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May 29, 2017

आ जा आई बहार-राजकुमार १९६४

सन १९६४ की फिल्म राजकुमार में शम्मी कपूर नायक
हैं. फिल्म के नाम से ऐसा लगता है मानो इसमें अभिनेता
राजकुमार ने काम किया हो.

फिल्म से एक तेज गति वाला गीत सुनते हैं साधना पर
फिल्माया गया. इसे लता मंगेशकर ने गाया है. बोल हैं
हसरत जयपुरी के और संगीत शंकर जयकिशन का.





गीत के बोल:

आ जा आई बहार  दिल है बेक़रार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा आई बहार  दिल है बेक़रार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा

जुल्फ़ों से जब भी  चले पुरवाई
जुल्फ़ों से जब भी  चले पुरवाई
तन मेरा टूटे
तन मेरा टूटे
आई अंगड़ाई
आई अंगड़ाई
देखूँ बार बार  तेरा इन्तज़ार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा आई बहार  दिल है बेक़रार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा

मन मे सुनू मैं  तेरी मुरलिया
मन मे सुनू मैं  तेरी मुरलिया
नाचूँ मैं छम-छम
नाचूँ मैं छम-छम
बाजे पायलिया
बाजे पायलिया
दिल का तार-तार  तेरी करे पुकार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा आई बहार  दिल है बेक़रार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा

जल की मछरिया  जल मे है प्यासी
जल की मछरिया  जल मे है प्यासी
खुशियों के दिन हैं
खुशियों के दिन हैं   
फिर भी उदासी
फिर भी उदासी   
ले के मेरा प्यार  आ जा अब के बार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा आई बहार  दिल है बेक़रार
ओ मेरे राजकुमार  तेरे बिन रहा न जाए
आ जा
……………………………………………………….
Aa ja aayi bahar-Rajkumar 1964

Artist: Sadhana

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Dec 14, 2016

इस रंग बदलती दुनिया में-राजकुमार १९६४

शम्मी कपूर और साधना पर फिल्माया गया एक गीत सुनते हैं जिसमें
रंग बदलती दुनिया का जिक्र है. इस थीम पर आप पहले दो गीत कल
सुन चुके हैं. इस गीत में पर्सनल सजेशन जैसा है. वैसे कुछ बातें सभी
पर लागू हो सकती हैं. गीत कभी कभी रोमांटिक लगता है तो कभी
एंटी-रोमांटिक.

हसरत जयपुरी हैं इसके गीतकार और शंकर जयकिशन की धुन पर इसे
गाया है रफ़ी ने. ये भी एक लोकप्रिय गीत है. ज्यादा लोकप्रिय गीतों के
टैग में हम उसका उल्लेख कर देते हैं.

इस साईट पर से बहुतों ने फायदा उठाया है. गूगल को शायद इस साईट
में और दूसरी साइटें जिन पर आधे अधूरे बोल दिए रहते हैं, कोई फर्क
नज़र नहीं आता. वैसे गूगल को फ्री ब्लॉग कम समझ में आते हैं. उसे
पैसे खर्च करके बनाई साइटें ही लुभावनी लगती हैं.




गीत के बोल:

इस रंग बदलती दुनिया में
इनसान की नीयत ठीक नहीं
निकला न करो तुम सज धज कर
ईमान की नीयत ठीक नहीं
इस रंग बदलती दुनिया में
इनसान की नीयत ठीक नहीं
निकला न करो तुम सज धज कर
ईमान की नीयत ठीक नहीं
इस रंग बदलती दुनिया में

ये दिल है बड़ा ही दीवाना
छेड़ा न करो इस पागल को
ये दिल है बड़ा ही दीवाना
छेड़ा न करो इस पागल को
तुम से न शरारत कर बैठे
नादान की नीयत ठीक नहीं

इस रंग बदलती दुनिया में
इनसान की नीयत ठीक नहीं
निकला न करो तुम सज धज कर
ईमान की नीयत ठीक नहीं
इस रंग बदलती दुनिया में

काँधे से हटा लो सर अपना
ये प्यार मुहब्बत रहने दो
काँधे से हटा लो सर अपना
ये प्यार मुहब्बत रहने दो
कश्ती को सम्भालो मौजों में
तूफ़ान की नीयत ठीक नहीं

इस रंग बदलती दुनिया में
इनसान की नीयत ठीक नहीं
निकला न करो तुम सज धज कर
ईमान की नीयत ठीक नहीं
इस रंग बदलती दुनिया में

मैं कैसे खुदा हाफ़िज़ कह दूँ
मुझको तो किसी का यकीन नहीं
मैं कैसे खुदा हाफ़िज़ कह दूँ
मुझको तो किसी का यकीन नहीं
छुप जाओ हमारी आँखों में
भगवान की नीयत ठीक नहीं

इस रंग बदलती दुनिया में
इनसान की नीयत ठीक नहीं
निकला न करो तुम सज धज कर
ईमान की नीयत ठीक नहीं
इस रंग बदलती दुनिया में
.................................................................................
Is rang badalti duniya mein-Rajkumar 1964

Artists: Shammi Kapoor, Sadhana

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Dec 18, 2014

मोहब्बत के सुहाने दिन-मर्यादा १९७१

विरह गीत हिंदी फिल्मों में कई रंगों वाले हैं. राजकुमार के हिस्से में भी कई
ऐसे गीत आये हैं. कल्याणजी आनंदजी अपने मुकेश के गाये गीतों की वजह
से आम आदमी द्वारा ज्यादा अच्छे से पहचाने जाते हैं. ये उनके संगीत स्कूल
से निकला नायाब हीरा है. गीत में मूड के मुताबिक संगीत में उतार चढाव
आते जाते मिलेंगे आपको. आनंद बक्षी ने इस गीत को लिखा है. सुना जाता
है कि इस गीत को राग चारुकेशी के स्वर समूहों के आधार पे बनाया गया है.

 

गीत के बोल: 

मोहब्बत के सुहाने दिन जवानी की हसीँ रातें
जुदाई में नज़र आती हैं ये सब ख़्वाब की बातें
मोहब्बत के सुहाने दिन

ये तन्हाई नहीं थी इस जगह थी प्यार की महफ़िल
तेरे ग़म से गले मिलकर जहाँ अब रो रहा है दिल
यहीं हँस हँस के होती थीं कभी अपनी मुलाकातें

मोहब्बत के सुहाने दिन

मेरे मायूस होंठों पे तेरे ग़म की कहानी है
कहानी ये नहीं ग़म की उल्फ़त की निशानी है
ये आँसू और ये आहें मोहब्बत की सौग़ातें

मोहब्बत के सुहाने दिन

न ऐसे दिल तड़पता था ना मैं ऐसे तरसता था
इसी गुलशन में देखो तो कभी सावन बरसता था
इसी वादी में अब होने लगीं अश्क़ों की बरसातें

मोहब्बत के सुहाने दिन

पता मैं पूछता फिरता हूँ तेरा इस ज़माने से
हुआ क्या हाल इस दिल का तेरे इक दूर जाने से
जनाज़े बन गई इस दिल के अरमानों की बारातें

मोहब्बत के सुहाने दिन जवानी की हसीँ रातें
जुदाई में नज़र आती हैं ये सब ख़्वाब की बातें
मोहब्बत के सुहाने दिन
............................................................
Mohabbat ke suhane din-Maryada 1971

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Apr 17, 2011

तेरा जलवा जिसने देखा-उजाला १९५९

'यादों की बारात चली है' कल इस ग़ज़ल को सुना मैंने कई दिन बाद।
ये ग़ुलाम अली की गाई एक ग़ज़ल है। इसको सुनकर वाकई यादों
की बारात सी निकलने लग जाती है। प्रस्तुत गीत के याद आने के
पीछे बहुत से कारण हैं-1)अभिनेता राजकुमार, 2) मिटटी के दिए पर
आधारित देसी सारंगी बजता हुआ एक अधेड़ उम्र युवक जो कल मिला
और 3)लगभग कुमकुम जैसी कमनीय काया वाली एक बाला के सड़क
पर गुज़रते हुए दर्शन हो जाना। इसके बाद थोड़ा दिमाग लगाया गया कि
एक गीत है जिसमे तीनों तत्त्व मौजूद हैं। तो साहब पहुँच गए सर खुजाते
हुए मुकाम पर और गीत याद आया सन १९५९ की फिल्म उजाला का जो है
-तेरा जलवा जिसने देखा।

