Showing posts with label Rakesh Roshan. Show all posts
Showing posts with label Rakesh Roshan. Show all posts

Feb 1, 2013

तुमसे बढ़ कर दुनिया में–कामचोर १९८२

कामचोरों और बेरोजगारों पर बॉलीवुड में पहले भी फ़िल्में
बनी हैं. १९८२ की फिल्म कामचोर में ग्लैमर है. थोडा नए
तरीके से प्रस्तुति है पुराने फार्मूले की. फिल्म के गीत भी
बढ़िया हैं. राकेश रोशन ने मेहनत की है अभिनय के मामले
में. बाकी लोगों का अभिनय तो बढ़िया है ही, जिसमें
अभिनेत्री जया प्रदा और श्रीराम लागू उल्लेखनीय हैं.
तनूजा और सुजीत कुमार भी अपनी अपनी भूमिकाओं में
जंचे हैं.

नायक लड़की पटाने की राह में एक पुराना एल. पी. रेकोर्ड
खरीद लाता है. जो गाना बजना शुरू होता है ग्रामोफोन पर,
थोड़ी देर में सुई अटकने लग जाती है. जिस गायक की ये
आवाज़ है भारी सी-उनका नाम है चंद्रू आत्मा. नायक
खुद गाना शुरू करता है इस गीत को, जो कि फिल्म के
मुताबिक़ ज़रूरी था. बाड में नायिका भी सुर में सुर मिलाने
वाली है.

   


गीत के बोल:

तुमसे बढ़ कर दुनिया में ना देखा कोई और
जुबां पर आज दिल की बात आ गई

क्या खूब ऑंखें हैं तेरी
इनमें जिंदगानी है मेरी
जी लेंगे हम देख देख के इनको
तू ही तू ख्वाबों में
है ना दूजा कोई और
जुबां पर आज दिल की बात आ गई

सुंदरता तूने वो पायी,
नाजां हैं तुझपे खुदाई
नाज़ नहीं अपने पर
फिर भी तुझको
दिल का हसीं तेरे जैसा
ना देखा कोई और
जुबां पर आज दिल की बात आ गई

बातों में तेरी एक अदा है
तेरी अदा में वफ़ा है
फिर भी तुझसे मिलने को जी चाहे
दिल में इतना प्यार लिए
ना आया कोई और
जुबां पर आज दिल की बात आ गई
………………………………………………..
Tumse badh kar duniya mein-Kaamchor 1982

Read more...

Aug 28, 2011

थोडा है थोड़े की ज़रूरत है-खट्टा मीठा १९७७

फिल्म नरम गरम से एक गीत और याद आया फिल्म खट्टा मीठा
का। निहायत ही खुशनुमा और उम्मीदें जगाने वाला गीत है ये।
इस फिल्म के कथानक ने मुझे काफी प्रभावित किया।

गीत का सार है-थोड़ा ही तो चाहिए। जीवन में थोड़ा थोड़ा सब
कुछ प्रसाद स्वरुप मिलता रहे तो आनंद ही आनंद है। आनंद तो है
मगर थोड़े में संतोष करने पर ही।

गीत लिखा है गुलज़ार ने और इसे गाया है किशोर कुमार एवं
लता मंगेशकर ने। इसे आप राजेश रोशन द्वारा संगीतबद्ध सर्वश्रेष्ठ
रचनाओं में से एक गिन सकते हैं। गुलज़ार बिना कुछ अलग हट के
और कुछ लीक से हटकर बने गीतों की आप कल्पना नहीं कर सकते
हैं. भारतीय सिनेमा का एक अवश्यक तत्त्व से हैं गुलज़ार। गुलज़ार
को हिंदी फ़िल्मी गीत में प्रयोगधर्मिता का मसीहा कहें तो अतिशयोक्ति
नहीं होना चाहिए।

गीत को आप परफेक्ट युगल गीत कह सकते हैं। ऐसे गीत सुनने में बेहद
रोचक लगते हैं जिसमें दो शब्द गायक, दो शब्द गायिका गाये। इसे आप
अकेले गुनगुनाएं तो आनंद नहीं आएगा। साथ में कोई होना ज़रूरी है इसे
गुनगुनाने के लिए। खुशकिस्मत हैं वो लोग जिन्हें साथ में कोई ना कोई
गुनगुनाने वाला मिलता है।

