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Aug 27, 2015

का जानूं मैं सजनिया चमकेगी-हम पांच १९८१

जमींदारी प्रथा के ऊपर बनी बहुसितारा फिल्म हम पांच से
एक गीत सुनते हैं आज. ये सन १९८१ की एक चर्चित फिल्म
है. प्रस्तुत गीत भी फिल्म का सबसे चर्चित गीत है जिसे
लता मंगेशकर और अमित कुमार ने गाया है. अमित कुमार
ने लाता मंगेशकर के साथ काफी युगल गीत गाये हैं और
अधिकतर चर्चित गीत हैं. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने गायक
अमित कुमार को ज्यादा अवसर दिए दूसरे संगीतकारों की
तुलना में. एक और संगीतकार हैं जिन्होंने अमित कुमार की
सेवाएं भरपूर लीं आर. डी. बर्मन.

गीत मिथुन चक्रवर्ती और दीप्ति नवल पर फिल्माया गया है.
इसे लिखा है आनंद बक्षी ने. मिथुन चक्रवर्ती भी एक ऐसे
अभिनेता हैं फिल्म जगत के, जिन्हें बहुत सारी अभिनेत्रियों
के साथ काम करने का अवसर मिला.





गीत के बोल:


का जानूं मैं सजनिया, चमकेगी कब चंदनिया
घर में गरीब के

उठाई ले घूँघटा
उठाई ले घूँघटा
उठाई ले घूँघटा चाँद देख ले

काश मेरे पास होती धरती
फिर मैं तुझसे प्यार नहीं करती
धरती पे पैदा होता सोना
बिकता नहीं दिल का ये खिलौना
ये मुफ्त का है सौदा
पैसा से नहीं होता
होता है प्यार से
मिलाई ले नैनवा
मिलाई ले नैनवा
मिलाई ले नैनवा प्यार तोल ले
उठाई ले घूँघटा चाँद देख ले

तोड़ के दीवार हम मिलेंगे
प्यार के ये फूल कब खिलेंगे
मैं हूँ यहाँ तू है कहाँ खोया
मैं कई रातों से नहीं सोया
हँसता है ये ज़माना
मैं हो गया दीवाना
कहते हैं लोग ये
बुलाई ले वैद को
बुलाई ले वैद को
बुलाई ले वैद को रोग पूछ ले
उठाई ले घूँघटा चाँद देख ले

दूं मैं तुझे बोल निशानी
तेरा प्यार मेरी जिंदगानी
जो भी तुझे चाहिए बता दे
बनिए का हार पहना दे
क्यूँ दूर खड़ा ऐसे
कट के पड़ी हो जैसे
डोर पतंग से
उडाई ले पतंग को
उडाई ले पतंग को
उडाई ले पतंग को डोर जोड़ ले
उठाई ले घूँघटा चाँद देख ले
.........................................................................................
Kaa janoon main sajaniya-Ham paanch 1981

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Jun 17, 2011

ये साये हैं ये दुनिया है-सितारा १९८०

फिल्म सितारा के किरदार के बारे में आपको बताया था पहले।
कैसे एक गाँव की लड़की फिल्म दुनिया के शिखर पर पहुँच
जाती है। शिखर पर पहुँचते ही उसे तमाम कडवे अनुभव होना
शुरू होते हैं। प्रेमी से बिछुड़ने का दर्द, अपनों द्वारा दोहे जाने
की कचोट, मतलबपरस्त हंसी वाले लोग इर्द गिर्द में। इन सभी
तत्वों के बीच नायिका अकेलापन महसूस करती है। उस दर्द
को बोलों के जरिया गुलज़ार ने,संगीत के ज़रिये राहुल देव बर्मन
ने और आवाज़ के ज़रिये आशा भोंसले ने बखूबी उभरा है।
अच्छे गीत कैसे बनते हैं, उसका एक नमूना। फिल्म नहीं
चली मगर ये गीत बजता रहेगा । एक पंक्ति में चकाचौंध
वाली दुनिया की हकीकत और औकात उधेड़ के रख दी गई है-
"यहाँ सारी रौनक है रुसवाइयों की" । गुलज़ार स्वयं बॉलीवुड
की हर नब्ज़ से वाकिफ हैं, उनसे बेहतर और कम शब्दों में
फिल्म जगत का असली चेहरा दिखलाने का तरीका शायद ही
किसी के पास हो।




गीत के बोल:

ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है

भरी भीड़ में खाली
भरी भीड़ में खाली तन्हाइयों की

ये साये हैं ये दुनिया है

यहाँ कोई साहिल सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
यहाँ कोई साहिल सहारा नहीं है
कहीं डूबने को किनारा नहीं है
यहाँ सारी रौनक है रुसवाइयों की


ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है

यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे हुए से
निगाहों में आंसू भी टाँगे हुए से
यहाँ सारे चेहरे हैं मांगे हुए से
निगाहों में आंसू भी टाँगे हुए से
बड़ी नीची राहें हैं ऊंचाइयों की

