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Jun 16, 2020

आओ मेरे पास और आओ-कौन कैसे १९८३

आज मशहूर कलाकार मिथुन चक्रवर्ती का जन्मदिन है.
८० के दशक के चर्चित और जनता के सबसे पसंदीदा
कलाकारों में से एक हैं मिथुन. आज भी उनकी फ़िल्में
उसी चाव से देखी जाती हैं. काफी बड़ा प्रशंसक वर्ग है
उनका जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ज्यादा हैं.

१६ जून १९५० में जन्में मिथुन की शुरुआत फिल्म जगत
में काफी धमाकेदार रही और भगवती चरण पाणिग्रही की
कहानी शिकार पर आधारित फिल्म मृगया के लिए उन्हें
फिल्मों के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस
फिल्म का निर्माण के राजेश्वर राव ने किये और निर्देशन
मृणाल सेन ने.

मिथुन ने ३५० से ऊपर फिल्मों में काम किया है और
उनकी पहली उल्लेखनीय फिल्म थी १९७८ की मेरा रक्षक.
मिथुन ने दीपक बाहरी के साथ कुछ सफल फ़िल्में की थीं.
इनमें से एक है राजश्री निर्मित तराना जिसने अपने समय
में कई शहरों में सिल्वर जुबलियाँ मनाने का रिकॉर्ड बनाया
था.

आज आपको सुनवाते हैं जासूसी फिल्म कौन कैसे से एक
गाना. गुलशन बावरा लिखित इस गीत की धुन तैयार की
है आर डी बर्मन ने और इसे किशोर कुमार ने गाया है.
गौरतलब है मिथुन पर फिल्माए गये और किशोर कुमार
द्वारा गाये गये सभी गीत लगभग लोकप्रिय हैं.

कौन कैसे का निर्देशन अनिल गांगुली ने किया है और हम
इस फिल्म को केवल कोरा कागज़, तपस्या, संकोच, तृष्णा,
खानदान जैसी फिल्मों के फैन होने की वजह से देखने गये
थे. फिल्म ने हमें निराश नहीं किया. अनिल गांगुली की
फिल्मों का संगीत पक्ष हमें काफ़ी मजबूत लगा.

प्रस्तुत गीत दीपक पाराशर पर फिल्माया गया है. इसे परदे
पर किसी ने नहीं गाया है मगर इस गाने के भावों से उस
दृश्य की मांग की पूर्ति बखूबी हो जाती है.





गीत के बोल:

आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ हो ओ
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ
यही है प्यार का समा
दर्द है जवां
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ हो ओ
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ
यही है प्यार का समा
दर्द है जवां
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ

जबसे देखा है तुम्हें
पूछो न क्या हाल हुआ
हाय जाने जाना
जबसे देखा है तुम्हें
पूछो न क्या हाल हुआ
हाय जाने जाना
पहली नजर में ही
तुमने तो लूट लिया
हाय जाने जाना
ये शोखियाँ ले ले न जां

आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ हूँ हूँ
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ

दिन ये जवानी के हैं
फिर ऐसे दिन हसीं
कभी कभी आयें
दिन ये जवानी के हैं
फिर ऐसे दिन हसीं
कभी कभी आयें
होता है जो हो जाने दे
देखो जी ये पल कहीं
यूं न चले जायें
आज का समा फिर मिले कहाँ

आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ हो ओ
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ
यही है प्यार का समा
दर्द है जवां
आओ मेरे पास और आओ
न घबराओ न शरमाओ
……………………………………………………..
Aao mere paas aur aao-Kaun kaise 1983

Artists: Deepak parashar, A girl

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Dec 21, 2017

आयेगा आयेगा-कौन कैसे १९८३

अनिल गांगुली निर्देशित फिल्म कौन कैसे का संगीत मधुर है.
इस सस्पेंस फिल्म ने ठीक ठाक व्यवसाय किया था. फिल्म
में उस समय की बहुचर्चित जोड़ी मौजूद है-मिथुन और रंजीता
मगर पेयरिंग थोड़ी अलग है-रंजीता और दीपक पराशर और
दूसरी जोड़ी है मिथुन संग अनीता राज. केमिस्ट्री की जगह थोड़ी
सी फिजिक्स हो गयी है.

इस गाने का मजमून ये है कि नायिका नायक को रिझाने का
प्रयत्न कर रही है. ये इस गीत के बाद में समझ आता है. अगर
आपने फिल्म देखी है तो आपको कहानी के बारे में जानकारी
होगी.

गीत गुलशन बावरा का है और संगीत आर डी बर्मन का. इसे
गाया है आशा भोंसले ने. आपने गौर किया है इस बात पर-आयेगा
आयेगी शब्दों से शुरू होने वाले गीत लगभग सभी लोकप्रिय रहे
हैं. इन सबका फोरफादर तो वही है-फिल्म महल का गीत जिसे
लता ने गाया है-आयेगा आयेगा आयेगा.



गीत के बोल:

आयेगा आयेगा
मेरे सपनों का राजा एक दिन तो आयेगा
डोली में वो मुझको कहीं ले जायेगा
आयेगा मेरे सपनों का राजा एक दिन तो आयेगा
डोली में वो मुझको कहीं ले जायेगा

आ के जवानी ने जाने क्या मुझपे जादू किया
तेरे बिना अब रह ना सकूं मैं आ जा पिया
आ के जव्हानी ने जाने क्या मुज़पे जादू किया
तेरे बिना अब रह ना सकूं मैं आ जा पिया
जाने जां जाने जां
ऐसे ही कब तक तू मुझे तड़पायेगा

दिल ये चाहे तेरी बाहों में रहूँ सदा
कुछ ना बोलूं आँखों से दिल की कहूँ सदा
दिल ये चाहे तेरी बाहों में रहूँ सदा
कुछ ना बोलूं आँखों से दिल की कहूँ सदा
सजना सजना
मेरी उलझी लट तू कब सुलझायेगा
आयेगा डोली में वो मुझको कहीं ले जायेगा
आयेगा मेरे सपनों का राजा एक दिन तो आयेगा
डोली में वो मुझको कहीं ले जायेगा
कहीं ले जायेगा कहीं ले जायेगा
कहीं ले जायेगा
………………………………………………………….
Aayega aayega-Kaun kaise 1983

Artists: Deepak Parashar, Ranjeeta

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May 16, 2011

मैं भी हूँ यहाँ - कौन कैसे १९८३

आपको एक गीत सुनवाया था पहले फिल्म स्वयंवर का।
फ़िल्मी गीत कभी कभी कुछ ध्वनि विशेष की वजह
से कुछ जीव जंतुओं की याद ताज़ा करवा देते हैं।
आइये एक और ऐसा ही गीत और सुनवाया जाये। आपने
कुत्ते के छोटे पिल्ले को "काईं काएं क्यों क्यों" की ध्वनियाँ
अवश्य निकलते सुना होगा, विशेषकर तब, जब वे किसी
परेशानी में होते हैं या जब बच्चे उनको पत्थर मार दिया करते हैं।

प्रस्तुत गीत में "आ", "ऊ" की ध्वनियों पे गौर करें तो
आपको कुछ समानता सुनाई पड़ेगी। बहरहाल गीत कर्णप्रिय
है और इस पर किया जा रहा नृत्य भी काफी उत्तेजक है।
फिल्म का नाम है "कौन कैसे", जिसमे परेशान से दिखाई
देने वाले नायक हैं दीपक पराशर और नाचने वाली नायिका
का नाम है अनीता राज। गुलशन बावरा के लिखे गीत की तर्ज़
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।



गीत के बोल:

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
आ आ आ

बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
दोस्त रहे जो यूँ अकेले
ना खेल कोई खेले
तो जीने में क्या है
जुल्फों के साये में
आ लूट ले मस्तियाँ
आ आ आ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ

मैं भी हूँ ला ला ला ला ला ला

खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
जीत उसी की हुई यारा
के जो भी दिल हारा
ये बाज़ी लगा ले
तीर-ए-नज़र यूँ चला के
चला है कहाँ
आ आओ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
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Main bhi hoon yahan-Kaun Kaise 1983

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