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Aug 5, 2019

घबरा के जो हम सर को-महल १९४९

कभी कभी कोई गीत की पंक्ति मन में प्रश्नचिन्ह छोड़ देती
है, किसी शब्द को लेकर या फ़िर किसी भाव को ले कर.
सन १९४९ की फिल्म महल में कई खूबसूरत गीत हैं. एक
और सुनते हैं आज.

गीत में सर को टकराने की बात की गयी है. सबसे पहला
विकल्प दिमाग में आता है-पत्थर. अंडरस्टुड जैसी चीज़ है
ये तो. इसमें सोचना क्या. मेरे जैसे कई संगीतप्रेमी ऐसा ही
सोचते हैं. मगर, सन्दर्भ सहित भावाख्या करने वाले इसके
अलग अलग मायने निकाल सकते हैं. दूसरा विकल्प फिल्मों
के ही अनुसार जो हो सकता है वो है-अपना सर किसी दूसरे
के सर पे दे मारना. ये ढिशुम ढिशुम वाली फिल्मों में हम
अक्सर देखते हैं.

बहरहाल जो भी हो, इन सब से इस गीत की खूस्ब्सूरती कम
ना होगी. नक्शब के लिखे गीत को गाया है राजकुमारी दुबे
ने. इसे विजयलक्ष्मी नाम की अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

घबरा के जो हम सर को टकराएं तो अच्छा हो
घबरा के जो हम सर को टकराएं तो अच्छा हो
इस जीने में सौ दुख हैं
इस जीने में सौ दुख हैं मर जाएं तो अच्छा हो
मर जाएं तो अच्छा हो
घबरा के जो हम सर को टकराएं तो अच्छा हो

दिल डूबने का मंज़र वो भी तो ज़रा देखें
दिल डूबने का मंज़र वो भी तो ज़रा देखें
आँसू मेरी आँखों में
आँसू मेरी आँखों में भर आएं तो अच्छा हो

घबरा के जो हम सर को टकराएं तो अच्छा हो

जो हम पे गुज़रनी है
जो हम पे गुज़रनी है इक बार गुज़र जाये
जो हम पे गुज़रनी है इक बार गुज़र जाये
वो कितने सितमगर है खुल जाए तो अच्छा हो

घबरा के जो हम सर को टकराएं तो अच्छा हो
…………………………………………………………….
Ghabra ke jo ham-Mahal 1949

Artist: Vijaylaxmi

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Jul 3, 2019

मधुर सुरों में गाये चाँदनी-माँ बाप १९४४

सन १९४४ की फिल्म माँ बाप फिल्म का निर्माण सनराईज़
पिक्चर्स ने किया था. फिल्म के निर्दशक वी एम् व्यास
हैं. याकूब, दीक्षित, वीणा, अमीरबाई कर्नाटकी, नजीर, माजिद
और राजकुमारी जैसे कलाकार फिल्म में मौजूद हैं. कलाकारों
में आपने गौर किया हो तो दो गायिकाओं के नाम हैं.

प्रस्तुत गीत राजकुमारी और स्वयं संगीतकार अल्लारखा ने
गाया है. रूपबनी नामक गीतकार ने इस गीत को लिखा है.
इन गीतकार का नाम अल्लारखा के संगीत वाली ४० और
पचास के दशक में काफी मिलेगा आपको.



गीत के बोल:

राजकुमारी:
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा

आँखों में है नींद की मस्ती
आँखों में है नींद की मस्ती
आओ बसावें ख़्वाब की बस्ती
आओ बसावें ख़्वाब की बस्ती
सेज बिछा दूँ मैं तारों की
सेज बिछा दूँ मैं तारों की

चाँद सो जा चाँद सो जा
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा

रात की देवी जाग रहीं है
नींद तो हम से भाग रही है
रात की देवी जाग रहीं है
नींद तो हम से भाग रही है
तुम सोओ मैं गाऊँ रागिनी
तुम सोओ मैं गाऊँ रागिनी

चाँद सो जा चाँद सो जा
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा
मधुर सुरों में गाये चाँदनी
चाँद सो जा चाँद सो जा
....................................................................
Madhur suron mein gaaye chandni-Maa Baap 1944

Artists:

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Sep 10, 2017

हरि दिन तो बीता शाम हुई-किताब १९७७

लीक से हट कर बनी हुई फिल्म किताब से एक गीत सुनते हैं.
इसे गुज़रे ज़माने की ख्यात गायिका राजकुमारी ने गाया है.
सन १९७७ का ये गीत शायद राजकुमारी का गाया अंतिम हिंदी
फ़िल्मी गीत है.