ये साये हैं
ये दुनिया है परछाइयों की
ये साये हैं ये दुनिया है

भरी भीड़ में खाली
भरी भीड़ में खाली तन्हाइयों की

ये साये हैं ये दुनिया है

जो अंतरा विडियो से गायब है वो इस प्रकार से है:


कई चाँद उठ कर जलाए बुझाये
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
कई चाँद उठ कर जलाए बुझाये
बहुत हमने चाहा ज़रा नींद आये
यहाँ रात होती है बेदारियों की
...............................
Ye saaye hain ye duniya hai-Sitara 1980

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Jun 15, 2011

साथ साथ तुम चलो-सितारा १९८०

फिल्म अभिमान में नारी के सितारा बनने का जिक्र है तो एक
और ऐसी फिल्म है जिसमें ग्रामीण परिवेश में पली बड़ी नायिका
फिल्म जगत की एक हस्ती बन जाती है। इस थीम पर पहले एक
फिल्म हम देख चुके हैं-मेरे हमसफ़र। फिल्म सितारा बॉक्स ऑफिस
पर कोई कमाल नहीं दिखा पाई ना ही इसके संगीत ने कोई अलख
जगाया । फिर भी, इस फिल्म में कुछ यादगार गीत हैं। फिल्म का
सबसे अलोकप्रिय गीत आपको सुनवाते हैं जो भूपेंद्र और आशा भोंसले
की आवाज़ में है। संगीत राहुल देव बर्मन का है। गीत फिल्माया गया
है ज़रीना वहाब और मिथुन पर। फिल्म एक आध बार आपको टी वी के
चैनल पर दिखाई दी होगी। मिथुन के चरित्र का नाम कुंदन और ज़रीना
के चरित्र का नाम धनिया है। वो धनिया से सरिता बन जाती है फिल्म
जगत में। गुल्ज़ाराना गीत बहुत दिनों के बाद प्रस्तुत कर रहा हूँ
ब्लॉग पर।




गीत के बोल:

साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
हो, साथ साथ तुम चलो तो रात रात चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें


साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
हो, साथ साथ तुम चलो तो रात रात चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें

साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें

सुबह से कह्नेगे जा के
अपना घर संभालिये
रात को जो सपने
दे गये थे वो निकालिए
हो, आपको खबर ना हो
सपने बेखबर चले

साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

रोज़ चढ़ के आस्मां पे
आ हा हा
चाँद जब लगायेंगे
लौ बुझाने का भी समय
ओ हो
हम उसे बताएँगे
फूँक से बुझा के चाँद
चाँद के उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें

साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

हो हो, हो हो
तेज़ है हवा कहीं
वक़्त ना उड़े आज का, हो
हो, चाँद से पकड़ के रखना
आ हा हा
हो ना वो एक रात का
रात ओढ़ के चलो,
रात के उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें
उधर चलें, उधर चलें

साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
साथ साथ तुम चलो तो रात रात भर चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
हो, रात साथ कल सुबह एक सुबह के घर चलें
..................................
Saath saath tum chalo-Sitara 1980

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May 16, 2011

मैं भी हूँ यहाँ - कौन कैसे १९८३

आपको एक गीत सुनवाया था पहले फिल्म स्वयंवर का।
फ़िल्मी गीत कभी कभी कुछ ध्वनि विशेष की वजह
से कुछ जीव जंतुओं की याद ताज़ा करवा देते हैं।
आइये एक और ऐसा ही गीत और सुनवाया जाये। आपने
कुत्ते के छोटे पिल्ले को "काईं काएं क्यों क्यों" की ध्वनियाँ
अवश्य निकलते सुना होगा, विशेषकर तब, जब वे किसी
परेशानी में होते हैं या जब बच्चे उनको पत्थर मार दिया करते हैं।

प्रस्तुत गीत में "आ", "ऊ" की ध्वनियों पे गौर करें तो
आपको कुछ समानता सुनाई पड़ेगी। बहरहाल गीत कर्णप्रिय
है और इस पर किया जा रहा नृत्य भी काफी उत्तेजक है।
फिल्म का नाम है "कौन कैसे", जिसमे परेशान से दिखाई
देने वाले नायक हैं दीपक पराशर और नाचने वाली नायिका
का नाम है अनीता राज। गुलशन बावरा के लिखे गीत की तर्ज़
बनाई है राहुल देव बर्मन ने।



गीत के बोल:

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
आ आ आ

बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
बात करो जो पास आ के
निगाहों को मिला के
तो फिर कुछ मज़ा है
दोस्त रहे जो यूँ अकेले
ना खेल कोई खेले
तो जीने में क्या है
जुल्फों के साये में
आ लूट ले मस्तियाँ
आ आ आ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
ऊ ऊ