गीत में आपको महानायक अमिताभ की एक झलक दिख जाएगी।



हुं हुं हुं, हे हे हे, ला ला ला ला ला ला

थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है
ज़िंदगी फिर भी अहा ख़ूबसूरत है
थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है

जिस दिन पैसा होगा
वो दिन कैसा होगा
उस दिन पहिये घूमेंगे
और क़िस्मत के लब चूमेंगे
बोलो ऐसा होगा

थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है

सुन सुन सुन हवा चली, सबा चली
तेरे आँचल से उड़ के घटा चली

सुन सुन सुन कहाँ चली कहाँ चली
मैं छूने ज़रा आसमाँ चली
बादल पे उड़ना होगा
थोड़ा है, थोड़े की
ज़रूरत है, हाँ ज़रूरत है, हो ज़रूरत है

हमने सपना देखा है
कोई अपना देखा है
हमने सपना देखा है
कोई अपना देखा है
जब रात का घूँघट उतरेगा
और दिन की डोली गुज़रेगी
तब सपना पूरा होगा
थोड़ा है, थोड़े की
ज़रूरत है
ज़िंदगी, फिर भी अहा, ख़ूबसूरत है
थोड़ा है, थोड़े की, ज़रूरत है
..............................................
Thoda hai thode ki zaroorat-Khatta Meetha 1977

Read more...

Jun 20, 2011

अभी अभी थी दुश्मनी-ज़ख़्मी १९७५

एक मनोरंजक और नटखट गीत देखते हैं। आखिर
बहुत दिन हो गये हैं हमें ऐसा गीत सुने। फिर हमें
सौम्यता का स्वर्ण पदक भी तो नहीं प्राप्त करना है
ब्लॉग पुरस्कारों में।

जवानी के दौर में जब आप किसी लड़की की ऊँगली मुंह
में डालते हैं तो दिल के अन्दर से व्ह्यऊँ व्ह्यऊँ ट्यून ट्यून
की ध्वनियाँ निकलने लगती है। गीत की शुरुआत में इसे
बड़े ही अनोखे अंदाज़ में दिखाया गया है। जो भी पाठक
जवानी के दौर में हैं या गुज़र चुके हैं उन्होंने इसे ज़रूर
महसूस किया होगा। युवा रीना राय और राजेश रोशन पर
फिल्माया गया ये गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ
है, इसे लिखा गौहर कानपुरी ने और संगीत से संवारा
है बप्पी लहरी ने।






गीत के बोल:

अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती
दिल विल मेरी मंजिल नहीं
चली रे
अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती
दिल विल मेरी मंजिल नहीं
चली रे

हा, छोड़ ना

गोरी गोरी बाहों को अरे अरे छोडो जी
देखो इन अदाओं से नाता नहीं जोड़ो जी
गोरी गोरी बाहों को अरे अरे छोडो जी
देखो इन अदाओं से नाता नहीं जोड़ो जी
इसके आगे प्यार है, प्यार बेकार है

अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती
दिल विल मेरी मंजिल नहीं
चली रे

ऐसे ही अकेले में प्यार किया जाता है
कसम खायी जाती है वादा किया जाता है, हा
ऐसे ही अकेले में प्यार किया जाता है
कसम खायी जाती है वादा किया जाता है
बाद में फिर शादी है, शादी में बर्बादी है


अभी अभी थी दुश्मनी अभी है दोस्ती
दिल विल मेरी मंजिल नहीं
चली रे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
चली रे
..................................
Abhi abhi thi dushmani-Zakhmi 1975

Read more...

