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Nov 1, 2014

जहाँ प्रेम का पावन- दुल्हन वही जो पिया मन भाये १९७७

आपको फिल्म-दुल्हन वही जो पिया मन भाये से एक गीत सुनवाया
था कुछ साल पहले. फिल्म मेंआधुनिक पोता घरेलू लड़की को नकली
बहू बनाले आता है उसके बाद सिलसिला शुरू होता है घरके सदस्यों के
मोहित होने का. इसी कड़ी में फिल्ममें एक भजन है जिसे हेमलता ने
गाया है औररामेश्वरी पर फिल्माया गया है.

आइये सुनते हैं एक कर्णप्रिय गीत जिसके बोल औरसंगीत दोनों ही
रवींद्र जैन के है. पुरानी धार्मिकफिल्मों के संगीतकार एस एन त्रिपाठी
की कमी कोरवींद्र जैन ने काफी हद तक पूरा कर दिया है. उन्होंने भक्ति
संगीत में काफी योगदान दिया है. 




गीत के बोल:

जहाँ प्रेम का पावन दियारा जले
जहाँ बोले वचन तब नीर भरे
उसी अंगना में उसी द्वारे पे
बीते हमारा भी जीवन राम करे
जहाँ प्रेम का पावन दियारा जले

कौन नदी की हम हैं लहर
कहो आ के मिला रे किनारा
जोग लिखे बिन हम नाहीं ऐसा मिलन हमारा
किन चरणों में न घर न पड़े
जहाँ प्रेम का पावन दियारा जले

जिस दिन नाही अपना कोई जो कह दे उसे अपना ले
उस की करुना उस की दया का उतरे न मर्ज़ उतारे
जिया जहाँ है वहीं जी मरें
जहाँ प्रेम का पवन दियारा जले
जहाँ बोले वचन तब नीर भरे
उसी अंगना में उसी द्वारे पे
बीते हमारा भी जीवन राम करे

जहाँ प्रेम का पावन दियारा जले
..........................................
Jahan prem ka-Dulhan wahi jo piya man bhaye 1977

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Feb 26, 2010

तुम सामने बैठे रहो-इकरार १९७९

सन १९७९ की फिल्म इकरार से एक और कर्णप्रिय गीत पेश है। यह गीत
लता मंगेशकर का गाया हुआ है। ये भी एक कम सुना हुआ गीत है।
बप्पी लहरी ने भी दुसरे संगीतकारों की तरह लता मंगेशकर के लिए
बढ़िया धुनें बनाने की कोशिश की है। पिआनो की आवाज़ वाला ये गीत
शांत किस्म का है। कुलवंत जानी के बोलों को धुन प्रदान की है बप्पी लहरी ने।



गीत के बोल:

तुम सामने बैठे रहो पलकें मेरी जम जाएं
तुम सामने बैठे रहो पलकें मेरी जम जाएं
हसरत है ये घड़ियाँ जब आएं तो थम जाएं

तुम सामने बैठे रहो पलकें मेरी जम जाएं

तुमसे ही मोहब्बत है तुम पर ही अक़ीदत है
ऐ जान-ए-तमन्नाई ये बात हक़ीक़त है
अब छोटे से इस दिल में ये छोटी सी हसरत है

तुम सामने बैठे रहो पलकें मेरी जम जाएं
हसरत है ये घड़ियाँ जब आएं तो थम जाएं
तुम सामने बैठे रहो

आए न कभी दूरी कोई न हो मजबूरी
तोहफ़ा है यही मेरा रहे माँग ये सिन्दूरी
आए न कभी दूरी कोई न हो मजबूरी
तोहफ़ा है यही मेरा रहे माँग ये सिन्दूरी
मेरे दिल की दुआ है के हो आस मेरी पूरी

तुम सामने बैठे रहो पलकें मेरी जम जाएं
हसरत है ये घड़ियाँ जब आएं तो थम जाएं
तुम सामने बैठे रहो

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साथी रे गम नहीं करना-इकरार १९७९

राकेश रोशन और रामेश्वरी की जोड़ी ?? चौंक गए ना। उसपर
राकेश रोशन रफ़ी की आवाज़ पे होंठ हिलाए तो थोडा चौंकना
स्वाभाविक है। राकेश रोशन को अधिकतर किशोर के गाये गाने
मिले हैं। ये थोडा अलग सा गीत है जो फिल्म आने के आस पास
रेडियो पर बहुत बजा करता था। उसके बाद ये एकदम से बजना
बंद हो गया। गीत कर्णप्रिय है और बप्पी लहरी ने इसकी धुन बनाई
है। फिल्म ज्यादा नहीं चली थी इसलिए जनता इसे देखने से लम्बे
समय तक वंचित रही। फिल्म की वी सी डी बाज़ार में आने के बाद
ही अधिकांश को इसे देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। रामेश्वरी फिल्मों
में अपनी घरेलू लड़की की सूरत के चलते ज्यादा नहीं दिखाई दीं।
पारिवारिक फिल्म 'दुल्हन वही जो पिया मन भाए' जैसी सफलता
उनको आगे फिर कभी देखने को नहीं मिली। ये एक प्रेरणादायक
गीत है जिसे आप महसूस करेंगे इसको सुनने के बाद।



गीत के बोल:

साथी रे गम नहीं करना
जो भी हो आहें ना भरना
साथी रे गम नहीं करना
जो भी हो आहें ना भरना

जीवन है एकतारा
जिसका हर सुर प्यारा

साथी रे गम नहीं करना
जो भी हो आहें ना भरना

दुःख सुख तो है धन की छाया
रमता जोगी बहता पानी
बीते कल का सोग मानना
रोग लगाना है नादानी

हाथों में हाथ ले
हाथों में हाथ दे
पार हो जीवन धारा

साथी रे गम नहीं करना


चार घडी का झोंका है बस
गहरी काली रात का डेरा
आज तो सूरज डूब रहा है
फिर आएगा लेके सवेरा

हाथों में हाथ ले
हाथों में हाथ दे
पार हो जीवन धारा

साथी रे गम नहीं करना

फूल की माना उम्र है थोड़ी
जितनी भी है महक भरी है
वैसे ही तू हंस के जी ले
जीवन तेरा जो बाकी है

हाथों में हाथ ले
हाथों में हाथ दे
पार हो जीवन धारा

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

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