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Sep 1, 2016

जैसा मेरा रूप रंगीला-सन्यासी १९७५

आज सुनते हैं सन १९७५ की फिल्म सन्यासी से एक गीत. ये फिल्म
सोहनलाल कँवर ने बनाई और इसका निर्देशन भी किया. मनोज कुमार,
हेमा मालिनी, प्रेमनाथ, प्रेम चोपड़ा, अरुणा ईरानी, प्राण, कामिनी कौशल
और टुनटुन जैसे कलाकारों से सजी ये फिल्म एक चर्चित फिल्म है
और इसके गीत भी बेहद लोकप्रिय हैं.

हिंदी फिल्मों में आम तौर पर खलनायक के सामने होने वाले डांस
हेलन, लक्ष्मी छाया, बिंदु, जयश्री टी जैसे कलाकारों के हिस्से में आया
करते थे. कुछ फिल्मों में ये काम फिल्म की नायिका को ही दे दिया
जाता था. गीत हेमा मालिनी पर फिल्माया गया है. हेमा मालिनी की
अधिकाँश फिल्मों में ऐसे गाने उनके ऊपर ही फिल्माए गए हैं शायद
उनके कुशल नर्तकी होने की वजह से निर्देशक दुसरे किसी कलाकार
की ज़रूरत महसूस ना करता हो.

गीत लिखा है विश्वेशर शर्मा ने और इसकी धुन शंकर जयकिशन ने
बनाई है. संगीतकार शंकर ने अकेले इस फिल्म का संगीत तैयार किया
था. 


   
गीत के बोल:

जैसा मेरा रूप रंगीला वैसा मिले जवान
तो सौदा पट जाए
जैसा मेरा रूप रंगीला वैसा मिले जवान
तो सौदा पट जाए

एक उमरिया बाली मेरी उस पर चढ़े जवानी
उसके ऊपर नशा रूप का हो गयी मैं दीवानी
एक उमरिया बाली मेरी उस पर चढ़े जवानी
उसके ऊपर नशा रूप का हो गयी मैं दीवानी
ऐसे में फिर साथ तुम्हारा
और ये रुत सुहानी

मुमकिन है हो जाए हमसे आज कोई नादानी
डरती हूँ कुछ हो ना जाए दोल रहा ईमान
ये दिल ना लुट जाए

जैसा मेरा रूप रंगीला वैसा मिले जवान
तो सौदा पट जाए

इसका दिल उसका दिल सबका दिल है काला
खोल रहा हर कोई देखो एक दूजे का ताला
इसका दिल उसका दिल सबका दिल है काला
खोल रहा हर कोई देखो एक दूजे का ताला

सोने का पिंजरा ले कोई खड़ा उधर दिलवाला
इधर जाल ले घूम रहा है मुझे पकड़ने वाला
किस पर करूं भरोसा सारे लोग यहाँ बेईमान
गला ना कट जाए

जैसा मेरा रूप रंगीला वैसा मिले जवान
तो सौदा पट जाए
जैसा मेरा रूप रंगीला वैसा मिले जवान
तो सौदा पट जाए
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Jaisa mera roop rangeela-Sanyasi 1975

Artists: Hema Malini, Manoj Kumar, Prem Chopra, Premnath

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Jul 6, 2011

कहीं हो ना मोहल्ले में-चौकी नंबर ११ १९७८

आपसे संगीत के दुर्लभ और मधुर प्रस्तुतियां सुनवाने का वादा है
अतः समय समय पर इस ब्लॉग में गैर फ़िल्मी गीत, ग़ज़ल भी
शामिल किये जाते हैं।

प्रस्तुत गीत फ़िल्मी गीत ही है। दुर्लभ ये इस मायने में है कि
एक समय खूब बजने के बाद ये अदृश्य सा हो गया। प्रसिद्ध
ठुमरी व दादरा गायिका शोभा गुर्टू ने इसे गाया है अपने दिलकश
अंदाज़ में। विश्वेश्वर शर्मा ने इसके बोल लिखे हैं और एक गुमनाम
सी फिल्म चौकी नंबर ११ के लिए इसका संगीत तैयार किया है
सोनिक ओमी ने।



गीत के बोल:


कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना
कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना

दरवज्जे पे ताला है लल्ला कि बड कईं आ जाना
दरवज्जे पे ताला है लल्ला कि बड कईं आ जाना
किवड़िया ना खटकाना

