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Oct 11, 2017

मैं शायर तो नहीं-बॉबी १९७३

ज़रूरत और आड़ा वक्त इंसान को बहुत कुछ सिखा देता है.
जैसा कोई धोबी न हो तो भी शादी के बाद वो कपडे धोना
सीख ही जाता है और कम से कम अपने चड्डी बनियान तो
धो ही लेता है कभी कभार.

फिल्म का हीरो इमानदारी से बतला रहा है उसे शायरी कैसे
आई. गीत सुनते हैं बॉबी फिल्म से जिसे आनंद बक्षी ने
लिखा है. इसे लक्ष्मी प्यारे के संगीत निर्देशन में गाया है
उस समय के नवोदित गायक शैलेन्द्र सिंह ने.



गीत के बोल:

मैं शायर तो नहीं
मगर ऐ हंसीं
जबसे देखा  मैंने तुझको  मुझको
शायरी  आ गई

मै आशिक़ तो नहीं
मगर ऐ हसीं
जबसे देखा  मैंने तुझको  मुझको
आशिक़ी  आ गई

प्यार का नाम मैंने सुना था मगर
प्यार क्या है ये मुझको नहीं थी खबर
मैं तो उलझा रहा उलझनों की तरह
दोस्तों में रहा दुश्मनों की तरह
मैं दुश्मन तो नहीं
मगर ऐ हंसीं
जब से देखा  मैंने तुझको  मुझको
दोस्ती आ गई

सोचता हूँ अगर मैं दुआ माँगता
हाथ अपने उठा कर मैं क्या माँगता
जब से तुझसे मुहब्बत मैं करने लगा
तब से ऐसे इबादत मैं करने लगा
मैं क़ाफ़िर तो नहीं
मगर ऐ हंसीं
जब से देखा  मैं ने तुझको  मुझको
बंदगी आ गई
……………………………………………..
Main shayar to nahin-Bobby 1973

Artists: Rishi Kapoor, Dimple Kapadia

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Feb 25, 2017

मुझे कुछ कहना है-बॉबी १९७३

गीत में लखनऊ और लखनऊ के नवाबों का जिक्र है. अदब वाला
शहर लखनऊ आज भी अपनी मीठी बोली और अदब के लिया जाना
जाता है. यहाँ गुस्सा और भड़ास भी अदब के साथ निकाली जाती है.
अंदाज़ा लगाइए किसी को किसी से प्रेम हो तो क्या हाल होता होगा.

नायक को कुछ कहना है तो नायिका क्यूँ पीछे रहे, उसे भी कुछ
कहन अहै. इस कहने सुनने में गीत काफी लंबा हो चला है. ये सुनते
सुनते उतना लंबा नहीं लगा मगर जब इसके बोल लिखने बैठे तो
मालूम हुआ पंक्तियाँ रूटीन गीतों से ज्यादा हैं इसमें.

ये गीत भी आनंद बक्षी और लक्ष्मी प्यारे की जोड़ी की देन है. इसे
शैलेन्द्र सिंह और लता मंगेशकर ने गाया है. लक्ष्मी प्यारे की एक
फिल्म का गीत जॉन जॉनी जनार्दन इस गीत से निकला है गौर
फरमाएं.



गीत के बोल:

मुझे कुछ कहना है
मुझे भी कुछ कहना है
मुझे कुछ कहना है
मुझे भी कुछ कहना है
पहले तुम पहले तुम
पहले तुम पहले तुम
तुम तुम तुम तुम तुम तुम

देखो जिस तरह लखनऊ के दो नवाबों की गाड़ी
पहले आप पहले आप पहले आप
पहले आप करते निकल गयी थी
उस तरह हमारी पहले तुम  पहले तुम  पहले तुम
पहले तुम में ये मस्ती भरी रूठ ना चली जाए

