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May 19, 2016

कोई दूर से आवाज़ दे-साहब बीबी और गुलाम १९६२

गीता दत्त की गायकी लाजवाब है और उनकी आवाज़ की आज तक
कोई डुप्लिकेट आवाज़ नहीं सुनने को मिली. डुप्लिकेट से मतलब
क्लोन से है. थोड़ी बहुत मीना कपूर की आवाज़ उनकी आवाज़ के
नज़दीक सुनाई देती थी, बस. इसके अलावा कोई भी महिला गायिका
उनकी गायकी के अंदाज़ के निकट नहीं पहुँच पाई.

प्रस्तुत गीत एक माइलस्टोन सॉंग है. फिल्म साहब बीवी और गुलाम
का ये गीत बेहतरीन दर्दीले गीतों में शामिल है. असहाय और कातर
से स्वर में नायिका पुकार रही है जिसका कि पुकारे जाने वाले पर
कोई असर नहीं हो रहा फिल्म में.

फिल्म से ये पांचवा गीत है ब्लॉग पर. इसके पहले आपको गीता के
गाये दो गीत और आशा के गाये दो गीत सुनवाए जा चुके हैं.



गीत के बोल:

जिया बुझा-बुझा  नैना थके-थके
पिया धीरे-धीरे चले आओ
कोई दूर से आवाज़ दे, चले आओ

रात-रात भर इंतज़ार है
दिल दर्द से बेकरार है
साजन इतना तो ना तड़पाओ
चले आओ
कोई दूर से आवाज़ दे, चले आओ

आस तोड़ ,के मुख मोड़ के
क्या पाओगे साथ छोड़ के
बिरहन को अब यूँ ना तरसाओ,
चले आओ
कोई दूर से आवाज़ दे, चले आओ
....................................................................................
Koi door se awaaz de chale aao-Sahib Biwi aur Ghulam 1962

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Dec 26, 2015

मिली ख़ाक में मोहब्बत-चौदहवीं का चाँद १९६०

आज आपको सुनवाते हैं रफ़ी का गाया एक शानदार दर्दीला
गीत. ये फिल्म चौदहवीं का चाँद से है. एक टूटे हुए दिल
से कैसी कैसी आवाजें और भाव निकलते हैं इस गीत के
द्वारा समझा जा सकता है.

ये शानदार गीत लिखा है शकील बदायूंनी ने और इसका
संगीत तैयार किया है रवि ने. इसे गुरु दत्त पर फिल्माया
गया है जिसके चलते ये गीत और भी ज्यादा दुखदायी सा
प्रतीत होने लगता है. गुरु दत्त की छबि कुछ ऐसी बन गयी
थी-ट्रेजडी वाली.

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म कागज के फूल की असफलता के
बाद चौदहवीं का चाँद एक व्यावसायिक रूप से सफल फिल्म
थी जिसने गुरु दत्त प्रोडक्शंस को उबार लिया.





गीत के बोल:


मिली ख़ाक में मोहब्बत जला दिल का आशियाना
मिली ख़ाक में मोहब्बत जला दिल का आशियाना
जो थी आज तक हकीकत वही बन गयी फ़साना

मिली ख़ाक में मोहब्बत जला दिल का आशियाना

ये बहार कैसी आई जो फिजा भी साथ लाई
ये बहार कैसी आई जो फिजा भी साथ लाई
मैं कहाँ रहूँ चमन में मेरा लुट गया ठिकाना

मिली ख़ाक में मोहब्बत जला दिल का आशियाना

मुझे रास्ता दिखा कर मेरे कारवां को लूटा
मुझे रास्ता दिखा कर मेरे कारवां को लूटा
इधर आ गले लगा लूं तुझे गर्दिश-ए-ज़माना

मिली ख़ाक में मोहब्बत जला दिल का आशियाना
जो थी आज तक हकीकत वही बन गयी फ़साना
मिली ख़ाक में मोहब्बत
……………………………………………………….
Mili khaak mein mohabbat-Chaudvin ka chand 1960

