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Aug 31, 2019

तुम मुझको भूल जाओ-बड़ी बहन १९४९

सुरैया की आवाज़ में एक दिलकश नगमा सुनते हैं फिल्म
बड़ी बहन से. फिल्म से आप काफी गीत सुन चुके हैं. इतने
सुन लिए एक और सुन लीजिए.

फिल्म में सुरैया एक परिवार के यहाँ नौकरी करने पहुँचती
है उसके बाद उसकी रहमान से मुलाकात होती है. मामला
आगे बढ़ता है और उसी दौर में ये गीत आता है.

गीत है कमर जलालाबादी का और इसकी धुन तैयार की है
हुस्नलाल भगतराम ने. इसे सुरैया ने गाया है परदे पर और
उसके पीछे भी.




गीत के बोल:

तुम मुझको भूल जाओ तुम मुझको भूल जाओ
अब हम ना मिल सकेंगे अब हम ना मिल सकेंगे
डाली से फूल टूटे डाली से फूल टूटे
अब कैसे खिल सकेंगे अब कैसे खिल सकेंगे
तुम मुझको भूल जाओ तुम मुझको भूल जाओ

एक रोज तो चकोरी देखेगी चाँद प्यारा
एक रोज तो मिलेगा हर लहर को किनारा
हम देखते रहेंगे हम देखते रहेंगे
रो रो के ये कहेंगे
अब हम ना मिल सकेंगे अब हम ना मिल सकेंगे
तुम मुझको भूल जाओ तुम मुझको भूल जाओ

शहनाइयां बजेंगी और दुल्हनें सजेंगी
हाथों में मल के मेहँदी साजन के घर चलेंगी
हम देखते रहेंगे हम देखते रहेंगे
रो रो के ये कहेंगे
अब हम ना मिल सकेंगे अब हम ना मिल सकेंगे
तुम मुझको भूल जाओ तुम मुझको भूल जाओ
अब हम ना मिल सकेंगे अब हम ना मिल सकेंगे
तुम मुझको भूल जाओ तुम मुझको भूल जाओ
………………………………………………………………..
Tum mujhko bhool jao-Bade behan 1949

Artists: Suraiya, Rehman

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Apr 4, 2018

वो पास रहें या दूर रहें-बड़ी बहन १९४९

हिंदी सिने संगीत इतिहास की सबसे पहली सफल जोड़ी
है हुस्नलाल भगतराम की. ४० और पचास के दशक में
इनके गीत खूब बजा करते थे.

हुस्नलाल भगतराम की सबसे सफल फिल्मों में से एक
है बड़ी बहन. इस फिल्म के अधिकाँश गीत लोकप्रिय की
श्रेणी में आते हैं. फिल्म में सुरैया और लता मंगेशकर के
गाये गीत ही ज्यादा हैं. फिल्म के लिए दो गीतकारों ने
गीत लिखे-राजेन्द्र कृष्ण और कमर जलालाबादी. भाषा
पर दोनों की बढ़िया पकड़ थी और दोनों ही सरलता से
अपनी बात कहने के लिए प्रसिद्ध रहे.




गीत के बोल:

वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं
वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं

छोटी सी बात मुहब्बत की
छोटी सी बात मुहब्बत की
और वो भी कही नहीं जाती
कुछ वो शरमाये रहते हैं
कुछ हम शरमाये रहते हैं

वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं

मिलने की घड़ियाँ छोटी हैं
मिलने की घड़ियाँ छोटी हैं
और रात जुदाई की लम्बी
जब सारी दुनिया सोती है
हम तारे गिनते रहते हैं

वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं
…………………………………………………….
Wo paas rahen ya door rahen-Badi behan 1949

Artist: Suraiya

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Dec 22, 2017

लिखने वाले ने लिख दी-बड़ी बहन १९४९

सुनते हैं एक किस्मत पर बना हुआ गीत जिसे राजेंद्र कृष्ण
ने लिखा है. गीतकार का नाम हम अक्सर चर्चा के अंत में
किया करते हैं. अरे भाई जब गीतकार लिखेगा ही नहीं तो
गायक गायेगा क्या?

किसी भी गीत की सफलता में गाने के बोलों का महत्वपूर्ण
योगदान होता है. कोई कोई गीत अपने टूं टां संगीत की वजह
से भी लोकप्रिय हो जाता है. मगर, बेसिक रिक्वायरमेंट यही है
गीत अच्छा हो.

गीत सुरैया ने गाया है और ये उन्हीं पर फिल्माया भी गया है. 



