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Aug 2, 2020

गुनगुन गुंजन करता भंवरा-हर हर महादेव १९५०

आज हिंदी सिनेमा जगत की जिन हस्तियों के जन्मदिन हैं
उनमें से एक हैं गीतकार रमेश शास्त्री. उनका लिखा बरसात
फिल्म का गीत आप सुन चुके हैं. एक गीत हमने सन १९५०
की फिल्म हर हर महादेव से भी सुनवाया है आपको पहले.

आज सुनते हैं हर हर महादेव फिल्म से एक और गीत जिसे
गीता दत्त ने गाया है. संगीत अविनाश व्यास का है.




गीत के बोल:

गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये
गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये
प्रेम मंतर चुपके से कह दो जो प्रीतम कहलाये
तुम कौन संदेशा लाये

इन नैनों में चैन नहीं है
इन नैनों में चैन नहीं है
सबके दिल कोई बैन नहीं है
हार उन्हीं के लिए रंक ने फूलन घेर बिछाए
तुम कौन संदेशा लाये

गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये

मेरा मन डोले रे डोले
ओ मेरा मन डोले रे डोले
वो क्या बोले रे बोले
मेरा मन डोले रे डोले
वो क्या बोले रे बोले
मैं उनके मन भाई हूँ
मैं उनके मन भाई हूँ क्या यही गीत तू गाये
तुम कौन संदेशा लाये

गुन गुनगुन गुन गुनगुन गुंजन करता भंवरा
तुम कौन संदेशा लाये
तुम कौन संदेशा लाये
तुम कौन संदेशा लाये
………………………………………………..
Gungun gunjan karta bhanwra-Har Har Mahadev 1950

Artist: Nirupa Roy

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Sep 13, 2018

कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ-हर हर महादेव १९५०

आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर सुनते हैं एक महादेव भजन.

त्रिलोक कपूर और निरुपा राय अभिनीत इस फिल्म में संगीत
अविनाश व्यास का है. प्रस्तुत गीत रमेश शास्त्री का लिखा हुआ
है.




गीत के बोल:

कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये
कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये
शिखर शिखर से पूछ रही हूँ
शंकर मेरा कहाँ है
गौरीवर गंगाधर हर हर
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये

लहर लहर लहराती गंगे तू क्यों गाती गाने
शिव जी हम से रूठ गए हैं क्या ये बात न जाने
रो रो नयन गवाएँ कोई बताये

कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूँ
शंकर मेरा कहाँ है कोई बताये

ओ नील गगन की चंद्रकला
ओ नील गगन की चंद्रकला
कोई बताये

हौले हौले चल फणीधर मैं भी तेरे संग चलूँ
तू लिपटेगा गले श्याम के मैं चरणों में रह लूँ
मेरा धन्य जीवन हो जाये
कोई बताये कोई बताये
…………………………………………………..
Kankad kankad se main poochhoon-Har Har Mahadev 1950

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Jan 16, 2017

हवा में उड़ता जाये-बरसात १९४९

सन १९४९ की फिल्म बरसात ने फिल्म संगीत का रुख मोड दिया
पूरी तरह से और एक नए युग का सूत्रपात हुआ इस फिल्म की
रिलीज़ के बाद. सन १९५० से १९७० तक के दौर को सुनहरा
दौर कहा जाता है. ज्यादा बारीक कान वाले ५०-६० के दशक को
सबसे अच्छा समय मानते हैं हिंदी फिल्म संगीत का.

अगर सयानों की बात सुनें तो हमारी फिल्मों ने सबसे पहले बोलना
शुरू किया, बातचीत जैसे गाने आये, फिर आया रोतला युग जिसमें
रोतले से गाने सुनाई दिए फिर आया बरसात के बाद का दौर. उस
बरसात में काफी सारे आंसू बह गए. इन्हीं सयानों के हिसाब से ७०
से २००० का दौर शोरगुल वाला युग और उसके बाद का चीखने वाला
युग है. लो साहब हो गया ३ लाइन में हिंदी फिल्म संगीत का
इतिहास.

फिल्म से एक गीत सुनते हैं रमेश शास्त्री का लिखा हुआ और लता
का गाया हुआ.



गीत के बोल:

हवा में उड़ता जाये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
इधर-उधर लहराये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी

हो ओ ओ ओ ओ ओ
सर सर सर सर हवा चले
हाय जियरा डगमग डोले
जियरा डगमग डोले
ओ सर सर सर सर हवा चले
हाय जियरा डगमग डोले
जियरा डगमग डोले
फर फर फर फर उड़े चुनरिया
घूँघट मोरा खोले
हाय घूँघट मोरा खोले

हवा में उड़ता जाये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
इधर-उधर लहराये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी

झर झर झर झर झरना बहता
ठण्डा ठण्डा पानी
ठण्डा ठण्डा पानी
झर झर झर झर झरना बहता
ठण्डा ठण्डा पानी
ठण्डा ठण्डा पानी
घूँघरू बाजे छुनक छुन्नक छुन्नक
चाल हुई मस्तानी
हाय चाल हुई मस्तानी

हवा में उड़ता जाये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
इधर-उधर लहराये
मोरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी हो जी
..............................................
Hawa mein udta jaaye-Barsaat 1949

Artist: Bimla Kumari

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