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Aug 12, 2015

कभी आर कभी पार लागा-आर पार १९५४

संगीतकारओ पी नैय्यर ने जितना भी संगीत दिया वो कर्णप्रिय की श्रेणी
में आता है. उनका नाम आते ही एक शब्द दिमाग में आता है-melody.
इस शब्द का इस्तेमाल लगभग सभी सयाने समीक्षकों ने उनके संगीत पर
बात करते समय इस्तेमाल किया है. मेलोडी का हिंदी अर्थ है-स्वरमाधुर्य.
क्या कर्णप्रियता और स्वर्माधुर्य अलग अलग पैरामीटर हैं? थोडा सा फर्क
है. कर्णप्रिय कोई भी चीज़ हो सकती है किसी व्यक्ति विशेष के लिए, हर
व्यक्ति का कर्णप्रियता का एक पैमाना होता है.

प्रस्तुत गीत फिल्म आर पार से है और फिल्म का शीर्षक गीत है. फिल्म
में गुरु दत्त, श्यामा, शकीला और जॉनी वॉकर प्रमुख कलाकार हैं. यह एक
हलकी फुलकी हास्य फिल्म है ये. इसके गीत अपने समय में लोगों की
जुबान पर चढ के बोले थे. फिल्म का निर्माण और निर्देशन गुरु दत्त ने ही
किया था. प्रसिद्ध कैमरामेन वी के मूर्ती फिल्म के छायाकार हैं.

मजरूह सुल्तानपुरी फिल्म के गीतकार हैं और मजरूह ने नैय्यर के साथ
शुरू के दौर की फिल्मों में काफी गीत लिखे. यह जोड़ी सुपरहिट थी उस
समय. बाद में नैय्यर को एश एच बिहारी की सेवाएं भी मिलनी शुरू हो
गयीं और मजरूह का ज्यादा समय दोनों बर्मन और लक्ष्मी प्यारे के लिए
गीत लिखने में व्यतीत हुआ. वे वो दौर था फिल्म संगीत का जब गाने के
बोल गुणवत्ता के मामले में सर्वश्रेष्ठ हुआ करते थे और एक गीत बनाने में
घंटों, कभी कभी कई दिनों की मेहनत होती थी. गायक से भी काफी पापड
बिलवा लिए जाते थे गायन में.

प्रस्तुत गीत शमशाद बेगम द्वारा गाया गया फिल्म का एकमात्र गीत है मगर
इसने प्रसिद्धि में अपना स्थान आसानी से बना लिया, यही है शमशाद बेगम
की आवाज़ का दम. आवाज़ की स्पष्टता और सधी हुई गायकी की बात होगी
तब तब हम शमशाद बेगम को याद करेंगे. उनकी आवाज़ में एक अलग किस्म
का आकर्षण था.




गीत के बोल:

कभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नज़र
सैंया घायल किया रे तूने मोरा जिगर
कभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नज़र
सैंया घायल किया रे तूने मोरा जिगर

कितना संभाला बैरी, दो नैनों में खो गया
देखती रह गयी मैं तो, जिया तेरा हो गया
दर्द मिला ये जीवन भर का
मारा ऐसा तीर नज़र का
लूटा चैन क़रार

कभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नज़र
सैंया घायल किया रे तूने मोरा जिगर

पहले मिलन में ये तो दुनियाँ की रीत है
बात में गुस्सा लेकिन दिल ही दिल में प्रीत है
मन ही मन में लड्डू फूटे
नैनों से फुलझड़ियाँ छूटे
होंठों पर तक़रार

कभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नज़र
सैंया घायल किया रे तूने मोरा जिगर
………………………………………………………………….
Kabhi aar kabhi paar-Aar paar 1954

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Jun 7, 2011

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो-सुहागन १९६४

फिल्म सुहागन(१९६४) से आपको पूर्व में २ गीत सुनवा चुके हैं।
अब सुनिए फिल्म का तीसरा गीत जो कि लता और तलत
की आवाज़ में एक युगल गीत है। इस फिल्म का एक युगल गीत
जो आपने पहले सुना था वो मन्ना डे और लता की आवाज़ में है।
६० के दशक के आते तलत महमूद को फिल्मों में गीत मिलना
कम हो गये। बदलते ज़माने और पसंद के साथ दूसरे गायक दृश्य
में दिखाई देने लगे। दूसरे संगीतकार जहाँ उनसे किनारा करने लगे,
मदन मोहन ने उन्हें कुछ गीत अवश्य दिए गाने को. मदन मोहन
ने तलत महमूद को फिल्म जहाँआरा में भी अवसर दिए।