मैं भी हूँ ला ला ला ला ला ला

खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

खूब निभेगी तेरी मेरी
तो फिर कैसी देरी
मुझे आजमा ले
जीत उसी की हुई यारा
के जो भी दिल हारा
ये बाज़ी लगा ले
तीर-ए-नज़र यूँ चला के
चला है कहाँ
आ आओ

मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
मैं भी हूँ यहाँ तू भी है यहाँ
हो फिर क्यूँ रहे इस तरह प्यार में दूरियां
जाता है कहाँ
वो ना मिलेगा कहीं जो मिलेगा यहाँ
.......................................................................
Main bhi hoon yahan-Kaun Kaise 1983

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Feb 1, 2011

सजना का कंगना-सितारा १९८०

हम में से कई एक ने पुराने ज़माने का चाबी वाला भोंपू या
ग्रामोफोन नहीं देखा होगा। नई पीढ़ी तो लगभग इसके स्वाद
से अछूती है। गाँव में एक फिल्म आई है उसका प्रचार हो रहा
है। पहले के समय में फिल्म का प्रचार तांगे, रिक्शे या बैलगाड़ी
के ज़रिये भी होता था। उसमे एक माइक होता जिसे लगभग
मुंह में डाल के उदघोषक कुछ अस्पष्ट से तो कुछ अति-अस्पष्ट से
शब्दों का उच्चारण करता हुआ अपना गला साफ़ करता। जो
चीज़ साफ़ सुनाई देती वो थी ग्रामोफोन से निकलने वाली ध्वनि।
कुछ लग चुकी फिल्मों के एल पी या ई पी रिकॉर्ड बजाये जाते।
गीत मनोरंजक है, इसमें महिला और पुरुष उदघोषक फुर्सत के
क्षणों में रिकॉर्ड बजा कर उसपर नृत्य और अभिनय कर रहे हैं।
जैसे ही ग्रामोफोन कि चाबी ख़त्म होने लगती है वो टें बोल जाता
है, उस प्रभाव को बड़े प्रभावी ढंग से बतलाया गया है। सिनेमा के
उन कुछ क्षणों में से एक जो वास्तविकता के सबसे करीब हैं। इसके
अलावा एक और पहलू से आप वाकिफ होंगे रिकॉर्ड के घिस जाने पर
सुई अटकना भी शुरू हो जाती है और एक ही शब्द को आपको रटने
की कोशिश करने लगती है तब उसे हलके से धक्के से आगे बढ़ाना
पढता था। ऐसी ऐसी विकट स्तिथियों में मैंने ग्रामोफोन बजते
सुने हैं कि आप सुन कर चकित रह जायेंगे वे किस्से। एक बार तो
रेगिस्तानी मेले में ऊँट की पीठ पर रख कर बजाया जा रहा था
ग्रामोफोने। ऊँट को २-४ गाने के बाद जाने क्या सूझी उसने एक
ज़ोरदार अंगडाई ली और ग्रामोफोन चारों खाने चित हो कर गिरा
मरा फ़ोन में तब्दील हो गया । वो बैटरी की सहायता से बजाया जाने
वाला रिकॉर्ड प्लयेर था ।

गौरतलब है कि इसमें नायक और नायिका हेमा मालिनी और राजेश
खान्नाका नाम लेते हैं। फिल्म सिनेमा के इतिहास में फ़िल्मी गीतों
की जीवन्तता के बारे में बात की जाये तो ये दोनों कलाकार दूसरों
पर भरी पढ़ते हैं। ज़रूरी नहीं की हिट गीत रोचक हो या रोचक गीत
बड़ा हिट हो जाये। इस गीत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है।
लेखनी एक बार फिर गुलज़ार की है और संगीतमय प्रयोगधर्मिता
राहुल देव बर्मन की। पिछले गीत में भूपेंद्र के साथ लता गा रहीं थीं
तो इस गीत में उनका साथ दिया है आशा भोंसले ने।

गीत में हास्य का पुट भी है। नायिका अति उत्साह में उछलती कूदती
गोबर के ढेर में पांव डाल कर फिसल पढ़ती है। नायक ने धोती यूँ बांध
रखी है मानो धोती के कपडे का कोई पतलून सिलवा के पहना हो।

म्यूजिकल मिस्फॉयरिंग भी है इस गीत में। कल्पना करें कि पुरुष आवाज़
नायिका के लिए और महिला आवाज़ नायक के लिए। गीत को आप
सिनेमा इतिहास के सबसे मनोरंजक गीतों में शामिल कर लीजिये।



गीत के बोल:

सजना का कंगना
हो कंगना में हीरा
हो सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं

अरे सजनी का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं

एक तो तेरी ऑंखें बिल्लौरी
ऑंखें जैसे दो हीरों की चोरी
एक तो तेरी ऑंखें बिल्लौरी
ऑंखें जैसे दो हीरों की चोरी
हो हीरे पे, हीरे पे, हीरे पे......

