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Aug 12, 2016

सोचता हूँ के तुम्हें मैंने-राज़ १९६७

अंदाज़-ए-बयां बदल जाए तो गीत कभी कभी खूबसूरत बन
जाता है. इस गीत के तो बोल भी खूबसूरत हैं. रफ़ी और
कृष्ण कल्ले का गाया ये युगल गीत है फिल्म राज़ से. रफ़ी
की दरियादिली के बदौलत हमें प्रमुख गायिकाओं के अलावा
भी कई ऐसे अनमोल गीत सुनने को मिले जिसमें दूसरी
कम लोकप्रिय गायिकाओं के साथ उन्होंने गाया. ऐसे कई
नायाब रत्न छुपे हुए हैं हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में.

सुनने और देखने के लिए पढते रहिये नियमित रूप से यह
ब्लॉग.

गीत लिखा है अख्तर रोमानी ने और इसकी धुन बनाई है
कल्याणजी आनंदजी ने. नायक नायिका को आप पहचान
ही जायेंगे. ना पहचान पायें तो विवरण देख लें.

गीत कि विशेषता है ये एक कविता पाठ की तरह गतिमान
है और इसमें शुएऊ के दो शब्द और आखिरी पंक्ति को छोड़
कर कहीं भी दोहराव नहीं है.




गीत के बोल:

क्या सोच रहे हो तुम
कुछ नहीं
कुछ नहीं ?
सोचता हूँ के तुम्हें मैंने कहीं देखा है
याद करता हूँ मगर याद नहीं आता है

मेरे हमराज़ मुझे तुमने वहीँ देखा है
दिल जहाँ होश में रह कर भी बहक जाता है

जाने क्या बात है हम जब भी मिला करते हैं
दिल में चुपके से कोई चोट ऊभर आती है
दिल से दिल मिलते हैं अफ़साने बिना करते हैं
और तकदीर मोहब्बत की संवर जाती है

अपने चेहरे पे मेरे ख्वाब-ए-परेशां की तरह
आज इन रेशमी जुल्फों को मचल जाने दो
दिल में उठते हुए जज़्बात के तूफानों की तरह
आज हर ख्वाब हकीकत में बदल जाने दो

वो जो एहसास था हल्का सा के तुम गैर नहीं
आज वो एक यकीन बनता सा नज़र आता है
खो दिया जो कभी याद की सूरत में कहीं
आज वो प्यार मुझे मिलता नज़र आता है
आज वो प्यार मुझे मिलता नज़र आता है
...............................................................
Sochta hoon ke tumhen-Raaz 1967

Artists: Rajesh Khanna, Babita

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Dec 25, 2011

अकेले हैं चले आओ जहाँ(रफ़ी)-राज़ १९६७

लोकप्रिय दर्द भरा गीत है ये फिल्म राज़ से. रफ़ी
की आवाज़ वाला गीत जिसे शमीम जयपुरी ने लिखा
है राजेश खन्ना पर फिल्माया गया है. हरियाली से
भरपूर दृश्यों से भरपूर है ये गीत.

हरियाली के बीच यूँ तो खुशनुमा और रोमांटिक गीत
ज्यादा फिल्माए जाते हैं या फिलोसॉफी से लबरेज़. ये
उस लिहाज से कुछ अलग है. ८० के दशक की फिल्म
प्यार झुकता नहीं में भी एक दर्द भरा गीत वादियों
में फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं चले आओ जहाँ हो

तुम्हें हम ढूँढते हैं हमें दिल ढूँढता है
तुम्हें हम ढूँढते हैं हमें दिल ढूँढता है
न अब मंज़िल है कोई न कोई रास्ता है

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं

ये तन्हाई का आलम और इस पर आपका ग़म
ये तन्हाई का आलम और इस पर आपका ग़म
न जीते हैं न मरते बताओ क्या करें हम

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं
……………………………………..
Akele hain chale aao(Rafi)-Raaz 1967

Artist: Rajesh Khanna

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Dec 1, 2011

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो(लता)-राज़ १९६७

हिंदी सिनेमा ने एक से बढ़ कर एक खूबसूरत चेहरे देखे
और दिखाए जनता को. इन्हीं में से एक हैं बबीता. मोहक
मुस्कान की स्वामिनी बबीता को हमने रुदन क्रंदन वाले
दृश्यों में कम देखा है.

आज सुनते हैं फिल्म राज़ से ये लोकप्रिय गीत जिसे लिखा
है शमीम जयपुरी ने. कल्याणजी आनंदजी की ट्यून पर
लता मंगेशकर ने इसे गाया है.

गीत में तलाश जारी है नायक की.



गीत के बोल:

चले आओ चले आओ चले आओ
अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं चले आओ जहाँ हो

ये मौसम और ये नज़ारे ये चाँद और ये सितारे
ये मौसम और ये नज़ारे ये चाँद और ये सितारे
सभी हैं आज लेकिन नहीं मेरे सहारे

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं

मेरी आँखों में आंसू मेरे लब पे हैं आहें
मेरी आँखों में आंसू मेरे लब पे हैं आहें
तुम्हीं को ढूंढती हैं मेरी वीरान निगाहें

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं

तरसती हूँ मैं जिनको वो दिन आ के रहेंगे
तरसती हूँ मैं जिनको वो दिन आ के रहेंगे
मुझे उम्मीद है ये तुम्हें पा कर रहेंगे

अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
कहाँ आवाज़ दें तुमको कहाँ हो
अकेले हैं चले आओ जहाँ हो
………………………………………………..
Akele hain chale aao(Lata)-Raaz 1967

Artist: Babita

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Nov 30, 2011

दिल संभाले संभलता नहीं-राज़ १९६७

रोमांस और प्रेम खास अवयय हैं फ़िल्मी कथानक के.
मालूम नहीं आर्ट फिल्म वालों के ये बात क्यूँ नहीं
समझ आती कि आर्ट प्रेमौर रोमांस में भी हो सकता
है. आर्ट फिल्मों के नायक को दांत घिसते हुए तो
दिखा लेंगे मगर पप्पी झप्पी से परहेज. गुड़ खाओ और
गुलगुले से परहेज?

सुनते हैं फिल्म राज़ से एक मधुर युगल गीत जिसे
खेत और हरियल के बीच फिल्माया गया है. एक
बार फिर से गुलाबी लिपस्टिक ने कहर मचाया है.

राजेश खन्ना और बबीता पर फिल्माए गए इस गीत
के रचयिता हैं गुलशन बावरा और मोहक धुन तैयार
करने वाले हैं कल्याणजी आनंदजी. 

नायक और नायिका दोनों के परिधान सफ़ेद रंग के
हैं. सफ़ेद रंग शुद्धता, सफाई और सादगी का प्रतीक है.
रंग जो हैं वो केवल नायिका के स्वेटर और आसपास
के वातावरण में हैं. 



गीत के बोल:

दिल संभाले संभलता नहीं आज तो
दिल संभाले संभलता नहीं आज तो
पास आने की दे दो इजाज़त हमें
पास आने की दे दो इजाज़त हमें

देखिए ये हसीं शाम ढलने को है
देखिए ये हसीं शाम ढलने को है
अब तो जाने की दे दो इजाज़त हमें
अब तो जाने की दे दो इजाज़त हमें
देखिए ये हसीं शाम ढलने को है

कैसे कह दें के जाओ इन आँखों से अब
तुमको जाते हुए देखा जाता नहीं
कैसे कह दें के जाओ इन आँखों से अब
तुमको जाते हुए देखा जाता नहीं
हम भी मजबूर हैं वरना जाने का तो
ये ख़्याल अपने दिल में भी आता नहीं
ये ख़्याल अपने दिल में भी आता नहीं

झील सी अपनी आँखों में पहले ज़रा
झील सी अपनी आँखों में पहले ज़रा
डूब जाने की दे दो इजाज़त हमें
अब तो जाने की दे दो इजाज़त हमें
देखिए ये हसीं शाम ढलने को है

डाल दी तुमने आँखों में आँखें अगर
जाने फिर कब सनम आयें हम होश में
डाल दी तुमने आँखों में आँखें अगर
जाने फिर कब सनम आयें हम होश में

ज़िन्दगी भर हमें साथ रहना है अब
हम रहेंगे मोहब्बत के आग़ोश में
हम रहेंगे मोहब्बत के आग़ोश में

क्या बताएँ हमें डर ज़माने का है
क्या बताएँ हमें डर ज़माने का है
इस ज़माने की ले दो इजाज़त हमें
पास आने की दे दो इजाज़त हमें
देखिए ये हसीं शाम ढलने को है
………………………………………………..
Dil sambhaale sambhalta nahin-Raaz 1967

Artists: Rajesh Khanna, Babita

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