गुलज़ार ने गीत लिखा है और पंचम ने इसकी धुन बनाई है.



गीत के बोल:

हरि दिन तो बीता शाम हुई रात पार करा दे
हरि दिन तो बीता शाम हुई रात पार करा दे
बीता मेरा काल तो बीता कूल पार करा दे
हरि दिन तो बीता शाम हुई रात पार करा दे

मैंने साथ लिया ना कोई दुशाला ना लोई
मैंने साथ लिया ना कोई दुशाला ना लोई
अपने छूटे सपने छूटे आशा और छुड़ा दे
हरि दिन तो बीता शाम हुई रात पार करा दे

दाता तेरे द्वार खड़ी हूँ माँगूँ मुक्ति दान
दाता तेरे द्वार खड़ी हूँ माँगूँ मुक्ति दान
बंधु छूटे बंधन छूटे छोर पार करा दे
हरि दिन तो बीता शाम हुई रात पार करा दे
बीता मेरा काल तो बीता कूल पार करा दे
हरि दिन तो बीता शाम हुई रात पार करा दे
…………………………………………………………..
Hari din to beeta-Kitaab 1977

Artists: Dina Pathak, Mater Raju

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Aug 9, 2017

छलको छलको ना रस की गगरिया-अनजान १९४१

गायिका राजकुमारी दुबे का गाया एक गीत सुनते हैं ४१ की
फिल्म अनजान से. कवि प्रदीप के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई
है पन्नालाल घोष ने.

किसी कार्यक्रम में ये गीत गाया जा रहा है और गीत के बाद
नृत्य कला का प्रदर्शन हो रहा है.




गीत के बोल:

छलको छलको ना रस की गगरिया
छलको छलको ना रस की गगरिया
मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया
हाँ मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया
छलको छलको ना रस की गगरिया-
मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया
हाँ मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया

आई पीने पिलाने की बेला
हाँ आज पनघट पे प्यासों का मेला
हाँ आई पीने पिलाने की बेला
हाँ आज पनघट पे प्यासों का मेला
देखो लागे ना मोहे नजरिया
हाँ देखो लागे ना मोहे नजरिया
देखो देखो ना लागे नजरिया
मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया
हाँ मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया

छलको छलको ना रस की गगरिया
मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया
हाँ मोरी पनघट पे भीगे चुनरिया
..............................................................
Chhalko chhalko na ras ki gagariya-Anjaan 1941

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Jul 14, 2017

घिर घिर के आसमान पर-बावरे नैन १९५०

फिल्म बावरे नैन से एक युगल गीत सुनते हैं जिसे
राजकुमारी और आशा भोंसले ने गाया है.

गीत एक घोडा गाड़ी पर फिल्माया गया है और इसे
गीत में आप एक ग्रामीण महिला को पहाड की चोटी
पर खड़े बांसुरी बजाते देख सकते हैं. केदार शर्मा की
कुछ फिल्मों में महिला बांसुरी वादक देख सकते हैं
आप.



गीत के बोल:

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं
घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं

क़ाबू में दिल नहीं है ना होश में जवानी
क़ाबू में दिल नहीं है ना होश में जवानी
बेसुध बना रही हैं मस्ती भरी हवाएं

कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जाएं

तेरी हँसी तो जा कर फूलों में छुप गयी थी
फूलों में छुप गयी थी
तेरी हँसी तो जा कर फूलों में छुप गयी थी
फूलों में छुप गयी थी
कोयल की कूक बन कर गूँजी मेरी सदाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटायें
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें

तू अपनी ओढ़नी में मन बाँध लें पिया का
मन बाँध लें पिया का
तू अपनी ओढ़नी में मन बाँध लें फिया का
मन बाँध लें पिया का
फिर ना उन्हें तू भूले न वो तुम्हें भुलायें
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें

घिर घिर के
घिर घिर के आसमान पर छाने लगी घटाएं
कह दो कोई पिया से परदेसवा न जायें
……………………………………………………
Ghir ghir ke aasman par-Bawre Nain 1950

Artists: Geeta Bali, Manju

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Feb 14, 2017

कहीं दिल लगाने का सामान-राग रंग १९५२

फिल्म राग रंग से आपको २ गीत सुनवाए हैं पहले. आज तीसरा
गीत सुनते हैं जिसे राजकुमारी ने गाया है.

सरशर सैलानी का गीत है और रोशन का संगीत. गीत में गति
परिवर्तन होता है दो जगह पर. ऐसे गति परिवर्तन वाले गीत
आपने राहुल देव बर्मन के संगीत में काफी सुने होंगे. यूँ कहें
उनके संगीत वाले ऐसे गीत ज्यादा सुनने को मिले हमें. रोशन
ने हलके फुल्के गीत भी काफी बनाये. उन्हें आम जनता शानदार
कव्वालियों के लिया ज्यादा याद किया करती है.




गीत के बोल:

कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले
हो मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
आसान कर ले
कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले

मुरादों के दिन हैं
मुरादों के दिन हैं ये
उमँगों की रातें उमँगों की रातें
ये बातें नहीं हैं मुंह से
बातें नहीं हैं मुंह से
कहने की बातें कहने की बातें
निगाहों निगाहों में पहचान कर ले
निगाहों निगाहों में पहचान कर ले
मँज़िल की
मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
हो आसान कर ले हो आसान कर ले
कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले
वो मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
आसान कर ले


वही ज़िँदगी है जो वही ज़िँदगी है जो
खुशियों से खेले खुशियों से खेले
मुश्क़िल है दुनिया में
मुश्क़िल है दुनिया में
जीना अकेले जीना अकेले
किसी की तमन्ना को मेंहमान कर ले
किसी की तमन्ना को मेंहमान कर ले
मँज़िल की
मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
हो आसान कर ले हो आसान कर ले

कहीं दिल लगाने का सामान कर ले
सामान कर ले
वो मँज़िल की मुश्क़िल को आसान कर ले
आसान कर ले
.....................................................................
Kahin dil lagane ka samaan-Raag rang 1952

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Sep 26, 2016

सुन बैरी बलम सच बोल-बावरे नैन १९५०

राजकुमारी की बात चली तो फिल्म बावरे नैन से ही एक गीत
सुनते हैं उनका गाया हुआ जो बेहद लोकप्रिय है. इसके बोल
भी शर्मा जी ने लिखे हैं और संगीत है रोशन का.

बैरी शब्द वाला ये गीत आकर्षक धुन में बंधा हुआ है. पिछले
गीत से जो आपके मन में जो दुःख और विषाद के भाव प्रकट
हुए होंगे वो इस गीत को सुन कर गायब हो जायेंगे और आपका
दिल गार्डन गार्डन हो जायेगा.

राजकुमारी को पहली प्लेबैक गायिका होने के श्रेय प्राप्त है.




गीत के बोल:

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा


मैं खोयी तू खोने लगा हाँ
मेरे दिल में यूँ यूँ होने लगा हाँ
मैं खोयी तू खोने लगा हाँ
मेरे दिल में यूँ यूँ होने लगा हाँ
मैं रोने लगी तू रोने लगा रे
इब क्या होगा

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा

बैठे बैठे आह भरने लगे हे
हम इक-दूजे पर मरने लगे हे
बैठे बैठे आह भरने लगे हे
हम इक-दूजे पर मरने लगे हे
हम ये क्या नखरे करने लगे रे
इब क्या होगा

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा

अब दिन को सपने आने लगे हे
तारो से आँख चुराने लगे हे
अब दिन को सपने आने लगे हे
तारो से आँख चुराने लगे हे
हम अपने से शरमाने लगे रे
इब क्या होगा

सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
सुन बैरी बलम सच बोल रे
इब क्या होगा
....................................................................
Sun bairi balam sach bol re-Bawre nain 1950

Artists: Geeta Bali, Raj Kapoor

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क्यूँ मेरे दिल में दर्द-बावरे नैन १९५०

केदार शर्मा का लिखा एक गीत सुनते हैं फिल्म बावरे नैन से.
केदार शर्मा को राज कपूर का गुरु भी कहा जाता है. राज कपूर
ने निर्देशन की कई बारीकियां केदार शर्मा से सीखीं. कुछ सामान्य
बारीकियां सीखीं तो कुछ स्पेशल वाली जिनसे फिल्म में रोचकता
पैदा की जाती है.

