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Mar 10, 2018

आज सजन मोहे अंग लगा लो-प्यासा १९५७

हिंदी सिनेमा इतिहास में निवेदन गीत बहुत से बने हैं जिनमें से एक
उल्लेखनीय गीत है-आती क्या खंडाला. आज के दौर में इससे भी आगे
बढे हुए गीत बन चुके हैं.

हम चूंकि घिसे पिटे जून पुराने अंदाज़ वाले हैं इसलिए हमें काले पीले
दौर के गाने ज्यादा सुहाते हैं. एक उत्कृष्ट(इस शब्द का काफी दिन से
प्रयोग नहीं किया है) कोटि का गीत श्रवणते हैं चलचित्र प्यासा से. इस
चलचित्र के प्रमुख पात्रों को आप पहचानते है अतः नाम पुनः छापने में
कोई अर्थ नहीं.

साहित्यिक गीत सामने आते ही हमें वो सब याद आने लगता है-बीती
विभावरी जाग री, चारु चंद्र की चंचल किरणें, वो तोडती पत्थर के
साथ साथ चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदी के चम्मच से वेज
सूप पिलाया.



गीत के बोल:

सखी री बिरहा के दुखड़े सह सह कर
जब राधे बेसुध हो ली
तो इक दिन अपने मनमोहन से जा कर यूँ बोली

आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
हृदय की पीड़ा देह की अग्नि
सब शीतल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये

करूं लाख जतन मोरे मन की तपन
मोरे तन की जलन नहीं जाये
करूं लाख जतन मोरे मन की तपन
मोरे तन की जलन नहीं जाये
कैसी लागी ये लगन कैसी जागी ये अगन
कैसी लागी ये लगन कैसी जागी ये अगन
जिया धीर धरन नहीं पाये
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया साँवरिया
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो जग जल थल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये

मोहे अपना बना लो मेरी बाँह पकड़
मैं हूँ जनम जनम की दासी
मोहे अपना बना लो मेरी बाँह पकड़
मैं हूँ जनम जनम की दासी
मेरी प्यास बुझा दो मनहर गिरिधर प्यास बुझा दो
मनहर गिरिधर प्यास बुझा दो
मनहर गिरिधर मैं हूँ अन्तर्घट तक प्यासी
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया साँवरिया
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो जग जल थल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये

कई जुग से हैं जागे मोरे नैन अभागे
कई जुग से हैं जागे मोरे नैन अभागे
कहीं जिया नहीं लागे बिन तोरे
सुख देखे नहीं आगे
सुख देखे नहीं आगे
दुःख पीछे पीछे भागे
जग सूना सूना लागे बिन तोरे
प्रेम सुधा मोरे साँवरिया साँवरिया
प्रेम सुधा इतनी बरसा दो जग जल थल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
हृदय की पीड़ा देह की अग्नि
सब शीतल हो जाये
आज सजन मोहे अंग लगा लो
जनम सफ़ल हो जाये
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Aaj sajan mohe ang laga lo-Pyasa 1957

Artist: Waheeda Rehman, Guru Dutt

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Apr 13, 2017

जिन्हें नाज़ है हिन्द पर-प्यासा १९५७

विचारों को झंझोड़ने वाला गीत फिल्म प्यासा से. सुबह
के नाश्ते के अवसर पर इसे सुन लीजिए, पाचन क्रिया
दुरुस्त हो जायेगी.

रफ़ी के गाये गीत की धुन तैयार की है एस डी बर्मन
ने. बोल साहिर के हैं.



गीत के बोल:

ये कूचे  ये नीलामघर दिलकशी के
ये लुटते हुए कारवाँ ज़िन्दगी के
कहाँ हैं  कहाँ है  मुहाफ़िज़ ख़ुदी के
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

ये पुरपेच गलियाँ  ये बदनाम बाज़ार
ये ग़ुमनाम राही  ये सिक्कों की झंकार
ये इस्मत के सौदे  ये सौदों पे तकरार
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

ये सदियों से बेख्वाब  सहमी सी गलियाँ
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियाँ
ये बिकती हुई खोखली रंगरलियाँ
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

वो उजले दरीचों में पायल की छन छन
थकी-हारी साँसों पे तबले की धन धन
ये बेरूह कमरों में खाँसी की ठन ठन
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

ये फूलों के गजरे  ये पीकों के छींटे
ये बेबाक नज़रें  ये गुस्ताख फ़िकरे
ये ढलके बदन और ये बीमार चेहरे
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

यहाँ पीर भी आ चुके हैं  जवाँ भी
तनोमंद बेटे भी  अब्बा  मियाँ भी
ये बीवी भी है और बहन भी है  माँ भी
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

मदद चाहती है ये हौवा की बेटी
यशोदा की हमजिंस  राधा की बेटी
पयम्बर की उम्मत  ज़ुलयखां की बेटी
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं

ज़रा मुल्क के रहबरों को बुलाओ
ये कूचे  ये गलियाँ  ये मंजर दिखाओ
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर उनको लाओ
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं
………………………………………………….
Jinhen naaz hai Hind par-Pyasa 1957

Artist: Guru Dutt

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Aug 16, 2016

हम आपकी आँखों में-प्यासा १९५७

फिल्म:प्यासा
वर्ष:१९५७
गीतकार:साहिर लुधियानवी
गायक: रफ़ी, गीता दत्त
संगीतकार; सचिन देव बर्मन

सवाल जवाब जैसा ये गीत अनूठा है. आपने गर इसे ध्यान से
सुना हो तो पाएंगे इसमें कुछ अलग हट के वार्तालाप हो रहा
है. गुदगुदाने वाला गीत है ये.



