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Jul 13, 2020

दोनों के दिल हैं मजबूर-नर्गिस १९९२

आज १३ जुलाई प्रसिद्ध सेक्सोफोन वादक मनोहारी सिंह की
पुण्यतिथि है. मनोहारी सिंह एस डी बर्मन के ओर्केस्ट्रा से
जुड़े और बाद में उनके पुत्र आर डी बर्मन के साथ उन्होंने
लमे समय तक वादक, संगीत सहायक और अरेंजर के रूप
में काम किया.

मनोहारी सिंह कई वाद्य कुशलता के साथ बजाते थे जिनमें
से एक बांसुरी भी है.

मनोहारी सिंह ने बासु चक्रवर्ती के साथ मिल के जोड़ी भी
बनाई थी. आज हम आपको इसी जोड़ी के संगीत से सजी
सन १९९२ की फिल्म नर्गिस से एक गाना सुनवाते हैं जिसे
लता मंगेशकर और जगजीत सिंह ने गाया है. इसे लिखा
है मजरूह सुल्तानपुरी ने.




गीत के बोल:

मजबूर प्यार से
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
हम क्या करें मेरी जां तुम क्या करो
मेरी जां तुम क्या करो
दोनों के दिल हैं मजबूर प्यार से
हम क्या करें मेरी जां तुम क्या करो
मेरी जां तुम क्या करो
.
............................................................
Dono ke dil hain majboor-Nargis 1992

Artists:

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Aug 6, 2019

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं-जगजीत सिंह

सबा अफ़गानी की लिखी हुई ग़ज़ल सुनते हैं जगजीत सिंह की
आवाज़ में. कागज़ के लिफ़ाफ़े के लिए जैसे gum की ज़रूरत होती
है वैसे ही जिंदगी के लिफ़ाफ़े के लिए गम की ज़रूरत होती है.

प्रकृति के श्रृंगार में कांटे भी अहम भूमिका निभाते हैं. गुलाब के
पौधे से अच्छा उदाहरण कहाँ मिलेगा हमको. कैक्टस खूबसूरत
ना होते तो रईस लोग उसे अपने घरों में ना सजाया करते. इससे
ज्यादा व्याख्या शायद मेरे स्कोप में नहीं है. मैं वाइज़-ए-नादान
नहीं बनना चाहता यहाँ. हाँ फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ां का मतलब बतलाये
देते हैं-शिकायत और रोना.




गीत के बोल:

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं कांटों से भी ज़ीनत होती है
गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं कांटों से भी ज़ीनत होती है
जीने के लिये इस दुनिया में ग़म की भी ज़रूरत होती है

ऐ वाइज़-ए-नादान करता है तू एक क़यामत का चर्चा
ऐ वाइज़-ए-नादान करता है तू एक क़यामत का चर्चा
यहाँ रोज़ निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज़ क़यामत होती है
यहाँ रोज़ निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज़ क़यामत होती है

वो पुरसिश-ए-ग़म को आये हैं कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं
वो पुरसिश-ए-ग़म को आये हैं कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं
ख़ामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दूँ तो शिकायत होती है
ख़ामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दूँ तो शिकायत होती है

करना ही पड़ेगा ज़क़त-ए-अलम पीने ही पड़ेंगे ये आँसू
करना ही पड़ेगा ज़क़त-ए-अलम पीने ही पड़ेंगे ये आँसू
फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ां से ए नादान तौहीन-ए-मोहब्बत होती है
फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ां से ए नादान तौहीन-ए-मोहब्बत होती है

जो आ के रुके दामन पे 'सबा' वो अश्क़ नहीं हैं पानी है
जो आ के रुके दामन पे 'सबा' वो अश्क़ नहीं हैं पानी है
जो अश्क न छलके आँखों से उस अश्क़ की क़ीमत होती है
जो अश्क न छलके आँखों से उस अश्क़ की क़ीमत होती है

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं कांटों से भी ज़ीनत होती है
जीने के लिये इस दुनिया में ग़म की भी ज़रूरत होती है
.....................................................................
Gulshan ki fakat phoolon se-Jagjit Singh

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May 1, 2018

हर घड़ी ख़ुद से उलझना-जगजीत सिंह

निदा फाजली की एक रचना सुनते हैं जगजीत सिंह
की खनकती आवाज़ में. एक यायावर की दास्ताँ सी
लगती इस रचना का आकार बहत छोटा है. कहानी
कभी कभी दो पन्क्तियों में ही पूरी हो जाया करती है.





