Showing posts with label Krishna Kalle. Show all posts
Showing posts with label Krishna Kalle. Show all posts

Nov 8, 2019

दिल में ले के प्यारे-सखी लुटेरा १९६२

६० के दशक में ऐसी काफी फ़िल्में आयीं जिनके
नाम में सखी शब्द जुड़ा होता. १९६२ की फिल्म है
सखी लुटेरा जिसका निर्देशन रुस्तम बी ईरानी ने
किया. इसमें आज़ाद ईरानी, हरक्यूलिस और
शकीला बानो भोपाली संग तबस्सुम प्रमुख कलाकार
हैं.
   
गीत संगीत और इसे गाने वाले सभी कम पहचाने
लोग हैं सिवाय कृष्ण कल्ले के. बी एन बाली इसके
संगीतकार हैं. गीत लिखा है अज़ीज़ गाजी ने और
इसे कृष्ण कल्ले संग उषा बलसावर ने गाया है.
गीत गाने वाली दूसरी चार उषाएं हैं-उषा खन्ना,
उषा टिमोथी, उषा मंगेशकर और उषा उथुप. आपको
और कोई ध्यान आ रही हो तो कमेन्ट बॉक्स में
अवश्य लिखें.

गीत के शुरू में आँख मारो कार्यक्रम बड़ी सहजता
से हो रहा है. इसमें कौन कौन कलाकार हैं आपको
मालूम चले तो हमें भी बतलायें. इसमें आज़ाद और
हरक्यूलिस मौजूद हैं बाकियों को आप पहचानिये.




गीत के बोल:

दिल में ले के प्यारे देख लो नज़र भर के
होय देख लो नज़र भर के
अजी हम तो हैं दिलदार तेरे जाने पहचाने
अजी हम तो हैं दिलदार तेरे जाने पहचाने
देख लो नज़र भर के
हाय देख लो नज़र भर के

ऐ सनम है अभी पहला कदम
राहे उल्फत में सनम है अभी पहला कदम
ऐसे देखो न हमें हो
ऐसे देखो न हमें लागे हमको शरम
लागे है शरम
हाथ में ले लो हाथ करो ना कोई बहन
देख लो नज़र भर के हाय
देख लो नज़र भर के

हमने तो प्यार किया दिल का व्यापार किया
हमने तो प्यार किया दिल का व्यापार किया
हमें ओ ओ ओ ओ
हमें फिर ना ये कहना हमें दिल का दर्द दिया
दर्द दिया
ओए लूट ले जायेंगे तेरा दिल अनजाने
होए लूट ले जायेंगे तेरा दिल अनजाने
देख लो नज़र भर के

आज हंस लो जी दिलवर कल की है किसको खबर
आज हंस लो जी दिलवर कल की है किसको खबर

फिर मिलेंगे हो ओ ओ ओ
फिर मिले ना मिलें आ जा दीवाने
आ जा दीवाने
लिखा हुआ क्या किस्मत में ये कोई ना जाने
ओए लिखा हुआ क्या किस्मत में ये कोई ना जाने
देख लो नज़र भर के
…………………………………………………
Dil mein le ke pyare-Sakhi Lutera 1962

Artists:

Read more...

Aug 29, 2019

राजा जानी ना मारो नैनवा के तीर-संसार १९७१

सन १९७१ की फिल्म संसार में ‘बस अब तरसना छोड़ो’ के अलावा
बहुत कुछ है. बाकायदा एक पूरी कहानी है जिसमें ढेर सारे पात्र हैं.
फिल्म में नवीन निश्चल और अनुपमा प्रमुख कलाकार हैं. अनुपमा
उन नवागंतुकों में से एक हैं जिन्होंने सिनेमा संसार में कदम तो
रखा मगर लंबी पारी नहीं खेल पायीं.

