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Dec 14, 2010

कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही -तलाश १९६९

हिंदी फिल्मों में अचंभित करने वाली पोशाकें अक्सर हेलन ने
ही पहनी हैं। आज की अभिनेत्रियाँ कितना भी पतले वस्त्रों में
सज संवर लें मगर वे सब पुराने दौर की हेलन की बराबरी नहीं
कर सकती। हेलन ने बहुत ही सहजता और गरिमा के साथ इन
गीतों को प्रस्तुत किया जो आम नायिकाओं के बस के बाहर पहले
भी था और अब भी है। या तो नायिकाएं सहज होने का प्रयत्न
करने लगतीं या फिर नृत्य करने का। दोनों काम एक साथ
बमुश्किल किसी किसी नायिका से हो पाते। दरअसल चपलता
और सहजता ये दोनों गुण एक साथ बहुत ही कम देखे जाते
हैं। ऐसे ही मामले में हम लोग विलक्षण शब्द का प्रयोग
करते हैं।

ओ पी रल्हन के निर्देशन में बनी तलाश में एक हेलन का पर
फिल्माया और आशा का गाया गीत है जो उस ज़माने के हिसाब
से काफी आगे था और ये कर्णप्रिय भी है। गीत के बोल लिखे हैं
मजरूह सुल्तानपुरी ने और धुन बनाई है एस डी बर्मन ने। संभव
है इस गीत में एस डी के पुत्र पंचम का भी कुछ योगदान हो, क्यूंकि
वे लम्बे समय अपने पिता के सहायक रहे। पिछले गीत में आपने
खरगोश की पूँछ देखी थी इस गीत में तो ऐसा लगता है मानो कोई
नारंगी रंग का बड़ा सा पक्षी नायिका के सर पर बिठा रखा हो। अब
आप ही बताइए ऐसी विचित्र स्तिथियों में डांस करना क्या बच्चों
का खेल है ? गौर फरमाएं इस गीत को देख कर किसी दर्शक को
लास वेगास और पैरिस की याद आ रही है। संभव है कि निर्देशक
ने किसी विलायती फिल्म में किसी क्लब डांसर का कॉसट्यूम
देख कर हूबहू हिंदी फिल्म की नायिका को पहना दिया हो।
गीत में सभी कुछ लाजवाब है-बोल, संगीत , गायकी, नृत्य
और प्रस्तुतीकरण।



गीत के बोल:

हा हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा
हं हं हं हं हं हं हं हं हं हं
हं हं हं हं

हाय हैंडसम
यहाँ बैठ सकती हूँ ?
माफ़ कीजियेगा

हाय प्रिंस
अकेले हो
शाद्दी नहीं की
प्यार भी नहीं

आ हा हा हा हा हा
इन्होने अभी तक प्यार भी नहीं किया
ऊं हूँ हूँ हूँ

कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं

कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
पर चोरी से कोई देखे ना कहीं

आ मैं तुझे बतला दूँ ये प्यार का रस्ता चलना
आ मैं तुझे बतला दूँ ये प्यार का रस्ता चलना
रंगीन होंठ किसी के छू कर बिन शोलों के जलना
रंगीन होंठ किसी के छू कर बिन शोलों के जलना
आँख में आँखें डाल के कुछ ना कहना और मचलना
अरे हा, अरे हा, हा, हा रे
आ के सम्भाले कोई तो फिर ना सम्भलना
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं

कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं

आज ही अपने दिल में रख ले तू कोई हसीना
आज ही अपने दिल में रख ले तू कोई हसीना
फिर झूम के ज़ुल्फ़ों के साये में रोज़ नज़र से पीना
फिर झूम के ज़ुल्फ़ों के साये में रोज़ नज़र से पीना
सीख ले मरना आज किसी पे ले के धड़कता सीना
अरे हा, अरे हा, हा, हा रे
मरना ना सीखा तूने तो फिर क्या जीना
अरे पगले, नज़र मिला, जहाँ मिले तुझे कोई हसीं

कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
ऐ,पर चोरी से कोई देखे ना कहीं
................................................
Kar Le Pyar Kar Le Ke Din Hain Yahi-Talaash 1969

Artists: OP Ralhan, Rajendra Kumar, Helen

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Oct 24, 2009

खाई है रे हमने कसम-तलाश १९६९

लता मंगेशकर की आवाज़ में एक शानदार नगमा। इसपर अजीब सा नृत्य
किया है शर्मिला टेगोर ने। यूँ कहें कि नृत्य निर्देशक ने करवाया है। इस
फ़िल्म का नाम है तलाश। गाने को देख के नहीं लगता आपको कि एक
अच्छे नृत्य निर्देशक की तलाश है गाने में। ज्यादा दिमाग मत दौडाइए ,
फ़िल्म में अच्छा नृत्य और संगीत है। बस इसी गाने पे नृत्य थोड़ा फिल्मी
दुनिया की भाषा में 'अलग हट के' है ;)

"इस अलग हट के गीत"पर हुयी चर्चा की एक कहानी सुनाते हैं आपको.
एक संगीत फोरम के ९५ प्रतिशत सदस्यों ने इस गीत पर शर्मिला के
नृत्य की तारीफ़ की. हुआ यूँ, वरिष्ठ सदस्यों ने वाह वाह की, अब
बाकी के बचे ९० प्रतिशत सदस्यों की नैतिक जिम्मेदारी हो जाती है कि
हाँ में हाँ मिलाये. इक्का दुक्का जिनको पसंद नहीं आया उन्होंने चर्चा
से आपने आप को अलग कर लिया. उन सयानों में से एक ऐसा भी
था जिसे न तो शर्मिला की एक्टिंग पसंद आती है और ना ही नृत्य.
वो सयाना वैसे बहुत सुलझा हुआ लेकिन कुटिल किस्म का संगीत प्रेमी
है.


गाने के बोल:

खाई है रे हमने कसम
संग रहने की

आएगा रे उडके मेरा हंस परदेसी

खाई है रे हमने कसम
संग रहने की

आएगा रे उड़के मेरा हंस परदेसी

पहला मिलन मोसे नहीं रे सजन का
रहेगा सदा मिलना धरती गगन का

पहला मिलन मोसे नहीं रे सजन का
रहेगा सदा मिलना धरती गगन का

युग से वो है मेरा
युग से वो है मेरा
मैं उसकी रे

खाई है रे हमने कसम
संग रहने की

आएगा रे उड़के मेरा हंस परदेसी

ऐसे तो नहीं उसके रंग में ढली मैं
पिया अंग लग लग के भई सांवली मैं

ऐसे तो नहीं उसके रंग में ढली मैं
पिया अंग लग लग के भाई सांवली मैं

मेरे तन पे छांव है
मेरे तन पे छांव है
उसी की रे

खाई है रे हमने कसम
संग रहने की

आएगा रे उड़के मेरा हंस परदेसी
हंस परदेसी
...मेरा, हंस परदेसी
............................................................................................
 Khai hai re hamne kasam-Talash 1969

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Jun 14, 2009

तेरे नैना तलाश करे जिसे-तलाश १९६९

जो गीत सुनने में हमेशा आनंद देते हैं वैसे गीतों में इसे
शामिल कर लीजिये। मन्ना डे का गाया लाजवाब गीत फ़िल्म
तलाश से जिसे लिखा है मजरूह ने और धुन बनाई है सचिन देव
बर्मन ने। फ़िल्म में एक पार्टी के अवसर पर इस गाया जा रहा है।
थोड़ा अलग सा प्रयोग है। उस समय की फिल्मों में पार्टी के अवसर पर
धिनचक धिनचक धूम धडाक गीतों को दिखने की प्रतियोगिता सी होती
थी। ऐसे में एक शास्त्रीय संगीत आधारित गीत मिल जाए तो एक राहत की
बात कही जाएगी।



गाने के बोल:

खोयी खोयी आँख है झुकी पलक है
जहाँ जहाँ देखेगा तू वही झलक है

खोयी खोयी,

हाँ, तेरे नैना तलाश करे जिसे
वो है तुझी में कहीं दीवाने

तेरे नैना ...

यहाँ दो रूप हैं हर एक के
यहाँ नज़रें उठाना ज़रा देख के
ओ जब उस की मुहब्बत में गुम है तू
वही सूरत नज़र आयेगी चार सू
कौन क्या है मन के सिवा ये कोई क्या जाने

तेरे नैना ...

ये जवान रात ले के तेरा नाम
कहे हाथ बढ़ा कोई हाथ थाम
ओ काली अलका के बादल में बिजलियाँ
गोरी बाहों में चाहत की अंगड़ाइयाँ
जो अदा है इशारा है प्यार का
ओ दीवाने तुझे चाहिये और क्या
पर रुक जा मन की सदा भी सुन दीवाने

तेरे नैना ...

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Apr 18, 2009

पलकों के पीछे से क्या तुमने-तलाश १९६९

१९६९ में एक फ़िल्म आई तलाश जिसमे राजेंद्र कुमार और
शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिकाओं में हैं। इस फ़िल्म की कहानी
कुछ अलग हट के थी। (वैसी नहीं जैसी की इंटरव्यू देते समय
प्रायः हर निर्माता, निर्देशक बताता है) फ़िल्म ओ. पी. रल्हन से
बनाई और इसमे नायक के मित्र की भूमिका भी निभाई।

रल्हन को बॉलीवुड की कुछ सबसे सफल फिल्में बनाने का
श्रेय जाता है। इस फ़िल्म के गानों की ध्वनि गुणवत्ता उत्तम है।
बावजूद इसके, कि इस फ़िल्म में बढ़िया संगीत है, फ़िल्म को
पुरस्कार के नाम पर केवल एक साउंड रिकॉर्डिंग की श्रेणी
में एक पुरस्कार मिला।

ये गाना एक पहाड़ी धुन सा प्रतीत होता है । पहाड़ पर फिल्माया
गया है और इसमे हल्का ईको का प्रयोग किया गया है जो इसकी
सुन्दरता बढाता है ।

गीत में सुंदरता बढाने वाले और भी कई कारक हैं जैसे नायिका के
जूडे की विशेष सज्जा।स्टेचू ऑफ लिबरटी से प्रेरित या साज सज्जा
वाला किसी आदिवासी क्षेत्र में कुछ समय बिता के आया था।
 स्टेचू के साथ दूसरी तरफ़ फूलों का बगीचा। हो सकता है म्युचुअल
इंडक्शन के चलते खुद बगीचे का हिस्सा नायिका के बालों से
चिपक गया हो।

गीत में आपको सेवंती, डहलिया और सेलोसिया के फूल खूब
दिखलाई देंगे। इस गीत को बारिश के बाद के मौसम में फिल्माया
गया होगा ज़रूर।




गीत के बोल:


पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना
नैनो ने सपनों की महफ़िल सजाई है
तुम भी ज़रूर आना
पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना

तौबा मेरी तौबा मुश्किल था एक तो
पहले ही दिल का बहलना
आफत फिर उस पे लट में तुम्हारा
मुखड़ा छिपा के चलना
हाय तौबा मेरी तौबा मुश्किल था एक तो
पहले ही दिल का बहलना
आफत फिर उस पे लट में तुम्हारा
मुखड़ा छिपा के चलना
ऐसे न बोलो पड़ जाये मुझको शरमाना

पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना
नैनो ने सपनों की महफ़िल सजाई है
तुम भी ज़रूर आना
हाय पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना


दुनिया न देखे धडके मेरा मन रस्ता सजन मेरा छोड़ो
तन थरथराए उंगली हमारी देखो पिया न मरोड़ो
दुनिया न देखे धडके मेरा मन रस्ता सजन मेरा छोड़ो
तन थरथराए उंगली हमारी देखो पिया न मरोड़ो
यूँ न सताओ मुझको बना के दीवाना

पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना
नैनो ने सपनों की महफ़िल सजाई है
तुम भी ज़रूर आना
हाय पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना

हूँ आ आ आ आ आ आ आ आ
हूँ आ आ आ आ आ आ आ आ

बच बच के हमसे ओ मतवाली है ये कहाँ का इरादा
नाज़ुक लबो से फिर करती जाओ मिलने का कोई वादा
बच बच के हमसे ओ मतवाली है ये कहाँ का इरादा
नाज़ुक लबो से फिर करती जाओ मिलने का कोई वादा
दिल ये मेरा घर है तुम्हारा आ जाना

पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रजाना
नैनो ने सपनों की महफ़िल सजाई है
तुम भी ज़रूर आना
हाय पलकों के पीछे से क्या तुमने कह डाला
फिर से तो फ़रमाना
………………………………………………
Palkon ke peechhe se kya tumne keh dala-Talash 1969

Artists: Rajendra Kumar, Sharmila Tagore

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