फिल्म बावरे नैन का गीत राज कपूर और गीता बाली पर फिल्माया
गया है. गायिका हैं राजकुमारी. राजकुमारी के गाये कई गीत प्रसिद्ध
हैं जो आज समय के साथ थोड़े गम हो चले हैं. पुराने संगीत प्रेमी
उनके गीत अवस्य ही सुना करते हैं. ५० के दशक में बाकी भारी
आवाज़ वाली गायिकाओं की तरह उनके भी गीत कम होते गए.

प्रस्तुत गीत के संगीतकार हैं रोशन जिनकी ये पहली म्यूजिकल हिट
फिल्म थी. गौरतलब है इसमें लता मंगेशकर का गाया एक भी गीत
नहीं है.

हीरोईन इतनी दुखी है कि कवेलू की छत पर चढ के बैठ गयी है और
बेहद दर्द भरा गीत गा रही है. ऊपर चढ के गाने का एक फायदा ये है
आवाज़ दूर दूर तक जाती है, कोई नहीं सुनना चाहे तो भी सुनाई देती
है. छितरे बादलों को फूटी घटाओं की उपमा दी गयी है गीत में.
कुछ कुछ गुलजारना सा लगता है ये तो !!




गीत के बोल:

क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो

दिल की कली को खिलने से पहले मसल दिया
पहले मसल दिया
दिल की कली को खिलने से पहले मसल दिया
पहले मसल दिया
काहे हँसा हँसा के रुलाया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो


दुनिया में छा रहा है अंधेरा तेरे बग़ैर
अंधेरा तेरे बग़ैर
दुनिया में छा रहा है अंधेरा तेरे बग़ैर
अंधेरा तेरे बग़ैर
क्यूँ मेरे दिल का दीप बुझाया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो

फूटी घटाओं वो मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
फूटी घटाओं वो मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
मेरी खुशियाँ कहाँ गयी
क्यूँ मुझको प्यार रास न आया जवाब दो
क्यूँ मेरे दिल में दर्द बसाया जवाब दो
क्यूँ भोले-भाले दिल को लुभाया जवाब दो
..........................................................................
Kyon mere dil mein-Bawre Nain 1950

Artist: Geeta Bali

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Nov 4, 2010

नज़रों में समाने से करार-हैदराबाद की नाजनीन १९५२

रंगीन युग से वापस श्वेत श्याम की ओर चला जाए एक बार फिर।
कहा भी गया है कि सबसे खूबसूरत रंग काला होता है।

कुछ साल पहले तक मुझे बस ये मालूम था कि इस नाम की
कोई फिल्म है, वो भी इसलिए कि इसमें वसंत देसाई का संगीत
है। फिल्म के गीत भी सुनने के लिए उपलब्ध नहीं थे। तकरीबन
७ साल पहले ये गीत सुनाई दिया । अब तो ये यू-ट्यूब पर देखने
के लिए भी उपलब्ध है। इसी को शायद हम सभी लोग कहते हैं
टेक्नोलोजिकल रेवोल्यूशन। तकनीकी के माध्यम से कई
सुप्त, गुप्त एवम लुप्त चीज़ें प्रकट हो गई हैं।

फिल्म में गुज़रे ज़माने के कुछ यादगार गीत हैं। प्रस्तुत गीत
फिल्माया गया है खूबसूरत निगार सुल्ताना पर। गीत लिखा
है नूर लखनवी ने और इसकी धुन बनाई है वसंत देसाई ने।
गीत गा रही हैं राजकुमारी जिनकी स्पष्ट और बुलंद आवाज़
के कई दीवाने आज भी मौजूद हैं।



गीत के बोल:

नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा
नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

हाँ , नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

तस्वीर निगाहों में है खामोश तुम्हारी
जो सुन नहीं सकती कभी फरियाद हमारी
ये खाली तसव्वुर किसी काम, आ ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

आएगा ख्याल आ के, हो हो हो
आएगा ख्याल आ के गुज़रता ही रहेगा
आहें कोई दिल थम के भरता ही रहेगा
तस्कीन की सूरत कोई बतला ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

हाँ, नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

टकरायेंगे हम सर कभी दीवार से दर से
हर सांस में उबलेगा लहू ज़ख्म-ए-जिगर से
दिल ढूंढेगा, आ आ आ
दिल ढूंढेगा तड़पेगा तुम्हें पा ना सकेगा
तुम पास नहीं दिल को ये बहला ना सकेगा

हाँ, नज़रों में समाने से करार आ ना सकेगा

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May 2, 2010

ये रात फिर ना आएगी-महल १९४९

फिल्मों के शीर्षक कहाँ से लिए जाते हैं ये रिसर्च का विषय हो सकता है।
पिछली पोस्ट से मुझे याद आया कि एक और भूतिया फिल्म-महल जो
सन १९४९ की फिल्म है उसमे एक गीत है जिसका मुखड़ा इस प्रकार से है-
ये रात फिर ना आएगी..... गीत राजकुमारी और ज़ोहराबाई अम्बालेवाली
की आवाजों में है जिसे परदे पर सुन रहे हैं दादामुनि यानि कि अशोक कुमार।
मेरा अनुमान है अशोक कुमार को 'दादा' का खिताब बहुत पहले भरी जवानी में
ही मिल गया होगा और 'मुनि' उसमे जुडा होगा शायद फिल्म चित्रलेखा के किरदार
के बाद। फिल्म में संगीत है खेमचंद प्रकाश का। फिल्म से सबसे ज्यादा फ़ायदा किसी
को हुआ तो वो है -लता मंगेशकर जिन्होंने फिल्म में एक गीत-आएगा आनेवाला
गा कर नए युग की शुरुआत की थी जिसे हम फिल्म संगीत से भारी आवाजों की
विदाई का बिगुल कह सकते हैं। बड़े बड़े चक्षु की स्वामिनी नर्तकी झटके ले ले
कर नृत्य कर रही है। नायक को हिलने डुलने का ज़रा भी मौका नहीं मिला गीत में।




गीत के बोल:

छुन छुन घुंघरवा बाजे छुन
कहाँ है ध्यान किसकी धुन
नज़र मिला के बात सुन

ये रात फिर ना आएगी
ये रात फिर ना आएगी
जवानी बीत जाएगी
जवानी बीत जाएगी
ये रात फिर ना आएगी
जवानी बीत जाएगी
जवानी बीत जाएगी

ये मस्त रात बे पिए, नशे में झूमती हुई
ये मस्त रात बे पिए, नशे में झूमती हुई
नज़र को छेड़ती हुई, दिलों को चूमती हुई
नज़र को छेड़ती हुई, दिलों को चूमती हुई
यूँ ही गुज़र गई अगर, खटक रहेगी उम्र भर
हज़ार चाहोगे मगर, चाहोगे मगर

ये रात फिर न आएगी
ये रात फिर न आएगी
जवानी बीत जाएगी
जवानी बीत जाएगी
ये रात फिर न आएगी
जवानी बीत जाएगी
जवानी बीत जाएगी

जवानी गा रही है दिल की धड़कनों के साज़ पर
जवानी गा रही है दिल की धड़कनों के साज़ पर
चलो कहीं भी ले चलो हमारा हाथ थाम कर
चलो कहीं भी ले चलो हमारा हाथ थाम कर
कहाँ की फ़िक्र, कैसा ग़म
हमारा जो है, उसके हम
तुम्हारी जान की क़सम

ये रात फिर न आएगी
ये रात फिर न आएगी
जवानी बीत जाएगी
जवानी बीत जाएगी
ये रात फिर न आएगी
जवानी बीत जाएगी
जवानी बीत जाएगी

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