प्रस्तुत गीत कृष्णा कल्ले द्वारा गाया गया है. परदे पर इसे जयश्री
टी पर फिल्माया गया है. बोल साहिर लुधियानवी के हैं और इसका
संगीत तैयार किया है चित्रगुप्त ने. चित्रगुप्त और साहिर के कॉम्बो
वाले गीत फिल्म वासना में भी हैं. जयश्री पर फिल्माया गया इसी
प्रकार का एक गीत फिल्म सावन भादो(१९७०) में भी है.



गीत के बोल:

राजा जानी
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
तीर रे तीर रे
राजा जानी

अभी नादान हूँ मैं नाज़ुक जान हूँ
मुझे ऐसे ना मारो यूं ही हलकान हूँ
मुझे ऐसे ना मारो यूं ही हलकान हूँ
हाय तीखी तीखी नज़रों से देखो न सांवरिया
सह न सकूंगी अभी कच्ची है उमरिया
जी कच्ची है उमरिया
मारो ना कटारी दो धारी उठे पीर रे
राजा जानी हाय दिलबर जानी
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
राजा जानी

ज़बान के नर्म हो नज़र के गर्म हो
अरे जी तौबा तौबा
बड़े बेशर्म हो अरे जी तौबा तौबा
बड़े बेशर्म हो
हाय दिल तुम्हे सौंपा मैंने दिलदार मान के
बन गए तुम तो सैयां बैरी मेरी जान के
जी बैरी मेरी जान के
मारो ना कटारी दो धारी उठे पीर रे
राजा जानी दिलबर जानी

राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे
राजा जानी ना मारो नैननवा के तीर रे तीर रे तीर रे
राजा जानी
…………………………………………………………………….
Raja jani na maaro-Sansar 1971

Artist: Jayshri T.

Read more...

May 20, 2018

मै केसर कस्तूरी-छोटे सरकार १९७३

कृष्ण कल्ले एक गायिका हैं जिन्हें ७० और ८० के दशक में
कई फ़िल्मी गाने गाने का सुभाग्य प्राप्त हुआ. वैसे तो काले पीले
युग(ब्लेक एंड व्हाट का ज़माना) में भी उन्होंने कुछ गीत गाये
मदर सबसे ज्यादा काम उन्हें ७० के दशक में ही मिला.

लता मंगेशकर और आशा भोंसले के मौजूद रहते दूसरी गायिकाओं
को काम कम मिला करता था. उनकी अनुपलब्धता और व्यस्तता
के चलते भी कई बार दूसरी गायिकाओं को गाने मिले.

सुनते हैं छोटे सरकार से एक गीत जिसकी पहली पंक्ति में ही
केसर और कस्तूरी घुले हुए हैं. राजेंद्र कृष्ण ने इस गीत को लिखा
है और इसका संगीत शंकर जयकिशन की देन है. गीत हेलन पर
फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

ला ला रा ला रा ला रा रा रा
मै केसर कस्तूरी मेरी सूरत के दीवानों
मेरी रंगत पर न जाओ मेरी खुशबू तो पहचानो
मै केसर कस्तूरी मेरी सूरत के दीवानों
मेरी रंगत पर न जाओ मेरी खुशबू तो पहचानो
मै केसर कस्तूरी

कहाँ कहाँ से आ जाते हैं रात के राही रंग ज़माने
जीते जिनकी भूल की ठोकर रोज की ताज़ा ठोकर खाने
कुछ जाने कुछ पहचाने और कुछ इनमें अनजाने
कुछ जाने कुछ पहचाने और कुछ इनमें अनजाने

मै केसर कस्तूरी मेरी सूरत के दीवानों
मेरी रंगत पर न जाओ मेरी खुशबू तो पहचानो
मै केसर कस्तूरी

आँख में झूठी रंगीनी है जीवन सबका फीका फीका
हर माथे पर लगा हुआ है गम के चन्दन का एक टीका
अपना अपना दर्द छुपाये चलते फिरते ये साये
अपना अपना दर्द छुपाये चलते फिरते ये साये

मै केसर कस्तूरी मेरी सूरत के दीवानों
मेरी रंगत पर न जाओ मेरी खुशबू तो पहचानो
मै केसर कस्तूरी

