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Feb 11, 2018

यूँ ही दिल ने चाहा था-दिल ही तो है १९६३

दिल अगर रोना चाहे तो उस बात का जिक्र इतने सुन्दर
अंदाज़ में भी किया जा सकता है. शब्दों को एक सुन्दर
धुन भी प्रदान करी गई है. गीत है सुमन कल्याणपुर का
गाया फिल्म दिल ही तो है से.

फिल्म के सभी गीत श्रवणीय हैं चाहे वो लता का गाया हो,
मुकेश का गाया हो या मन्ना डे का गाया हुआ. सभी गीत
साहिर ने लिखे हैं और संगीत है रोशन का. परदे पर इसे
नूतन गा रही हैं.





गीत के बोल:

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना
यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

हमें भी नहीं इल्म हम जिस पे रोये
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

ग़म-ए-दिल है और ग़म-ए-ज़िंदगी भी
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना
ग़म-ए-दिल है और ग़म-ए-ज़िंदगी भी
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना
न इसका ठिकाना न उसका ठिकाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

कोई किसपे तड़पे कोई किसपे रोये
इधर दिल जला है उधर आशियाना
इधर दिल जला है उधर आशियाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना
.................................................................
Yunhi dil ne chaha tha-Dil hi to hai 1963

Artist: Nutan

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Jan 8, 2016

निगाहें मिलाने को जी चाहता है-दिल ही तो है १९६३

एक नई फिल्म का नाम है-दिल तो बच्चा है जी. इस फिल्म का
नाम आते ही एक पुरानी फिल्म-दिल ही तो है याद आ जाती है.
किस चीज़ का कनेक्शन कहाँ जुड जाए कहा नहीं जा सकता. रोज
कुछ नए सिलसिले शुरू होते हैं, नए कथानक बनते हैं, नए सफर
तय होते हैं.

आइये आज सुनें अपने ज़माने की मशहूर कव्वाली जो सन १९६३
से निरंतर आनंदित करती चली आ रही है. इसे आप टाइमलेस
कह सकते हैं, क्यूंकि ये हर दशक में आनंदित करती आई है. ये
कव्वाली है या गीत, जो भी हो, बढ़िया सामान है सुनने के लिए.
आशा भोंसले के गाये उम्दा गीतों में इसकी गिनती की जाती है.
साहिर लुधियानवी साहब ने इसे तबियत से लिखा और उतनी ही
बढ़िया तबियत से इसकी धुन बनाई रोशन ने. राज कपूर और
नूतन इस फिल्म में प्रमुख कलाकार हैं.




गीत के बोल:

राज की बात है महफिल में  कहें या ना कहें
बस गया है कोई इस दिल में  कहें या ना कहें

निगाहें मिलाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जां लुटाने को जी चाहता है

वो तोहमत जिसे इश्क कहती है दुनियाँ
वो तोहमत उठाने को जी चाहता है

किसी के मनाने में लज्जत वो पाई
के फिर रूठ जाने को जी चाहता है

वो जलवा जो ओझल भी है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है

जिस घड़ी मेरी निगाहों को तेरी दीद हुई
वो घड़ी मेरे लिए ऐश की तमहीद हुई
जब कभी मैंने तेरा चाँद सा चेहरा देखा
ईद हो या के ना हो, मेरे लिए ईद हुई
वो जलवा जो ओझल भी है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है

मुलाक़ात का कोई पैगाम दीजे के
छुप-छुप के आने को जी चाहता है
और आ के न जाने को जी चाहता है
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
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Nigahen milane ko jee chahta hai-DIl hi to hai 1963

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Nov 11, 2009

तुम अगर मुझको न चाहो -दिल ही तो है १९६३

सभी तरह के भावों पर गाने बन चुके हैं। जो बाकी थे वो नई
हिन्दी अंग्रेज़ी मिश्रित फिल्मों ने पूरे कर दिए हैं। भावों का मिश्रण
जब होता है तो कुछ नया सा महसूस होता है। इस गाने के साथ
भी ऐसा ही कुछ है। इसमे नायक, नायिका को प्यार और शिकायत
भरी धमकी दे रहा है। अब प्यार मिली धमकी कुछ अलग हट के
लिखने वाले ही सोच सकते हैं। साहिर लुधियानवी इन बोलों के लिए
जिम्मेदार हैं और रोशन ने इसकी धुन बनाई है। गायक हैं मुकेश। ये
गीत अपने अलग अंदाज़ के कारण मशहूर हुआ है। नूतन इस गाने में
अपने अभिनय के जौहर दिखा रही हैं। ये गीत ऐसा है कि इसपे शायद
नूतन के अलावा आप और किसी अभिनेत्री की कल्पना नहीं कर सकते।



गाने के बोल

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी

अब अगर मेल नहीं है तो जुदाई भी नहीं
बात तोड़ी भी नहीं तुमने बनाई भी नहीं
यह सहारा ही बहुत है मेरे जीने के लिए
तुम अगर मेरी नहीं हो तो परायी भी नहीं
मेरे दिल को न सराहो, मेरे दिल को न सराहो
तो कोई बात नहीं, तो कोई बात नहीं
गैर के दिल को सराहोगी तो मुश्किल होगी

तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी

तुम हसीं हो तुम्हे सब प्यार भी करते होंगे
में जो मरता हूँ तो क्या और भी मरते होंगे
सबकी आंखों में इसी शोख का तूफ़ान होगा
सबके सीने में यही दर्द उभरते होंगे
मेरे ग़म में न कराहो, मेरे ग़म में न कराहो
तो कोई बात नहीं, तो कोई बात नहीं
और के ग़म में कराहोगी तो मुश्किल होगी
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी

फूल की तरह हंसो सबकी निगाहों में रहो
अपनी मासूम जवानी की पनाहों में रहो
मुझको वो दिन न दिखाना तुम्हें अपनी ही कसम
मैं तरसता रहूँ तुम गैर की बाहों में रहो
तुम जो मुझसे न निबाहो, तुम जो मुझसे न निबाहो
तो कोई बात नही, तो कोई बात नही
किसी दुश्मन से निबाहोगी तो मुश्किल होगी
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी

तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी
.....................................
Tum agar mujhko na chaho-Dil hi to hai 1963

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