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Jul 22, 2018

गया अँधेरा हुआ उजारा-सुबह का तारा १९५४

आज एक प्रेरणादायी गीत सुनते हैं श्वेत श्याम युग से.
ये अपने ज़माने का बेहद लोकप्रिय गीत हैं.

फिल्म के शीर्षक कैसे और क्यूँ रखे जाते हैं ये अब
तक मुझे पूरी तरह से समझ नहीं आया. उपन्यास
के शीर्षक तो काफी हद तक समझ आ जाते हैं
लेकिन कुछ फिल्मों में शीर्षक और कथानक के बीच
सम्बन्ध ढूंढते ढूंढते फिल्म समाप्त हो जाती है और
सिनेमा घर की बत्तियाँ जल जाती हैं.

सुनते हैं सन १९५४ की फिल्म सुबह का तारा से
शीर्षक गीत जिसे तलत महमूद संग लता मंगेशकर
ने गाया है. नूर लखनवी की रचना है जिसका संगीत
सी रामचंद्र ने तैयार किया है.

भारतीय रेल के जनरल कम्पार्टमेंट में जब आप फँस
जाएँ और सारी सवारियां जबरन आँख मिचमिचाती हुई
सोती मिले और बैठने की जगह ना मिले तो आप ऐसे
गीत गा कर मन बहला सकते हैं. रात का सफर होगा
तो बैठे बैठे गुनगुनाते हुए सुबह हो ही जायेगी.



गीत के बोल:

गया अँधेरा हुआ उजारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
टूटे दिल का बँधा सहारा चमका चमका सुबह का तारा

साँस खुशी की तन में आई अरमानों ने ली अंगड़ाई
जाग उठीं उम्मीदें सारी जाग उठी तक़दीर हमारी
हमें किसी ने दूर पुकारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी
मुरझाई कली क्या फिर से खिलेगी खोई हुई क्या राहत मिलेगी
खोई हुई क्या राहत मिलेगी
कहीं ये तारा टूट न जाये सुबह का साथी छूट न जाये
आँखों में रह जाये नज़ारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा

गई उदासी रौनक छाई रोशनी अब जीवन में आई
हँसी खुशी का छेड़ो तराना नाच उठे मन झूमे ज़माना
समा सुहाना प्यारा प्यारा
चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
गया अँधेरा हुआ उजारा चमका चमका सुबह का तारा
………………………………………….
Gaya andhera hua ujala-Subah ka tara 1954

Artists: Pradeep Kumar, Jayshri

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Feb 6, 2017

चंदा की छांव में-परछाई १९५२

सन १९५२ की फिल्म परछाई से एक गीत सुनते
हैं. ये ऐसी फिल्म है जिसमें वी शांताराम के साथ
जयश्री और संध्या दोनों मौजूद हैं बतौर नायिका.

गीत जयश्री पर फिल्माया गया है जिसे लता गा
रही हैं. नूर लखनवी के बोल हैं और सी रामचंद्र
का संगीत. सुनहरे दौर का यह  गीत जिसमें चंदा
की छांव का जिक्र है रात को सुनने में ज्यादा
सुहाना लगता है. म्यूजिक मेड सिंपल इस फंडे
पर चलने वाले सी रामचंद्र संगीत की सभी विधाओं
में दक्ष होने के बावजूद सरल धुनों को ही ज्यादा
तरजीह दिया करते थे. ऐसे गीत जिन्हें आसानी से
गुनगुनाया जा सके.



गीत के बोल:

चंदा की छांव में ठण्डी ठण्डी हवाओं में
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा
चंदा की छांव में ठण्डी ठण्डी हवाओं में
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा

भँवरों का बोलना फूलों का डोलना
ओ ओ ओ ओ ओ फूलों का डोलना
भँवरों का बोलना फूलों का डोलना
ओ ओ ओ ओ ओ फूलों का डोलना
आज मुझे भा रहा
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा

चंदा की छांव में ठण्डी ठण्डी हवाओं में
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा

दिल और जिगर के बीच हो ओ ओ ओ
मेरी आँख और नज़र के बीच हो
दिल और जिगर के बीच हो ओ ओ ओ
मेरी आँख और नज़र के बीच हो
है कोई समा रहा
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा

चंदा की छांव में ठण्डी ठण्डी हवाओं में
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा


छुप छुप के मेरे पास हो ओ ओ ओ
इक प्रेम की ले के आस हो
छुप छुप के मेरे पास हो ओ ओ ओ
इक प्रेम की ले के आस हो
वो कोई आ रहा
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा

चंदा की छांव में ठण्डी ठण्डी हवाओं में
ओ कोई गा रहा
ओ ओ ओ ओ ओ कोई गा रहा
………………………………………………
Chanda ki chhanv mein-Parchhain 1952

Artist: Jayshri

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Nov 4, 2010

नज़रों में समाने से करार-हैदराबाद की नाजनीन १९५२

रंगीन युग से वापस श्वेत श्याम की ओर चला जाए एक बार फिर।
कहा भी गया है कि सबसे खूबसूरत रंग काला होता है।

कुछ साल पहले तक मुझे बस ये मालूम था कि इस नाम की
कोई फिल्म है, वो भी इसलिए कि इसमें वसंत देसाई का संगीत
है। फिल्म के गीत भी सुनने के लिए उपलब्ध नहीं थे। तकरीबन
७ साल पहले ये गीत सुनाई दिया । अब तो ये यू-ट्यूब पर देखने
के लिए भी उपलब्ध है। इसी को शायद हम सभी लोग कहते हैं
टेक्नोलोजिकल रेवोल्यूशन। तकनीकी के माध्यम से कई
सुप्त, गुप्त एवम लुप्त चीज़ें प्रकट हो गई हैं।

फिल्म में गुज़रे ज़माने के कुछ यादगार गीत हैं। प्रस्तुत गीत
फिल्माया गया है खूबसूरत निगार सुल्ताना पर। गीत लिखा
है नूर लखनवी ने और इसकी धुन बनाई है वसंत देसाई ने।
गीत गा रही हैं राजकुमारी जिनकी स्पष्ट और बुलंद आवाज़
के कई दीवाने आज भी मौजूद हैं।



गीत के बोल:

नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा
नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

हाँ , नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

तस्वीर निगाहों में है खामोश तुम्हारी
जो सुन नहीं सकती कभी फरियाद हमारी
ये खाली तसव्वुर किसी काम, आ ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

आएगा ख्याल आ के, हो हो हो
आएगा ख्याल आ के गुज़रता ही रहेगा
आहें कोई दिल थम के भरता ही रहेगा
तस्कीन की सूरत कोई बतला ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

हाँ, नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

टकरायेंगे हम सर कभी दीवार से दर से
हर सांस में उबलेगा लहू ज़ख्म-ए-जिगर से
दिल ढूंढेगा, आ आ आ
दिल ढूंढेगा तड़पेगा तुम्हें पा ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

हाँ, नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

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