ओ गुलछड़ी - भाई हो तो ऐसा १९७२

साहिर लुधियानवी ने अपना अलग मुकाम बनाया हिंदी फिल्म
संगीत क्षेत्र में। २५ अक्टूबर उनकी पुण्यतिथि है। तीस साल
पहले उन्होंने इस संसार से विदा ली थी। उनकी लेखन प्रतिभा
के सभी कायल हैं चाहे वो आम आदमी हो या फिर कोई साहित्यकार।
उनकी लिखी कविताओं का यहाँ आनंद उठाइए - परछाइयाँ
उनके नाम का जब भी उल्लेख होता है तो गंभीर किस्म के गीतों
पर ही चर्चा मिलती है। उन्होंने कुछ हलके फुल्के अंदाज़ वाले
गीत भी लिखे हैं। उनमे से एक इधर प्रस्तुत है। ये गीत है फिल्म
"भाई हो तो ऐसा" से जो जीतेंद्र और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया है।
इसे गा रहे हैं रफ़ी और इसकी धुन बनाई है सोनिक-ओमी ने।



गीत के बोल :

ऐ फुलझड़ी ऐ गुलछड़ी
जो तूने की उलटी पड़ी

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

ऐ फुलझड़ी ऐ गुलछड़ी
जो तूने की उलटी पड़ी

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

ऐ फुलझड़ी

हांफी हुई हैं साँसें
नखरों की हार देखी
कांपी हुई हैं टांगें
मर्दों की मार देखी

हांफी हुई हैं साँसें
नखरों की हार देखी
कांपी हुई हैं टांगें
मर्दों की मार देखी

रूपा

होए, मूंह को तो खोल
ज़रा बोल, ज़रा हाय
बहकती चाल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

ऐ फुलझड़ी

लड़की वोही है अच्छी
जो लड़कियों में खेले
मर्दों के बीच तूने
काहे को दंड पेले

लड़की वोही है अच्छी
जो लड़कियों में खेले
मर्दों के बीच तूने
काहे को दंड पेले

रूपा

होए अब तो ये मान गयी
जान गयी, हाय
ये बांकेला क्या है
मेरी जान हाल क्या है

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

ऐ फुलझड़ी ऐ गुलछड़ी
जो तूने की उलटी पड़ी

होए मेरा कमाल देखा,
जाल देखा हाय,
तेरा सुर ताल क्या है
मेरी जान हाल क्या है

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Oct 26, 2010

जैसे को तैसा मिला-जैसे को तैसा १९७३

ये फिल्म का शीर्षक गीत है। हंटर से पिटाई करते वक़्त भी सधी
आवाज़ में गीत गाया जा सकता है। हिंदी फिल्म का नायक सब
कुछ कर सकता है। ये कुछ कुछ ज्योमेट्री की थेओरम की तरह है।
पीटने वाला कलाकार जीतेंद्र है और पिटने वाला कलाकार रमेश देव।
गीत किशोर ने गाया है और संगीत आर. डी. बर्मन ने दिया है। गीत
में जो फ़िल्मी मकान है उसकी सीढियां जानी पहचानी सी हैं और इसे
आप कई फिल्मों में देख चुके होंगे। गीत में हंटर की आवाज़ के लिए
जो प्रभाव इस्तेमाल किया गया है उसको सुन कर लगता है कि सर्प
की फुफकार और हंटर की आवाज़ में ज्यादा फर्क नहीं है। इस गीत
को 'रीयल एक्शन सोंग' कहा जा सकता है ।



गीत के बोल:


जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या


मुजरिम तेरा नाम है
तुझपे ये इलज़ाम है
सीधे साधे भले लोगों को
सताना तेरा काम है
मुजरिम तेरा नाम है
तुझपे ये इलज़ाम है
सीधे साधे भले लोगों को
सताना तेरा काम है

ये खता है तेरी ये सजा है तेरी
तू आगे आगे, तो मैं पीछे दौदूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

कुछ जानते वो नहीं
पहचानते वो नहीं
लातों के जो भूत होते हैं
बातों से तो वो मानते नहीं
कुछ जानते वो नहीं
पहचानते वो नहीं
लातों के जो भूत होते हैं
बातों से तो वो मानते नहीं

आ गयी वो घडी बोल कैसी पड़ी
आ ज़रा मैं तेरी बाहें मरोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

खाना है पीना है रे
हम सब को जीना है रे
हक छीनता है मगर दूसरों का
तू कितना कमीना है रे
ऐ बांगडू
खाना है पीना है रे
हम सब को जीना है रे
हक छीनता है मगर दूसरों का
तू कितना कमीना है रे

तेरे जैसे हैं जो यूँ ही मरते हैं वो
चाबुक से मारूं के आँखों को फोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

बोल, जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

जैसे को तैसा मिला
कैसा मज़ा आया
मारूं कि छोडूं, तेरी टांगें तोडूं
बता तेरी मर्ज़ी है क्या

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Oct 25, 2010

साजन कहाँ जाऊंगी मैं -जैसे को तैसा १९७३

भूतिया फ़िल्में मुझे आकर्षित करती रही हैं उसकी एक वजह उनका
संगीत होता है। ऐसी ही एक फिल्म है जिसमे भूतिया किरदार हालाँकि
छोटा सा है मगर एक मधुर गीत गाता है। फिल्म का निर्देशन मुरुगन
कुमारन साहब ने किया है और चेहरे मोहरे से वो अभिनेत्री दक्षिण की
ही नज़र आती है। हो सकता है वो मुरुगन की पसंदीदा अभिनेत्री हो जिसको
एक छोटा सा रोल इसमें दिया गया हो। गीत शुरू होते ही अपने अभिनेता का
चेहरा ऐसा भाव दिखाता है जैसे गीत गाने वाला भूत पलंग के नीचे से गाते
हुए निकल कर जंगल में घुस गया हो। अच्छा प्रभाव दर्शाया गया है। गीत
आनंद बक्षी ने लिखा है और इसे गाया है लता मंगेशकर ने। संगीत एक बार
फिर से आर. डी. बर्मन का है।




गीत के बोल:

साजन
सजना रे

साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं
साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं

मुरझा के फूल खिलते भी हैं
बिछड़े हुए मिलते भी हैं
हो, तुम रखना याद पतझड़ के बाद
बनके बहार ओ मेरे मीत
फिर तेरे गीत गाऊंगी मैं

साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं

मुझसे तो प्यार करते हो तुम
फिर किसलिए डरते हो तुम
हो, मैं हूँ मजबूर तुमसे हूँ दूर
आ जाऊं पास मिट जाए प्यास
प्यासी कहाँ जाऊंगी मैं ?

साजन कहाँ जाऊंगी मैं
वापस यहाँ आऊँगी मैं

साजन कहाँ
साजन कहाँ
साजन कहाँ

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