कुमकुम कि स्क्रीन प्रेजेंस पर पहले हम चर्चा कर चुके हैं। उनकी भाव भंगिमाओं
के आगे उनकी समकालीन अभिनेत्रियाँ पानी भरती नज़र आतीं। किसी ने कुमकुम
की तारीफ में लिखा है- हिप्नोटिक डांसर- सही है। इस गीत की वजह से फिल्म हमने
सिनेमा हाल में जा कर २ बार देखी थी ।



गीत के बोल:

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया
ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया
क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया
ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया

है मुझमे भी ऐसा अनोखा सा जादू
जो देखे वो होता है दिल से बेकाबू
लगे तोसे नैना तो नैना ना लागे
ख्यालों में डूबी हूँ तेरे ओ बाबू
तू आया तो महफ़िल में उजाला हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरी एक झलक ने वो हालत बना दी
मेरे तन-बदन में मुहब्बत जगा दी
अभी भूल कर को इधर बहते पानी
किनारे पे रहती हूँ फिर भी मैं प्यासी
अब दिल का क्यूँ करें ग़म गया सो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

बुलाती हैं तुझको ये आंचल की छैयां
जरा मुस्कुरा दे पडूं तोरे पैयाँ
कसम है तुझे दिल की जाने तमन्ना
तुझे हमने माना है अपना ही सैंया
मैं अकेली वो तेरा ज़माना हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया

तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया
मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया
ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया
.................................
Tera Jalwa Jisne Dekha-Ujala 1959

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Feb 14, 2010

अंदाज़ मेरा मस्ताना - दिल अपना और प्रीत पराई १९६०

फिल्म 'दिल अपना और प्रीत पराई' का एक और गीत पेश
है। लीना, टीना, तकलीना जैसे शब्द मुझे आकर्षित करे रहे।
'तकलीना' का अर्थ आज तक समझ नहीं आया ना ही इस नाम
की कोई मोहतरमा मिलीं। सो इसको फ़िल्मी नाम समझ कर
दिमाग के किसी कोने में डाल दिया। ये गीत भी मीना कुमारी पर
फिल्माया गया है। इसके गीतकार शैलेन्द्र हैं और गायिका लता
मंगेशकर । एक छोटे से गीत को किलोमीटर लम्बा बनाया गया
है फिर भी सुनने वाला बोर नहीं होता, इसकी धुन आकर्षक जो अमां।



गीत के बोल:

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

प्यार की किताब हूँ मैं
सच हूँ फिर भी ख्वाब हूँ मैं
देख कर सुरूर आये,
वो अजब शराब हूँ मैं
मैं हूँ जवानी का
रंगीन तराना, रंगीन तराना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

तुझको मेरी जुस्तजू है
मुझको तेरी आरजू है
मेरे दिल का आइना तू
दिल के आइने में तू है
हम से ही रोशन है
सारा ज़माना, सारा ज़माना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

मैं किधर हूँ तू कहाँ है
ये ज़मीं या आसमान है
मेरे तेरे प्यार की ये
क्या अजीब दास्तां है
मीठा सा ये दर्द
भी है सुहाना, दर्द सुहाना

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

अंदाज़ मेरा मस्ताना,
मांगे दिल का नजराना
ज़रा सोचके आंख मिलाना,
हो जाये ना तू दीवाना
के हम भी जवान हैं,
समां भी जवान है
ना फिर हम से कहना
मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है

तकलीना

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Feb 13, 2010

अजीब दास्तां है ये- दिल अपना और प्रीत पराई १९६०

"दिल एक मंदिर" और "दिल अपना और प्रीत परायी" दोनों फिल्मों
में शंकर जयकिशन का संगीत है। फिल्म के नाम में मैं अक्सर धोखा
खा जाता हूँ और एक फिल्म के गाने दूसरी में फिट कर दिया करता हूँ।
ऐसा आपके साथ भी होता होगा ज़रूर।