सजना का कंगना
कंगना में हीरा

हो हीरे पे हीरा मैं खाई के मरूं
एक बार, के दुई बार, के तीन बार,
के कै बार मरूं

सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं

एक तो पड़े लोगों की नज़र ना
दूजे तेरी गली से गुज़ारना
हो ओ ओ ओ, एक तो पड़े लोगों की नज़र ना
दूजे तेरी गली से गुज़ारना
बच बच के रुकना कभी चलना
एक बार, के दुई बार, के तीन बार,
के कै बार बचूं

हे सजनी का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं


एक तो तेरी पायल ऊंची बोले
दूजे गोरी घूंघट में ना बोले
एक तो तेरी पायल ऊंची बोले
दूजे गोरी घूंघट में ना बोले

मलमल के घूंघट में गोरी जले
एक बार के दुई बार के तीन बार
के कै बार जले

सजना का कंगना
कंगना में हीरा
हीरा मैं खाई के मरूं एक बार,
के दुई बार, के तीन बार, के कै बार मरूं
...................................
Sajna ka kangna-Sitara 1980

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थोड़ी सी ज़मीन थोडा आसमान-सितारा

तुमसे थोड़ी सी ज़मीन ही तो मांगी थी तुम तो हलकट प्रोपर्टी
ब्रोकर की तरह थोड़ी सी धूल थमा के चलते बने। थोडा आसमान
क्या मांग लिया तुमने तो हमें भैंस की तरह पोखर में डुबो दिया।
अब भाई दारू पी के बढ़िया बढ़िया शेर निकलते होंगे दिल से, हम
तो चाय और भजिये पर जिंदा रहने वाले प्राणी हैं अतः बासी
भजिये खाने के बाद आने वाली डकार के अंदाज़ में ऐसे ही उदगार
प्रकट हो पा रहे हैं, बतलाइए क्या किया जाए।

आइये सुनें एक आशावादी गीत जो देखने और सुनने दोनों में आनंद
देता है। गुलज़ार का लिखा और संगीतकार पंचम उर्फ़ आर डी बर्मन
का संगीतबद्ध किया ये गीत गा रहे हैं लता और भूपेंद्र। सौंधी मिटटी
और लेपे हुए चूल्हे को सुनें ध्यान लगा कर और बाजरे के या चने के
जिस खेत में आपका जी चाहे कौवे उड़ायें।

सपने ज़रूर देखने चाहिए मगर उनको अमल में लाने का पुख्ता
प्रोग्राम होना ज़रूरी है।



गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला, ला ला ला ला ला ला

थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमान
तिनकों का बस एक आशियाँ

थोड़ी सी ज़मीन थोड़ा आसमान
तिनकों का बस एक आशियाँ

मांगा है जो तुमसे वो ज्यादा तो नहीं है
देने को तो जान दें दें, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता हैं कहाँ

मेरे घर के आँगन में, छोटा सा झूला हो
सौंधी सौंधी मिटटी होगी, लेप हुआ चूल्हा हो
थोड़ी थोड़ी आग होगी, थोड़ा सा धुंआ

रात कट जायेगी तो कैसे दिन बिताएंगे
बाजरे के खेतों में कौवे उड़ायेंगे
बाजरे के टिक्कों जैसे, बेटे हो जवान

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Jan 20, 2011

दिल धक् धक् करने लगा-पतिता-१९८०

सन ८० की फिल्म पतिता का जो गीत चलन में था फिल्म की रिलीज़
के वक़्त वो पेश है आज। ये है किशोर कुमार की आवाज़ में-दिल धक्
धक् करने लगा। आनंद बक्षी के लिखे गीत की धुन बनाई है बप्पी लहरी
ने। मिथुन चक्रवर्ती के ऊपर इसे फिल्माया गया है और गीत में उन्होंने
प्रशंसकों को अपने नृत्य से खुश कर दिया था । सैक्सोफोने लेकर जब
नायक हुंकार भरता है तो शम्मी और देव आनंद का ज़माना याद आ जाता
है मगर जल्द ही वो ग़लतफहमी दूर हो जाती है जब वो नृत्य शुरू करता है।

वैसे इस आकर्षक गीत में कई और ऐसी आकर्षक वजह हैं जिनके कारण
पब्लिक इसे थीएटर में देखने जाया करती थी वो सब आपको गीत देखने पर
समझ आएँगी।




गीत के बोल:

धक् धक् धक् धक्
धक् धक् धक् धक्
धक् धक् धक् धक्
धक् धक् धक् धक्
दिल धक् करने लगा
मैं दिल से डरने लगा
दिल धक् करने लगा
मैं दिल से डरने लगा
ऐसा लगता है मैं
किसी पे मरने लगा

हाय दिल धक् करने लगा
मैं दिल से डरने लगा

मैं पूछा करता हूँ
इस दिल दीवाने से
वो खुद आये तो क्या हो
जिसकी याद आने से
आई कोई ख़ुशबू
कोई जादू चलने लगा
हो ओ ओ ऐसा लगता है मैं
किसी पे मरने लगा

