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Aug 20, 2016

रात ढली जान चली-नौशेरवां-ए-आदिल १९५७

फिल्म: नौशेरवां-ए आदिल
वर्ष: १९५७
गीतकार:परवेज़ शमसी
संगीतकार: सी रामचंद्र
गायिका: लता मंगेशकर




गीत के बोल:

आ जा आ जा
आ जा आ जा

रात ढली रात ढली जान चली जान चली
बेखबर बेखबर मेरे दिलरुबा
रात ढली जान चली
बेखबर है किधर मेरे दिलरुबा

वो तेरी मेरी बात सनम याद है
वो तेरी मेरी बात सनम याद है
वो ठंडी ठंडी रात मुझे सनम याद है
वो ठंडी ठंडी रात मुझे सनम याद है
सूनी पड़ी सूनी पड़ी मेरी गली मेरी गली
बेखबर बेखबर है किधर मेरे दिलरुबा

रात ढली जान चली
बेखबर है किधर मेरे दिलरुबा

फीके पड़े हैं सारे नज़ारे
फीके पड़े हैं सारे नज़ारे
डूब चले हैं रात के तारे
दर्द-ए-जिगर कहाँ तुझको पुकारे
दर्द-ए-जिगर कहाँ तुझको पुकारे
सूख गयी दिल की कली
बेखबर है किधर मेरे दिलरुबा

आ जा आ जा
तेज बहते हुए मझधार के पानी से ना डर
तेज बहते हुए मझधार के पानी से ना डर
ना व् बन जायेगा तेरे लिए हर एक भंवर
दिल पे रख हाथ मोहब्बत के सहारे आ जा
दिल पे रख हाथ मोहब्बत के सहारे आ जा
आ जा आ जा आ जा
.............................................................
Raat dhali jaan chali-Nausherwan-e-adil 1957

Artists: Mala Sinha

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Aug 1, 2016

भूल जाएँ सारे गम-नौशेरवां-ए-आदिल १९५७

फिल्म नौशेरवां-ए-आदिल की शीर्षक भूमिका में हैं सोहराब मोदी.
वो न्यायप्रिय शासक की कहानी है जिसे कठिनाइयों का सामना
करना पडता है. जैसा कि हर ऐसी कहानी में होता है सच्चे और
आदर्शवादी मार्ग पर चलने वालों से ऊपरवाला पापड बिलवा लेता
है तरह तरह के, वैसा ही इस फिल्म के कथानक में भी है.

आइये सुनें एक और मधुर गीत इस फिल्म से जो राजकुमार और
माला सिन्हा पर फिल्माया गया है. फिल्म का ये दूसरा लता-रफ़ी
युगल गीत है. इसे भी परवेज़ शम्सी ने लिखा है और धुन बनाने
वाले संगीतकार भी वही हैं-सी रामचंद्र.



गीत के बोल:

भूल जायें सारे ग़म डूब जायें प्यार में
बज रही है धुन यही  रात के सितार में
भूल जायें सारे ग़म

हँस रहे है फूल जो गा रहा है गुलसितां
गा रहा है गुल जहां गा रहा है आसमां
तू ही तू है सदा
तू ही तू है सदा
लाख में हज़ार में

भूल जायें सारे ग़म डूब जायें प्यार में
बज रही है धुन यही  रात के गिटार में
भूल जायें सारे ग़म

शर्म से जो है डरी आ नहीं रही हँसी
बेखुदी में बेखुदी कर रही है गुदगुदी
हम रहे करार में
हम रहे करार में
दिल न है करार में

भूल जायें सारे ग़म डूब जायें प्यार में
बज रही है धुन यही  रात के गिटार में
भूल जायें सारे ग़म

इश्क़ में ज़रर नहीं कुछ हमें खतर नहीं
इश्क़ में ज़रर नहीं कुछ हमें खतर नहीं
बिजलियों से डर नहीं
बिजलियों से डर नहीं
जल ही जायें आशियाँ
जल ही जायें आशियाँ
हाँ मगर बहार में

भूल जायें सारे ग़म डूब जायें प्यार में
बज रही है धुन यही  रात के गिटार में
भूल जायें सारे ग़म
...............................................................
Bhhol jayen saare gham-Nausherwan-e-adil 1957

Artists-Mala Sinha, Raj Kumar

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Jun 19, 2016

ये हसरत थी-नौशेरवां-ए-आदिल १९५७

रफ़ी की आवाज़ में सभी कुछ था-भाव, लय, कारीगरी, सुर
और गज़ब का आकर्षण. सी रामचंद्र के साथ रफ़ी के ज्यादा
गीत नहीं हैं मगर ८३ गीत हैं जो मायने रखते हैं. सन ४७
से सन ७७ तक ये सफर चला. हिंदी गीत से शुरू हो के
तेलुगु गीत पर खत्म हुआ. इस सिलसिले में कई मधुर गीत
पनपे और अमर हो गए. ऐसे गीतों में से चुन के टॉप क्लास
गीत आज सुनवाते हैं आपको.

सी रामचंद्र एक ऐसे संगीतकार थे जो गीत के बोलों के हिसाब
से संगीत रचने में माहिर थे. उनका एक फंडा बढ़िया था जो
एस डी बर्मन का भी था-वाद्य यन्त्र गीत पर हावी न हो जाएँ
और गाने की ख़ूबसूरती को खतम न कर दें.  इसी बात को
ध्यान में रखने की वजह से हमें गायकों के ऐसे गीत सुनने
को मिले जिसमें गायकों ने भी अपने प्राण फूँक दिए. फिल्म
के गीत परवेस शम्सी ने लिखे हैं. जीने मरने की अलग वजहें
तो नहीं मगर अलग तरीके से प्रस्तुत हैं गीत में.

पोस्ट ज्यादा लंबा खींच के गोल्ड मैडल नहीं लेना है. किसी
शायराना ब्लॉग पर इस गाने की शान में कसीदे पढ़ लें. वैसे
भी दाद देने वाले आजकल दिख नहीं रहे लगता है जनता की
दाद खुजली सब खतम हो गई किसी करिश्माई दवाई से.

गीत में नायिका का दीदार आपको चंद पलों के लिए ही होगा.
. 


गीत के बोल:

ये हसरत थी के इस दुनिया में बस दो काम कर जाते
ये हसरत थी के इस दुनिया में बस दो काम कर जाते
तुम्हारी याद में जीते, तुम्हारे ग़म में मर जाते

ये दुनिया डूबती तूफ़ान आता इस क़यामत का
ये दुनिया डूबती तूफ़ान आता इस क़यामत का
अगर दम भर को आँखों में मेरी आँसू ठहर जाते

ये हसरत थी के इस दुनिया में बस दो काम कर जाते

तुम्हारी याद आ आ कर मेरे नश्तर चुभोती है
तुम्हारी याद आ आ कर मेरे नश्तर चुभोती है
मेरे नश्तर चुभोती है
मगर न दिल के सारे ज़ख़्म इतने दिन में भर जाते
मगर न दिल के सारे ज़ख़्म इतने दिन में भर जाते

ये हसरत थी के इस दुनिया में बस दो काम कर जाते

कहाँ तक दुख उठाएं
कहाँ तक दुख उठाएं तेरी फ़ुर्क़त और जुदाई के
तेरी फ़ुर्क़त और जुदाई के
अगर मरना ही था एक दिन, न क्यूँ फिर आज मर जाते
अगर मरना ही था एक दिन, न क्यूँ फिर आज मर जाते

ये हसरत थी के इस दुनिया में बस दो काम कर जाते
..............................................................................
Ye hasrat thi-Nausherwan-e-adil 1957

Artists: Rajkumar, Mala Sinha

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Jan 28, 2010

तारों की जुबां पर- नौशेरवां-ए-आदिल १९५७

कुछ गीत जिनमे चाँद सितारों का जिक्र है उनको रात में सुना जाए
तो अधिक आनंद देते हैं। इस गीत को भी आप रात में सुनिए ज्यादा
आनंद आएगा। वजह क्या है ये तो संगीत के दिग्गज बता सकते हैं।
एक मधुर युगल गीत लता और रफ़ी की आवाज़ में जिसकी धुन बनाई
है सी रामचंद्र ने। गीत फिल्माया गया है माला सिन्हा और राजकुमार पर।
गीत लिखा है परवेज़ शम्सी ने जिनका नाम और किसी फिल्म के साथ
मैंने नहीं सुना।



गीत के बोल:

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी
तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

कहते हैं जिसे चांदनी है नूर-ए-मुहब्बत
कहते हैं जिसे चांदनी है नूर-ए-मुहब्बत
तारों से सुनहरी है हमेशा तेरी किस्मत
तारों से सुनहरी है हमेशा तेरी किस्मत
जा जा के पलट आती है फिर तेरी जवानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

छाया हुआ दुनिया पे मुहब्बत का असर है
छाया हुआ दुनिया पे मुहब्बत का असर है
कहते हैं जिसे चाँद मेरा दाग-ए-जिगर है
कहते हैं जिसे चाँद मेरा दाग-ए-जिगर है
तारों से कहा करता है ये दिल की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

हम हो ना हो दुनिया यूँ ही आबाद रहेगी
हम हो ना हो दुनिया यूँ ही आबाद रहेगी
ये ठंडी हवा और ये फिजा याद रहेगी
ये ठंडी हवा और ये फिजा याद रहेगी
रह जाएगी दुनिया में मुहब्बत की निशानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

तारों की जुबां पर है मुहब्बत की कहानी
ए चाँद मुबारक हो तुझे रात सुहानी

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Jul 21, 2009

भीनी भीनी है-नौशेरवां-ए-आदिल १९५७

लता मंगेशकर और सी. रामचंद्र की म्युज़िकल केमिस्ट्री
ज़बरदस्त थी। इस जोड़ी ने कई सदाबहार यादगार नगमे दिए हैं।
एक फ़िल्म आई थी १९५७ में नौशेरवां-ए-आदिल। सोहराब मोदी
द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में राजकुमार और माला सिन्हा की
मुख्य भूमिकाएं हैं। फ़िल्म का सबसे मधुर गीत यही है। माला
सिन्हा के हिस्से में लता मंगेशकर के बहुत से मधुर गीत आए हैं।
पढ़ते रहिये जानकारी के लिए ये ब्लॉग।
गीतकार: परवेज़ शमसी



गाने के बोल:

भीनी भीनी है
मीठी मीठी है

धीमी धीमी है क्यूँ हवा

मिलके आई है
मस्ती छाई है
फूल लायी है खुशनुमा

महक रहे हैं दिल जिग़र
न होश है न ख़बर

कहीं पे दिल कहीं पे हम
है कुछ खुशी तो कुछ हैं ग़म

नया हुआ है ये माजरा

भीनी भीनी है................

खिली है जो कली कली
महकती है गली गली

ये कह रही है बुलबुलें
सनम के घर चलो चलें

बहरा का मिले मज़ा

भीनी भीनी है
मीठी मीठी है

धीमी धीमी है क्यूँ हवा

मिलके आई है
मस्ती छाई है
फूल लायी है खुशनुमा

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