गीत के बोल:

दिल तेरे आने से पहले भी यूँ ही बरबाद था
और यूँ ही बरबाद है तेरे चले जाने के बाद

ओ ओ लिखने वाले ने
ओ ओ लिखने वाले ने लिख दी मेरी तक़दीर में बरबादी
लिखने वाले ने
हो ओ लिखने वाले ने लिख दी मेरी तक़दीर में बरबादी
हो ओ लिखने वाले ने

दिल को जब तेरी मुहब्बत का इशारा मिल गया
मैंने समझा मेरी कश्ती को किनारा मिल गया
हाय क़िस्मत को मगर कुछ और ही मंज़ूर था
आँख जब खोली तो कश्ती से किनारा दूर था

ओ ओ लिखने वाले ने
ओ ओ लिखने वाले ने लिख दी मेरी तक़दीर में बरबादी
ओ ओ लिखने वाले ने लिख दी मेरी तक़दीर में बरबादी
लिखने वाले ने
ओ ओ लिखने वाले ने

छोड़ कर दुनिया तेरी तुझको भुलाने के लिये
हम चले आये यहाँ आँसू बहाने के लिये
दिल अभी भूला न था तुझको के फिर क़िस्मत मेरी
खेंच कर लाई तुझे मुझको रुलाने के लिये

ओ ओ लिखने वाले ने
ओ ओ लिखने वाले ने लिख दी मेरी तक़दीर में बरबादी
लिखने वाले ने
.........................................................
Likhne wale ne likh di-Badi behan 1949

Artist: Suraiya

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Aug 20, 2017

जो दिल में खुशी बन कर आये-बड़ी बहन १९४९

खुशी के पर लगे होते हैं वो ज्यादा देर तक नहीं ठहरती.
दरअसल ये जीवन दुखों और तकलीफों से ही भरा है.
खुशी केक पर आइसिंग जैसी है जो कम मात्रा में मिलती
है.

नज़रिए पर बहुत कुछ निर्भर करता है. आप दुःख को
कम कर सकते हैं सम दृष्टि भाव अपना कर. तटस्थता
थोड़ी आगे की चीज़ हो गयी उसमें भावहीनता भी हो
सकती है.

राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत लता मंगेशकर ने गाया है
हुस्नलाल भगतराम की धुन पर.




गीत के बोल:

जो दिल में खुशी बन कर आये
जो दिल में खुशी बन कर आये
वो दर्द बसा कर चले गए हाय चले गए
जो शमा जलाने आये थे
जो शमा जलाने आये थे
वो शमा बुझा कर चले गए हाय चले गए
जो दिल में खुशी बन कर आये

जीवन के दोराहे पर कोई ये पूछ रहा है किस्मत से
जीवन के दोराहे पर कोई ये पूछ रहा है किस्मत से
हाय किस्मत से
क्यूँ आँख मिलाने आये थे क्यूँ आँख मिलाने आये थे
जो आँख चुरा कर चले गए हाय चले गए

जो दिल में खुशी बन कर आये
जो दिल में खुशी बन कर आये
वो दर्द बसा कर चले गए हाय चले गए
जो दिल में खुशी बन कर आये

ओ रोने वाले एक तू ही बर्बाद नहीं है उल्फत में
ओ रोने वाले एक तू ही बर्बाद नहीं है उल्फत में
हाय उल्फत में
इस राह में लाखों टूटे दिल इस राह में लाखों टूटे दिल
आये और आ के चले गए हाय चले गए
जो दिल में खुशी बन कर आये
जो दिल में खुशी बन कर आये
वो दर्द बसा कर चले गए हाय चले गए
जो दिल में खुशी बन कर आये
........................................................
Jo dil mein khushi ban kar-Badi behan 1949

Artists: Mahila mandal

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Feb 21, 2017

बिगड़ी बनाने वाले-बड़ी बहन १९४९

सुरैया अपने ज़माने की सबसे मशहूर एक्ट्रेस थीं जो
गाती भी थीं. उन्हें ऊपर वाले ने शकल सूरत और
आवाज़ दोनों बढ़िया दर्जे की दी थीं. उन्होंने काफी सारे
गीत गाये और स्वयं अपनी मर्ज़ी से गायन और फिल्मों
में काम करना बंद कर दिया.

आज सुनते हैं उनका एक लोकप्रिय गीत बड़ी बहन फिल्म
से. कमर जलालाबादी के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है
हुस्नलाल भगतराम ने. इस गीत को सुन के अच्छे अच्छों
के दिल की सिगड़ी सुलग उठती थी किसी समय.