अच्छा  मै कहती हूँ
अक्सर कोई लड़की इस हाल मे
किसी लड़के से सोलहवें साल मे
जो कहती है वो मुझे कहना है
अक्सर कोई लड़का इस हाल मे
किसी लड़की से सोलहवें साल मे
जो कहता है वो मुझे कहना है
अक्सर कोई लड़की
हाँ अक्सर कोई लड़का
अक्सर कोई लड़की इस हाल मे

ना आँखों में नींद  ना दिल में करार
यही इंतज़ार  यही इंतज़ार
तेरे बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता
सब झूठा लगता है  सच्चा नहीं लगता
ना घर में लगे दिल  ना बाहर कहीं पर
बैठी हूँ कहीं पर  खोई हूँ कहीं पर
अरे कुछ ना कहूँ  चुप रहूँ
मै नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं पर
अब मुश्किल चुप रहना है

मुझे कुछ कहना है
मुझे भी कुछ कहना है
पहले तुम पहले तुम
पहले तुम पहले तुम
पहले तुम पहले तुम पहले तुम

मुझे रात दिन नहीं और काम
कभी तेरी याद  कभी तेरा नाम
सब रंग दुनिया के फीके लगते हैं
एक तेरे बोल बस मीठे लगते हैं
लिखे हैं बस तेरे सजदे इस ज़बीं पर
जिंदा हूँ मैं तेरी बस हाँ पर नहीं पर
अरे कुछ ना कहूँ  चुप रहूँ
मै नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं पर
अब मुश्किल चुप रहना है

मुझे कुछ कहना है
मुझे भी कुछ कहना है
पहले तुम पहले तुम
पहले तुम पहले तुम
तुम तुम तुम तुम

मिले हमको फूल के कांटें मिले
वहाँ जा बसे  वहाँ जा रहे
तुझे मिलने में जहाँ डर ना हो कोई
पिया के सिवाय दूजा घर ना हो कोई
क्या ऐसी जगह है कोई इस ज़मीं पर
रहने दे बात को यहाँ पर  यहीं पर
अरे कुछ ना कहूँ  चुप रहूँ
मै नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं पर
अब मुश्किल चुप रहना है

अक्सर कोई लड़की इस हाल मे
किसी लड़के से सोलहवें साल मे
जो कहती है
जो कहता है वो मुझे कहना है
अक्सर कोई लड़की इस हाल मे
…………………………………………………….
Mujhe kuchh kehna hai-Bobby 1973

Artists: Rishi kapoor, Dimple Kapadia

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Jan 18, 2017

अखियों को रहने दे-बॉबी १९७३

सन १९७३ की फिल्म बॉबी प्रेम नयी पीढ़ी के प्रेम कथानकों की
ट्रेंड सेटर फिल्म जैसी है. इसके नए नायक नायिका ने अभिनय
में झंडे तो नहीं गाडे मगर फिल्म की कहानी में बाकी कलाकारों
के अभिनय के साथ संतुलन बना लिया.फिल्म में प्राण, प्रेमनाथ
अरुणा ईरानी और फरीदा जलाल का अभिनय उम्दा रहा. फिल्म
एक बड़ी हिट फिल्म है अपने समय की.

राज कपूर अगर स्वयं अभिनय और निर्देशन में अपना श्रेष्ठ बाहर
लाते थे तो वे दूसरों से भी उनका श्रेष्ठ निकलवाने का माद्दा रखते
थे. लक्ष्मी प्यारे से उन्होंने काफी मेहनत करवाई और परिणाम
स्वरुप हमें कुछ अच्छी धुनें सुनने को मिलीं.

फिल्म में लता का एक गीत है जो आज भी हमें कहीं कहीं बजता
सुनाई दे जाता है. आनंद बक्षी का लिखा गीत मर्म को भेदने वाला
है.