गीत के बोल:


तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
तुम्हें दिल में बसाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
हाँ हाँ हाँ हाँ आ आ आ आ
तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हें दिल से लगाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

इबादत है निगाहों की तुझी को देखते रहना
तेरी हर बात को सहना
तुम्हीं तो मेरे साथी हो तुम्हें अपना बनाया है

तुम्हीं तो मेरी पूजा हो

तमन्ना है इन आँखों की तुम्हारे ही नज़ारे हों
जहाँ देखूँ तुम्हें देखूँ हसीं जलवे तुम्हारे हों
हसीं जलवे तुम्हारे हों
तुम्हीं ने मेरी मंज़िल को बहारों से सजाया है

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो

तुम्हारे हाथ में है अब हमारी लाज का आँचल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
न बह जाए कहीं देखो हमारी आँख का काजल
हमारी आंख का काजल

तुम्हीं तो मेरी दुनिया हो
तुम्हीं तो मेरी पूजा हो
......................................
Tumhin to meri pooja ho-Suhagan 1964

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Jun 5, 2011

तू मेरे सामने है-सुहागन १९६४

आइये आपको एक रोमांटिक गीत सुनवाते हैं। ये असली छाया गीत
है, श्वेत श्याम युग का और इसमें भाव भंगिमाएं भी कुछ श्याम
वर्ण सी हैं । गीत की सिचुएशन कुछ विरोधाभासी किस्म की सी है।
नायक रोमांटिक मूड में है और नायिका बेबस और लाचार सी दिखती
है। नायक हैं गुरुदत्त और नायिका माला सिन्हा।

नायक न्यूनतम और दृढ़ प्रतिज्ञ से भावों के साथ गीत गा रहा है
और नायिका अपनी पूरी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर रही है और
काफी ज़द्दो ज़हद के बाद आखिरकार समर्पण वाली मुद्रा में आ जाती
है। मदन मोहन के साथ हसरत जयपुरी ने बहुत कम फिल्मों में गीतों
पर काम किया है। इस गीत के लिए तो मानना पड़ेगा कि हसरत जयपुरी
का रोमांटिक गीतों को लिखने के मामले में कोई सानी नहीं। गीत में
संगीत कहीं कहीं लाऊड हो जाता है, इसको मदन मोहन भक्तों की भाषा
में बोलें तो-इतना तो चलता है गाने में.



गीत के बोल :

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होंठ लरजते हुए मैखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तू जो हँसती है तो बिजली सी चमक जाती है
तेरी साँसों से ग़ुलाबों की महक आती है
तू जो चलती है तो कुदरत भी बहक जाती है
मैं भला होश में कैसे रहूँ, कैसे रहूँ

तू मेरे सामने है
तेरी जुल्फें हैं खुली
तेरा आँचल है ढला
मैं भला होश में कैसे रहूँ

................................
Too mere samne hai-Suhagan 1964

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Nov 13, 2010

सर जो तेरा चकराए-प्यासा १९५७

ये गीत है एक क्लासिक फिल्म से। गुरु दत्त की लगभग
सारी फिल्मों को क्लासिक का दर्जा प्राप्त है। प्यासा फिल्म
को महान फिल्म का दर्ज़ा प्राप्त है। इस फिल्म के गीत साहिर
के लिखे हुए हैं और संगीत है सचिन देव बर्मन का। ये गीत
फिल्म के कुछ खुशनुमा हिस्सों में से एक है। फिल्म में एक
गीत गीता दत्त का भी है जो हलके फुल्के मूड में गाया गया है
इसके अलावा अधिकाँश मसाला फिल्म में गंभीर किस्म का है ।
धुन के बारे में कहा जाता है की ये एस. डी. पुत्र पंचम द्वारा बनाई
गई थी। अब बहुत सारे लोग कहते हैं तो हम भी मान लेते हैं । धुन
भले ही पंचम की हो मगर इसकी फिनिशिंग बड़े बर्मन साहब की
ही है। गायक हैं रफ़ी और परदे पर होंठ हिलाने वाले कलाकार हैं
जॉनी वाकर । 'तेल मालिश' और 'चम्पी' को बड़े परदे पर ला के
उसकी शान बधाई गई है इसके लिए फिल्म के निर्देशक बधाई के
पात्र हैं। जॉनी वाकर ने अपनी सौम्य हास्य अदाओं से इस
गीत को अमर बना दिया है।