ये गीत एक पार्टी में गाया जा रहा है। पाश्चात्य प्रभाव वाला संगीत
होने के बावजूद ये गीत देसी ही लगता है। शैलेन्द्र के बढ़िया बोलों
को आवाज़ दी है गायिका लता मंगेशकर ने और इसे परदे पर गा
रही हैं मीना कुमारी। राज कुमार एक डॉक्टर हैं जिनकी शादी नादिरा
से होती है। शादी के बाद ये पार्टी दी जा रही है। मीना कुमारी जो कि
एक नर्स हैं वो डॉक्टर से प्रेम करती थी/हैं। अपनी उलझन भरी
भावनाओं को वे गीत के माध्यम से व्यक्त कर रही हैं। इस फिल्म
के एक गीत पर पहले हम चर्चा कर चुके हैं।



गीत के बोल:

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सकें ना हम

ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुंआ उठा चिराग से
ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुआं उठा चिराग से
ये ख्वाब देखती हूँ मैं
के जग पड़ी हूँ ख्वाब से

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम

मुबारकें तुम्हें के तुम
किसी के नूर हो गए
मुबारकें तुम्हें के तुम
किसी के नूर हो गए
किसी के इतने पास हो
के सबसे दूर हो गए

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम

किसी का प्यार ले के तुम
नया जहाँ बसाओगे
किसी का प्यार ले के तुम
नया जहाँ बसाओगे
ये शाम जब भी आएगी
तुम हमको याद आओगे

अजीब दास्तां है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें हैं कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
.............................
Ajeeb dastan hai ye-Dil apna aur preet parayi 1960

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Oct 11, 2009

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना-दिल अपना और प्रीत परायी १९६०

गाने में नक्काशी कैसे की जाती है इसका शानदार नमूना देखिये। कुछ
अचंभित और विस्मृत करने वाले गाने जिन पर चर्चा कम हुई है आपके
लिए पेश हैं। एक गीत है फ़िल्म 'दिल अपना और प्रीत परायी' से -मेरा
दिल अब तेरा ओ सजना। शंकर जयकिशन ने लता मंगेशकर के लिए जो
मधुर नगमे बनाये हैं उनमे से एक। इस गीत में वाद्य यंत्रों की बाजीगरी से
लेकर जितनी भी आवाजें हैं वो इसको कर्णप्रिय बनाती हैं चाहे वो गाने के
शुरू में होने वाला कोलाहल हो या गाने के बीच में सुनाई देने वाली वाद्य यंत्रों
की आवाजें हो। ये भी एक खूबसूरत नृत्य रचना है जो आँखों को आनंददायी
सुख प्रदान करती हैं। शुरू में होने वाली "ला ला ला ला ला ला " इसको सहज
बनाती है। 'ला ला ला ला' के साथ 'होए' का "फ़ोलो-अप " इसको कातिल बना
देता है। साथी मित्रों का अनुमान है की मुझे थोडी अजीब से चीज़ें पसंद आती हैं।
इस फ़िल्म के बाकी के गाने जनता को ज्यादा पसंद आते हैं। आज तक कोई
शंकर जयकिशन प्रेमी मुझे इस गाने की तारीफ़ करता नहीं मिला। उससे ज्यादा
फर्क नहीं पड़ता। जो अच्छा है वो अच्छा ही रहेगा। कुछ चीज़ें सुनने में ज्यादा
मज़ा आता है तो कुछ देखने में। इस फ़िल्म को थिएटर में देखने के बाद मुझे
सबसे ज्यादा इसी गाने से लगाव है। फ़िल्म के कुछ और गीत मुझे बेहद पसंद
हैं उनका जिक्र फ़िर कभी....

कैसा जा........दू ........ फे........... रा.......





गाने के बोल
:

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
मेरा दिल अब तेरा ओ साजना

कैसा जादू फेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

नैन हमारे, तुम संग लागे
तुम संग प्रीत हमारी
मन भाए तुम, जान न जानो
जाने है दुनिया साड़ी
कोई और न मेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

मोरनी बनके राह तकूँ मैं
तुम बादल बन छाओ
मेरे प्यासे रोम रोम पे रस बरसाते जाओ
मेरा दिल में बसेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा ओ साजना
कैसा जादू फेरा ओ साजना

प्यार का बंधन जनम जनम का
साथ तो संग ही छूटे
सारे ही रंग फीके पड़ जाएँ
प्यार का रंग न छूटे

तूने तन मन घेरा ओ साजना

मेरा दिल अब तेरा साजना
कैसा जादू फेरा साजना

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