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Apr 15, 2015

क्या नज़ारे क्या सितारे-झील के उस पार १९७३

अब एक गीत सुनवाते हैं आपको जो कम सुना हुआ है
और जिसे जनता भी कम सुना करती है. इस गीत की
हालांकि राहुल देव बर्मन के भक्त बहुत तारीफ करते हैं,
इस गीत के बोल बढ़िया हैं, इस गीत का संगीत बढ़िया
है, इस गीत में एक्टिंग अच्छी की है कलाकारों ने, इस
गीत को गायक ने बहुत उम्दा तरीके से गाया है, इत्यादि.
गीत सिचुएशनल किस्म का है. कहानी में नायिका देखने
से मोहताज़ है, उसके आँखों के ऑपरेशन की तैय्यारी हो
चुकी है. नायक चाहता है वो ज़ल्द ठीक हो जाए और
सारे नज़ारे देख पाए.

कुछ भी हो गीत में जो चीज़ सबसे बढ़िया है वो है इसके
फिल्मांकन की लोकेशन जिसकी वजह से इसे एक बार सुन
कर आनंद उठाया जा सकता है. आप भी उठायें. इस फिल्म
का फिल्मांकन जाने माने कैमरामेन जाल मिस्त्री ने किया है




गीत के बोल:

क्या नज़ारे क्या सितारे
सबको है इंतज़ार सब हैं बेक़रार
तू कब सब देखेगी
हर कली में हर गली में
देखेगी मेरा प्यार प्यार की बहार
तू सब जब देखेगी

क्या नज़ारे क्या सितारे
सबको है इंतज़ार सब हैं बेक़रार
तू कब सब देखेगी

बादल अम्बर पे यूँ ही आता जाता रहेगा
तेरे रेशमी आँचल की तरह लहराता रहेगा
क़दमों की धूल चूमेगी ये फूल
तू जब सब देखेगी

मन में तू ऐसे समायी जैसे नदिया में नीर
मेरे नैनों के दर्पण में लगी है यूँ तेरी तसवीर
अपना ये रूप ये छाँव धूप
तू जब सब देखेगी

क्या नज़ारे क्या सितारे
सबको है इंतज़ार सब हैं बेक़रार
तू कब सब देखेगी
हर कली में हर गली में
देखेगी मेरा प्यार प्यार की बहार
तू सब जब देखेगी
.......................................................
Kya nazare-Jheel ke us paar 1973

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Jul 2, 2011

दो घूँट मुझे भी पिला दे-झील के उस पार १९७३

कहते हैं जो दिखता है वो बिकता है। दुकानदारी में ये
सिद्धांत बहुत काम का है। ब्लॉग जगत में भी यही बात
लागू होती है। मेरे ब्लॉग पर भी लागू होती है। मुझे अभी
तक विलायती या अप्रवासी हिंदी प्रेमी भारतीयों में से केवल
२-३ बंधु ही ऐसे मिले जो ब्लॉग पर नियमित रूप से नज़र
डाला करते हैं। इस ब्लॉग को बेहतर बनाने के सुझाव और
टिप्पणियों की ज़रुरत महसूस होती है कभी कभी। स्वतः
प्रेरणा से एक सीमा तक ही कुछ किया जा सकता है।

आइये आपको आज एक फरमाइशी गीत सुनवाते हैं। ये गीत है
फिल्म झील के उस पार से। गीत फिल्माया गया है मुमताज़ पर।
मुमताज़ के साथ जो कलाकार हैं परदे पर, उनका नाम अनवर
हुसैन है जो अभिनेत्री नर्गिस के भाई हैं।

इस गीत को आप शराबी गीतों की श्रेणी में रख लीजिये।




गीत के बोल:

दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या
बालमा रे, ज़ालिमा,
अरे अरे अरे अरे,
आग पानी मैं लगा दे ज़रा सी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या


गाऊंगी रे, नाचूंगी रे
तेरे लिए आज से मैं
आये शरम, लेकिन बलम ,
मर जाऊंगी लाज से मैं
गाऊंगी रे, नाचूंगी रे
तेरे लिए आज से मैं
आये शरम, लेकिन बलम,
मर जाऊंगी लाज से मैं
बालमा रे, ज़ालिमा,
अरे अरे अरे अरे,
लाज का ये घूंघट उठा दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

किस काम का ये जाम है
इसमें मज़ा वोह नहीं है
भर के भी यह ख़ाली सा है
इसमें नशा वो नहीं है
किस काम का ये जाम है
इसमें मज़ा वो नहीं है
भर के भी यह ख़ाली सा है
इसमें नशा वो नहीं है
साक़िया रे, साक़िया,
अरे अरे अरे अरे,
प्यार थोड़ा इस में मिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

हो, दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

इस पे लिखा, इस में लिखा
आये मज़ा आज ऐसे,
तडपे जिया ऐसे मेरा
बुलबुल कोई कैद जैसे
इस पे लिखा, इस में लिखा
आये मज़ा आज ऐसे,
तड़पे जिया ऐसे मेरा
बुलबुल कोई कैद जैसे
थोड़ी या पे रंज़िया,
अरे अरे अरे अरे, एक बार,
एक बार, पहरा हटा दे शराबी,
देख फिर होता है क्या

दो घूँट मुझे भी पिला दे शराबी,
देख फिर होता है क्या
............................................................
Do ghoot mujhe bhi pila de-Jheel ke us paar 1973

Artists: Mumtaz, Anwar Husaain

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Oct 24, 2009

बाबुल तेरे बागां दी मैं बुलबुल-झील के उस पार १९७३

फ़िल्म का नाम है झील के उस पार, १९७३ में आई थी।
एक अंधी लड़की का बाप अपने अन्तिम समय में एक
गाने की फरमाइश करता है. अनहोनी की आशंका से
ग्रस्त नायिका गीत सुना रही है.इस गीत की भावनाएं
मुझे हमेशा झंझोड़ती हैं उसका कारण इसमें दर्द
का कूट कूट कर भरा होना है । गीत अच्छा है
और मुझे उम्मीद है आपको भी पसंद आएगा ।
बोल आनंद बक्षी के हैं और संगीत राहुल देव बर्मन का।
गीत गाया है लता मंगेशकर ने.



गाने के बोल:

बाबुल तेरे बागां दी मैं बुलबुल
बाबुल तेरे बागां दी मैं बुलबुल
तुझे कौनसा गीत सुनाऊँ
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
हो, मैं रोऊँ या मुस्काऊँ

बाबुल तेरे बागां दी मैं बुलबुल
तुझे कौनसा गीत सुनाऊँ
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
हो, मैं रोऊँ या मुस्काऊँ

तेरे बिना मेरी कोई कदर न जाने
लोग दीवाने, लोग दीवाने

तेरे बिना मेरी कोई कदर न जाने
लोग दीवाने, लोग दीवाने

बेगाने सब अनजाने,
किसे मन की बात बताऊँ
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
हो, मैं रोऊँ या मुस्काऊँ

याद नहीं भूल गई मुझे
प्यारी प्यारी सूरत तेरी, ओ मूरत तेरी
याद नहीं भूल गई मुझे
प्यारी प्यारी सूरत तेरी, ओ मूरत तेरी
युग बीते तुझे देखे
मैं कैसे तस्वीर बनाऊं
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
हो, मैं रोऊँ या मुस्काऊँ

डोली नही, तो न सही
मुझे अर्थी में तू बिठलाना
ओ फ़िर तू जाना
डोली नही, तो न सही
मुझे अर्थी में तू बिठलाना
ओ फ़िर तू जाना

सो जाना मत खो जाना
सो जाना मत खो जाना
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ
हो, मैं रोऊँ या मुस्काऊँ

बाबुल तेरे बागां दी मैं बुलबुल
बाबुल तेरे बागां दी मैं बुलबुल
तुझे कौनसा गीत सुनाऊँ
मैं रोऊँ या मुस्काऊँ

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