Feb 2, 2011

बागों में खिले हैं कैसे कैसे फुलवा-शुभकामना १९८३

आपको फिल्म सितारा के दो गीत सुनवाए। उम्मीद है
पसंद आये होंगे। अब सुनिए एक कम सुना हुआ कर्णप्रिय
गीत जो कम देखी गई फिल्म शुभकामना से है। इसे
आशा भोंसले और एस पी बालसुब्रमण्यम ने गाया है।
फिल्म में रति अग्निहोत्री और राकेश रोशन की जोड़ी
है। उत्पल दत्त के अलावा इस फिल्म के कलाकारों के
अभिनय पर ज्यादा दिमाग खर्च करने की आवश्यकता
नहीं पड़ेगी, अगर आप फिल्म देखना चाहें तो। गीत
अलबत्ता फिल्म के सुनने लायक हैं और ऐसा लगता है
एक बार फिर संगीतकार की मेहनत बेकार हुई। फिल्म
हिट होती है तो जनता गाने भी सुन लेती है। राकेश रोशन
की हंसी शायद फिल्म उद्योग की सबसे खिसियानी हंसियों
में से एक है। गीत की शुरुआत में केवल यही एक चीज़
खटकती है। बोल अनजान के हैं वही "खाई के पान बनारस"
गीत को लिखने वाले । एक बिल्ली अलसाई सी म्याऊँ बोले
तो जो आवाज़ आएगी कुछ वैसे ही अंदाज़ में इस गीत के
शब्द "गाये", "आये" वगैरह गाये गए हैं।



गीत के बोल:

बागों में खिले हैं कैसे कैसे फुलवा
बुलबुल क्यूँ नहीं गाये

गाना वो चाहे जो होंठों पे ना आये
बुलबुल कैसे गाये

Read more...

Feb 26, 2010

साथी रे गम नहीं करना-इकरार १९७९

राकेश रोशन और रामेश्वरी की जोड़ी ?? चौंक गए ना। उसपर
राकेश रोशन रफ़ी की आवाज़ पे होंठ हिलाए तो थोडा चौंकना
स्वाभाविक है। राकेश रोशन को अधिकतर किशोर के गाये गाने
मिले हैं। ये थोडा अलग सा गीत है जो फिल्म आने के आस पास
रेडियो पर बहुत बजा करता था। उसके बाद ये एकदम से बजना
बंद हो गया। गीत कर्णप्रिय है और बप्पी लहरी ने इसकी धुन बनाई
है। फिल्म ज्यादा नहीं चली थी इसलिए जनता इसे देखने से लम्बे
समय तक वंचित रही। फिल्म की वी सी डी बाज़ार में आने के बाद
ही अधिकांश को इसे देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। रामेश्वरी फिल्मों
में अपनी घरेलू लड़की की सूरत के चलते ज्यादा नहीं दिखाई दीं।
पारिवारिक फिल्म 'दुल्हन वही जो पिया मन भाए' जैसी सफलता
उनको आगे फिर कभी देखने को नहीं मिली। ये एक प्रेरणादायक
गीत है जिसे आप महसूस करेंगे इसको सुनने के बाद।



गीत के बोल:

साथी रे गम नहीं करना
जो भी हो आहें ना भरना
साथी रे गम नहीं करना
जो भी हो आहें ना भरना

जीवन है एकतारा
जिसका हर सुर प्यारा

साथी रे गम नहीं करना
जो भी हो आहें ना भरना

दुःख सुख तो है धन की छाया
रमता जोगी बहता पानी
बीते कल का सोग मानना
रोग लगाना है नादानी

हाथों में हाथ ले
हाथों में हाथ दे
पार हो जीवन धारा

साथी रे गम नहीं करना


चार घडी का झोंका है बस
गहरी काली रात का डेरा
आज तो सूरज डूब रहा है
फिर आएगा लेके सवेरा

हाथों में हाथ ले
हाथों में हाथ दे
पार हो जीवन धारा

साथी रे गम नहीं करना

फूल की माना उम्र है थोड़ी
जितनी भी है महक भरी है
वैसे ही तू हंस के जी ले
जीवन तेरा जो बाकी है

हाथों में हाथ ले
हाथों में हाथ दे
पार हो जीवन धारा

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

Read more...