कदम कदम पर जिनके पीछे मायूसी के लगे है पहरे
हाथ मे लेकर वो पैमाने देख रहे हैं ख्वाब सुनहरे
पागल मन को यूँ बहलाए कदम कदम पर धोखा खायें
पागल मन को यूँ बहलाए कदम कदम पर धोखा खायें

मै केसर कस्तूरी मेरी सूरत के दीवानों
मेरी रंगत पर न जाओ मेरी खुशबू तो पहचानो
मै केसर कस्तूरी मेरी सूरत के दीवानों
मेरी रंगत पर न जाओ मेरी खुशबू तो पहचानो
मै केसर कस्तूरी
.............................................................................
Main kesar kasturi-Chhote sarkar 1973

Artist: Helen

Read more...

Aug 12, 2016

सोचता हूँ के तुम्हें मैंने-राज़ १९६७

अंदाज़-ए-बयां बदल जाए तो गीत कभी कभी खूबसूरत बन
जाता है. इस गीत के तो बोल भी खूबसूरत हैं. रफ़ी और
कृष्ण कल्ले का गाया ये युगल गीत है फिल्म राज़ से. रफ़ी
की दरियादिली के बदौलत हमें प्रमुख गायिकाओं के अलावा
भी कई ऐसे अनमोल गीत सुनने को मिले जिसमें दूसरी
कम लोकप्रिय गायिकाओं के साथ उन्होंने गाया. ऐसे कई
नायाब रत्न छुपे हुए हैं हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में.

सुनने और देखने के लिए पढते रहिये नियमित रूप से यह
ब्लॉग.

गीत लिखा है अख्तर रोमानी ने और इसकी धुन बनाई है
कल्याणजी आनंदजी ने. नायक नायिका को आप पहचान
ही जायेंगे. ना पहचान पायें तो विवरण देख लें.

गीत कि विशेषता है ये एक कविता पाठ की तरह गतिमान
है और इसमें शुएऊ के दो शब्द और आखिरी पंक्ति को छोड़
कर कहीं भी दोहराव नहीं है.




गीत के बोल:

क्या सोच रहे हो तुम
कुछ नहीं
कुछ नहीं ?
सोचता हूँ के तुम्हें मैंने कहीं देखा है
याद करता हूँ मगर याद नहीं आता है

मेरे हमराज़ मुझे तुमने वहीँ देखा है
दिल जहाँ होश में रह कर भी बहक जाता है

जाने क्या बात है हम जब भी मिला करते हैं
दिल में चुपके से कोई चोट ऊभर आती है
दिल से दिल मिलते हैं अफ़साने बिना करते हैं
और तकदीर मोहब्बत की संवर जाती है

अपने चेहरे पे मेरे ख्वाब-ए-परेशां की तरह
आज इन रेशमी जुल्फों को मचल जाने दो
दिल में उठते हुए जज़्बात के तूफानों की तरह
आज हर ख्वाब हकीकत में बदल जाने दो

वो जो एहसास था हल्का सा के तुम गैर नहीं
आज वो एक यकीन बनता सा नज़र आता है
खो दिया जो कभी याद की सूरत में कहीं
आज वो प्यार मुझे मिलता नज़र आता है
आज वो प्यार मुझे मिलता नज़र आता है
...............................................................
Sochta hoon ke tumhen-Raaz 1967

Artists: Rajesh Khanna, Babita

Read more...

Dec 15, 2009

मेरी हसरतों की दुनिया-गाल गुलाबी नैन शराबी - १९७३

१९७३ में जीवन पुत्र किरण कुमार बहुतेरी हिन्दी फिल्मों में
दिखाई दिए। प्रारब्ध में चर्चित जवानी नहीं थी सो अधेड़ आयु
में उनको यश एवं प्रसिद्धि प्राप्त हुए। फ़िल्म से एक गाना है जो
संगीत रसिकों को पसंद आया। मोहम्मद रफ़ी और कृष्णा कल्ले
ने इस युगल गीत को गाया है। एक संगीत प्रेमी ने मुंबई स्थित
रफ़ी चौक की फोटो लगा के इस गाने का ऑडियो यू ट्यूब पर डाला
है। गीत को एक गुमनाम से संगीतकार श्यामजी घनश्यामजी ने
संगीत से नवाज़ा है।

