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Oct 27, 2015

बीते हुए लम्हों की कसक-निकाह १९८२

बीते हुए लम्हों की कसक-निकाह १९८२

एक कवि ने यह कहा है-बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो
होगी. उसके आगे वाली पंक्ति एकदम कंट्रास्ट है-ख्वाबों  में
ही हो चाहे मुलाकात तो होगी. कॉम्प्लेक्स किस्म के इमोशंस
के घोल में लिपटी हैं पंक्तियाँ. व्याख्या करने बैठो तो पन्ने
भर जाएँ. ऐसे ही गूढ़ अर्थ वाले गीत कभी कभी हमें सोचने
पर मजबूर कर देते हैं कि फिल्म संगीत वाकई एक बड़ा
खज़ाना है जिसमें तरह तरह के रत्न बिखरे पड़े हैं.

जीवन में बीते हुए लम्हों और दिनों की यादें जेहन में रह ही
जाती हैं. कितना भुलाने की कोशिशें की जाएँ, वे पीछा नहीं
छोड़तीं.

फिल्म निकाह अपने समय की बड़ी हिट फिल्म है. इसमें जिन
कलाकारों ने अभिनय किया-राज बब्बर, सलमा आगा, दीपक
पराशर वे अब फिल्मों में सक्रिय नहीं के बराबर हैं. राज बब्बर
का फ़िल्मी कैरियर तो लंबा चला मगर दीपक पराशर और
सलमा आगा समय के साथ नेपथ्य में चले गए. सलमा आगा
तो अभिनय के साथ साथ गायन में भी सक्रिय थीं. कुछ एक
गीत गाने के बाद उन्हें भी अवसर मिलना बंद हो गए.

फिल्म जगत में कुछ इस तरह के कलाकार होते हैं-एक फिल्म
की चमक वाले, ४-५ फिल्मों तक चलने वाले, शुरूआत से ही न
चलने वाले, ४-५ साल तक दिखने वाले, एक दशक तक चलने
वाले, अपनी पूरी उम्र तक सक्रिय रहने वाले. इनमें से कुछ ही
कलाकार ऐसे हैं जो अपनी पूरी जिंदगी भर सक्रिय रहे या हैं.
महानायक अमिताभ बच्चन उन सौभाग्यशालियों में से हैं. उन्हीं
के पदचिन्हों पर शाहरुख भी जाते दिखाई दे रहे हैं. ये तो समय
ही बतलायेगा कि किंग खान ६० की उम्र तक सक्रिय रहते हैं या
नहीं.

सदाबहार कलाकार वे होते हैं जो समय समय पर अपनी उपस्थिति
दर्ज करते आपको मिल जायेंगे. उनकी सेहत पर बाकी के माहौल
का असर नहीं दिखलाई देता है. अभिनेता संजीव कुमार सदाबाहर
कलाकार थे. स्मिता पाटिल एक और सदाबहार अदाकारा थीं. ये
वे कलाकार हैं जिनकी फिल्मों का जनता बेसब्री से इंतज़ार किया
करती थी.

आज आपको निकाह से यही गीत सुनवा रहे हैं जिसे गाया है एक
सदाबाहर गायक ने-महेंद्र कपूर. इसे लिखा है हसन कमाल ने और
इसकी धुन बनाई है संगीतकार रवि ने जिन्हें बहुत ही कम लोग
रविशंकर शर्मा के नाम से जानते हैं.



गीत के बोल:

अभी अलविदा मत कहो दोस्तों
न जाने फिर कहाँ मुलाक़ात हो
क्यों कि

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

ये प्यार ये डूबी हुई रँगीन फ़िज़ाएं
ये चहरे ये नज़ारे ये जवाँ रुत ये हवाएं
हम जाएं कहीं इनकी महक साथ तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

फूलों की तरह दिल में बसाए हुए रखना
यादों के चिराग़ों को जलाए हुए रखना
लम्बा है सफ़र इस में कहीं रात तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

ये साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत
जज़्बात की दौलत ये ख़यालात की दौलत
कुछ पास न हो पास ये सौगात तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी
......................................................................
Beete hue lamhon ki kasak-Nikaah 1982

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Jun 13, 2011

ऐ हवा मेरे संग चल-बाबू १९८५

आपको फिल्म बाबू(राजेश खन्ना वाली) का एक गीत पहले
सुनवाया था। अब सुनिए रति अग्निहोत्री के ऊपर फिल्माया गया
लता मंगेशकर का गाया एक गीत। फिल्म रिलीज़ के वक़्त और
उसके २-३ साल बाद तक ये गीत बहुत बजा था। गाँव और गाँव
जैसे शहरों के मेले में नौटंकी में इस गीत के ऊपर स्कूल के बच्चों
वाली पी. टी. कसरत जैसी मुद्राओं में नौटंकी की काबिल डांसर्स
नृत्य किया करती थीं। वैसे इस गीत में नायिका जो नृत्य कर रही
है वो थोड़ा ही बेहतर है। गीत की ताल और गीत के फिल्मांकन
में ज्यादा तादतम्य नहीं है लेकिन बाकी मसाला काफी है गीत
में आपको बहलाने के लिए। ढप ढप और टपर टपर की ताल
राजेश रोशन के संगीत की विशेषता है। दीपक पाराशर नाम
के कलाकार रति अग्निहोत्री के साथ आपको परदे पर दिखाई
देंगे। नृत्य देख के मुझे कुछ भ्रष्ट भाषा के शब्द याद आ जाते हैं- उच्कंती, कूदंती, बल्खंती और नाचंती।

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है इसलिए आपको इसके
बोल सुहाने लगेंगे। मजरूह के ज़माने तक दिल में हलचल ही मचा
करती थी आजकल के दौर में होने लगी है- सन सनन साँय साँय।





गीत के बोल:

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ
रुक ना सकूं मैं दौड़ी आऊँ
फिर कुछ सोच के मैं घबराऊँ

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है
तूने कैसा जादू किया है
बिन डोर के मुझे बांध दिया है

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ
कठपुतली सी नाच रही हूँ
कैसे कहूं तुझे ढूंढ रही हूँ

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल

कहे दरिया का पानी कल कल
तुझे आस मिलन की हर पल

ऐ हवा मेरे संग संग चल
मेरे दिल में हुई हलचल
...............................
Ae hawa mere sang sang chal-Babu 1985

Artists-Rati Agnihotri

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May 16, 2011

मैं भी हूँ यहाँ - कौन कैसे १९८३

आपको एक गीत सुनवाया था पहले फिल्म स्वयंवर का।
फ़िल्मी गीत कभी कभी कुछ ध्वनि विशेष की वजह
से कुछ जीव जंतुओं की याद ताज़ा करवा देते हैं।
आइये एक और ऐसा ही गीत और सुनवाया जाये। आपने
कुत्ते के छोटे पिल्ले को "काईं काएं क्यों क्यों" की ध्वनियाँ
अवश्य निकलते सुना होगा, विशेषकर तब, जब वे किसी
परेशानी में होते हैं या जब बच्चे उनको पत्थर मार दिया करते हैं।

प्रस्तुत गीत में "आ", "ऊ" की ध्वनियों पे गौर करें तो
आपको कुछ समानता सुनाई पड़ेगी। बहरहाल गीत कर्णप्रिय
है और इस पर किया जा रहा नृत्य भी काफी उत्तेजक है।
फिल्म का नाम है "कौन कैसे", जिसमे परेशान से दिखाई
देने वाले नायक हैं दीपक पराशर और नाचने वाली नायिका
का नाम है अनीता राज। गुलशन बावरा के लिखे गीत की तर्ज़
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।



गीत के बोल:

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
आ आ आ

बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
दोस्त रहे जो यूँ अकेले
ना खेल कोई खेले
तो जीने में क्या है
जुल्फों के साये में
आ लूट ले मस्तियाँ
आ आ आ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ

मैं भी हूँ ला ला ला ला ला ला

खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
जीत उसी की हुई यारा
के जो भी दिल हारा
ये बाज़ी लगा ले
तीर-ए-नज़र यूँ चला के
चला है कहाँ
आ आओ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
.......................................................................
Main bhi hoon yahan-Kaun Kaise 1983

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Feb 28, 2010

तू इस तरह से २ -आप तो ऐसे ना थे १९८०

ये एक सदाबहार हिट गीत है। तीन संस्करण में यह गीत उपलब्ध है।
पिछला संस्करण आपने सुना जो थोडा धीमा था। अब सुनिए थोडा
तेज़ वाला जो एक पार्टी में फिल्माया गया है। इसे परदे पर दीपक
पाराशर गा रहे हैं। प्रेम त्रिकोण पर आधारित फिल्म आप तो ऐसे ना
थे के इस गीत ने सफलता के कीर्तिमान कायम किये। आज भी ये उतने
ही चाव से सुना जाता है। निदा फाजली का ये एक बड़ा हिट गीत है।

उषा खन्ना जो कि संगीतकार हैं गीत की, जनता को चौंकाने वाले कारनामे
करती रही हैं। बड़े बड़े नाम वाले संगीतकारों के बीच उन्होंने अपनी एक
अलग पहचान बनाई है। हिंदी सिनेमा संगीत के इतिहास के कुछ बड़े
हिट गीत उनके नाम पर दर्ज हैं-जैसे 'दिल के टुकड़े टुकड़े करके -दादा' ,
ज़िन्दगी प्यार का गीत है-सौतन इत्यादि। इस गीत के गायक हैं रफ़ी।
सरदार के भेस में हैं मदन पुरी और उनके साथ गाने के अंत में जो गोल
सा चेहरा दिखाई देता है वो है ओम शिवपुरी का।



गीत के बोल:


तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
जहाँ भी जाऊं ये लगता है तेरी महफ़िल है

तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है

तेरे बगैर जहाँ में कोई कमी सी थी
तेरे बगैर जहाँ में कोई कमी सी थी
भटक रही थी जवानी अंधेरी राहों में
सुकून दिल को मिला आ के तेरी बाहों में
मैं एक खोई हुई मौज हूँ तू साहिल है,
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है

तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है

तेरे जमाल से रोशन है कायनात मेरी
तेरे जमाल से रोशन है कायनात मेरी
मेरी तलाश, तेरी दिलकशी, रहे बाकी
खुदा करे के ये दीवानगी रहे बाकी
तेरी वफ़ा ही मेरी हर खुशी का हासिल है,
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है

तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है

ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा
हर एक चीज़ है अपनी जगह ठिकाने पे
कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से
ये ज़िन्दगी है सफ़र तू सफ़र की मंजिल है
जहाँ भी जाऊँ ये लगता है, तेरी महफ़िल है

तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है
.................................................................................
Too is tarah se meri zindagi mein2-Aap to aise na the 1980

Artists-Raj Babbar, Ranjeeta

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