Feb 19, 2010

ये ऑंखें देख कर हम- धनवान १९८१

समय से आगे का संगीत देने वाला संगीतकार-जी हाँ
हम ऐसे ही जानेंगे हृदयनाथ मंगेशकर को क्यूंकि स्वयं लता
ने उनके बारे में ऐसा कहा है जो हृदयनाथ कि बहन हैं। उनकी
धुनें थोड़ी अलग सी तो सुनाई देती हैं इसमें कोई शक नहीं ।
ये गीत है फिल्म धनवान से जिसमे राजेश खन्ना रीना रॉय और
राजेश खन्ना प्रमुख कलाकार हैं। तीनों के नाम 'र' से शुरू होते हैं।
खेतों में बजूका अक्सर सफ़ेद रंग कि पोषक में खड़ा किया जाता है।
गीत शुरू होते समय ऐसा लगता है बजूका अपने बांस से कूद के
ज़मीन पे उतर आया हो और उसने हरे भरे बगीचे /खेत में नाचना
शुरू कर दिया हो। अरे ये तो हीरो है जो हाथ में दो ओरेंज कैंडी लेके
झूमता हुआ नायिका के पास आ रहा है और जल्दी ही गीत गानेवाला
है। गीत गाया है लता और सुरेश वाडकर ने। 'झेंपना' जैसा शब्द कौन
गीतकार इस्तेमाल कर सकता है-पहचानिए ??



गीत के बोल:

ये ऑंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं
ये ऑंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं
इन्हें पाने की
इन्हें पाने की धुन में हर तमन्ना भूल जाते हैं

तुम अपनी महकी महकी ज़ुल्फ़ के पेचों को कम कर दो
तुम अपनी महकी महकी ज़ुल्फ़ के पेचों को कम कर दो
मुसाफिर इनमें घिरकर अपना रास्ता भूल जाते
भूल जाते हैं

ये ऑंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं

ये बाँहें जब हमें अपनी पनाहों में बुलाती हैं
ये बाँहें जब हमें अपनी पनाहों में बुलाती हैं
हमें अपनी क़सम
हमें अपनी क़सम हम हर सहारा भूल जाते हैं

तुम्हारे नर्म-ओ-नाज़ुक होंठ जिस दम मुस्कुराते हैं
तुम्हारे नर्म-ओ-नाज़ुक होंठ जिस दम मुस्कुराते हैं
बहारें झेंपती हैं फूल खिलना भूल जाते हैं

ये ऑंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं

बहुत कुछ तुम से कहने कि तमन्ना दिल में रखते हैं
बहुत कुछ तुम से कहने कि तमन्ना दिल में रखते हैं
मगर जब सामने आते हैं कहना भूल जाते हैं

मुहब्बत में जुबां चुप हो तो ऑंखें बात करतीं हैं
मुहब्बत में जुबां चुप हो तो ऑंखें बात करतीं हैं
वो कह देती हैं सब बातें जो कहना भूल जाते हैं

ये ऑंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं
ये ऑंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं

Read more...

Oct 18, 2009

तू प्यार तू प्रीत- पराया धन १९७२

गाने को मधुर बनने में वाद्य यंत्रों का भी बहुत बड़ा योगदान
रहता है , उसका एक शानदार नमूना ये गीत। फ़िल्म का नाम है
पराया धन और इसमे कलाकार हैं हेमा मालिनी और राकेश रोशन।
ये शायद उस ज़माने का गीत है जब राकेश रोशन के सर पर पूरे
बाल हुआ करते थे। लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गाये
गीत को स्वरबद्ध किया है राहुल देव बर्मन ने। ये मेरे पसंदीदा
गीतों में से एक है। आप भी आनंद उठायें।



गाने के बोल:

तू प्यार तू प्रीत,
तू चाँद तू रात

जीना मरना साथ
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार तू प्रीत,
तू चाँद तू रात

जीना मरना साथ
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू साज़ तू गीत
हाँ, तू रूप, तू रंग

छूटे ना ये संग
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार .......

बात आज की तो ये नहीं
भूल जायें जो ये वो नहीं
हाँ,बात आज की तो ये नहीं
भूल जायें जो ये वो नहीं

नई है जिंदगानी,
है सदियों पुरानी , हमारी मुलाक़ात
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू साज़ तू गीत
हाँ, तू रूप, तू रंग

छूटे ना ये संग
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार .......

