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Jul 26, 2017

एक ज़रा दिल के करीब आओ-शोभा गुर्टू

शोभा गुर्टू की गाई एक गज़ल सुनते हैं जिसके
बोल लिखे हैं गणेश बिहारी ‘तर्ज़’ ने.

गज़ल में दो नामचीन शायरों को याद किया गया है
दाग़ देहलवी और मीर तकी मीर.




गीत के बोल:

एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
जाम को जाम से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
जाम को जाम से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब

दिल उलझता है बहुत नग़मा-ए-रंगीन सुन कर
दिल उलझता है बहुत नग़मा-ए-रंगीन सुन कर
गीत एक दर्द भरा गाओ तो कुछ चैन पड़े
गीत एक दर्द भरा गाओ तो कुछ चैन पड़े

एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
जाम को जाम से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब

बैठे बैठे तो हर एक मौज से दिल दहलेगा
बैठे बैठे तो हर एक मौज से दिल दहलेगा
बढ़ के तूफ़ानों से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
बढ़ के तूफ़ानों से टकराओ तो कुछ चैन पड़े

एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
जाम को जाम से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब

दाग़ के शेर जवानी में भले लगते हैं
दाग़ के शेर जवानी में भले लगते हैं
मीर की कोई ग़ज़ल गाओ तो कुछ चैन पड़े
मीर की कोई ग़ज़ल गाओ तो कुछ चैन पड़े

एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
जाम को जाम से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब

याद-ए-अय्या में गुज़िश्तां से इजाज़त लेकर
याद-ए-अय्या में गुज़िश्तां से इजाज़त लेकर
'तर्ज़' कुछ देर को सो जाओ तो कुछ चैन पड़े
'तर्ज़' कुछ देर को सो जाओ तो कुछ चैन पड़े

एक ज़रा दिल के करीब आओ तो कुछ चैन पड़े
जाम को जाम से टकराओ तो कुछ चैन पड़े
एक ज़रा दिल के करीब
……………………………………………….
Ek zara dil ke kareeb aao-Shobha Gurtu Ghazal

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Aug 5, 2016

दिल है हाज़िर-सज्जो रानी १९७६

शास्त्रीय संगीत के गायकों को सुनने का मज़ा अलग ही है.
सुनते जाओ, सुनते जाओ. शोभा गुर्टू का मैं एक छोटा सा
फैन हूँ. हिंदी फिल्म संगीत धन्य है जो उन्होंने कुछ योगदान
फिल्मों के लिए दिया. संगीतकार सपन जगमोहन ने १९७४
की फिल्म सज्जो रानी में उनसे दो गीत गवाए. शोभा गुर्टू
को हम जैसे फ़िल्मी गीतों के रसिक ठुमरी क्वीन के नाम से
जानते हैं. प्रस्तुत गीत भी ठुमरी ही है.

ख्याल गायकी में गायकी और राग के उतार चढ़ाव ज्यादा ही
अहमियत रखते हैं वहीँ ठुमरी में भाव और बोल पर ज्यादा जोर
रहता है. ठुमरी का इतिहास बहुत पुराना है, मगर इसे प्रसिद्धि
दिलाने का काम उन्नीसवीं शती में वाजिद अली शाह ने ज्यादा
किया जिनके दरबार में ठुमरी संग नृत्य का आयोजन होता था.

प्रस्तुत ठुमरी राग खमाज में है.



गीत के बोल:


दिल है हाज़िर लीजिए ले जाइए
और क्या क्या और क्या क्या
और क्या क्या फरमाइए
और क्या क्या फरमाइए

प्यार धोखा है
प्यार धोखा है
तो धोखा ही सही
चाहता है चाहता है
चाहता है दिल के धोखा खाइए

हमको अपना इम्तेहान मंज़ूर है
हमको अपना इम्तेहान मंज़ूर है
और भी तरसाइए तड्पाइए
और भी तरसाइए तड्पाइए

इश्क वालों का
इश्क वालों का मुकद्दर है यही
आप अपनी आप अपनी
आप अपनी आग में जल जाइये
आप अपनी आग में जल जाइये

दिल है हाज़िर लीजिए ले जाइए
………………………………………………………..
Dil hai hazir-Sajjo Rani 1976

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Dec 1, 2014

नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना-सज्जो रानी १९७५

८० के दशक में दो शब्दों ने मुझे काफ़ी आकर्षित किया
वे हैं-नकबजनी और नथनिया. नकबजनी से सामान्य
अर्थ ये निकलता है नाक से बजने वाली कोई चीज़
या नाक से बजने वाली कोई कला. हिंदी अख़बारों को
पढ़ कर इसका असल अर्थ मालूम हुआ. नकबजनी चोरी
और ठगी से जोड़ कर देखी जाने वाली कोई चीज़ है.

उसी दरमियान १९७५ में एक फिल्म आई-सज्जो रानी .
इसमें एक गीत है-नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
फिल्मों में ऐसे प्रयोग समय समय पर होते रहे हैं जब कोई
सेमी-क्लासिकल का टुकड़ा अन्य गीतों के साथ प्रस्तुत किया
गया हो. कभी कभी तो कथानक की मांग न होते हुए भी ऐसे
गीत फिल्म में डाले जाते हैं-एक अच्छा उदाहरण है फिल्म
बैंडिट क्वीन जिसमें नुसरत फ़तेह अली खान की आवाज़ में
गाये हुए कई मधुर गीत शामिल किये गए हैं. इन्हें सुन कर
हम आसानी से कह सकते हैं-लीक से हट कर बने हुए फ़िल्मी
गीत.

आइये सुनते हैं फिल्म-सज्जो रानी से वही गीत शोभा गुर्टू का
गाया हुआ जिसका जिक्र ऊपर किया है. गीत लिखा है शायर
जां निसार अख्तर ने और धुन बनायीं है सपन जगमोहन ने.
गीत में नृत्य करने वाली अभिनेत्री है-जयश्री टी. टोपी पहने
युवक हैं-सत्येन कप्पू



गीत के बोल:

नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना

जब मैं हो गई जब मैं हो गई
जब मैं हो गई चौदह बरस की
जब मैं हो गई चौदह बरस की
लोगों ने पीछा मोरा कीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना

जब मैं हो गई
जब मैं हो गई पंद्रह बरस की
जब मैं हो गई पंद्रह
जब मैं हो गई पंद्रह बरस की
जब मैं हो गई पंद्रह बरस की
सर से दुपट्टा मोरा छीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना

जब मैं हो गई जब मैं हो गई
जब मैं हो गई जब मैं हो गई
जब मैं हो गई सोलह बरस की
जब मैं हो गई सोलह बरस की
गोदी में मोहे भर लीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम नथनिया ने
नथनिया ने हाय राम नथनिया ने
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
नथनिया ने हाय राम बड़ा दुःख दीना
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Nathaniya ne haye Ram-Sajjo Rani 1975

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Apr 2, 2014

सैयां रूठ गए-मैं तुलसी तेरे आँगन की १९७८

एक समय ऐसा आता है जब अधिकता से व्यक्ति अघा
जाता है. यहाँ इसका तात्पर्य संतृप्त होने से है. बोर होने
से कतई नहीं. एक ही शब्द के अनेक अर्थ होने से सब
अपने अपने मतलब के अर्थ समझते हैं.

मुख्य धारा के सिनेमा में ५० के दशक ७० के दशक तक
दो गायिकाएं प्रमुख थीं-लता और आशा. दूसरी महिला
गायिकाएं अपनी उपस्थिति कम दर्ज करा पाती थीं. इस
सब के चलते कुछ गीत अपना प्रभाव समय के साथ
छोड़ते चले जो दूसरी गायिकाओं द्वारा गाये गए हैं.