दिल धक् करने लगा
मैं दिल से डरने लगा

तस्वीरें देखी हैं
कितनी बाज़ारों में
तस्वीरें देखी हैं
कितनी बाज़ारों में
तुम जैसे हैं हजारों
वो है एक हजारों में
देखी दो निगाहें
मैं आहें भरने लगा

हो ओ ओ ऐसा लगता है मैं
किसी पे मरने लगा

दिल धक् करने लगा
मैं दिल से डरने लगा

सोचा था खेलूंगा
मैं एक खिलोने से
अब कैसे की रोकूँ दिल को
खुद पे आशिक होने से
मैं तो दिल्लगी में
दिल का सौदा करने लगा

हो ओ ओ ऐसा लगता है मैं
किसी पे मरने लगा

दिल धक् करने लगा
मैं दिल से डरने लगा

ऐसा लगता है मैं
किसी पे मरने लगा
....................................
Dil dhak dhak karne laga-Patita 1980

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Jan 19, 2011

उस्तादी उस्ताद से-उस्तादी से १९८२

फ़िल्मी क़व्वाली एक और ले आये हैं आपकी खिदमत में। ये
फिल्माई गई है रंजीता और विनोद मेहरा पर। थोड़ी कॉमेडी
वाली इस क़व्वाली में हैदराबाद से गाज़ियाबाद की सैर करवा दी
गई है। गीत में आपको मिथुन और गुज़रे ज़माने के हिट हीरो
भगवान भी दिखाई देंगे। गनीमत है जो खातून इसमें गा रही हैं
उन्होंने अपने तुगलकाबाद से होने का दावा पेश नहीं किया।





गीत के बोल :

इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हाँ, इश्क का जो दावा जो करते थे
सारी महफ़िल से कहते थे
हुस्न का तोड़ेंगे गुरूर वो
जाने फिर मेरे हुज़ूर वो
क्यूँ नहीं आये यहाँ
हो चली है शब् जवान

नहीं अच्छी मोहतरमां
इस कदर भी बेसब्री
हम वो उस्ताद हैं वो
जो कभी हारे ना बाज़ी, हाँ
मर्द का यूँ उलझना
वो भी औरत से तौबा
एक उस्ताद की ये
नहीं है शान क़िबला

कौन असली है डर है
कौन असली है कौन नकली है
कौन असली है डर है
राज़ कैसे खुलेगा
अरे हट
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
नहीं चलेगी
नहीं चलेगी, हाँ
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से
चुप
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से

असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
हाँ, बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के

हमसे उलझा है जो वो हारा है
छोड़ दो जिद ये माल हमारा है
जान दे देंगे जिद ना छोड़ेंगे
ओ माल हाथों से जाने ना देंगे

तू चीज़ की ऐ
निब्बू बांध निचोड़ा तैनू
क्या चीज़ छिब्बा ते
लगती वांग दिलो वान तैनू
सुनो गज़ियाबादी
खुद को ना समझो बागी
अरे जा हैदराबादी
उड़ा जायेंगे बाज़ी
आ अगर ऐसा दावा है
तो फिर हम भी हैं राज़ी

बच के
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से
टूटे ना शीशा टकरा के फौलाद से

अजी नहीं चलेगी नहीं चलेगी
नहीं चलेगी नहीं चलेगी
उस्तादी उस्ताद से

असली हैदर हैं हम
हैदराबाद के
बागी हैदर हैं हम
गाज़ियाबाद के
....................................
Ustadi ustad se-Ustadi Ustad se 1982

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Dec 4, 2010

लग जा गले से ऐ तन्हाई-वो जो हसीना

लग जा गले-इस थीम पर आपको एक मधुर गीत सुनवाया
अब सुनिए पुरुष आवाज़ में रंगीन युग से एक निवेदन।
निवेदन नायिका के बजाये तन्हाई से किया जा रहा है।
गीत है फिल्म वो जो हसीना से जिसके दो गीत आपको
सुनवाए जा चुके हैं। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और
रंजीता नायक-नायिका की भूमिकाओं में हैं। रवीन्द्र रावल
के लिखे बोलों को सुर में ढाला है राम-लक्ष्मण (विजय पाटिल)
ने। आवाजें है नितिन मुकेश और उषा मंगेशकर की।

नितिन मुकेश का गाया ये गीत हर समय की युवा पीढ़ी को
भाता रहा है। सरल से शब्दों में दिल की व्यथा कह दी गई
है। गीत की सबसे दमदार पंक्ति है-आग से मैंने प्यास बुझाई !
gईट का विडियो उपलब्ध नहीं है और जिस महाशय ने इस
गीत पर स्लाइड शो बनाया है उसे देख के लगता है कि ये गीत
डिप्रेशन के शिकार लोगों को ज्यादा पसंद आता है।



गीत के बोल:

लग जा गले से ऐ तन्हाई
लग जा गले से ऐ तन्हाई

प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई

लग जा गले से ऐ तन्हाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई

मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई

कैसे करूं मैं किसी से गिला
दुनिया में होती तो मिलती वफ़ा
हो, कैसे करूं मैं किसी से गिला
दुनिया में होती तो मिलती वफ़ा

मुझको मोहब्बत रास ना आई
मुझको मोहब्बत रास ना आई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई

मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई

तू ही बता ऐ मेरी ज़िन्दगी
पहले कहाँ थी ये दीवानगी
हो, तू ही बता ऐ मेरी ज़िन्दगी
पहले कहाँ थी ये दीवानगी

आग से मैंने प्यास बुझाई
आग से मैंने प्यास बुझाई
प्यार मेरा निकला हरजाई
प्यार मेरा निकला हरजाई

मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई
मैं भी रो रो के दूँगी दुहाई

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Apr 24, 2010

भीगी भीगी रुत है-तकदीर का बादशाह १९८२

थोड़ी कम लोकप्रिय मगर एक हिट जोड़ी थी फिल्मों की-
मिथुन चक्रवर्ती और रंजीता की। इस जोड़ी के १-२ गीत हम
शामिल कर चुके हैं इस ब्लॉग पर। आज सुनिए एक कर्णप्रिय
रोमांटिक गीत जो सन १९८२ की फिल्म तकदीर का बादशाह
से लिया गया है । बी सुभाष के निर्देशन में बनी इस फिल्म में
ये एक उत्तम बरसाती गीत है जिसपर प्रेमियों का ध्यान नहीं
गया । गीत की विशेषता है नायिका द्वारा प्रश्नवाचक -"और" ।
नारी सुलभ भावनाओं को उभरता ये गीत बतला रहा है कि कितनी
भी तारीफ़ कर लो, नारियों को कम ही लगा करती हैं। उन्हें हमेशा
"और" की चाह रहती है। पानी(H2O) में इस जोड़ी की केमिस्ट्री
ज़बरदस्त लग रही है।



गीत के बोल:

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

हो ओ, रुकी रुकी साँसें हैं
जवानी बेकरार है
और ?

यहाँ कोई नहीं
तेरा मेरा प्यार है

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

मेरे ख्यालों की गर्मी ने
तेरी जवानी पिघल रही है

पानी में दोनों मचल रहे हैं
आग बदन से निकल रही है
पहले जो दिल की बिगड़ी थी हालत
अब वो ज़रा सी संभल रही है

और ?

यहाँ कोई नहीं
तेरा मेरा प्यार है

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

बढ़ने लगी है रूप की ठंडक
बादल रहा है प्यार का मौसम
मेरी नज़र भी दोल रही है
काँप रही है तू भी ए हमदम
तुझको ज़रुरत शोलों की है
मुझमे समा जा ए मेरी शबनम

और ?

यहाँ कोई नहीं
तेरा मेरा प्यार है

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

देख रहा हूँ तू दुल्हन है
और फूलों की सेज सजी है
साँसों में एक तूफ़ान लिए तू
शर्म-ओहाय में डूबी हुई है
जितना मैं तुझसे लिपट रहा हूँ
उतनी ही तू खुद में सिमट रही है

और ?

यहाँ कोई नहीं
तेरा मेरा प्यार है

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

हो ओ, रुकी रुकी साँसें हैं
जवानी बेकरार है
और ?

यहाँ कोई नहीं
तेरा मेरा प्यार है

भीगी भीगी रुत है
उमंगों पे निखार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है
धुंधली सी रौशनी है
आँखों में खुमार है

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Mar 26, 2010

सारा जहाँ छोड़ के -वारदात

७० के दशक के उत्तरार्ध और ८० के दशक की शुरुआत में जूडो कराटे
हमारे देश में चलन में आया। ब्रूस ली को जनता पहचानने लगी। तमाम
पत्रिकाओं में इस विषय पर सामग्री प्राप्त होने लगी। इसका असर बॉलीवुड
पर भी देखने को मिला। कुछ जासूसी फ़िल्में जिसमे एक एजेंट होता और उसका
कोई कोड नंबर होता, आयीं, ये थीं ज्यादातर मिथुन की फ़िल्में । आइये देखें
फिल्म वारदात का एक गीत जो काजल किरण और मिथुन पर फिल्माया गया है।
इसके गायक कलाकार हैं उषा मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी। धुन बनाई है
बप्पी लहरी ने। इस गीत को अगर आप वोल्यूम कम करके सुनेंगे तो आपको ये
किसी 'वेट-लॉस' कंपनी का विज्ञापन दिखाई देने लगेगा। गीत लिखने वाले
गीतकार का नाम है रमेश पन्त जिन्होंने बहुत कम लिखे हैं हिंदी फिल्मों के लिए।



गीत के बोल:

सारा जहाँ छोड़ के तुझे मैंने सलाम किया है
तूने भी क्या कोई ऐसा काम किया है

मैंने तो खुद अपना जीना हरम किया है
जिस दिन से हाथ तेरा थाम लिया है

सारा जहाँ छोड़ के तुझे मैंने सलाम किया है
तूने भी क्या कोई ऐसा काम किया है

तू चाहे प्यार ना कर मैं तो तुझे ही चाहूंगी
जहाँ भी तू जाएगा पीछे पीछे आऊँगी
तू चाहे प्यार ना कर मैं तो तुझे ही चाहूंगी
जहाँ भी तू जाएगा पीछे पीछे आऊँगी

मुझको पाना है तो मेरा पीछा छोड़ दे

सारा जहाँ छोड़ के तुझे मैंने सलाम किया है
तूने भी क्या कोई ऐसा काम किया है

मैंने तो खुद अपना जीना हरम किया है
जिस दिन से हाथ तेरा थाम लिया है

हाय....

मेरी तो आदत है इसे उसे दिल देने की
और कोई मेरी बनी तो फिर तू क्या कर लेगी
मेरी तो आदत है इसे उसे दिल देने की
और कोई मेरी बनी तो फिर तू क्या कर लेगी

जोगन बन के गली गली में गाना गूंगी

मैंने तो खुद अपना जीना हरम किया है
जिस दिन से हाथ तेरा थाम लिया है

सारा जहाँ छोड़ के तुझे मैंने सलाम किया है
तूने भी क्या कोई ऐसा काम किया है

हो थाम लिया है
हो काम किया है

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Mar 6, 2010

भीगा भीगा मौसम आया-भयानक १९७९

फिल्म का नाम ही भयानक है वरना फिल्म देखने लायक है।
मिथुन चक्रवर्ती और रंजीता की जोड़ी वाली इस फिल्म से
दर्शक थोड़े निराश हो सकते हैं क्यूँकि इसमें नायिका का
रोल जल्दी ख़त्म हो जाता है। भयानक एक सस्पेंस थ्रिलर
फिल्म है। इसका सबसे कर्णप्रिय गीत भी यही है जो इधर
प्रस्तुत है। इसको गा रही हैं हेमलता जिन्होंने रवीन्द्र जैन खेमे
के बाहर कुछ गिनती के गीत ही गाये हैं। इस गीत का संगीत
तैयार किया है उषा खन्ना ने। इस बरसाती गीत में नायक और
नायिका कि केमिस्ट्री देखने लायक है। दोनों की जोड़ी वाली कई
फ़िल्में मैंने देखी हैं। गीत में फिजिक्स , जूलोजी , बोटनी इत्यादि
सब बढ़िया दिखाई देते हैं जैसे जैसे गीत अपने चरम पर पहुँचता है।




गीत के बोल:

भीगा भीगा मौसम आया
बरसे घटा घनघोर

भीगा भीगा मौसम आया
बरसे घटा घनघोर

प्रीत का पहला नटखट सावन
देखो मचाये कैसे शोर

भीगा भीगा मौसम आया
बरसे घटा घनघोर

दिल जिस तरह ना भूले धड़कना
मैंने भी तुझे यूँ ना भूलों

मेरे सनम नहीं ये भी कम
ख्यालों में गर तुझको छू लूं

सात जनम का साथ हमारा
टूटे ना ये डोर

प्रीत का पहला नटखट सावन
देखो मचाये कैसे शोर

भीगा भीगा मौसम आया
बरसे घटा घनघोर

इतना मुझे मिला तेरा प्यार
मन में मेरे ना समाये

रखना मुझे छुपा के सदा
दुनिया नहीं छीन पाए

बूंदों की सरगम
नाचे छम छम
मेरे मन का मोर

प्रीत का पहला नटखट सावन
देखो मचाये कैसे शोर

भीगा भीगा मौसम आया
बरसे घटा घनघोर

खुद से ही मैं डरने लगी हूँ
दिल में वो अरमान जगे हैं

टूटे नहीं सीमा कहीं
सागर में तूफ़ान उठे हैं

प्यार की हलचल जीवन चंचल
मन पे रहा ना कोई जोर

प्रीत का पहला नटखट सावन
देखो मचाये कैसे शोर

भीगा भीगा मौसम आया
बरसे घटा घनघोर

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Dec 15, 2009

दिल पे तेरे प्यार का पैगाम-शतरंज १९९३

मिथुन चक्रवर्ती के खाते में कुछ अच्छे गीत आये सभी दौर में।
गायक बदलते रहे मगर उनको परदे पर बढ़िया गीत गाने के लिए
मिलते रहे । आनंद-मिलिंद प्रतिभाशाली संगीतकार हैं। वाद्य
यंत्रों का अनूठा प्रयोग उन्होंने अपने पिता से सीखा और उसको
आगे बढाया। ९० के दशक में वे छाये रहे । उनकी कर्णप्रिय धुनों में
से एक है फिल्म शतरंज से, जिसे कुमार सानू और साधना सरगम
ने गाया है। गीत फिल्माया गया है मिथुन और जूही चावला पर।



गीत के बोल:

दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं

दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं

दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं

तेरी याद तेरे ख्वाब बस तेरा ही ख्याल
तेरी याद तेरे ख्वाब बस तेरा ही ख्याल
अब तो मुझे याद नहीं दीं महिना साल

देखूं जहाँ मैं वहां तेरी तस्वीर है
तेरी मोहब्बत सनम मेरी तकदीर है

नाम-ए-वफ़ा अपनी सुबह शाम लिख दूं
नाम-ए-वफ़ा अपनी सुबह शाम लिख दूं
आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं

मेरे यार पहली बार किया तूने बेकरार
मेरे यार पहली बार किया तूने बेकरार
नींद उडी चैन गया आये ना करार

मैं भी तो बेताब था, तेरे दीदार को
आ करीब चूम लूं, तेरे रुखसार को

लब पे तेरे शबनमी कलाम लिख दूं
लब पे तेरे शबनमी कलाम लिख दूं

आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं

दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
दिल पे तेरे प्यार का पैगाम लिख दूं
आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं
आ जा, ज़िन्दगी मैं, तेरे नाम लिख दूं
................................................................
Dil pe tere pyar ka paigaam likh doon-Shatranj 1993

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Jul 7, 2009

सुल्ताना सुल्ताना मेरा नाम है सुल्ताना -तराना १९७९

नहीं नहीं हम पुराने ज़माने की तराना फ़िल्म की बात नहीं कर
रहे हैं! एक फ़िल्म आई थी १९७९ में जिसने जोर शोर से कई शहरों
में सिल्वर जुबिली मनाई थी । लता और आशा के होते किसी और
गायिका का गाना हिट हो जाए ये उन दिनों बड़ी बात होती थी।
इस गाने को उषा मंगेशकर ने गाया है। संगीत दिया है राम लक्ष्मण
ने । प्रसिद्धि का ये आलम था कि जिस गली से गुजरो ये गाना बजता
सुनाई देता था। तराना एक लो बजट फ़िल्म थी जिसने जबरदस्त
व्यवसाय किया। फ़िल्म राजश्री बैनर की फ़िल्म है।


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Jul 5, 2009

दुल्हन बनूंगी- वो जो हसीना १९८३

बॉलीवुड में कभी कभार ऐसे गीत बनते हैं जो भावनाओं से भरपूर होते हैं।
ऐसा नहीं है कि अधिकांश गीत भावनामुक्त होते हैं । यहाँ भावना का
सहज उपजी भावनाओं से है। मिथुन और रंजीता की स्क्रीन केमिस्ट्री
तारीफ़- ए- काबिल रही है। एक गाना है फ़िल्म वो जो हसीना का
"दुल्हन बनूंगी" फ़िल्म ज्यादा पॉपुलर नहीं हुई इसलिए ये गाना भी
नेपथ्य में चला गया। इस गाने को लता और मन्ना डे ने गया है।
मेरी पसंद के युगल गीतों में से एक है। इस गाने को जब मैंने
पहली बार सुना था तभी से इसका विडियो देखने की इच्छा मेरे मन में थी।
एक कुतूहल था मन में कि इसका पिक्चराईजेशन कैसा होगा ? राम ळक्ष्मण
ने जितना भी संगीत दिया है अधिकतर कर्णप्रिय और लोकप्रिय रहा है।



गाने के बोल :

दुल्हन बनूंगी डोली चढूँगी
बोले हमारा कंगना

दूल्हा बनूँगा घोडी चढूँगा
आऊँगा तेरे अंगना

ओ मेरी जान तुझपे सदके
कुर्बान मैं तुझपे यारा

जन्मों का है नाता हमारा
सदियों का है याराना

ये रिश्ता पुराना है अपना
हमने तो है ये जाना

हम धारा, किनारा तुम
जीने का सहारा तुम

मारे खुशी के मर ही न जाऊं,
मुझको संभालो सजना

कल तक जो अधूरा था
वो आज पूरा हुआ है सपना

ओ मेरी जान तुझपे सदके
कुर्बान मैं तुझपे यारा

जय हो माताजी , जय हो माताजी (कोरस )

शेरा वाली माता ने हमें तुमसे मिलाया है
जय हो जोतावाली माता की,
वरदान ये आया है

अब जान रहे या जाए
कोई यारी छुडा न पाये

तूफ़ान आए अंधी डराए,
दीपक जलाये रखना

दुनिया से प्यारी दुनिया हमारी
सजनी सजाये रखना

ओ मेरी जान तुझपे सदके
कुर्बान मैं तुझपे यारा ........

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