गीत के बोल:

टूट के दिल के टुकड़े टुकड़े
हो गए मेरे सीने में
आ गले लग के मर जाएं
क्या रखा है जीने में

अँखियों को रहने दे अँखियों के आस पास
अँखियों को रहने दे अँखियों के आस पास
दूर से दिल की बुझती रहे प्यास
अँखियों को रहने दे अँखियों के आस पास
दूर से दिल की बुझती रहे प्यास
अँखियों को रहने दे

दर्द ज़माने में कम नहीं मिलते
दर्द ज़माने में कम नहीं मिलते
सबको मोहब्बत के ग़म नहीं मिलते
टूटने वाले दिल
टूटने वाले दिल होते हैं कुछ खास
दूर से दिल की बुझती रहे प्यास
अँखियों को रहने दे

रह गई दुनिया में नाम की खुशियाँ
रह गई दुनिया में नाम की खुशियाँ
तेरे मेरे किस काम की खुशियाँ
सारी उमर हमको
सारी उमर हमको रहना है यूँ उदास
दूर से दिल की बुझती रहे प्यास

अँखियों को रहने दे अँखियों के आस पास
दूर से दिल की बुझती रहे प्यास
अँखियों को रहने दे
………………………………………………
Ankhiyon ko rehne de-Bobby 1973

Artists: Dimple Kapadia

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Jan 16, 2017

झूठ बोले कौवा काटे-बॉबी १९७३

कहावत ही है मगर कौवे अपनी सुरक्षा के लिए काट भी सकता
है. झूठ बोले कौवा काटे इस वाक्य का काफी इस्तेमाल होता था
पहले. अब शब्द सामर्थ्य बढ़वा दी है फिल्म उद्योग ने दर्शकों
की, वो नए नए और नायब जुमलों का प्रयोग करने लगे हैं.

गीत है फिल्म बॉबी से कौवे को समर्पित. पिछले दिनों आपको
एक कौवे वाला गीत इस ब्लॉग पर सुनवाया था ९० के दशक
की फिल्म से. दोनों की तुलना में मुझे ये ज्यादा पसंद है. इसमें
सातों वचन, सौतन, दूसरा ब्याह, मायके और डंडे का जिक्र है.

आनंद बक्षी की जधुई कलम से निकला गीत गाया है लता और
शैलेन्द्र सिंह ने.



गीत के बोल:

झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो
अरे झूठ बोले
झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो

तू मायके चली जाएगी
मैं डंडा लेकर आऊंगा
तू डंडा लेकर आएगा
मैं कुए में गिर जाऊंगी
मैं रस्सी से खिंचवाऊंगा
मैं पेड़ पे चढ़ जाऊँगी
मैं आरी से कटवाऊंगा
प्यार करे आरी चलवाए ऐसे आशिक़ से डरियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो

अरे झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो
मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो

तू मायके चली जाएगी
मैं दूजा ब्याह रचाऊँगा
तू दूजा ब्याह रचाएगा
हाय मेरी सौतन लाएगा
मैं मायके नहीं जाऊँगी मैं मायके नहीं जाऊँगी
मैं मायके नहीं जाऊँगी रे मायके नहीं जाऊँगी
अरे तेरे सदके जाऊंगी रे मायके नहीं जाऊंगी
मैं सातों वचन निभाऊँगी रे मायके नहीं जाऊंगी
अरे मायके नहीं जाऊँगी रे मायके नहीं जाऊँगी

झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो
मैं तेरी सौतन लाऊंगा तुम देखती रहियो
मैं तेरी सौतन लाऊंगा तुम देखती रहियो
झूठ बोले कौआ काटे काले कौए से डरियो
मैं मायके नहीं जाऊंगी तुम देखते रहियो
मैं मायके नहीं जाऊंगी तुम देखते रहियो
................................................................
Jhooth bole kauwa kaate-Bobby 1973

Artists: Rishi kapoor, Dimple Kapadia

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Nov 11, 2016

ए फँसा-बॉबी १९७३

फिल्म बॉबी का प्रस्तुत गीत आनंद बक्षी की कविता सरीखा है
जो शायद उन्होंने प्रेम करने वालों की व्यथा पर लिखी हो. इस
गीत की पंक्तियाँ किसी आधुनिक कविता की तरह हैं. सुनने में
धुन थोड़ी अटपटी सी लगती है मगर अपने अनोखेपन की वजह
से ही ये गीत लोकप्रिय हुआ.

‘ऐ फंसा’ जैसे शब्दों से शुरू होने वाला कोई गीत जनता ने इसके
पहले तक नहीं सुना था. नायक को टीज़ किया जा रहा है इस गीत
के जरिये और आगाह किया जा रहा है उसके क्रियाकलापों के
अंजाम के लिए. 




गीत के बोल:

ए फंसा
अरे अरे अरे
उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए फंसा
उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए ए ए ए ए फंसा

ला ला ला ला ला ला
ला रा ला रा ला रा ला रा
ये एक साल
बचपन और जवानी के बीच का बड़ा बुरा होता है
ये एक साल
नौजवानों का  नादानों का  दीवानों का
ये एक साल
बचपन और जवानी के बीच का बड़ा बुरा होता है
आशिक़ का हो गया नाम बदनाम
हुआ अंजाम सुबह-ओ-शाम
ज़माना हँसा  हँसा  हँसा
ए फंसा

उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए ए ए ए ए फंसा

बचा के आँख
पंछी पिंजरा ले के उड़ जाए तो शायद जान बच जाए
बचा के आँख
किसी झरोखे से  किसी मौके से  कभी धोखे से
बचा के आँख
पंछी पिंजरा ले के उड़ जाए तो शायद जान बच जाए
जीना हुआ दुश्वार दिलदार के लगा आर पार
तीर किसी ने कसा  कसा  कसा
ए ए ए ए ए फंसा

उसका छूटा घर-बार संसार
जो कर के प्यार यार
किसी के दिल में बसा  बसा  बसा
ए फंसा
...............................................................
Ae phansa-Bobby 1973

Artists: Rishi Kapoor, Aruna Irnai, Farida Jalal

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Jul 6, 2016

तौबा मेरी ना ढोलना मैं नी बोलना-बॉबी १९७३

अलग हट के सुनाई देने वाली चीज़ें सबका ध्यान आकृष्ट करती
ही हैं, चाहे वो त्रिदेव के गीत का का “ओए ओए” हो, चोली के
पीछे गीत का “कु कु कु कु “ हो  या फिर नाजिया हसन का
गाया गीत “आप जैसा कोई” गीत हो. अनूप जलोटा की गाई एक
लाइन-कोशिश कर के देख ले जो एक दूजे के लिए के गीत में
है बेहद लोकप्रिय हुई.

७० के दशक की एक सनसनी नरेन्द्र चंचल भी थे. उनका बॉबी
फिल्म का गीत काफी लोकप्रिय हुआ था उस वक्त. आज सुनते
हैं वो गीत. रूठी हुयी प्रेमिका और एक आहत प्रेमी पर यह गीत
फिल्माया गया है. बैकग्राउंड में बजता ये गीत खुद प्रभावशाली
है, इस पर नायक नायिका ने ठीक ठाक भावोत्पादन किया है.
अलाव जल रहा है और एक शख्स जनता का दिल बहलाने के
लिए गीत गा रहा है. ऐसे दृश्य आपने महेश भट्ट की फिल्मों
में भी बहुत देखे होंगे. ये जो शख्स है इस गीत में वो और कोई
नहीं-नरेन्द्र चंचल ही हैं.

बाबा बुल्ले शाह के सन्देश पर आधारित ये गीत आनंद बक्षी ने
लिखा है. गीत भाईचारे और आपसी प्रेम का सन्देश देता है.
प्रेम और मोहब्बत को दूसरे सन्दर्भों में भी अगर देखें तो ये गीत
प्रासंगिक है.



गीत के बोल:

बेशक़ मंदिर मस्जिद तोड़ो, बुल्लेशाह ये कहता
बेशक़ मंदिर मस्जिद तोड़ो, बुल्लेशाह ये कहता
पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो
इस दिल में दिलवर रहता
जिस पलड़े में तुले मोहब्बत
जिस पलड़े में तुले मोहब्बत
उसमें चाँदी नहीं तौलना
तौबा मेरी ना डोलना मैं नी बोलना
ओ नहीं बोलना जा, मैं नहीं बोलना जा
ओ मैं नहीं बोलना जा, डोलना मैं नी बोलना
तौबा मेरी न डोलना मैं नी बोलना

आग ते इश्क़ बराबर दोनो, पर पानी आग बुझाए
आग ते इश्क़ बराबर दोनो, पर पानी आग बुझाए
आशिक़ के जब आँसू निकले, और अगन लग जाए
तेरे सामने बैठ के रोना
ओ तेरे सामने बैठ के रोना दिल का दुखड़ा नहीं टोलना
डोलना मैं नी बोलना
ओ नहीं बोलना जा, मैं नहीं बोलना जा
वे मैं नहीं बोलना जा, बोलना मैं नी बोलना
तौबा मेरी न डोलना मैं नी बोलना
वे मैं नहीं बोलना, ओ वे मैं नहीं बोलना
वे मैं नहीं बोलना, ते मैं नहीं बोलना
नहीं बोलना, डोलना मैं नी बोलना
नहीं बोलना, नहीं बोलना…
................................................................................
Tauba meri naa bolna-Bobby 1973

Artists- Rishi Kapoor, Dimple Kapadia

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Jul 18, 2015

ना चाहूँ सोना चांदी-बॉबी १९७३

मेरे दो सुनार मित्र हैं जिनको ये गीत बेहद पसंद आता है.
१९७३ की सुपर डुपर हिट फिल्म बॉबी से ये गीत है जिसे
मन्ना डे और शैलेन्द्र सिंह ने गाया है. गोवा में प्रचलित
संगीत पर ये गाना आधारित है. सुना मैंने भी इसे बहुत
बार है मगर दावे से नहीं कह सकता कि ये मेरे पसंदीदा
गीतों में शुमार हो गया है. बस कभी कभी, यूँ ही सुन लेता
हूँ इसे भी. अलग फ्लेवर वाला गीत जो है ये. 

फिल्म सफल फिल्मों में गिनी जाती है, सफल फिल्मों पर
प्रश्न नहीं किये जाते इसलिए हम भी अपना मुंह बंद रखेंगे
और केवल गीत सुनेंगे बस ये सोच के कि इस फिल्म की
कहानी देश के किस हिस्से से शुरू हो के किस हिस्से पर
पहुँचती है ?

आनंद बक्षी साहब ने गीत लिखा है और लक्ष्मी-प्यारे ने
इसकी धुन बनाई है. मन्ना डे और शैलेन्द्र सिंह के युगल
गीत बहुत कम हैं फिल्म संगीत के खजाने में. १९७३ के
लिहाज से इसे प्रयोग कह सकते हैं. इस गीत में गायिका
लता मंगेशकर की आवाज़ भी है इसलिए इसे युगल गीत
कहना सही नहीं है.


एक बात तो तय थी उस वक्त-अभिनेता ऋषि कपूर के लिए
शैलेन्द्र सिंह की आवाज़ का चयन. ये कुछ समय तक चला
बाद में किशोर कुमार ने उनके लिए ढेरों गीत गाये.






गीत के बोल:

न चाहूँ सोना चांदी, न चाहूँ हीरा मोती
ये मेरे किस काम के
न मांगूँ बंगला बाड़ी, न मांगूँ घोड़ा गाड़ी
ये तो हैं बस नाम के
देता है दिल दे, बदले में दिल के
घे घे घे घे घे, दे रे साहिबा
प्यार में सौदा नहीं

न जानूं मुल्ला काज़ी, न जानूं काबा काशी
मैं तो हूँ प्रेम प्यासा रे
मेरे सपनों की रानी, होगी तुमको हैरानी
मैं तो तेरा दीवाना रे
देता है दिल दे, बदले में दिल के
घे घे घे घे घे, दे रे साहिबा
प्यार में सौदा नहीं
घे घे घे घे घे, दे रे साहिबा
प्यार में सौदा नहीं
....................................................................
Na chahoon sona chandi-Bobby 1973

Artists: Rishi Kapoor, Dimple Kapadia, 

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Jun 14, 2010

हम तुम एक कमरे में बंद हों-बॉबी १९७३

कुछ दिन पहले अख़बार में शेरों की कम होती आबादी के बारे में खबर
पढ़ रहा था। पढने के बाद मेरे दिमाग में स्वतः ही एक गाना कौंधा-वो
था-फिल्म बॉबी का हम तुम एक कमरे में बंद हों ।

गीत में एक पंक्ति ऐसी है-हम तुम एक कमरे में बंद हो और शेर आ जाये।
अब शेर को कोई और काम तो है नहीं कमरे में घुसने के सिवा, और प्रेमियों
के मेल में दखलंदाज़ी के सिवा। सवाल ये है बंद कमरे में शेर कैसे आएगा-
छत तोड़ कर, या सूक्ष्म शरीर धारण कर के किसी छिद्र से प्रविष्ट हो कर।
खैर संभव है कि आबादी में शेर आये, क्यूंकि हम लोगों ने उसके रहने के
लिए जंगल छोड़े कहाँ हैं ?

आये दिन हम लोग अख़बार में या चैनल पर खबर पाते हैं कि आबादी में
शेर/चीता घुस आया। यही हाल रहा तो शायद आगे आने वाली पीढ़ियों को
शेर/चीता फोटो में देखने को मिलेंगे

ये गीत आनंद बक्षी का लिखा, लक्ष्मी कान्त प्यारेलाल का संगीतबद्ध किया
और लता मंगेशकर /शैलेन्द्र सिंह का गाया हुआ है। अपने ज़माने का बड़ा
हिट गीत है ये।



गीत के बोल:

बाहर से कोई अन्दर ना आ सके
अन्दर से कोई बाहर ना जा सके

सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

तेरे नैनों की भूल भलैया में
बॉबी खो जाए

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

आगे हो घनघोर अँधेरा
बाबा मुझे डर लगता है
पीछे कोई डाकू लुटेरा
उम्, क्यूँ डरा रहे हो

आगे हो घनघोर अँधेरा
पीछे कोई डाकू लुटेरा
ऊपर भी जाना हो मुश्किल
नीचे भी आना हो मुश्किल

सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो

हम तुम कहीं को जा रहें हों
और रास्ता भूल जाएँ
हो हो
हम तुम कहीं को जा रहें हों
और रास्ता पूल जाएँ

तेरे बैयाँ के झूले में सैयां
बॉबी झूल जाये

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

हा हा, हा हा, आ हा हा
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ

बस्ती से दूर परबत के पीछे
मस्ती में चूर घने पेड़ों के नीचे
अनदेखी अनजानी सी जगह हो
बस एक हम हों और दूजी हवा हो

सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो

हम तुम एक जंगल से गुजरें
और शेर आ जाये

हम तुम एक जंगल से गुजरें
और शेर आ जाये

शेर से मैं कहूं तुमको छोड़ दे
मुझे खा जाए

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

ऐसे क्यों खोये खोये हो
जागे हो कि सोये हुए हो
क्या होगा कल किसको खबर है
थोडा सा मेरे दिल में ये डर है

सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो
सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो

हम तुम यूँ ही हँसते रहे हों
और आंख भर आये

हम तुम यूँ ही हँसते रहे हों
और आंख भर आये

तेरे सर कि कसम तेरे गम से
बॉबी मर जाए

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

तेरे नैनों की भूल भलैया में
बॉबी खो जाए

हम तुम,हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए

हम तुम एक कमरे में बंद हों
और चाबी खो जाए
और चाबी खो जाए
.....................................................
Ham tum ek kamre mein-Bobby 1973

Artists: Rishi Kapoor, Dimple Kapadia

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