दूर दूर अब रहना नहीं,
आज और कुछ कहना नहीं
हो, दूर दूर अब रहना नहीं,
आज और कुछ कहना नहीं

ना लागे अब जिया रे,
कहे तो तेरे द्वारे
मैं ले आऊँ बरात
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार तू प्रीत,
तू चाँद तू रात

जीना मरना साथ
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार ....

रात और दिन ढलते रहें
साथ साथ हम चलते रहें
रात और दिन ढलते रहें
साथ साथ हम चलते रहें
बने हम ऐसे साथी
के जैसे दिया बाती
दिल में है ये उमंग
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार तू प्रीत,
तू चाँद तू रात

जीना मरना साथ
तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है

तू प्यार .......
...............................................................
Too pyar too preet-paraya dhan  1972

Read more...

Jul 4, 2009

पहली पहली बार-एक कुंवारी एक कुंवारा १९७३

गाने के विडियो को देख के ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि किसकी
लिपस्टिक ज्यादा चमकदार है इस गाने में-राकेश रोशन की या नायिका
लीना चंदावरकर की । आशा और किशोर का गया हुआ ये गाना समुद्र
किनारे फिल्माया गया है। ऐसे हरियाली भरे गाने आँखों को सुकून प्रदान
करते हैं। जब नायक या नायिका नए होते हैं तब उनके साथ थोड़ा सा
प्रयोग चलता है फिल्म जगत में । राकेश रोशन भी दूसरे नायकों की भांति
अनेक नायिकाओं के साथ देखे गाये अपने शुरुआती दौर में । लगभग सारे
नामचीन कलाकार जोड़ियों के रूप में प्रसिद्ध हुए मगर वे फिल्म उद्योग के
उन चुनिन्दा अभिनेताओं में हैं जिनके नाम के साथ किसी नायिका विशेष का
नाम नहीं जुड़ा अर्थात जोड़ी नहीं बन पाई। कमोबेश यही स्तिथि शानदार
कलाकार संजीव कुमार की भी रही। संजीव की लीना चंदावरकर के साथ
४-५ फ़िल्में अवश्य आयीं। राकेश रोशन और लीना चंदावरकर की जोड़ी
शायद ही किसी और फ़िल्म में आई हो। इस प्रकार से ये गाना 'रेएर सोंग्स'
की श्रेणी में आ जाता है।

फ़िल्म : एक कुंवारी एक कुंवारा
संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी


गीत के बोल:

पहली पहली
पहली पहली बार हुई जब तुमसे ऑंखें चार
पहली पहली बार हुई जब तुमसे ऑंखें चार

हो ओ ओ, आग लगी दोनों के दिलों में जागा ऐसा प्यार
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे

फिर चुपके चुपके होने लगे प्यार के इशारे
फिर चुपके चुपके होने लगे प्यार के इशारे
तुम धीरे धीरे आने लगे पास हमारे
तुम धीरे धीरे आने लगे पास हमारे
मारा ऐसा तीर-ए-नज़र जो
मारा ऐसा तीर-ए-नज़र जो, हो गया दिल के पार
तीर चलते रहे हम सँभालते रहे
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे

पहली पहली बार हुई जब तुमसे ऑंखें चार
हो ओ ओ, आग लगी दोनों के दिलों में जागा ऐसा प्यार
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे

फिर एक दिन तुमने कर ही लिया हमसे किनारा
फिर एक दिन तुमने कर ही लिया हमसे किनारा
पूछो ना सजना फिर जो हुआ हाल हमारा
पूछो ना सजना फिर जो हुआ हाल हमारा
प्यार में जो तकरार नहीं हो
प्यार में जो तकरार नहीं हो, वो भी कैसा प्यार
दिल मचलते रहे, हम बहलते रहे
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे

पहली पहली बार हुई जब तुमसे ऑंखें फोर
हो ओ ओ, आग लगी दोनों के दिलों में जागा ऐसा प्यार
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे
तुम भी जलते रहे हम भी जलते रहे
....................................................
Pehli pehli baar hui hain-Ek kunwari ek kunwara 1973

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP