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Feb 12, 2018

आ जा जाने जां-गीत गाया पत्थरों ने १९६४

अभिनेत्री राजश्री वाला एक गीत आपने सुना. अब सुनते हैं एक
एकल गीत उनपर फिल्माया गया जिसे आशा भोंसले ने गाया है.
बोल हसरत जयपुरी के हैं और संगीत रामलाल का.

वी शांताराम की कृतियाँ क्लासिक कही जाती हैं. कोई दूसरा ऐसा
निर्माता निर्देशक नहीं है हिंदी सिनेमा क्षेत्र में जिसकी सभी फिल्मों
को क्लासिक का दर्ज़ा प्राप्त हो. किसी कि एक किसी कि दो किसी
कि दस फ़िल्में क्लासिक हो सकती हैं मगर सम्पूर्ण उत्पाद क्लासिक
हो या फिल्म समीक्षकों ने बतलाये हों ऐसा दूसरा नाम नहीं मिलता.
प्रयोगधर्मिता को पैमाना ना बनाया जाए तो बिमल रॉय का नाम
हिंदी सिनेमा के उत्कृष्ट फिल्मकारों में गिना जाता है.

यथार्थवादी सिनेमा की नाव खेने वाले फिल्मकार भी बहुतेरे हुए हैं
एक पीढ़ी में ख्वाजा अहमद अब्बास, दूसरी में बी आर ईशारा और
तीसरी पीढ़ी में जो नाम ध्यान आता है वो रामगोपाल वर्मा का.
सबके कथानक के प्रस्तुतीकरण अलग अलग हैं. आज तो प्रतिभाओं
की झड़ी लगी हुई है बॉलीवुड में, और, रीयलिस्टिक सिनेमा के काफी
कर्णधार दिखलाई देने लगे हैं. पैडमैन जैसी फ़िल्में भी बनाई जाने
लगी हैं. ऐसे विषयों को पहले कोई छूने का प्रयास नहीं करता था.



गीत के बोल:   

आ जा रे जाने जां
आ जा जाने जां मेरे मेहरबां
आ जा जाने जां
नैनों का कजरा बुलाये
दिल का ये अचरा बुलाये
बाहों का गजरा बुलाये
आ जा जाने जां मेरे मेहरबां
आ जा जाने जां

जब से गया तू घर से मेरी मोहब्बत तरसे
पलकों से सावन बरसे बरसे
चंदा चंदा ना गुज़रे इधर से
हर साँस दिल को दुखाये ज़ख़्मों ने आँसू बहाये

आ जा जाने जां मेरे मेहरबां
आ जा जाने जां

घुँघरू में नगमा तुम्हारा आँखों में जलवा तुम्हारा
फूलों में मुखड़ा तुम्हारा तुम्हारा
तारों में तारों में हँसना तुम्हारा
मेरी नज़र ललचाये होठों से निकले हाय

आ जा जाने जां मेरे मेहरबां
आ जा जाने जां
नैनों का कजरा बुलाये
दिल का ये अचरा बुलाये
बाहों का गजरा बुलाये
आ जा जाने जां मेरे मेहरबां
आ जा जाने जां
………………………………………………………….
Aa ja jaane jaan-Geet gaaya pattharon ne 1964

Artist: Rajshri

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Dec 23, 2017

लगी मस्त नज़र की कटार-सेहरा १९६३

कभी कभी मैं सोचता हूँ बिना आलेख क्या गीत नहीं
सुनते श्रोता. सुनते हैं, ज़रूर सुनते हैं. गीत का मजा
लेने वाले ये नहीं देखते पांच पन्ने का निबंध लिखा
है ये प्रेसी लिखी है. जिन्हें केवल कॉपी ही करना हो
उन्हें आलेख ऐसे मिलता है जैसे इडली के साथ सांबर
और चटनी फ्री. पीते जाओ पीते जाओ.

जिन्हें गीत का आनंद लेना हो उन्हें फर्क नहीं पड़ता
नायक अपनी अपान वायु छोड़ने पहाड पे गया या
खुले मैदान में या उसने भरी महफ़िल में ही धीरे से
छोड़ दी.

एक गीत सुनते हैं फिल्म सेहरा से जिसे रफ़ी ने
गाया है. हसरत के बोल हैं और रामलाल का संगीत.



गीत के बोल:

लगी मस्त नज़र की कटार
मस्त नज़र की कटार
दिल के उतर गयी पार
इन प्यार की राहों में
हो इन प्यार की राहों में
दिल भी गया हम भी गये
ज़ख्मे जिगर है बहार
मस्त नज़र की कटार
दिल के उतर गयी पार
इन प्यार की राहों में
हो इन प्यार की राहों में
दिल भी गया हम भी गये
ज़ख्मे जिगर है बहार
मस्त नज़र की कटार


चेहरा आ हा
चेहरा चमकीला सूरज हो जैसे प्यार का
बाहें लहराती नक़्शा है एक तलवार का
हम तो लुट गये
हम तो लुट गये
खुशी से हम तो लुट गये
खामोश नज़ारों में
हो खामोश नज़ारों में
प्यासी अदा जिस पे फ़िदा
हम तो हुए सौ बार

हो मस्त नज़र की कटार
मस्त नज़र की कटार
दिल के उतर गयी पार
इन प्यार की राहों में
हो इन प्यार की राहों में
दिल भी गया हम भी गये
ज़ख्मे जिगर है बहार
हो मस्त नज़र की कटार

आँखें हाय हाय
आँखें मतवाली उल्फ़त के जैसे रास्ते
पलकें अलबेली छाया है मेरे वास्ते
झूमे ज़िंदगी
झूमे ज़िंदगी नशे में झूमे ज़िंदगी
दिलवर के खयालों में
हाय दिलवर के खयालों में
हम तो मगन गाते चले
प्यार के नग़मे हज़ार
मस्त नज़र की कटार

मस्त नज़र की कटार
अरे दिल के उतर गयी पार
इन प्यार की राहों में
हो इन प्यार की राहों में
दिल भी गया हम भी गये
ज़ख्मे जिगर है बहार
मस्त नज़र की कटार

खुशबू हा
खुशबू ज़ुल्फ़ों की आती है सर्द हवाओं से
खोया चाहत में अब गुज़रूँ हूँ जिस गाँव से
यादें घेर लें
यादें घेर लें हमको यादें घेर लें
जंगल की फिज़ाओं में
जंगल की फिज़ाओं में
वो जो नहीं फीका लगे
रंग भरा संसार

मस्त नज़र की कटार

मस्त नज़र की कटार
दिल के उतर गयी पार
हाय हाय हाय
इन प्यार की राहों में
हो इन प्यार की राहों में
दिल भी गया हम भी गये
ज़ख्मे जिगर है बहार
हो मस्त नज़र की कटार
दिल के उतर गयी पार
इन प्यार की राहों में
हो इन प्यार की राहों में
दिल भी गया हम भी गये
ज़ख्मे जिगर है बहार
हो मस्त नज़र की कटार
हा हा हा
.............................................
Lagi mast nazar ki katar-Sehra 1963

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Jul 29, 2017

तक़दीर का फ़साना(लता)-सेहरा १९६३

फिल्म सेहरा से फिल्म से एक और कर्णप्रिय गीत सुनते हैं
वी शांताराम निर्देशित फिल्म सेहरा से आपको हम कुछ गीत
पूर्व में सुनवा चुके हैं.

इस गीत का रफ़ी वाला संस्करण आप सुन चुके हैं. प्रस्तुत
गीत लता मंगेशकर ने गाया है. इसे भी हसरत ने लिखा है
और धुन रामलाल ने तैयार की है. इसे पर्दे पर संध्या गा
रही है.





गीत के बोल:

उजड गया है मोहब्बत में जिंदगी का चमन
सितारे हैं मेरी दुनिया के आंसुओं का कफ़न

तक़दीर का फ़साना जाकर किसे सुनाएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं
तक़दीर का फ़साना जाकर किसे सुनाएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं
तक़दीर का फ़साना

देखे थे जो भी सपने
देखे थे जो भी सपने वो बन गए हैं आंसू
जाती हुई हवाओं
जाती हुई हवाओं ले जाओ मेरी आहें
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं
तक़दीर का फ़साना

अपना तो गम नहीं है
अपना तो गम नहीं है गम है तो इतना गम है
वो बेवफा न समझें
वो बेवफा न समझें हमसे बदल ना जाएँ
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं
तक़दीर का फ़साना जाकर किसे सुनाएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं
तक़दीर का फ़साना
............................................................
Taqdeer ka fasana-Sehra 1963

Artist: Sandhya

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Jun 1, 2017

तक़दीर का फ़साना-सेहरा १९६३

वी शांताराम निर्देशित फिल्म सेहरा से आपने कुछ गीत सुने.
फिल्म से एक और कर्णप्रिय गीत सुनते हैं जो फिल्म में दो
संस्करण में मौजूद है. पहले आपको सुनवाते हैं रफ़ी वाला
संस्करण. गीत की रेंज विस्तृत है. अंतरे काफी ऊंचे स्केल
पर गाये गए हैं इस गाने के.

प्रस्तुत गीत को उत्तम कोटि के दर्दीले गीतों में स्थान प्राप्त है.
रामलाल कोई नामचीन संगीतकार नहीं थे मगर उनकी बनाई
इस धुन के हजारों दीवाने हैं. गीत हसरत जयपुरी ने लिखा है.




गीत के बोल:

तक़दीर का फ़साना जाकर किसे सुनाएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं

साँसों में आज मेरे तूफ़ान उठ रहे हैं
शहनाईयों से कह दो कहीं और जा के गाएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं

मतवाले चाँद सूरज तेरा उठाये डोला
तुझको खुशी की परियाँ घर तेरे ले के जाएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं

तुम तो रहो सलामत सेहरा तुम्हे मुबारक
मेरा हर एक आँसू देने लगा दुआएं
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएं
............................................................
Taqdeer ka fasana-Sehra 1963

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May 29, 2017

जा जा जा रे तुझे हम-सेहरा १९६३

सन १९६३ की फिल्म सेहरा में एक से बढ़ कर एक लाजवाब
गीत हैं. वी शांताराम की फिल्मों का संगीत भी अनूठापन लिए
होता है उनकी फिल्मों की तरह. जो कुछ दूसरे निर्देशक रिस्क
लेने से बचते थे या हैं वो सब आपको वी शांताराम की फिल्मों
में मिल जायेगा. रिस्क से यहाँ मतलब प्रयोग से है.

फिल्म से एक बड़े साइज़ का गीत सुनते हैं. ये एक युगल गीत
है लता मंगेशकर और रफ़ी का गाया हुआ. हसरत जयपुरी इसके
रचयिता हैं और रामलाल ने इसकी धुन बनाई है.




गीत के बोल:

कली कब तक छुपेगी एक भँवरे की निगाह से
चमक जाती है बिजली खुद ही इन गहरी घटाओं में
बरस पड़ती है शबनम आप ही ठण्डी फ़िज़ाओं से
अरे जा जा

जा जा जा रे तुझे हम जान गये
कितने पानी में हो पहचान गये
तुम कितने पानी में हो पहचान गये
जा जा जा रे तुझे हम जान गये

आ किनारे आ के लहरों का इशारा देखने वाले
तुझे अपनी खबर भी है नज़ारा देखने वाले
तमाशा खुद न बन जाना तमाशा देखने वाले
जा जा
जा जा जा रे तुझे हम जान गये

आ बदल कर भेस परवाने का शमा झिलमिलाती है
नशीली शाम के पर्दे में सुबह मुस्कुराती है
वो शोला हो के चिंगारी मचल कर नाच जाती है
तो धड़कते दिल से मेरे मदभरी आवाज़ आती है
जा जा अरे जा जा
जा जा जा रे तुझे हम जान गये

आ शमा से बच के रहना सारी तन मन को जला देगी
वो शोला हो के चिंगारी लगी में और लगा देगी
सुबह जब मुस्कुरायेगी तो वो तूफ़ान उठा देगी
खुलेगा शाम क पर्दा वो तुझ को भी मिटा देगी
जा जा
जा जा जा रे तुझे हम जान गये

आ ये काली रेशमी ज़ुल्फ़ें शराबी नैन के प्याले
ये दिल का हाल कह देते हैं दोनों ये ही मतवाले
नहीं डरते किसी से जीत कर भी हारने वाले
क़यामत की नज़र रखते हैं लेकिन ताड़ने वाले
जा जा
जा जा जा रे तुझे हम जान गये

आ ये ज़ुल्फ़ें तो नहीं डसने वाले नाग हैं काले
ये दो आँखें नहीं ज़हर से भरपूर हैं प्याले
तू आँखें रख के भी बेहोश है अरे ताड़ने वाले
क़यामत सामने है जान के पड़ जायेंगे लाले
जा जा
जा जा जा रे तुझे हम जान गये
..............................................................................
Ja ja ja re tujhe ham-Sehra 1963

Artists: Sandhya, Mahipal

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Sep 12, 2016

तेरे खयालों में हम-गीत गाया पत्थरों ने १९६४

किसी कलाकृति में प्राण फूंकना हर कलाकार के बस में नहीं होता.
प्रतिभा के साथ एकाग्रता, दृढ़ता और दैवीय प्रेरणा होना बहुत ज़रूरी
है. ये सब कैसे और कहाँ से आता है इसका अनुमान लगाना कठिन
है. कला के प्रति भावों को तराशा जा सकता है, इन्हें नए सिरे से
पैदा करना एक दुष्कर कार्य है.

कहते हैं पत्थरों में भी जान होती है. शिल्प कला के कुछ नमूने तो
बोलते से प्रतीत होते हैं, यही है एक कलाकार की कल्पनाशीलता की
चरम अवस्था. प्राचीन इमारतों और मंदिरों में कई ऐसे शिल्प मौजूद
हैं जिन्हें देख के हम लोग आश्चर्य करते हैं.

गीत गाया पत्थरों ने फिल्म का कथानक एक कलाकार के ऊपर ही
केंद्रित है.




गीत के बोल:

तेरे खयालों में हम तेरी ही बाहों में हम
तेरे खयालों में हम तेरी ही बाहों में हम
अपने हैं दोनो जहाँ ओ जान-ए-बेखुदी यहाँ
तेरे खयालों में हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

यूँ रोशनी भोर की पलकों में तेरे छुपी
जब आँख खोलेगा तू पुतली में होंगे हमीं
हम हैं कला की जगह आँखों में तेरे रवां
तेरे खयालों में हम
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

मदभर चंचल ये शाम देती है तुझको पयाम
पत्थर से कर शायरी तुझको हमारा सलाम
तू है जहाँ हम वहाँ झूमे ज़मीन आस्मां

तेरे खयालों में हम
..................................................................................
Tere khayalon mein ham-Geet gaaya pattharon ne 1964

Artists: Rajshri, Jeetendra

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Jul 13, 2016

हम हैं नशे में-सेहरा १९६३

काफी दिनों से उत्तम गुणवत्ता वाला शराबी गीत नहीं सुनाया
इधर. एक बार का प्रसंग है चर्चा हुई थी इसी बात पर-ये
उत्तम गुणवत्ता क्या होती है, शराब शराब है. हाँ, एक जवाब
आया. जैसे देसी ठर्रे और विलायती ठर्रे में कोई फर्क नहीं
वैसे ही सब चीजें बराबर है.

विलायती पीने वाले ब्लेंड का महत्त्व जानते हैं. कहा जाता है
शराब जितनी पुरानी होती जाती है उतनी असरदार होती जाती
है. ब्लेंडिंग मतलब स्वादिष्ट मिलावट. दो किस्म की शराबों को
मिला कर स्वाद बढाया जाता है. 

गीत सुनते हैं फिल्म सेहरा से जिसे आशा भोंसले से गवाया
है संगीतकार ने. गीत के बोल लिखे हैं हसरत जयपुरी ने.

आशा भोंसले की गायकी और संध्या के नृत्य की कोई होड
नहीं है, इस गीत को देखने के बाद आप दांतों तले ऊँगली
दबा लेंगे.




गीत के बोल:


आ आ आ आ आ आ हा
आ आ आ आ आ आ हा
हम हैं नशे में तुम हो नशे में
तुम हो नशे में
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में तुम हो नशे में
ओ हो हो हो
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में

हो कल रात देखा था अलबेला सपना
कल रात देखा था अलबेला सपना
मन चाहे बालम को पाया था अपना
फिर मैं न सोयी, फिर
फिर मैं न सोयी सपनों में खोयी
सपनों में खोयी
आहें भरीं हैं उसी का नशा है
आहें भरीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में
हो हो हो हो
हम हैं नशे में

हाय नशा प्यार का है उमर भर रहेगा
नशा प्यार का है उमर भर रहेगा
उल्फ़त के मौजों में ये दिल बहेगा
मैं बन के नदिया
मैं बन के नदिया लहरा रही हूँ
लहरा रही हूँ
लहरें उठीं हैं उसी का नशा है
लहरें उठीं हैं उसी का नशा है

हम हैं नशे में
हो हो हो हो
हम हैं नशे में तुम हो नशे में
तुम हो नशे में
आँखें मिलीं हैं उसी का नशा है
हम हैं नशे में
...................................................................
Ham hain nashe mein-Sehra 1963

Artist: Sandhya

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Jan 6, 2010

तुम तो प्यार हो सजना-सेहरा १९६३

रेगिस्तान की रेतीली रातों में कितना आकर्षण है ये मैंने जैसलमेर
जाकर जाना। रातें ठंडी होती हैं और रेत पर घूमना एक अद्भुत
अनुभूति प्रदान करता है। संगीतकार रामलाल की इस धुन में
अतिरिक्त गहराई है और कोरस की आवाज़ उसके माधुर्य को बढ़ाने
का कार्य करती है । गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने जिसे गाया है
लता मंगेशकर और रफ़ी ने। कश्मीर की पृष्ठभूमि वाली फिल्मों के
गीतों में आपको संतूर की ध्वनि ज़रूर मिल जाएगी। यहाँ ये इस्तेमाल
की गयी है रेगिस्तान में गाये जा रहे गीत में। जहाँ शांति को शांतिपूर्ण
ढंग से छेड़ना होता है, संतूर का प्रयोग उपयुक्त होता है।






गीत के बोल:

तुम तो
तुम तो प्यार हो सजना
तुम तो प्यार हो
मुझे तुमसे प्यारा और ना कोई
तुम तो प्यार हो सजना

तुम तो प्यार हो, सजनी
तुम तो प्यार हो
मुझे तुमसे प्यारा और ना कोई
तुम तो प्यार हो


कितना है प्यार हमसे इतना बता दो
अम्बर पे तारे जितने, इतना समझ लो
सच, मेरी कसम
तेरी कसम तेरी याद मुझे लुटे
कसमें तो खाने वाले होते हैं झूठे
चलो जाओ, हटो जाओ,
दिल का दामन छोडो

तुम तो प्यार हो, सजनी
तुम तो प्यार हो
मुझे तुमसे प्यारा और ना कोई
तुम तो प्यार हो

आ के ना जाए कभी, ऐसी बहार हो
तुम भी हमारे लिए जीवन सिंगार हो
सच, मेरी कसम
तेरी कसम तू है आँख के तिल में
तुम भी छुपी हो मेरे शीशा-ए-दिल में
ओ, मेरे हमदम
मेरे हमदम मेरी बात तो मानो

तुम तो प्यार हो, सजना
तुम तो प्यार हो
मुझे तुमसे प्यारा और ना कोई
तुम तो प्यार हो सजनी
तुम तो प्यार हो सजना
ओ सजनी
तुम तो प्यार हो

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