कुछ लोकप्रिय उदाहरण हैं ७० के दशक के:




गीत के बोल:

सैयां रूठ गये
सैयां रूठ गये
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Saiyan rooth gaye-Main Tulsi tere aangan ki 1978

Artists: Asha Parekh

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Jul 6, 2011

कहीं हो ना मोहल्ले में-चौकी नंबर ११ १९७८

आपसे संगीत के दुर्लभ और मधुर प्रस्तुतियां सुनवाने का वादा है
अतः समय समय पर इस ब्लॉग में गैर फ़िल्मी गीत, ग़ज़ल भी
शामिल किये जाते हैं।

प्रस्तुत गीत फ़िल्मी गीत ही है। दुर्लभ ये इस मायने में है कि
एक समय खूब बजने के बाद ये अदृश्य सा हो गया। प्रसिद्ध
ठुमरी व दादरा गायिका शोभा गुर्टू ने इसे गाया है अपने दिलकश
अंदाज़ में। विश्वेश्वर शर्मा ने इसके बोल लिखे हैं और एक गुमनाम
सी फिल्म चौकी नंबर ११ के लिए इसका संगीत तैयार किया है
सोनिक ओमी ने।



गीत के बोल:


कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना
कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना

दरवज्जे पे ताला है लल्ला कि बड कईं आ जाना
दरवज्जे पे ताला है लल्ला कि बड कईं आ जाना
किवड़िया ना खटकाना

जब से बिहाई तब से ना आई एक रात सुहानी
जब से बिहाई तब से ना आई एक रात सुहानी
पियु गये परदेस कमाने
पियु गये परदेस कमाने सूनी छोड़ जवानी
रोये रात रात
रोये रात रात चुनरी का पल्ला घुन्घत्वा उठा जाना
रोये रात रात चुनरी का पल्ला घुन्घत्वा उठा जाना
किवड़िया ना खटकाना

पिछली रात पडोसी के घर लाल जले जब बत्ती
पिछली रात पडोसी के घर लाल जले जब बत्ती
खिड़की के परदे पर देखूं,
देखूं मोरी दिया हाँ देखो मोरी सैयां
खिड़की के परदे पर देखूं, छाया है जो मिलती
जिया करता है
जिया करता है जोर से जो चिल्लाऊं ,
बचाना मुझे बचाना
जिया करता है जोर से जो चिल्लाऊं ,
बचाना मुझे बचाना

कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना
किवड़िया ना खटकाना

सावन सूखा, फाल्गुन फीका , होली ना दीवाली
सावन सूखा, फाल्गुन फीका , होली ना दीवाली
सखियों के घर कागा बोले,
कागा बोले, कागा बोले
सखियों के घर कागा बोले, यहाँ पे बिल्ली काली
मैं तो फूँक फूँक
मैं तो फूँक फूँक हारी रे चूल्हा सबर कब चटकाना ?
मैं तो फूँक फूँक हारी रे चूल्हा सबर कब चटकाना ?
किवड़िया ना खटकाना

आगे ताला पीछे ताला बंद सभी दरवाजे
आगे ताला पीछे ताला बंद सभी दरवाजे
चाबी मेरे पास नहीं है पायलिया जब बाजे
पायलिया जब बाजे रामा, पायलिया जब बाजे
चाबी मेरे पास नहीं है पायलिया जब बाजे
इस खिड़की का
इस खिड़की का पल्ला लगे झुल्ला
उसी से तू आ जाना
इस खिड़की का पल्ला लगे झुल्ला
उसी से तू आ जाना

कहीं हो ना मोहल्ले में हल्ला किवड़िया ना खटकाना
किवड़िया ना खटकाना
दरवज्जे पे ताला है लल्ला कि बड कईं आ जाना
किवड़िया ना खटकाना
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Kahin ho na mohalle mein-Chowki No. 11

Arttist: Zareena Wahab

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