गीत के बोल:

बिगड़ी बनाने वाले बिगड़ी बना दे
नैया हमारी पार लगा दे

दुनियाँ हमारी तेरे हाथ में है
चाहे बसा दे चाहे मिटा दे
नैया हमारी पार लगा दे
बिगड़ी बनाने वाले बिगड़ी बना दे
नैया हमारी पार लगा दे

इधर भी हैं काँटे उधर भी हैं काँटें
तू चाहे तो काँटों को कलियाँ बना दे
नैया हमारी पार लगा दे
बिगड़ी बनाने वाले बिगड़ी बना दे
नैया हमारी पार लगा दे
…………………………………………….
Bigdi banana waale-Badi behan 1949

Artist: Suraiya

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Jul 16, 2016

चले जाना नहीं-बड़ी बहन १९४९

फिल्म बड़ी बहन के गाने हिट हैं. सन १९४९ की बड़ी बहन
आज काफी बड़ी हो गयी है-६७ साल की. फिल्म का ये गीत
तो कई रसिकों को संगीत समेत याद हो गया है. आज बोलों
पर परीक्षा ले लो उनकी १०० में से १०० नंबर आयेंगे.

राजेंद्र कृष्ण के लिखे बोलों को संगीत दिया है संगीतकार जोड़ी
हुस्नलाल भगतराम ने. गीत फिल्माया गया है गीता बाली पर.
इसके अलावा गीत में आपको प्राण नाम के नायक दिखलाई
देंगे सिगरेट फूंकते हुए. 



गीत के बोल:
चले जाना नहीं
चले जाना नहीं नैना मिला के
हाय सैयां बेदर्दी सैयां बेदर्दी
चले जाना नहीं नैना मिला के
हाय सैयां बेदर्दी सैयां बेदर्दी

मेरी क़सम तुम्हे मेरे ही हो के रहना
मेरी क़सम तुम्हे मेरे ही हो के रहना
दिलों की बात किसी और से नहीं कहना
दिलों की बात किसी और से नहीं कहना
बैरी दुनिया से
बैरी दुनिया से रखना छुपा के
हाय सैयां बेदर्दी सैयां बेदर्दी

चले जाना नहीं
चले जाना नहीं नैना मिला के
हाय सैयां बेदर्दी सैयां बेदर्दी

नन्हीं सी जान मेरी कहो न जलाओगे
नन्हीं सी जान मेरी कहो न जलाओगे
छोड़ के मुझे कहीं चले तो न जाओगे
छोड़ के मुझे कहीं चले तो न जाओगे
भूल जाना नहीं
भूल जाना नहीं दिल में बसा के
हाय सैयां बेदर्दी सैयां बेदर्दी

चले जाना नहीं
चले जाना नहीं नैना मिला के
हाय सैयां बेदर्दी सैयां बेदर्दी
.......................................................................
Chale jaana nahin-Badi behan 1949

Artists: Geeta Bali, Pran

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Jul 22, 2009

चुप चुप खड़े हो-बड़ी बहन १९४९

संगीत के सुनहरे दौर से एक और गीत आज आपके लिए पेश है
"चुप चुप खड़े हो ज़रूर कोई बात है" फ़िल्म बड़ी बहन से।
फ़िल्म में अपने ज़माने की दो मशहूर अभिनेत्रियाँ नूरजहाँ और सुरैया
हैं, साथ में रहमान बतौर हीरो हैं। इस गीत के रचनाकार है
राजेंद्र कृष्ण और संगीत दिया है हुस्नलाल भगतराम ने।
अपने ज़माने के लोकप्रिय गानों में इसका शुमार होता था।
ये गीत लता और प्रेमलता का युगल गीत है। प्रेमलता ने हिन्दी फिल्मों
में बहुत कम गीत गाये हैं। ये उनके हिट गीतों में से एक है।

१९४९ में एक और फ़िल्म आई थी 'नदिया के पार जिसमें
ललिता देउलकर का गाया गाना था-
"मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार" । नदिया के पार के संगीतकार
चितलकर रामचंद्र हैं। तो साहब ,ये हैं कुछ १९४९ के चर्चित नगमे।



गाने के बोल :

चुप-चुप खड़े हो ज़रूर कोई बात है
पहली मुलाक़ात है जी पहली मुलाक़ात है
चुप-चुप खड़े हो ...

साजन की बात पर, गुस्सा जो आ गया
ज़ुल्फ़ों का बादल, गालों पे छा गया
अभी-अभी दिन था अभी-अभी रात है

पहली मुलाक़ात है जी पहली मुलाक़ात है
चुप-चुप खड़े हो ...

पहली मुलाक़ात में, बात ऐसी हो गई
राजा भी खो गया, रानी भी खो गई
दोनों को न पता चला मज़े की ये बात है

पहली मुलाक़ात है जी पहली मुलाक़ात है
चुप-चुप खड़े हो ...
....................................................................
Chup chup khade ho-Badi Behan 1949

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