गीत के बोल:

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा
हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
.................................................................
Har ghadi khud se ulajhna-Jagjit Singh

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Mar 5, 2018

वो कौन है दुनिया में-जगजीत सिंह

एक गीत/ग़ज़ल सुनते हैं जगजीत सिंह की आवाज़ में. एक
एल्बम-लव इज ब्लाइंड में ये शामिल है.

सुख दुःख का चोली दामन का साथ है. एक समय में कोई
सुख होगा तो कोई दुःख भी होगा. छोटा बड़ा होना समय और
स्तिथि पर निर्भर है. एक ही दुःख किसी को बड़ा लगता है तो
किसी को छोटा.

कहने का अंदाज़ बदलता रहता है, मसले वही होते हैं इंसानी
दिमाग में घुमड़ने वाले. जैसे हवा चाहे कंप्रेसर से निकले या
टायर से हवा ही होती है. कभी वो अपने आप बहती है कभी
उसे कोई ज़बरदस्ती निकालता है. पी एच डी ३९ ग्राम बेसन
से बने भजिये पर की जाए या ४० ग्राम बेसन से बने पर,
वो कहलायेगी तो पी. एच. डी. ही. नकलची इसे खूब समझते
हैं.



गीत के बोल:

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता
वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता
किस घर में खुशी होती है मातम नहीं होता
वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता

ऐसे भी है दुनिया में जिन्हें ग़म नहीं होता
ऐसे भी है दुनिया में जिन्हें ग़म नहीं होता
एक ग़म है हमारा जो कभी कम नहीं होता

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता

क्या सुरमा भरी आँखों से आँसू नहीं गिरते
क्या सुरमा भरी आँखों से आँसू नहीं गिरते
क्या मेहंदी लगे हाथों से मातम नहीं होता

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता

कुछ और भी होतीं है बिगड़ने की अदायें
कुछ और भी होतीं है बिगड़ने की अदायें
बनने में सवरने में ये आलम नहीं होता

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता
……………………………………………………………………
Wo kaun hai duniya mein-Jagjit Singh

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Feb 25, 2018

वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था-जगजीत सिंह

जगजीत सिंह के एल्बम मरासिम से एक गीत/ग़ज़ल सुनते हैं.
गुलज़ार की रचना है और संगीत स्वयं जगजीत सिंह का है.

कभी कभी ये समझने में मुश्किल होती है कि गीत है या नज़्म,
कविता है या ग़ज़ल. समझ आना चाहिए और आनंद आना चाहिए.
ब्रेड पकोडा खाओ, सैंडविच या ब्रेड रोल अगर आनंद तीनों में आये
तो तीनो खाओ. है ना दोस्तों !




गीत के बोल:

वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था
वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था
वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था

कुछ और भी हो गया नुमाया
कुछ और भी हो गया नुमाया
मैं अपना लिखा मिटा रहा था
मैं अपना लिखा मिटा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था
वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था

उसी का ईमान बदल गया है
उसी का ईमान बदल गया है
कभी जो मेरा खुदा रहा था
कभी जो मेरा खुदा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था
वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था

वो एक दिन एक अजनबी को
वो एक दिन एक अजनबी को
मेरी कहानी सुना रहा था
मेरी कहानी सुना रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था
वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था
मैं साल अपने बढ़ा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था
वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था
………………………………….
Wo khat ke purze-Jagjit Singh Non film

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Aug 21, 2017

चम्पई धूप के साये-लीला २००२

२००२ की फिल्म लीला से एक गीत सुनते हैं. चम्पई शब्द वाला
एक गीत हमने आपको सुनवाया था कुछ समय पहले जिसके बोल
साहिर के हैं.

आज सुनते हैं गुलज़ार के बोल वाला चम्पई गीत. शुभा मुद्गल के
गाये इस गीत की तर्ज़ बनाई है जगजीत सिंह ने.

फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं डिम्पल कपाडिया और विनोद खन्ना.
दीप्ति नवल और गुलशन ग्रोवर अन्य प्रमुख कलाकार हैं. आंग्ल
भाषा की इस फिल्म में कुछ कर्णप्रिय हिंदी गीत हैं.





गीत के बोल:

चम्पई धूप के साये
चम्पई धूप के साये
बाहों में सिमट आये हैं
बहने लगे हैं शरयानों में
बड़ा रंगीं लगता है
फिर भी ग़मगीं लगता है

छाँव छोड़ के धूप में चलना
छाँव छोड़ के धूप में चलना
धूप सदा रहती भी नहीं
यूँ भी कभी तो होता होगा
गुनाह हसीं लगता है
फिर भी ग़मगीं लगता है
…………………………………………………………….
Champai dhoop ke saaye-Leela 2002

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Aug 15, 2017

ये फासले तेरी गलियों के-मम्मो १९९४

श्याम बेनेगल ने फिल्म मम्मो का निर्देशन किया था. ये फिल्म
सन १९९४ में अवतरित हुयी थी. जैसे नाम इसके साथ जुड़े हैं,
मसलन निर्देशक, निर्माता-एन एफ डी सी और संगीत निर्देशक
इस फिल्म के-वनराज भाटिया, प्रथम दृष्टया ये फिल्म कोई आर्ट
फिल्म ही दिखाई देती है.

फिल्म के नाम से कुछ ऐसे शब्द-मम्मा, मामू, कम्मो, इत्यादि
याद आ जाते हैं, क्यूँ, समझ नहीं आता.




गीत के बोल:

ये फ़ासले तेरी गलियों के हमसे तय न हुए
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले

न जाने कौन सी मट्टी वतन की मट्टी थी
न जाने कौन सी मट्टी वतन की मट्टी थी
नज़र में धूल जिगर में लिये ग़ुबार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले

ये कैसी सरहदें उलझी हुई हैं पैरों में
ये कैसी सरहदें उलझी हुई हैं पैरों में
हम अपने घर की तरफ़ उठ के बार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले
…………………………………………………….
Ye faasle teri galiyon ke-Mammo 1994

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Jul 20, 2017

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं-पिंजर २००३

इस ग़ज़ल में एक सन्देश है मगर आजकल उपदेश और सन्देश
सुनता कौन है. वो जो टुच्च लोगों द्वारा उच्च वचन व्हाट्स एप
नाम के सरदर्द द्वारा प्रेषित किये जाते हैं वो भी जनता ने पढ़ना
बंद कर दिया है. ऐसे और भी एप हैं जो कभी कभी Ape लगने
लग जाते हैं मानो चिढा रहे हों-तुम नेट ऑन करो हम तुम्हारे
सर पर कूदेंगे.

आवाज़ में सिलवट गुलज़ार के अलावा कौन सोच सकता है?




हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते

जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते

शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा
जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते

लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते
…………………………………………………….
Haath chhoote bhi to rishte-Jagjit Singh Ghazal

Artist:Urmila Matondkar

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Jul 18, 2017

ग़म बढ़े आते हैं कातिल-जगजीत सिंह ग़ज़ल

सुदर्शन फ़ाकिर की लिखी हुई एक ग़ज़ल सुनते हैं
जिसे जगजीत सिंह ने गाया है.
   


बोल:

ग़म बढ़े आते हैं कातिल की निगाहों की तरह
तुम छुपा लो मुझे ऐ दोस्त गुनाहों की तरह

अपनी नज़रों में गुनहगार न होते क्यूँ कर
अपनी नज़रों में गुनहगार न होते क्यूँ कर
दिल ही दुश्मन हैं मुखालिफ़ के गवाहों की तरह

हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त
हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त
बस तेरी याद का साया है पनाहों की तरह
तुम छुपा लो मुझे ऐ दोस्त गुनाहों की तरह

जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाए फ़ाकिर
वो भी पेश आए हैं इंसाफ के शाहों की तरह

ग़म बढ़े आते हैं कातिल की निगाहों की तरह
………………………………………………………..
Gham badhe aate hain-Jagjit Singh ghazal

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May 26, 2017

कांटों की चुभन पाई-चित्रा सिंह ग़ज़ल

चित्रा सिंह की गाई एक ग़ज़ल सुनते हैं. संगीत है
जगजीत सिंह का. बोल सुरिंदर मलिक के हैं.




बोल:

कांटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी
दिल दर्द के मौसम में रोया भी हँसा भी

आने का सबब याद न जाने की खबर है
वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी

हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है
गुमराह मेरे साथ हुअ रहनुमा भी

गुमनाम कभी अपनो से जो ग़म हुए हासिल
कुछ याद रहे उन में तो कुछ भूल गया भी
.....................................................................
Kaanton ki chubhan payi-Chitra Singh

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Apr 26, 2017

उस मोड़ से शुरू करें-गज़ल १९८२

जिंदगी में ऐसे मौके भी आते हैं जब गुज़रा हुआ वक्त
वर्त्तमान से ज्यादा हसीं और लुभावना लगता है. कुछ
रूटीन गज़लों से अलग है ये सुदर्शन फाकिर की लिखी
हुई गज़ल जिसे जगजीत सिंह संग चित्रा सिंह गा रहे
हैं.



गज़ल के बोल:

उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
हर शय जहाँ हसीन थी  हम तुम थे अजनबी
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी

लेकर चले थे हम जिन्हें जन्नत के ख़्वाब थे
फूलों के ख़्वाब थे वो मुहब्बत के ख़्वाब थे
लेकिन कहाँ है इनमें वो  पहली सी दिलकशी
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी

रहते थे हम हसीन ख़यालों की भीड़ में
उलझे हुए हैं आज सवालों की भीड़ में
आने लगी है याद वो फुरसत की हर घड़ी
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
हर शय जहाँ हसीन थी  हम तुम थे अजनबी
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी

शायद ये वक़्त हमसे कोई चाल चल गया
रिश्ता वफ़ा का और ही रंगो में ढल गया
अश्कों की चाँदनी से थी बेहतर वो धूप ही
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
हर शय जहाँ हसीन थी  हम तुम थे अजनबी
उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी
…………………………………………………….
Us mod se shuru Karen-Ghazal Jagjit Singh

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Apr 2, 2017

मेरा जीवन तेरी शरण-माता भजन

आज चैत्र नवरात्र की छठ तिथि के अवसर पर सुनते हैं
एक माता भजन. इसे जगजीत सिंह और साथियों ने
गाया है.




भजन के बोल:

मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
ओ मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण

सारे राग विराग हुए अब
सारे राग विराग हुए अब
मोह सारे त्याग हुए अब
मोह सारे त्याग हुए अब
सारे राग विराग हुए अब
मोह सारे त्याग हुए अब
एक यही मेरा बंधन
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण

अविरत रहा भटकता अब तक
अविरत रहा भटकता अब तक
भटकूं मैं और अभी कब तक

भटकूं मैं और अभी कब तक
अविरत रहा भटकता अब तक
भटकूं मैं और अभी कब तक
पा लूं कवल तुझको ही माँ
पा लूं कवल तुझको ही माँ
एक यही है मेरी लगन

मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण
मेरा जीवन तेरी शरण

तेरे चरणों पर हूँ अर्पण
तेरे चरणों पर हूँ अर्पण
मेरे जीवन के गुण अवगुण
मेरे जीवन के गुण अवगुण
तेरे चरणों पर हूँ अर्पण
मेरे जीवन के गुण अवगुण
सारी व्यथाएं दूर करो माँ
सारी व्यथाएं दूर करो माँ
हो कुसिमित मेरा नंदन

मेरा जीवन तेरी शरण
सारे राग विराग हुए अब
सारे राग विराग हुए अब
मोह सारे त्याग हुआ अब
मोह सारे त्याग हुआ अब 
एक यही मेरा बंधन
मेरा जीवन तेरी शरण

जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
जय जय माँ जय माँ जय जय माँ
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Mera jeevan teri sharan-Mata Bhajan

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Mar 5, 2017

तेरे आने की जब खबर महके-गैर फ़िल्मी गज़ल २०००

आज सुनते हैं जगजीत सिंह की गयी गज़ल जिसे लिखा है
नवाज़ देवबंदी ने. धुन स्वयं जगजीत सिंह ने तैयार की है.
इसे समीरा रेड्डी पर फिल्माया गया है.









गज़ल के बोल:

तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके

शाम महके तेरे तसव्वुर से
शाम महके तेरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहर महके
शाम के बाद फिर सहर महके

तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके

रात भर सोचता रहा तुझको
रात भर सोचता रहा तुझको
ज़हान-ओ-दिल मेरा रात भर महके
ज़हान-ओ-दिल मेरा रात भर महके

तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके

याद आये तो दिल मुनव्वर हो
याद आये तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके
दीद हो जाए तो नज़र महके

तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके

वो घडी दो घडी जहाँ बैठे
वो घडी दो घडी जहाँ बैठे
वो ज़मीन महके वो शजर महके
वो ज़मीन महके वो शजर महके

तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके
...................................................................
Tere aane ki jab khabarmehke-Jagjit Singh Ghazal

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Feb 15, 2017

चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ाएं-गैर फ़िल्मी गीत

आज एक गैर फ़िल्मी गीत सुनते हैं चित्रा सिंह का गाया हुआ.
बोल लिखे हैं सरदार अंजुम ने और इसकी धुन जगजीत सिंह ने
तैयार की है.

ये सरदार अंजुम वही हैं जिनकी रचना-शराब चीज़ ही ऐसी है
पंकज उधास ने गाई है.




गीत के बोल:

चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ाएं
चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ाएं
ना तुम याद आओ
ना तुम याद आओ ना हम याद आएं
चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ाएं

सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा
सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा
किसे याद रखें
किसे याद रखें किसे भूल जाएं

चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ाएं
ना तुम याद आओ
ना तुम याद आओ ना हम याद आएं

उन्हें क्या खबर हो
उन्हें क्या खबर आने वाला ना आया
उन्हें क्या खबर आने वाला ना आया
बरसती रहीं
बरसती रहीं रात भर ये घटाएं

चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ाएं
ना तुम याद आओ
ना तुम याद आओ ना हम याद आएं
...................................................................
Chalo baant lete hain-Non film song

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Dec 19, 2016

ये तेरा घर ये मेरा घर-साथ साथ १९८२

फिल्म साथ साथ के पिछले गीत सुनवाते वक्त हमने काफी बारूद
खर्च की थी. इस बार बिना बारूद के गीत आपको सुनवा रहे हैं.
विवरण टैग में देख लीजिए. बोलो गूगल देवता की जय.

केवल एक सन्देश- अपने घर से प्रेम करिये चाहे वो एक कमरे का
हो या आलीशान बंगला और अपने संसाधनों में खुश रहना सीखिए.
पडोसी की थाली का घी मत देखिये.



गीत के बोल:

ये तेरा घर ये मेरा घर किसी को देखना हो गर
तो पहले आ के माँग ले मेरी नज़र तेरी नज़र
ये तेरा घर ये मेरा घर
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है

न बादलों की छाँव में न चाँदनी के गाँव में
न फूल जैसे रास्ते बने हैं इसके वास्ते
मगर ये घर अजीब है ज़मीन के क़रीब है
ये ईंट पत्थरों का घर हमारी हसरतों का घर
ये तेरा घर ये मेरा घर
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है

जो चाँदनी नहीं तो क्या ये रोशनी है प्यार की
दिलों के फूल खिल गये तो फ़िक़्र क्या बहार की
हमारे घर न आयेगी कभी खुशी उधार की
हमारी राहतों का घर हमारी चाहतों का घर
ये तेरा घर ये मेरा घर
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है

यहाँ महक वफाओं की मोहब्बतों का रंग है
ये घर तुम्हारा ख्वाब है ये घर मेरी उमंग है
न आरजू पे कैद है ना हौसले पे जंग है
हमारे हौसलों का घर हमारी हिम्मतों का घर

ये तेरा घर ये मेरा घर किसी को देखना हो गर
तो पहले आ के माँग ले मेरी नज़र तेरी नज़र
ये तेरा घर ये मेरा घर
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है
ये घर बहुत हसीन है
………………………………………………………….
Ye tera ghar ye mera ghar-Saath saath 1982

Artists: Farooq Sheikh, Deepti Naval

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Nov 17, 2016

हमको दुश्मन की निगाहों से-चित्रा सिंह गज़ल

बहुत दिन हो गए गज़ल सुने हुए. आज सुनते हैं एक अलग
फ्लेवर वाली गज़ल.

इसे लिखा है रईस अख्तर ने और धुन बनाई है जगजीत सिंह
ने. इसे एक्सटेसीज़ नामक एल्बम में रिलीज़ किया गया था.

लंबा समय किसी के साथ गुज़ार लेने के बाद उसपर भरोसा
हो जाना चाहिए और अगर धोखा भी मिले जो खूबसूरत हो
तो उसे गले लगा लें. ये प्रेम के मामले में तो ठीक है मगर
बाकी के केस में क्या करना चाहिए आप समझिए.

गज़ल में साउंड ओवेरलेप का सुन्दर प्रयोग है जो आम तौर
पर गज़लों में प्रयोग नहीं होता है.



गज़ल के बोल:

हमको दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजे
हमको दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजे
प्यार ही प्यार हैं हम
प्यार ही प्यार हैं हम हम पे भरोसा कीजे
हमको दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजे

चंद यादों के सिवा हाथ न कुछ आयेगा
चंद यादों के सिवा हाथ न कुछ आयेगा
इस तरह उम्र-ए-गुरेज़ा का न पीछा कीजे
प्यार ही प्यार हैं हम
प्यार ही प्यार हैं हम हम पे भरोसा कीजे
हमको दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजे

रौशनी औरों के आँगन में गवारा न सही
रौशनी औरों के आँगन में गवारा न सही

कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजे
प्यार ही प्यार हैं हम
प्यार ही प्यार हैं हम हम पे भरोसा कीजे
हमको दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजे

क्या ख़बर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिये
क्या ख़बर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिये
रोज़ पलकों पे नई शमाएँ जलाया कीजे
प्यार ही प्यार हैं हम
प्यार ही प्यार हैं हम हम पे भरोसा कीजे
हमको दुश्मन की निगाहों से न देखा कीजे
.............................................................
 Hamko dushman ki nigahon se-Chitra Singh

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Nov 10, 2016

कोई फ़रियाद तेरे दिल में-तुम बिन २००१

जीवन की साँसें खोया पाया के हिसाब में ही गिन जाती हैं. इसी
बीच में इंसान को कुछ समय मिलता है जिसमें वो बाकी के थोड़े
बहुत काम कर लेता है. दिमाग का यादों का सेक्शन कभी चैन से
बैठने नहीं देता. वो गुज़रे वक्त की हकीकतों के जाल में फँस कर
वर्तमान में डिस्को डांस करता है.

फिल्म तुम बिन का ये गीत बोलों और इसके अनूठे संगीत की वजह
से लोकप्रिय है. जगजीत सिंह द्वारा गाये गए गीतों और गज़लों में
शायद ही आपने ऐसा संगीत कभी सुना होगा. एक प्रयोगधर्मी सा
गीत जो आगे आने वाले संगीत के लिए रास्ता खोलने वाला था.
ऐसे गीत हमें आज काफी सुनाई देते हैं जिनमें बोल एक प्रेम कहानी
के और संगीत किसी हॉरर फिल्म का सा महसूस होता है.

गीत लिखा है निदा फाजली ने और इस गीत का संगीत तैयार किया
है निखिल विनय की जोड़ी ने. गीत की खूबसूरती ये कि इसका संगीत
रहस्य रोमांच वाली फिल्म और ऑपेरा थियेटर में घुस के निकलता
हुआ अपनी लय पर लौट आता है जैसे ही गीत के बोल उभरते हैं.

गीत में फिल्म का नाम आता है और इसे भी आप शीर्षक गीत कह
सकते हैं.



गीत के बोल:

जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाकी है मगर सांस रुकी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे

हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे

राह चलते हुए अक्सर रुकना होता है
राह चलते हुए अक्सर ये गुमां होता है
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे
वो नज़र छुप के मुझे देख रही हो जैसे

एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर
एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर
जिंदगी तेरी बहुत तेज चली हो जैसे
जिंदगी तेरी बहुत तेज चली हो जैसे

किस तरह पहरूं तुझे सोचता रहता हूं मैं
किस तरह पहरूं तुझे सोचता रहता हूं मैं
मेरी हर सांस तेरे नाम लिखी हो जैसे
मेरी हर सांस तेरे नाम लिखी हो जैसे

कोई फ़रियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे
तूने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे
जान बाकी है मगर सांस रुकी हो जैसे
……………………………………………………….
Koi fariyad-Tum bin 2001

Artists: Priyanshu Chatterji, Sandali Sinha

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Oct 27, 2016

हम तो हैं परदेस में-गैर फ़िल्मी गीत

परदेस और परदेसी हिट्स का अपना अलग आकर्षण है श्रोताओं के
बीच. फ़िल्मी और गैर फ़िल्मी गीतों ने बराबर की लोकप्रियता अर्जित
की है. यकीनन चिट्ठी आई है के पदार्पण के पहले तक शायद इसे
सबसे ज्यादा सुना जाता था.

डा. राही मासूम रज़ा का लिखा ये गीत जगजीत और चित्रा सिंह ने
गाया है और धुन भी जगजीत सिंह की है. प्रस्तुत  वीडियो रॉयल
के लाइव प्रोग्राम का है.



गीत के बोल:


हम तो हैं परदेस में
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
अपनी रात की छत पे कितना तन्हा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में

चांद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीतें हो
चांद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीतें हो
मेरे बिना किस हाल में होगा
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चांद हो

हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद

रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर हो
रात ने ऐसा रात ने ऐसा
रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर
आँगन वाले नीम में जाकर
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चांद हो
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
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Ham to hain pardes mein-Non film song

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Sep 10, 2016

खुदा हमको ऐसी खुदाई-चित्रा सिंह गज़ल

थोडा फ्लेवर बदला जाए और एक गज़ल सुनी जाए. इस
बार आपको सुनवा रहे हैं चित्रा सिंह की गयी एक गज़ल.
बशीर बद्र का कलाम है और संगीत जगजीत सिंह का.

खुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई ना दे

ईश्वर को महसूस ही किया जा सकता है जहाँ तक आम
मनुष्य का सवाल है, इस बात को पुख्ता करती ये गज़ल
और भी कई मसलों को छुपाये हुए है.

सबले अपने अपने यूनीक एक्सपीरियंस होते हैं ईश्वर वाले
विषय में अर्थात हर व्यक्ति का अनुभव दूसरे से जुदा होता
है. ईश्वर कहाँ किस रूप में किस विचार में मिल जाएँ ये
कहना कठिन है.



गज़ल के बोल:

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
के अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

खतावार समझेगी दुनिया तुझे
खतावार समझेगी दुनिया तुझे
अब इतनी ज्यादा सफाई न दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

हँसो आज इतना कि इस शोर में
हँसो आज इतना कि इस शोर में
सदा सिसिकियों की सुनाई न दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

अभी तो बदन में लहू है बहुत
अभी तो बदन में लहू है बहुत
कलम छीन ले रोशनाई ना दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे

खुदा ऐसे एहसास का नाम है
खुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई ना दे

खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
के अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे
खुदा हमको ऐसी खुदाई ना दे
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Khuda hamko aisi khudai na de-Chitra Singh Ghazal

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Aug 13, 2016

सफ़र में धूप तो होगी-गज़ल चित्रा सिंह

निदा फाज़ली की लिखी हुई एक गज़ल सुनते हैं चित्रा सिंह
की आवाज़ में. इसका संगीत जगजीत सिंह ने तैयार किया
है.

जिंदगी का फलसफा है निदा फाज़ली की नज़र से. कोम्पीटीशन
का ज़माना है और गलाकाट प्रतिस्पर्धा. इस दौर में ये ज्यादा
प्रासंगिक मालूम पड़ती है. यहाँ समय के अनुसार खिलौनों को
आप गैजेट्स समझ लें.



सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी, निकल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी, निकल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को, ख़ुद ही, बदल सको तो चलो
तुम अपने आप को, ख़ुद ही, बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिरा के, अगर तुम, सम्भल सको तो चलो
मुझे गिरा के, अगर तुम, सम्भल सको तो चलो

सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो

यही है ज़िंदगी, कुछ ख़ाक, चंद उम्मीदें
यही है ज़िंदगी
यही है ज़िंदगी, कुछ ख़ाक, चंद उम्मीदें
इन्ही खिलौनों से, तुम भी, बहल सको तो चलो
इन्ही खिलौनों से, तुम भी, बहल सको तो चलो

सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी, निकल सको तो चलो
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
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Safar mein dhoop to hogi-Ghazal Chitra Singh

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