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Oct 9, 2017

मेघा रे मेघा रे-प्यासा सावन १९८१

सन १९८० तक ज़माना सिंपल था जैसा कि आज के समय को देख
कर हम कह सकते हैं. सन १९४० में उससे भी सिंपल था जैसा कि
पूर्ण चांदीमय बालों के ओनर कहा करते हैं. तो हम सन १९८० पर
बात कर रहे हैं. फिल्म संगीत का कर्णभेदी पहलू अभी सो के उठा
ही था. उस युग में कुछ प्रमुख गायकों के संसार छोड़ने की वजह
से कुछ नए गायकों को अवसर मिलना शुरू हुए. इनमें से एक नाम
है सुरेश वाडकर का.

आज फिल्म प्यासा सावन से एक गीत सुनते हैं लता मंगेशकर और
सुरेश वाडकर का गाया हुआ. संतोष आनंद का गीत है और इस गीत
का संगीत लक्ष्मी प्यारे की देन है.




गीत के बोल:

मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
मत परदेस जा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे

कहाँ से तू आया कहाँ जायेगा तू
के दिल की अगन से पिघल जायेगा तू
धुआँ बन गई है ख़यालों की महफ़िल
मेरे प्यार की जाने कहाँ होगी मंज़िल
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे
मेरे ग़म की तू दवा रे  दवा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे

बरसने लगी हैं बूँदें तरसने लगा है मन
हो  ओ ओ ओ ओ
ज़रा कोई बिजली चमकी लरज़ने लगा है मन
और न डरा तू मुझको ओ काले काले घन
मेरे तन को छू रही है प्रीत की पहली पवन
हो  ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे मेघा रे मेघा रे
मेरी सुन ले तू सदा रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे

मन का मयूरा आज मगन हो रहा है
मुझे आज ये क्या सजन हो रहा है
उमंगों का सागर उमड़ने लगा है
बाबुल का आँगन बिखरने लगा है
न जाने कहाँ से हवा आ रही है
उड़ा के ये हमको लिये जा रही है
ये रुत भीगी भीगी भिगोने लगी है
के मीठे से नश्तर चुभोने लगी है
चलो और दुनिया बसायेंगे हम तुम
ये जन्मों का नाता निभायेंगे हम तुम
हो ओ ओ ओ ओ
मेघा रे मेघा रे  मेघा रे मेघा रे
दे तू हमको दुआ रे
आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे

हो ओ ओ ओ ओ
मे घारे  मे घारे मे घारे मे घारे
मेघा रे  मेघा रे मेघा रे मेघा रे
……………………………………….
Megha re megha re-Pyasa sawan 1981

Artists: Jeetendra, Mausami Chatterji

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Sep 9, 2015

इन हसीन वादियों से-प्यासा सावन १९८१

सुरेश वाडकर के शुरूआती गानों में से एक है प्यासा सावन
का ये गीत. ये थोडा बहुत सुनाई देता था फिल्म की रिलीज़
के आसपास.

ये उनका लता मंगेशकर ये साथ गाया युगल गीत है. लता
को उन्हें प्रमोट करने के श्रेय जाता है. शुरू में उन्हें संघर्ष
करना पड़ा लेकिन राह आसान बनती चली गई हौले हौले.

८० के दशक में अधिकाँश प्रमुख गायक सक्रिय थे सिवाए
मुकेश और रफ़ी के. मुकेश १९७५ में तो रफ़ी १९८० में
अलविदा कह गये उसके बाद हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में काफ़ी
रिक्तता आ गई. नयी आवाजों को फिल्म लाइन वाले एकदम
से स्वीकार नहीं कर पाए और उन्हें ये अंदेशा भी रहता कि
दर्शक इन्हें स्वीकार करेगा या नहीं.

सुनते हैं संतोष आनंद रचित और लक्ष्मी प्यारे द्वारा संगीतबद्ध
ये गीत फिल्म प्यासा सावन से.




गीत के बोल:

इन हसीन वादियों से
इन हसीन वादियों से दो चार नज़ारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें
इतना बड़ा गगन है दो चार सितारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें
इन हसीन वादियों से दो चार नज़ारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें

कहीं कोई झरना ग़ज़ल गा रहा है
कहीं कोई बुलबुल तराना सुनाये
यहाँ हाल ये है के साँसों की लय पर
ख्यालों में खोया बदन गुनगुनाये
कहीं कोई झरना ग़ज़ल गा रहा है
कहीं कोई बुलबुल तराना सुनाये
यहाँ हाल ये है के साँसों की लय पर
ख्यालों में खोया बदन गुनगुनाये
न नज़ीज़ ज़ुल्मतों से दो चार शरारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें

इन हसीन वादियों से दो चार नज़ारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें

हमारी कहानी शुरू हो गई है
हमारी कहानी शुरू हो गई है
समझ लो जवानी शुरू हो गयी है
कई मोड़ हमने तय कर लिये है
नई जिन्दगानी शुरू हो गई है
इन मदभरे मंजरो से दो चार सहारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें

इन हसीन वादियों से दो चार नज़ारे
चुरा लें तो चलें
इतना बड़ा गगन है दो चार सितारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें
इन हसीन वादियों से दो चार नज़ारे
चुरा लें तो चलें चुरा लें तो चलें
चुरा लें तो चलें
………………………………………………
In haseen wadiyon mein-Pyasa sawan 1981

Artists:

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Sep 6, 2015

ओ मेरी छम्मक छल्लो-प्यासा सावन १९८१

छम्मक छल्लो, छमिया हिट्स के अंतर्गत आने वाले
गानों में अगला गाना सुनते हैं

जिसने जवानी का भरपूर आनंद नहीं लिया उसे बुढापे
में क्या मौज और आनंद ऊपर से टपक के मिलेगा. जो
काम जिस समय का है उसे उसी समय पर किया जा
सकता है.

गीत काफी बड़ा है और उसमें बीच में कुछ नसीहतें
भी दी हुई हैं. पुराने गीतों की यही विशेषता होती थी
कि उसमे चीजें ढकी हुई रहती थीं और सुन्दर लगती
थीं. आज के गीत पहली ही पंक्ति से मुखर हो जाते हैं.

गीत संतोष आनंद का है और इसे किशोर कुमार संग
आशा भोंसले ने गाया है. गीत मनोरंजक है.


गीत के बोल:

ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरी छम्मक छल्लो दो दिन की है जिंदगानी
ओ मेरी छम्मक छल्लो दो दिन की है जिंदगानी
तू प्यार कर मुझे ऐसे मैं लिख दूं प्रेम कहानी
ओ मेरे रामलुभाया आंय
ओ मेरे रामलुभाया क्या लिखनी प्रेम कहानी
ओ मेरे रामलुभाया क्या लिखनी प्रेम कहानी
मौका है मौज मना लो कब किसपे रहे जवानी

ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरे रामलुभाया

लिखने का शौक मुझे है लिखता हूँ दिल की बातें
लिखने का शौक मुझे है लिखता हू दिल की बातें
थोड़ी सी दिन की बातें थोड़ी सी रातो की बातें
दिन के क्या तौर तरीके रातो की नीयत क्या है
तुम तो क्या जानो इस पर मौसम की चाहत क्या है

दिल जो कहता है उसको आँखों से मै कहता हूँ
दिल जो कहता है उसको आँखों से मै कहता हूँ
दिल की हालत को समझो रुत है कितनी मर्दानी
ओ मेरे रामलुभाया
ओ मेरे रामलुभाया क्या लिखनी प्रेम कहानी
मौका है मौज मना लो कब किसपे रहे जवानी

ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरे रामलुभाया

सुन सुन के बोल न बोले मेरा दिल बैठा जाये
सुन सुन के बोल न बोले मेरा दिल बैठा जाये
प्यासे अरमानों वाला सावन ये बीता जाये
मुझको कुछ होश नहीं था सचमुच में वो असर था
नजरो में तुम ही तुम थे मौसम से बेखबर था
अब तो कुछ खैर खबर लो सुन लो घनघोर खिलाडी
आंय
मंजिल पे आ के भटकी मेरे यौवन की गाड़ी
करते हो क्यों नादानी सोचो बातें मर्दानी
करते हो क्यों नादानी सोचो बातें मर्दानी
मौका है मौज मना लो कब किसपे रहे जवानी

ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरी छम्मक छल्लो दो दिन की है जिंदगानी
तू प्यार कर मुझे ऐसे मैं लिख दूं प्रेम कहानी
ओ मेरे रामलुभाया आंय
ओ मेरे रामलुभाया क्या लिखनी प्रेम कहानी
मौका है मौज मना लो कब किसपे रहे जवानी

ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरे रामलुभाया
ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरे रामलुभाया
ओ मेरी छम्मक छल्लो
ओ मेरे रामलुभाया
…………………………………………….
O meri chhammak chhallo-Pyasa sawan 1981

Artists:

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