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Sep 14, 2017

देख सकता हूँ मैं कुछ भी-मजबूर १९७४

हिंदी फिल्मों में भाई बहन गीत काफी सारे हैं. उनमें से एक
सुनते हैं आज फिल्म मजबूर से. अमिताभ और फरीदा जलाल
पर फिल्माया गया ये गीत गाया है किशोर कुमार ने.

आनंद बक्षी गीतकार और लक्ष्मी प्यारे संगीतकार हैं. अपने ज़माने
का ये एक लोकप्रिय गीत है.



गीत के बोल:

देखा फूलों को काँटों पे सोते हुए
देखा तूफ़ाँ को कश्ती डुबोते हुए
देख सकता हूँ मैं कुछ भी होते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
देख सकता हूँ मैं कुछ भी होते हुए
देख सकता हूँ मैं कुछ भी होते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए

एक दिन बिगड़ी क़िस्मत सँवर जाएगी
एक दिन बिगड़ी क़िस्मत सँवर जाएगी
ये ख़ुशी हमसे बच कर किधर जाएगी
ग़म न कर ज़िन्दगी यूँ गुज़र जाएगी
रात जैसे गुज़र गई सोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए

तू भी सुन ले जो मैने सुना एक दिन
तू भी सुन ले जो मैने सुना एक दिन
बाग में सैर को गया मैं एक दिन
एक मालन ने मुझसे कहा एक दिन
खेल काँटों से कलियाँ पिरोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए

आँख भर आई फिर क्यों किसी बात पर
आँख भर आई फिर क्यों किसी बात पर
कर भरोसा बहन भाई की जात पर
हाथ रख दे यकीन से मेरे हाथ पर
मुस्करा दे ज़रा यूँ ही रोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे सोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए

देख सकता हूँ मैं कुछ भी होते हुए
देख सकता हूँ मैं कुछ भी होते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
नहीं मैं नहीं देख सकता तुझे रोते हुए
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Dekh sakta hoon main kuchh bhi-Majboor 1974

Artists: Amitabh, Farida Jalal

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Aug 13, 2017

दारू की बोतल में-मजबूर १९७४

मजबूरी इंसान से क्या क्या करवा देती है यही इस फिल्म
का सार है. फिल्म अपने ज़माने की एक चर्चित फिल्म है
और इसके गीत भी काफी बजे थे किसी ज़माने में. प्रस्तुत
गीत काफी लोकप्रिय हुआ था. इसमें दारू का जिक्र जो है.

इसके रचनाकार हैं आनंद बक्षी. किशोर के गाये इस गीत की
धुन लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने बनाई है. गीत फिल्माया गया है
प्राण और जयश्री तलपडे उर्फ जयश्री टी पर.



गीत के बोल:

हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
दारू की बोतल में काहे पानी भरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

शी शी शी चीं ए कैसा करता ऐसा काहे को होता
शी शी शी चीं ए कैसा करता ऐसा काहे को होता
देख ले जिस दिन माइकल को रात को सेठ नहीं सोता
ख़ुद चोरी करता है लेकिन चोर से डरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

जंगल में हैं मोर बड़े शहर में हैं चोर बड़े
जंगल में हैं मोर बड़े शहर में हैं चोर बड़े
अपने भी उस्ताद यहाँ पड़े हुए और बड़े
माइकल तो बस लोगों की बस ख़ाली जेब कतरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

साल महीने के लिए खाने-पीने के लिए
अरे साल महीने के लिए खाने-पीने के लिए
कितना पैसा चाहिए आख़िर जीने के लिए
लोग दीवाना हैं जो इस पैसे पे मरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला

दारू की बोतल में काहे पानी भरता है
फिर ना कहना माइकल दारू पी के दंगा करता है
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
हे हांव सो सायबा ला ला ला ला ला
............................................................................
Daroo ki botal mein-Majboor 1974

Artists: Pran, Jayshri T

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May 12, 2017

आदमी जो कहता है-मजबूर १९७४

आज सुनते हैं एक लोकप्रिय गीत फिल्म मजबूर से. १९७४
की फिल्म मजबूर का किशोर का गाया ये गीत दर्शनवादी
है. कहा जाता है वाणी खत्म नहीं होती उसी प्रकार कर्म भी
खत्म नहीं होते. अच्छा बुरा जैसा बोलो या करो उसका
प्रतिफल अवश्य प्राप्त होता है.

गीत आनंद बक्षी का लिखा हुआ है जिसे परदे पर अमिताभ
गा रहे हैं. संगीत लक्ष्मी प्यारे का है.



गीत के बोल:

कभी सोचता हूँ कि मैं चुप रहूँ
कभी सोचता हूँ कि मैं कुछ कहूँ

आदमी जो कहता है आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं
आदमी जो कहता है आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं
आदमी जो देता है आदमी जो लेता है
रास्ते मे वो दुआयें पीछा करती हैं

कोई भी हो हर ख़्वाब तो सच्चा नहीं होता
कोई भी हो हर ख़्वाब तो सच्चा नहीं होता
बहुत ज्यादा प्यार भी अच्छा नहीं होता
कभी दामन छुड़ाना हो तो मुश्किल हो
प्यार के रिश्ते टूटे तो प्यार के रस्ते छूटे तो
रास्ते में फिर वफ़ाएं पीछा करती हैं

आदमी जो कहता है आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं


कभी कभी मन धूप के कारण तरसता है
कभी कभी मन धूप के कारण तरसता है
कभी कभी फिर झूम के सावन बरसता है
पलक झपके यहाँ मौसम बदल जाए
प्यास कभी मिटती नहीं इक बूँद भी मिलती नहीं
और कभी रिमझिम घटाएं पीछा करती हैं

आदमी जो कहता है आदमी जो सुनता है
ज़िंदगी भर वो सदायें पीछा करती हैं
आदमी जो देता है आदमी जो लेता है
रास्ते मे वो दुआयें पीछा करती हैं
......................................................................
Aadmi jo kehta hai-Majboor 1974

Artists: Amitabh Bachchan

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Nov 19, 2016

तुम्हें जो भी देख लेगा-मजबूर १९६४

मजबूर फिल्म का ये गीत सुन के श्रोता ये समझने पर भी
मजबूर हो जाता है कि इसका संगीत हेमंत कुमार द्वारा दिया
गया है. विश्वजीत फिल्म के हीरो हैं और इस गीत का मामला
भी कुछ कुछ बीस साल बाद इश्टाईल का हैं.

गीत कुछ कुछ यूँ है मानो एक बकरी कल्याणजी आनंदजी के
बाडे की घास चरते चरते हेमंत कुमार के बाडे में घुस गयी हो.
संगीत संयोजन गीत के शुरू का तो कल्याणजी आनंदजी वाला
है मगर बाद में हेमंत कुमार के अंदाज़ वाला.

बहुत कम गीत ऐसे मिलेंगे आपको जिसमें नायक नायिका किसी
तालाब या पोखर में तैरते हुए गीत गा रहे हों. ज्यादा देर पानी
में भैंसों को नहाने में दिक्कत नहीं होती मगर इंसानों को होती
है, जिन्हें ज्यादा मात्रा में एक बार में नहाने की आदत ना हो.

ज्यादा ताम झाम नहीं किया गया है इस गीत के लिए. एक ही
पोशाक पूरे गीत में दिखलाई देगी आपको नायक और नायिका की.
गीत पूरा होते तक शायद कपडे सूख गए होंगे !

गीत लाजवाब है और ऐसी तारीफें करना आज की जनरेशन को
कुछ अजीब लगता होगा.



गीत के बोल:

तुम्हें जो भी देख लेगा
किसी का ना हो सकेगा
तुम्हें जो भी देख लेगा
किसी का ना हो सकेगा
परी हो बला हो क्या हो तुम
तुम्हें जो भी देख लेगा
किसी का ना हो सकेगा
परी हो बला हो क्या हो तुम
तुम्हें जो भी देख लेगा

दुनिया चले उधर ही जिधर ये निगाह घूमे
शबनम को देख लो गर बन कर शराब झूमे
नशा ही नशा हो क्या हो तुम

तुम्हें जो भी देख लेगा
किसी का ना हो सकेगा
परी हो बला हो क्या हो तुम
तुम्हें जो भी देख लेगा

कजरारे नैन भंवरे पलकें जो खोलते हैं
दिलों की बिसात क्या है ईमान भी डोलते हैं
भूतों के खुदा हो क्या हो तुम

तुम्हें जो भी देख लेगा
किसी का ना हो सकेगा
परी हो बला हो क्या हो तुम
तुम्हें जो भी देख लेगा

कहाँ ये दमकता मुखडा कहाँ ऐसा नूर होगा
जिसने बनाया तुमको उसे भी गुरूर होगा
खुदा की अदा हो क्या हो तुम

तुम्हें जो भी देख लेगा
किसी का ना हो सकेगा
परी हो बला हो क्या हो तुम
तुम्हें जो भी देख लेगा
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Tumhen job hi dekh lega-Majboor 1964

Artists: Biswajeet, Waheeda Rehman

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