जब से बिहाई तब से ना आई एक रात सुहानी
जब से बिहाई तब से ना आई एक रात सुहानी
पियु गये परदेस कमाने
पियु गये परदेस कमाने सूनी छोड़ जवानी
रोये रात रात
रोये रात रात चुनरी का पल्ला घुन्घत्वा उठा जाना
रोये रात रात चुनरी का पल्ला घुन्घत्वा उठा जाना
किवड़िया ना खटकाना

पिछली रात पडोसी के घर लाल जले जब बत्ती
पिछली रात पडोसी के घर लाल जले जब बत्ती
खिड़की के परदे पर देखूं,
देखूं मोरी दिया हाँ देखो मोरी सैयां
खिड़की के परदे पर देखूं, छाया है जो मिलती
जिया करता है
जिया करता है जोर से जो चिल्लाऊं ,
बचाना मुझे बचाना
जिया करता है जोर से जो चिल्लाऊं ,
बचाना मुझे बचाना

कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना
किवड़िया ना खटकाना

सावन सूखा, फाल्गुन फीका , होली ना दीवाली
सावन सूखा, फाल्गुन फीका , होली ना दीवाली
सखियों के घर कागा बोले,
कागा बोले, कागा बोले
सखियों के घर कागा बोले, यहाँ पे बिल्ली काली
मैं तो फूँक फूँक
मैं तो फूँक फूँक हारी रे चूल्हा सबर कब चटकाना ?
मैं तो फूँक फूँक हारी रे चूल्हा सबर कब चटकाना ?
किवड़िया ना खटकाना

आगे ताला पीछे ताला बंद सभी दरवाजे
आगे ताला पीछे ताला बंद सभी दरवाजे
चाबी मेरे पास नहीं है पायलिया जब बाजे
पायलिया जब बाजे रामा, पायलिया जब बाजे
चाबी मेरे पास नहीं है पायलिया जब बाजे
इस खिड़की का
इस खिड़की का पल्ला लगे झुल्ला
उसी से तू आ जाना
इस खिड़की का पल्ला लगे झुल्ला
उसी से तू आ जाना

कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना
किवड़िया ना खटकाना
दरवज्जे पे ताला है लल्ला कि बड कईं आ जाना
किवड़िया ना खटकाना
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Kahin ho na mohalle mein-Chowki No. 11

Arttist: Zareena Wahab

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May 16, 2011

तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन -आत्माराम १९७९

शंकर जयकिशन का संगीत हिंदी फिल्म संगीत की अमूल्य
निधि कहा जाता है। उनके संगीत में आपको वाद्य यंत्रों
का प्रचुर प्रयोग मिलेगा। सन १९७१ में जयकिशन के अवसान
के बाद शंकर अकेले ही संगीत तैयार करते रहे। उन्होंने
जोड़ी का नाम यथावत रखा-शंकर जयकिशन। आम श्रोता
तक इस प्रकार की जानकारी नहीं पहुँच पाती। वो केवल गीत
सुन सुन कर खुश हो लेता है। लता और रफ़ी के गाये युगल
गीत आपने कई सुने होंगे लेकिन कितने आप याद रख पाते
हैं वो अलग बात है। ये गीत सन ८० के आस पास बहुत बजा
करता था। इसकी फिल्म कब आई कब गई कुछ मालूम
नहीं पढ़ा। बरसों बाद जानकारी मिली कि ये शत्रुघ्न सिन्हा
और विद्या सिन्हा अभिनीत फिल्म आत्माराम से है। फिल्म में
आत्माराम का चरित्र शत्रुघ्न ने निभाया है। सिन्हा-सिन्हा की
जोड़ी वाली शायद ही कोई और फिल्म बनी हो । गीत में नायिका
नायक को उकसाती प्रतीत हो रही है और नायक दूर भाग रहा है।
ऐसा क्यूँ है ये जानने के लिए आपको फिल्म एक बार अवश्य देखना
पड़ेगी। फिल्म का निर्माण और निर्देशन सोहनलाल कँवर ने किया,
वही सोहनलाल जिनकी अधिकतर फिल्मों में आपको शंकर जयकिशन
का संगीत मिलेगा। इनकी जो फ़िल्में ज्यादा लोकप्रिय है वो है मनोज
कुमार अभिनीत बेईमान और राजेश खन्ना अभिनीत धनवान।