गीत के बोल:

मालिश, तेल मालिश, चम्पी

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये
मालिश, तेल मालिश
सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये

तेल मेरा है मुश्की, गंज रहे ना खुश्की
जिस के सर पर हाथ फिरा दूं चमके किस्मत उसकी
तेल मेरा है मुश्की, गंज रहे ना खुश्की
जिस के सर पर हाथ फिरा दूं चमके किस्मत उसकी
सुन सुन सुन, अरे बेटा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
सुन सुन सुन, अरे बेटा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ ना आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये

प्यार का होवे झगडा, या बिज़नस का हो रगडा
सब लफड़ों का बोझ हटे जब पड़े हाथ इक तगड़ा
प्यार का होवे झगडा, या बिज़नस का हो रगडा
सब लफड़ों का बोझ हटे जब पड़े हाथ इक तगड़ा
सुन सुन सुन, अरे बाबू सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
सुन सुन सुन, अरे बाबू सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ ना आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये, काहे घबराये

नौकर हो या मालिक, लीडर हो या पब्लिक
अपने आगे सभी झुके हैं, क्या राजा क्या सैनिक
नौकर हो या मालिक, लीडर हो या पब्लिक
अपने आगे सभी झुके हैं, क्या राजा क्या सैनिक
सुन सुन सुन, अरे राजा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
सुन सुन सुन, अरे राजा सुन, इस चम्पी में बड़े बड़े गुण
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ ना आजमाए
काहे घबराए, काहे घबराए

सर जो तेरा चकराए, या दिल डूबा जाए
आ जा प्यारे पास हमारे, काहे घबराये

मुश्की-मुश्क अर्थात् कस्तूरी के रंग का। काला। श्याम

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Oct 6, 2009

चौदहवी का चाँद हो-चौदहवी का चाँद

मजमूँ ये है कि हीरो एक निहायत ही रोमांटिक गाना गाता है
और उसे सुनकर सोती हुई अभिनेत्री उठ जाती है और कुछ
घबराती है, कुछ शर्माती है। अब अकस्मात तारीफों की बौछार
पड़ेगी तो किसी के भी साथ यही होगा। इस गाने में वहीदा रहमान
को सुंदर दिखने में कोई कसार नहीं छोड़ी गई है। इस गाने को
आसानी से सर्वकालीन कसीदाकारी वाले गानों में शामिल
किया जा सकता है। नए प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए अच्छा ट्युटोरियल
है ये -तारीफ़ कैसे की जाए !



गाने के बोल:

चौदहवी का चाँद हो या आफ़ताब हो
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो

चौदहवी का चाँद हो..

जुल्फे हैं जैसे कांधों पे बादल झुके हुए
जुल्फे हैं जैसे कांधों पे बादल झुके हुए
ऑंखें हैं जैसे मय के प्याले भरे हुए

मस्ती है जिसमे प्यार की तुम वो शराब हो

चौदहवी का चाँद हो या आफ़ताब हो
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो

चौदहवी का चाँद हो..

चेहरा है जैसे झील में हँसता हुआ कमल
चेहरा है जैसे झील में हँसता हुआ कमल
या ज़िन्दगी के साज़ पे छेड़ी हुई ग़ज़ल

जाने-बहार तुम किसी शायर का ख्वाब हो

चौदहवी का चाँद हो या आफ़ताब हो
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो

चौदहवी का चाँद हो

होंठों पे खेलती है तबस्सुम की बिजलियाँ
होंठों पे खेलती है तबस्सुम की बिजलियाँ

सजदे तुम्हारी राह में करती है कहकशां
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क का तुम ही शबाब हो।

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