गीत के बोल:


हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो
हम मूँद के पलकों को इस दिल को सज़ा दें तो
हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो

इन ज़ुल्फ़ों में गूँथेंगे हम फूल मुहब्बत के
ज़ुल्फ़ों को झटक कर हम ये फूल गिरा दें तो
इन ज़ुल्फ़ों में गूँथेंगे हम फूल मुहब्बत के
ज़ुल्फ़ों को झटक कर हम ये फूल गिरा दें तो
हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो

हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा हा

हम आपको ख्वाबों में ला ला के सतायेंगे
हम आपकी आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो
हम आपको ख्वाबों में ला ला के सतायेंगे
हम आपकी आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो
हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो

हम आपके कदमों पर गिर जायेंगे ग़श खा कर
इस पर भी न हम अपने आंचल की हवा दें तो
हम आपके कदमों पर गिर जायेंगे ग़श खा कर
इस पर भी न हम अपने आंचल की हवा दें तो

हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो
हम मूँद के पलकों को इस दिल को सज़ा दें तो
हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो
हम मूँद के पलकों को इस दिल को सज़ा दें तो
हम आपकी आँखों में इस दिल को बसा दें तो
..................................................................................
Ham aapki ankhon mein-Pyasa 1957

Artists:Guru Dutt, Mala Sinha

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Nov 13, 2010

सर जो तेरा चकराए-प्यासा १९५७

ये गीत है एक क्लासिक फिल्म से। गुरु दत्त की लगभग
सारी फिल्मों को क्लासिक का दर्जा प्राप्त है। प्यासा फिल्म
को महान फिल्म का दर्ज़ा प्राप्त है। इस फिल्म के गीत साहिर
के लिखे हुए हैं और संगीत है सचिन देव बर्मन का। ये गीत
फिल्म के कुछ खुशनुमा हिस्सों में से एक है। फिल्म में एक
गीत गीता दत्त का भी है जो हलके फुल्के मूड में गाया गया है
इसके अलावा अधिकाँश मसाला फिल्म में गंभीर किस्म का है ।
धुन के बारे में कहा जाता है की ये एस. डी. पुत्र पंचम द्वारा बनाई
गई थी। अब बहुत सारे लोग कहते हैं तो हम भी मान लेते हैं । धुन
भले ही पंचम की हो मगर इसकी फिनिशिंग बड़े बर्मन साहब की
ही है। गायक हैं रफ़ी और परदे पर होंठ हिलाने वाले कलाकार हैं
जॉनी वाकर । 'तेल मालिश' और 'चम्पी' को बड़े परदे पर ला के
उसकी शान बधाई गई है इसके लिए फिल्म के निर्देशक बधाई के
पात्र हैं। जॉनी वाकर ने अपनी सौम्य हास्य अदाओं से इस
गीत को अमर बना दिया है।



गीत के बोल:

मालिश, तेल मालिश, चम्पी

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये
मालिश, तेल मालिश
सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये

तेल मेरा है मुश्की, गंज रहे ना खुश्की
जिस के सर पर हाथ फिरा दूं चमके किस्मत उसकी
तेल मेरा है मुश्की, गंज रहे ना खुश्की
जिस के सर पर हाथ फिरा दूं चमके किस्मत उसकी
सुन सुन सुन, अरे बेटा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
सुन सुन सुन, अरे बेटा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ ना आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये

प्यार का होवे झगडा, या बिज़नस का हो रगडा
सब लफड़ों का बोझ हटे जब पड़े हाथ इक तगड़ा
प्यार का होवे झगडा, या बिज़नस का हो रगडा
सब लफड़ों का बोझ हटे जब पड़े हाथ इक तगड़ा
सुन सुन सुन, अरे बाबू सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
सुन सुन सुन, अरे बाबू सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ ना आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये

नौकर हो या मालिक, लीडर हो या पब्लिक
अपने आगे सभी झुके हैं, क्या राजा क्या सैनिक
नौकर हो या मालिक, लीडर हो या पब्लिक
अपने आगे सभी झुके हैं, क्या राजा क्या सैनिक
सुन सुन सुन, अरे राजा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
सुन सुन सुन, अरे राजा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ ना आजमाए
काहे घबराए, काहे घबराए

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये

मुश्की-मुश्क अर्थात् कस्तूरी के रंग का। काला। श्याम

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