सन १९७५ की फिल्म सन्यासी के बाद शंकर-जयकिशन के नाम को
लोग भूलने लगे। इस गीत से उन्होंने फिर एक बार अपनी उपस्थिति
दर्ज करायी और उस समय के बने कर्णप्रिय युगल गीतों में इसे उच्च
स्थान दिलवाया। ये बात और है कि लक्ष्मी प्यारे कल्याणजी आनंदजी
और बप्पी लहरी के दौर में वे लम्बे समय तक नहीं टिक पाए।




गीत के बोल:

तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
खबर क्या थी के अपने भी सितारे ऐसे बिगड़ेंगे
खबर क्या थी के अपने भी सितारे ऐसे बिगड़ेंगे
के जो पूजा के काबिल हैं वो ही यूँ रंग बदलेंगे

तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे

कई दिन बाद फिर ये साज ये सिंगार पाया है
नहीं मालूम था के आप यूँ इनकार कर देंगे
तुम्हें कैसे बताएं क्या हमारे साथ गुजरी है
तुम्हारे ख्वाब टूटेंगे अगर सच बात कह देंगे
नगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे

तुम्हारी एक ना मानेंगे करेंगे आज मनमानी
बहुत तरसाया है तुमने नहीं अब और तरसेंगे
सताया तो नहीं करते कभी किस्मत के मारों को
किसी की जान जाएगी किसी के अरमान निकलेंगे

तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे

मनाया तुमको कितनी बार लेकिन तुम नहीं माने
तो अब मजबूर होकर हम शरारत पर भी उतरेंगे
हकीकत क्या है ये पहले बता देते तो अच्छा था
खुद अपने जाल से ही हम ना जाने कैसे निकलेंगे

तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं कई दिन अब ना गुजरेंगे
जो दिल में आ गई है हम वो कर ही गुजरेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे हैं, कई दिन अब ना गुजरेंगे

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Tumhare bin guzare hain-Atmaram 1979

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Jun 12, 2009

जबसे देखा है तुमको-इज्ज़त आबरू १९८६

अनजान और गुमनाम फिल्मों में से एक गीत आपके लिए ।
फ़िल्म का नाम है इज्ज़त आबरू जो शायद अपनी इज्ज़त बॉक्स
ऑफिस पर बचने में नाकाम रही।

इस फिल्म मे २-३ सुनने लायक गीत हैं। प्रस्तुत गीत के बोल लिखे
हैं विश्वेश्वर शर्मा ने और धुन बनाई है संगीतकार अजय स्वामी ने।
गायक कलाकार हैं सुरेश वाडकर ।



गीत के बोल:

जबसे देखा है तुमको
चैन आए न दिल को
रूप ऐसा तुम्हारा
बिन पिए नशा हो
बड़ी फुर्सत से ऐ जानम
रब ने तुमको बनाया है

जबसे देखा है तुमको
चैन आए न दिल को

ऑंखें तेरी नशीली मदभरी
पलकें रहमी हैं सुरमई सुरमई
ऑंखें तेरी नशीली मदभरी
लैब तेरे हैं ऐसे लैब तेरे
जैसे गुलाब देखो खिल गए खिल गए
लैब तेरे हैं ऐसे लैब तेरे

सोये अरमानों को तुमने ही जगाया है

जबसे देखा है तुमको
चैन आए न दिल को
रूप ऐसा तुम्हारा
बिन पिए नशा हो
बड़ी फुर्सत से ऐ जानम
रब ने तुमको बनाया है

जबसे देखा है तुमको
चैन आए न दिल को

सूने सफर में तू जो मिल गई
ख्वाबों में ज़िन्दगी ढल गई, ढल गई
सूने सफर में तू जो मिल गई

हो, छाये जो दिल पे तेरी बेखुदी
सारा जहाँ लगे अजनबी अजनबी
छाये जो दिल पे तेरी बेखुदी
मैंने चाहत में तुम्हारी दोनों जहाँ को भुलाया है

जबसे देखा है तुमको
चैन आए न दिल को
रूप ऐसा तुम्हारा
बिन पिए नशा हो
बड़ी फुर्सत से ऐ जानम
रब ने तुमको बनाया है

जबसे देखा है तुमको
चैन आए न दिल को
.......................................................
Jabse dekha hai tumko-Izzat Aabroo 1986

Artist:

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