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Nov 10, 2019

रूठे रूठे पिया-कोरा कागज़ १९७४

फिल्म कोरा कागज़ एक साफ़ सुथरी फिल्म है जिसके
कथानक में गंभीरता ज्यादा है. फिल्म में कुछ पल
ऐसे भी हैं जिनमें हास्य और छेड़ छाड है. आम तौर
पर नायक नायिका को छेड़ता नज़र आता है. प्रस्तुत
गीत में नायिका नायक को छेड़ रही है. खिसियाने से
दिख रहे नायक का नाम विजय आनंद है.

एम जी हशमत के लिखे गीत की धुन बनाई है जोड़ी
कल्याणजी आनंदजी ने और इसे लता मंगेशकर ने
गाया है. इस गीत के लिए लता मंगेशकर को फिल्मों
का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. फिल्म के संगीत के
लिए कल्याणजी आनंदजी को उस साल का फिल्मफेयर
पुरस्कार मिला था.



गीत के बोल:

रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसे
रूठे रूठे पिया मनाऊँ कैसे
आज न जाने बात हुई क्या
क्यों रूठे मुझसे
जब तक वो न बोलें मुझसे
मैं समझूँ कैसे
रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया

वो बैठे हैं कुछ ऐसे
शादी में दुल्हन जैसे
क्या बन के दुल्हा मैं जाऊँ
और उनकी माँग सजाऊँ
लम्बी दुल्हन ठिगना दूल्हा
लम्बी दुल्हन ठिगना दूल्हा
जोड़ी सजे कैसे
रूठे रूठे हो रूठे रूठे
हाँ हाँ रूठे रूठे पिया पिया पिया
रूठे रूठे पिया

क्या मुझसे हसीं हैं क़िताबें
पिया जिनको प्यार से थामे
मैं नैन मिलाना चाहूँ पर
नैन मिला ना पाऊँ
सौतन चश्मा बीच में आये
सौतन चश्मा बीच में आये
नैन मिलें कैसे
रूठे रूठे पिया

क्या बचपना कर रही हो
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Roothe roothe piya-Kora kagaz 1974

Artists: Jaya Bhaduri, Vijay Anand

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Apr 12, 2017

मेरा जीवन कोरा कागज़-कोरा कागज़ १९७४

किशोर कुमार के सबसे ज्यादा लोकप्रिय जो गीत हैं उनमें से एक
आज प्रस्तुत है फिल्म कोरा कागज से.

कोरा कागज फिल्म का निर्देशन अनिल गांगुली ने किया है. फिल्म
का कथानक रूटीन फिल्मों से अलग है. एक पारिवारिक फिल्म है
ये जिसमें मानवीय रिश्तों और पेचीदगियों का सजीव चित्रण है.




गीत के बोल:

मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया
जो लिखा था
जो लिखा था आँसुओं के संग बह गया
मेरा जीवन
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया

इक हवा का झोंका आया
इक हवा का झोंका आया
टूटा डाली से फूल टूटा डाली से फूल
ना पवन की ना चमन की
किसकी है ये भूल किसकी है ये भूल
खो गई
खो गई खुशबू हवा में कुछ न रह गया
मेरा जीवन
मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया

उड़ते पंछी का ठिकाना
हो उड़ते पंछी का ठिकाना
मेरा न कोई जहां मेरा न कोई जहां
ना डगर है ना खबर है
जाना है मुझको कहाँ जाना है मुझको कहाँ
बन के सपना
बन के सपना हमसफ़र का साथ रह गया
मेरा जीवन
मेरा जीवन ब्लेंक पेपर कोरा ही रह गया
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Mera jeevan kora kagaz-Kora kagaz 1974

Artists: Jaya Bhaduri, Vijay Anand

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Jun 16, 2010

मेरा पढने में नहीं लागे दिल-कोरा कागज़ १९७४

बात सन १९७४ की हो या सन २०१० की, गाना आज भी प्रासंगिक
है। यूँ कहिये आज ज्यादा प्रासंगिक है। आश्चर्य है की इसका 'मसाला '
'दुशाला, 'ऊट पटांगो छींको खांसो' मिक्स अभी तक क्यूँ नहीं बना।

फिल्म कोरा कागज़ के लिए संगीतकार कल्याणजी भाई और आनंदजी भाई
को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ था। गाना फिल्माया गया है जया भादुड़ी पर और
साथ में नाजनीन नाम की नायिका दिखलाई दे रही हैं। नाजनीन गाना शुरू
करती है और नायिका बाद में साथ देने लगती है। विजय आनंद अर्थात मास्टरजी
की शकल दिखाई देने के बाद सिट्टी पिट्टी गुम जैसे भाव के साथ गाना रुकता है
और क्षणिक अन्तराल के बाद फिर चल पढता है।

गीत अपने ज़माने का ज़बरदस्त हिट गीत है और इसे गाया है लता ने । इसको
हम नटखट गीतों की श्रेणी में गिन सकते हैं।



गीत के बोल:


मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ
मेरा पढने में नहीं लागे दिल
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल, उम्म्ह
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो ओ ओ ओ, बैठे बैठे मन मुस्काए
बैठे बैठे मन मुस्काए
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
मैं ना जानूं वो क्यूँ याद आये
किस्से बातें करती हूँ मैं
अरे किस्से बातें करती हूँ
चुपके चुपके हंसती हूँ
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, हो

हो, दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
दिल में क्या है लिख नहीं पाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
ख़त लिखूं तो उसे कैसे पहुँचाऊँ
पास भी उसके जा ना सकूं मैं
अरे, पास भी उसके जा ना सकूं मैं
दूर भी उसके रह ना सकूं मैं

कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल, क्यूँ
दिल पे क्या पड़ गई मुश्किल
अरे रात भी सूनी सूनी लागे
और दिन भी सूना सूना लागे
कोई ये तो बता दे
मुझे वो तो नहीं हो गया
मुझे वो तो नहीं हो गया

मेरा पढने में नहीं लागे दिल क्यूँ

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