गीत  का वीडियो भी उपलब्ध है उसे देखिये। 



गीत के बोल:

मेरी हसरतों की दुनिया
तू मिले कहीं जो मुझको
सीने से लगा लूं तुझको

मेरी हसरतों कि दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया

तू मिले कहीं जो मुझको
सीने से लगा लूं तुझको

मेरी हसरतों की दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया

प्यार तेरा इश्क मेरा
कोई मिट जाने की शय नहीं है
तू मिलेगी मेरे दिल को
आज भी तो ये पूरा यकीन है
तू जहाँ है
तू जहाँ है प्यार मेरे
तू जहाँ है प्यार मेरे
मेरे ख्वाबों कि मंजिल वही है

मेरी हसरतों की दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया

हो हो ओ ओ ओ

मेरे दिलवर ज़िन्दगी भर
नाम तेरा रहेगा जुबां पर
सर झुकेगा उस जगह पर
पांव तेरे पड़ेंगे जहाँ पर
पूरे होंगे सारे वादे
पूरे होंगे सनम सारे वादे
वो जो आपस में हमने किये हैं

मेरी हसरतों की दुनिया
मेरी हसरतों की दुनिया
..............................................................
Meri hastaron ki duniya-Gaal gulabi nain sharabi  1973

Read more...

Mar 30, 2009

धड़का तो होगा दिल ज़रूर-सी आई डी ९०९ १९६७

कुछ गीत फ़िल्म में आगे बेंच पर बैठे दर्शकों के लिए बनाये
जाते थे। आगे की बेंच पर बैठ के मैंने भी कुछ फ़िल्में देखी।
वहां बैठ के देखने का आनंद बालकनी में बैठे व्यक्ति को नहीं हो
सकता। बड़े परदे पर सभी चीज़ें बड़े अकार की दिखाई देती है।
ऐसे में कोई हिलती डुलती वस्तु जो परदे के एक छोर से दूसरी
छोर की तरफ़ जाए तो उसको देखने के लिए गर्दन भी वैसी ही
घुमाते रहना पड़ता है। इस गीत में मुमताज़ और बेला बोस के
साथ फिरोज खान दिखाई देंगे आपको। लंबे कद वाली नायिका
मुमताज़ हैं । इस गीत को लिखा है अज़ीज़ कश्मीरी ने और धुन
बनाई है ओ पी नय्यर ने। इस गीत में आए शब्द 'ताबेदार' का अर्थ
है-आज्ञाकारी या सेवक।



गीत के बोल:

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजुर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार

आँखों में तुम्हारी चाहत की तस्वीर लिए
आए हैं,
आए हैं तुम्हारे क़दमों में तकदीर लिए
किस्मत ने कभी मौका जो दिया
दिखलायेंगे हम
दिल चीज़ है क्या
ये जान भी देंगे तुम पे लुटा

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

ये प्यार हमें लाया है कहाँ मालूम नहीं
कहते हैं, किसे आँखों की ज़बान मालूम नहीं

कातिल है अदा, दुश्मन है नज़र
अब बच के कोई जाए किधर
मरने दो यहीं मरना है अगर

धडक तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार

इस दिल से कोई इकरार तो कर
ऐ जाने वफ़ा
थोड़ा ही सही
थोड़ा ही सही प्यार तो कर
ऐ जाने वफ़ा

किस्मत ने कभी मौका जो दिया
दिखलायेंगे हम दिल चीज़ है क्या
ये जान भी देंगे तुम पे लुटा

धडक तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
हमसे छुपाओ न हुजूर
हम हैं तुम्हारे ताबेदार
जाने ताबेदार

धड़का तो होगा दिल ज़रूर
किया जो होगा तुमने प्यार
............................................................
Dhadka to hoga dil zaroor-CID 909 1967

Artists: Bela Bose, Mumtaz, Feroz Khan

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP