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Nov 16, 2025

बाँधी रे काहे प्रीत-संकोच १९७६

रुपहले परदे का माया यही है जब आप चमक रहे होते हैं तो सब 
वाह वाह करते हैं और आपको दिल-ओ-जान से याद किया करते
हैं. एक बार आप हाशिये पर पहुंचे तो कोई पूछने वाला नहीं बचता

नवम्बर के इस महीने में कुछ दिल्मी कलाकार इस दुनिया को फानी
कह गए उनमें से एक हैं अपने ज़माने की खूबसूरत और प्रतिभा
संपन्न अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

अभिनेता संजीव कुमार से वो विवाह करना चाहती थीं. नियति 
को कुछ और मंजूर था. संजीव कुमार असमय संसार छोड़ चले
उसके बाद सुलक्षणा पंडित आजीवन अविवाहित रहीं. 

दर्शकों और सिने प्रेमियों से पूछा जाये तो अधिकांश यही बात 
कहेंगे कि इन दोनों का विवाह हो जाना था.

सुलक्षणा पंडित की आवाज़ में एक गीत सुनते हैं फिल्म 
संकोच का. इसे लिखा है एम् जी हशमत ने और धुना बनायींई
है कल्यानजी आनंदजी ने. अपने समय का ये एक बेहद चर्चित
गीत है.


गीत के बोल:

बांधी रे काहे प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

बांधी रे काहे प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

बाली उमर में मैं ना समझी
बाली उमर में मैं ना समझी
क्या है प्रीत की रीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

पास रही तो मैं ना समझी
दूर हुई तो जाना
दूर हुई तो जाना
प्यार में कैसे अपना बन के
कोई बने बेगाना

कैसे बचेगा अब जीवन
कैसे बचेगा अब जीवन
बिन साथी बिन मिलो

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत

अंग लगी है पेड़ की बेला
लहर को मिले किनारा
लहर को मिले किनारा
बिन साजन के मैं हूँ अकेली
मेरा कौन सहारा
ऐसा सूना लागे जीवन
ऐसा सूना लागे जीवन
जैसे सुर बिन गीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत
बाली उमर में मैं ना समझी
बाली उमर में मैं ना समझी
क्या है प्रीत की रीत

बांधी रे काहे प्रीत, प्रीत
पिया के संग अंजानी रीत.
...............................................................................................
Bandhi re kaahe preet-Sankoch 1976

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Jun 18, 2020

परदेसिया तेरे देश में-गरम खून १९८०

विवरण तो हम रोज ही दिया करते हैं. आज बिना विवरण के
इस गाने को सुन लेते हैं. विवरण वगैरह बाद में दे देंगे.
बस इतना बताये देते हैं ये अपने ज़माने का खूब बजा हुआ
गाना है.



गीत के बोल:

हमें मालूम है आपको जल्दी नहीं है
और फिर आपको ये अपनी लिरिक्स वाली
वेबसाईट के लिए तो चाहिए नहीं होंगी, है न?
……………………………………………………..
Pardesiya tere desh mein-garam khoon

Artists: Vinod Khanna, Sulakshana Pandit


Lyrics:Singhar

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Aug 2, 2019

मौसम मौसम लवली मौसम-थोड़ी सी बेवफाई १९८०

अनवर और सुलक्षणा पंडित के गाया युगल गीत सुनते हैं
फिल्म थोड़ी सी बेवफाई से. युवा पद्मिनी कोल्हापुरे और
युवा सिद्धार्थ रे पर ये गीत फिल्माया गया है. सिद्धार्थ
वही हैं फिल्म बाजीगर के “छुपाना भी नहीं आता” गीत
वाले.

गुलज़ार के बोल हैं और खय्याम का संगीत. फिल्म का ये
गीत थोडा तेज गति वाला है. युवा पीढ़ी के हिसाब से बनाया
गया गीत. फिल्म का दूसरा गीत-आँखों में हमने आपने’
राजेश खन्ना और शबाना आज़मी पर फिल्माया गया है.




गीत के बोल:

हो हो ओ ओ ओ ओ
हो हो ओ ओ ओ ओ

मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

हवा के झोंकों मे तेरी खुशबू सी है
हवा के झोंकों मे तेरी खुशबू सी है
बेवजह लगता है कोई खुशखबरी है

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

कली के होठों पे मुस्कुराहट सी है
कली के होठों पे मुस्कुराहट सी है
कहो तो सुनती हैं सुनो तो कहती हैं

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम

ना जाने ऐसे में क्यूँ बदन जलते हैं
ना जाने ऐसे में क्यूँ बदन जलते हैं
ज़मीन पे उड़ते हैं हवाओं मे चलते हैं

मौसम मौसम लवली मौसम
कसक अनजानी है मद्धम मद्धम
चलो घुल जाएँ मौसम में हम
मौसम मौसम लवली मौसम
मौसम मौसम लवली मौसम
.......................................................................
Mausam mausam lovely mausam-Thodi si bewafai 1980

Artists: Padmini Kolhapure, Siddharth Ray

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Jan 7, 2018

देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ-पायल की झंकार १९८०

एक गीत सुनते हैं राजकमल के संगीत निर्देशन वाला. ७० के
दशक में राजकमल ने सावन को आने दो फिल्म के गीतों से
तहलका मचाया था. राजकमल यूँ तो हिंदी फिल्म संगीत के
क्षेत्र में काफी पहले आ गए थे मगर प्रसिद्धि उन्हें उसी फिल्म
से मिली जिसका जिक्र हमने ऊपर किया है.
   
फिल्म का नाम है पायल की झंकार जिसका गीत आज आप
सुनेंगे. इसे माया गोविन्द ने लिखा है और इस गीत को येसुदास
और सुलक्षणा पंडित गा रहे हैं. फ़िल्मी कृष्ण भजन है मगर इसे
सुनते सुनते आप ध्यानमग्न हो जायेंगे.




गीत के बोल:

देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ

बंशी बजा के करे बरजोरी
बंशी बजा के करे बरजोरी
बिनती करूँ पर माने नहीं मोरी
देखो देखो रोके हमरी डगरिया
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ

जमुना पे आई भरन गगरिया
गगरिया गगरिया
जमुना पे आई भरन ग

नीर भरत जमुना तट पर जब
भर भर नीर उठाई गगर
तब डगर चलत मोहे छेड़त लंगर
हट जाओ जी कुँवर फूटी जात गगर
मोहे छोड़ छोड़ माधव माधव माधव
मोहे छोड़ छोड़ माधव माधव माधव
मोहे छोड़ छोड़ माधव माधव माधव

जमुना पे आई भरन गगरिया
मैं तो भोली श्यामा गुजरिया
भरी गगरी पे मारी कंकरिया
छलिया छेड़े बाँसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ
छलिया छेड़े पांसुरिया
देखो कान्हा नहीं मानत बतियाँ

दीम ता रे ना दिर देना देरे न
दीम ता रे ना दिर देना देरे न
दीम ता दीम ता दीम ता ना दिर देना देरे न
दीम ता दीम ता दीम ता ना दिर देना देरे न
ना दिर न दीम ता दीम ता दीम ता दीम देरे न
देरे न
दीम ता रे ना दिर देना देरे न
ओ दिर तानी दिर दिर तानी दीम तानी दीम देरे न
ओ दिर दिर तानी दीम तानी दीम देरे न
ता दीम ता दीम ता दीम ता दीम देरे न
ता दीम ता दीम ता दीम ता दीम देरे न
धागर किट तक धुम किट तक धि ता धा ता धा ता
दीम तारे ना दिर देना देरे न देरे न देरे न
देरे न देरे न

गोपाल गोपाल गोपाल
बिन गोपाल भयो ब्रज सूनो
बिन गोपाल भयो ब्रज सूनो
कहाँ हो गोपाल कहाँ हो गोपाल
कहाँ हो गोपाल चौपाल
बिन गोपाल भयो ब्रज सूनो
मधुवन सूनो यमुना सूनी
मधुवन सूनो यमुना सूनी
आज कदम की छैयां सूनी
आज कदम की छैयां सूनी
यशोदा को घर आँगन सूनो
नन्द बाबा की अँखियाँ सूनी
सूनी सूनी दधि की मटकियाँ
राधा रानी को मन सूनो
कहाँ हो गोपाल
कहाँ हो गोपाल
कहाँ हो गोपाल
गोपाल
..............................................................
Dekho Kanha nahin maanat-Payal ki jhankar 1980

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May 11, 2017

जब जब अपना मेल हुआ-महुआ १९६९

महुआ फिल्म से एक मधुर गीत सुनते हैं मोहम्मद रफ़ी और
सुलक्षणा पंडित का गाया हुआ.  सोनिक ओमी के संगीत में
कुछ ऐसे एल्बम हैं जिन्हें आप पूरा सुन सकते हैं. महुआ के
गीत उनकी काफी सारी फिल्मों के गीतों से बेहतर हैं. वैसे
हर संगीतकार अपनी कोशिश के हिसाब से बेहतर की कोशिश
करता है मगर जनता को सभी चीज़ें पसंद नहीं आया करतीं.

गीत लिखा है कमर जलालाबादी ने जिन्होंने इस फिल्म के
सभी गीत लिखे हैं. ये फिल्म का शीर्षक गीत कहा जा सकता
है. महुआ नाम वैसे इस फिल्म के ३ गीतों में लिया जाता है.
थम्ब रूल ये कहता है जिस गीत में फिल्म का नाम आये वो
शीर्षक गीत.




गीत के बोल:

जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा
जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा
जनम जनम तक टूट सके ना कभी साथ हमारा
जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा

तेरे गम को गले लगा के हो ओ ओ अपनी खुशियाँ मैं तुझपे लुटा दूं
गथोडा सा तू मुस्कुरा दे हो ओ ओ तो वीराने में कलियाँ खिला दूं
हो ओ ओ ओ ओ ओ शर्माता है कलियों को भी ये बैरी रूप तुम्हारा
जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा

छेड़ के अपने प्यार का नगमा हो ओ ओ  तेरे दिल में तराने जगा दूं
तेरी आँख के आंसू ले के हो ओ ओ नए चाँद सितारे बना दूं
हो ओ ओ ओ ओ ओ नीलगगन पर दीप जले हैं ज़रा देखो नज़ारा
जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा

लाख जनम के अरमानों का हो ओ ओ कोई रंगीन फ़साना बना
ले कर आग तेरे गालों की हो ओ ओ गोरे गोरे कमल मैं खिला दूं
हो ओ ओ ओ ओ ओ आज मिलेगा नदिया से किनारा

जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा
जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा
जनम जनम तक टूट सके ना कभी साथ हमारा
जब जब अपना मेल हुआ तो दिल ये ही पुकारा
....................................................................
Jab jab apna mel hua-Mahua 1969

Artists: Shiv Kumar, Anjana Mumtaz

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Apr 21, 2017

पप्पा जल्दी आ जाना-तकदीर १९६७

कभी कभी कोई गाना याद आने का बहाना कुछ अलग ही होता
है. आज ब्रायन सिलास ला प्यानो पर बजाय एक इन्स्ट्रुमेन्टल
सुनते सुनते एक गीत याद आया जिसमें बच्चे प्यानो बजा रहे
हैं.

फिल्म तकदीर में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं. इनमें से एक आप सुन
चुके हैं. आज आपको बच्चों पर फिल्माया गया गीत सुनवाते हैं
जिसमें अभिनेत्री शालिनी हैं. गौरतलब है फिल्म तकदीर एक
कोंकणी फिल्म निर्मोन का रिमेक है. यह कोंकणी फिल्म राष्ट्रीय
पुरस्कार प्राप्त फिल्म है.


गीत लता मंगेशकर और सुलक्षणा पंडित ने गाया है. आनंद बक्षी
के बोल हैं और लक्ष्मी प्यारे का संगीत.




गीत के बोल:

सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
अच्छी सी गुडिया लाना
गुडिया चाहे ना लाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना
सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
अच्छी सी गुडिया लाना
गुडिया चाहे ना लाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

तुम परदेस गए जब से बस ये हाल हुआ तब से
दिल दीवाना लगता है घर वीराना लगता है
झिलमिल चाँद सितारों ने दरवाजों दीवारों ने
सबने पूछा है हमसे कब जी छूटेगा गम से
कब जी छूटेगा गम से
कब होगा उनका आना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

माँ भी लोरी नहीं गाती हमको नींद नहीं आती
खेल खिलौने टूट गए संगी साथी छूट गए
जेब हमारी खाली है और बासी दीवाली है
हम सबको ना तड़पाओ अपने घर वापस आओ
अपने घर वापस आओ
और कभी फिर ना जाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

खत ना समझो तार है ये कागज नहीं है प्यार है ये
दूरी और इतनी दूरी ऐसी भी क्या मजबूरी
तुम कोई नादान नहीं तुम इससे अनजान नहीं
इस जीवन के सपने हो एक तुम ही तो अपने हो
एक तुम्हीं तो अपने हो
सारा जग है बेगाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना

सात समुन्दर पार से गुड़ियों के बाजार से
अच्छी सी गुडिया लाना
गुडिया चाहे ना लाना
पप्पा जल्दी आ जाना
पप्पा जल्दी आ जाना
……………………………………………………
Pappa jaldi aa jaana-Tadeer 1967

Artists: Shalini Mardolkar, unknown kids

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Sep 15, 2015

अपने जीवन की उलझन को(लता)-उलझन १९७५

आपको उलझन फिल्म का शीर्षक गीत सुनवाया था कुछ समय
पहले जो किशोर कुमार का गाया हुआ है. अब सुनते हैं इस गीत
का महिला संस्करण. इसे लता मंगेशकर ने गया है. गौरतलब
है सुलक्षणा पंडित जो की स्वयं गायिका हैं उनके लिए इस गीत
को लता गा रही हैं.

सुलक्षणा पंडित ने लता के कई गीत डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर
गाये हैं. डबिंग आर्टिस्ट वो होता है जो गीत बनते समय गाया
करता है, गीत पूरा हो जाने के बाद जब मूल गायक उपलब्ध
होता है तो उससे फाइनल गीत गवा लिया जाता है. ऐसी सुविधा
के बारे में कम ही लोगों को मालूम है. कल्याणजी आनंदजी अगर
चाहते तो इस गीत को सुलक्षणा पंडित से भी गवा सकते थे.
खैर जो भी हुआ हो, गीत बढ़िया है और संगीतकार के चयन
का मामला हम अपनी चर्चा में नहीं लाते क्यूंकि हमें इस बारे
में ज्यादा जानकारी नहीं है, ठीक है न भाई लोग(बहनें भी).




गीत के बोल:

अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
बीच भंवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊँ

दिल में ऐसा दर्द छुपा है
दिल में ऐसा दर्द छुपा है
मुझसे सहा न जाए
मुझसे सहा न जाए
कहना तो चाहूँ अपनों से मैं
फिर भी कहा न जाए
फिर भी कहा न जाए
आंसू भी आँखों में आये
आंसू भी आँखों में आये
चुपके से पी जाऊं

अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
बीच भंवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊँ

जीवन के पिंजरे में मन का ये पंछी
जीवन के पिंजरे में मन का ये पंछी
कैसे कैद से छूटे
कैसे कैद से छूटे
जीना होगा इस दुनिया में
जब तक सांस न टूटे
जब तक सांस न टूटे
दम घुटता है अब साँसों का
दम घुटता है अब साँसों का
कैसे बोझ उठाऊँ


अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
बीच भंवर में नाव है मेरी कैसे पार लगाऊँ
अपने जीवन की उलझन को
......................................................................
Apne jeewan ki uljhan ko-Uljhan 1975

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Jul 8, 2015

माना तेरी नज़र में-आहिस्ता आहिस्ता १९८१

फिल्म पूनम के गीत ने एक और खूबसूरत गीत की याद दिलवा दी.
ये है फिल्म आहिस्ता आहिस्ता से सुलक्षणा पंडित का गाया हुआ एक
दर्द भरा गीत. नक्श लायलपुरी के गंभीर बोलों के लिए खय्याम ने
एक निहायत ही कर्णप्रिय धुन बनाई है.

शशि कपूर पुत्र कुणाल कपूर कुछ फिल्मों में दिखाई दिए ये उनमें से
एक दुर्लभ फिल्म है. पद्मिनी कोल्हापुरे तो बहुतेरी फिल्मों में दिखलाई
दीं.




गीत के बोल:

माना तेरी नज़र में तेरा प्यार हम नहीं
माना तेरी नज़र में तेरा प्यार हम नहीं
कैसे कहें के तेरे
कैसे कहें के तेरे तलबगार हम नहीं
माना तेरी नज़र में

तन को जला के राख बनाया बिछा दिया
तन को जला के राख बनाया बिछा दिया
लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नहीं
लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नहीं
माना तेरी नज़र में

जिसको निखारा हमने तमन्ना के खून से
जिसको निखारा हमने तमन्ना के खून से
गुलशन में उस बहार के हक़दार हम नहीं
गुलशन में उस बहार के हक़दार हम नहीं
माना तेरी नज़र में

धोखा दिया है खुद को मोहब्बत के नाम पर
धोखा दिया है खुद को मोहब्बत के नाम पर
ये किस तरह कहें के गुनाहगार हम नहीं

माना तेरी नज़र में तेरा प्यार हम नहीं
कैसे कहें के तेरे
कैसे कहें के तेरे तलबगार हम नहीं
माना तेरी नज़र में
...............................................................
Maana teri nazar mein-Aahista aahista 1981

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Aug 4, 2011

आप अगर आप न होते-गृह प्रवेश १९७९

नायिका नंबर दो का घर में प्रवेश हो चुका है। ये है फिल्म गृह प्रवेश
से दूसरा गीत। गीत में संजीव कुमार और सारिका अपने अपने भावों
का अनुसार प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ रोमांस कुछ रोमांच वाला ये गीत
कर्णप्रिय है। गुलज़ार के बोल, सुलक्षणा पंडित की आवाज़ और कनु रॉय
का संगीत है। आनंद लीजिए।

उल्लेखनीय है कि कनु रॉय ने एक और लीक से हट के बनी फिल्म
आविष्कार में भी संगीत दिया है।




गीत के बोल:

आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते

संगेमरमर के तराशे हुए चेहरे पे अगर
आ आ आ आ आ आ आ
संगेमरमर के तराशे हुए चेहरे पे अगर
आपके हँसने का अंदाज़ यही होता मगर
वो जो शरमा के झुका लेते हैं आप नज़र
ऐसे शरमाने पे हम कैसे न फ़िदा होते

आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते

आपके माथे पे बसती है जवां शाम सहर
आपके माथे पे बसती है जवां शाम सहर
अच्छी लगती है हमें आपकी पेशानी मगर
वो जो माथे पे पसीना उभर आती है मगर
ऐसे माथे पे भला क्यों न लोग फ़िदा होते

आप अगर आप न होते तो भला क्या होते
लोग कहते हैं कि पत्थर के मसीहा होते
.......................................
Aap agar aaap na hote-Griha Pravesh 1979

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Jul 10, 2011

झूमता गाता सावन आया -जज़्बात १९८०

बारिश के मौसम में फिर एक गीत और याद आ गया. सन १९८० की
फ़िल्म जज़्बात से अगला गीत पेश है. एक अनजान सी फ़िल्म है
जिसके गीत पर ज़रीना वहाब होंठ हिला रही हैं. महेंद्र देहलवी के बोलों
को संगीत में ढाला है राजकमल ने और आवाज़ है सुलक्षणा पंडित की .

ज़रीना वहाब ने इस गीत पर काफी मेहनत की होगी. फिल्म गर ज्यादा
न चले तो सब बेकार हो जाता है. महेंद्र देहलवी साहब ने सावन को आग
लगा दी है इस गीत में. फ़िल्मी गीत में कभी सावन आग लगाता है तो
कभी सावन को आग लगा दी जाती है.



गीत के बोल:

हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो
हो ओ ओ हो
हो ओ ओ ओ

झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
पर न लाया साजन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ

रिमझिम रिमझिम बरखा बरसे
ऐसे में प्रियतम ये मनवा
तेरे मिलन को तरसे
सखियाँ झूलें, हाय प्यार के झूले
उसको झूला कौन झुलाये
जिसको साजन भूले
ओ आ जा पिया ओ आ जा रे
झुलना झुला जा रे
ओ आ जा पिया
ओ ओ, झुलना झुला जा रे
तकते हैं नैन तेरी राह दिनन
तू अब तो दरस दिखा जा रे

तेरे नाम की
तेरे नाम की रट लागी है
मन तड़पे तेरे दर्शन को
जो सावन बिन साजन आए
आग लगे उस सावन को

झूमता गाता सावन आया
सावन आया, हो ओ ओ, हो ओ ओ
....................................
Jhoomta gaata sawan aaya-Jazbaat 1980

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Nov 7, 2010

बेक़रार दिल तू गाये जा-दूर का राही १९७१

पिछले गीत में आपने किशोर कुमार को अभिनय करते देखा।
आइये अब उनका एक गीत भी सुन लेते हैं। ये उनके द्वारा
बनाई गई फिल्म 'दूर का राही' से है। इसे लिखा है ए. इरशाद
नाम के गीतकार ने और धुन बनाई है स्वयं किशोर कुमार ने।
इस गीत में किशोर का साथ दिया अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित ने
जिन्होंने एक डबिंग आर्टिस्ट की तरह काफी समय हिंदी फिल्म
संगीत क्षेत्र को अपनी सेवाएँ दीं। उसके बाद उन्होंने पार्श्वगायन
भी किया और कुछ अच्छे गीत भी उनके हिस्से में आये।
फिलहाल इस गीत में वो तनूजा के लिए पार्श्वगायन कर रही हैं।
प्यानो की ध्वनि मेसमेरायिज़ करती हुई सी प्रतीत होती है।

गीत फिल्माया गया है अशोक कुमार पर। अशोक कुमार भी
किशोर की आवाज़ के दीवानों में से एक थे। गीत पूरा सुनिए
ये एक सन्देश देता है। नैराश्य के भंवर में उलझे हुओं को एक
बार अवश्य सुनना चाहिए।



गीत के बोल:

बेक़रार दिल, तू गाये जा
खुशियों से भरे वो तराने
जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, अरे तू गाये जा

राग हो कोई मिलन का,
सुख से भरी सरगम का
युग-युग के बंधन का,
साथ हो लाखों जनम का
ऐसे ही बहारें गाती रहें,
और सजते रहे वीराने

जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा
खुशियों से भरे वो तराने
जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा

रात यूँ ही थम जायेगी,
रुत ये हंसीं मुस्काएगी
बंधी कली खिल जायेगी,
और शबनम शरमायेगी
प्यार के हों ऐसे नगमे,
जो बन जायें अफ़साने

जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा

दर्द में डूबी धुन हो,
सीने में इक सुलगन हो
सांसों में हलकी चुभन हो,
सहमी हुई धड़कन हो
दोहराते रहें बस गीत नये,
दुनिया से रहें बेगाने

जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल दीवाने

बेक़रार दिल, तू गाये जा
खुशियों से भरे वो तराने
जिन्हें सुन के दुनिया झूम उठे
और झूम उठे दिल......

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Feb 4, 2010

जिसके लिए सबको छोड़ा-साजन की सहेली १९८१

बेवफाई का हिंदी अर्थ है-विश्वासघात जो कि एक बहुअर्थी शब्द है।
अंग्रेजी में इसको कहते हैं-betrayal। उर्दू शब्द से हमें सीधे समझ
आता है कि शब्द का मतलब क्या है। हिंदी गानों में अक्सर बेवफा,
बेवफाई शब्द सुनाई देते हैं। इसी प्रकार साजन और सजनी का
मतलब हमें मालूम है। इसके अलावा जो तीसरा चरित्र है उसको
फिल्म ने अच्छा नाम दिया है-साजन की सहेली।

अभी हमें एक परिभाषा सुनना बाकी है-सजनी का सहेला। इस गीत
में सहेली सहेला दोनों हैं। रेखा सहेली हैं तो राजेंद्र कुमार सहेला।
विनोद मेहरा और नूतन की भावनाओं को ठेस लगायी जा रही हैं
गीत में। विनोद मेहरा अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए गाना शुरू
करते हैं और रेखा उन्हें जवाब देती हैं। फिल्मों में नायिका के मुखर
होने का एक अच्छा उदाहरण है ये । सुलक्षणा पंडित और रफ़ी इस
गीत के गायक कलाकार हैं। गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने
और संगीत तैयार किया है उषा खन्ना ने।



गीत के बोल:

जिसके लिए सबको छोड़ा
उसी ने मेरे दिल को तोडा
जिसके लिए सबको छोड़ा
उसी ने मेरे दिल को तोडा
वो बेवफा, वो बेवफा
किसी और के साजन की सहेली हो गयी

तुझसे प्यारा कोई मिला
छोड़ा तुझे तो क्यूँ हैं गिला
तुझसे प्यारा कोई मिला
छोड़ा तुझे तो क्यूँ हैं गिला
मैं बेवफा
ओ मैं बेवफा
किसी और के साजन की सहेली हो गयी
जिसके लिए सबको छोदा
उसी ने मेरे दिल को तोडा

ला ला ला, ला ला ला,
ला ला ला ला ला रा ला ला

देखो क्या खुश हो के
पायल को झनकारे
जलके राह जाए दिल
ऐसे करे इशारे
देखो क्या खुश हो के
पायल को झनकारे
जलके राह जाए दिल
ऐसे करे इशारे
आ के मेरे सितमगर
गैर के दिल में बस के
कैसी बेशर्मी से
बात करे हंस हंस के
कैसे कहूं क्या हो गया
कल मेरा दिल थी जो दिलरुबा, हाँ
कैसे कहूं क्या हो गया
कल मेरा दिल थी वो दिलरुबा
वो बेवफा, ओ बेवफा
किसी और के साजन की सहेली हो गयी
हो,तुझसे प्यारा कोई मिला
छोड़ा तुझे तो क्यूँ हैं गिला

मैं तो हूँ इक तितली
उड़ने फिरने वाली
कैसे रहूंगी बैठी
एक ही दिल की डाली
मैं तो हूँ इक तितली
उड़ने फिरने वाली
कैसे रहूंगी बैठी
एक ही दिल की डाली
जब एक से एक बढ़ के
हैं प्यार के नज़ारे
फिर क्यूँ ना लहराऊँ
क्यूँ ना करूं इशारे
कैसी शर्म कैसी हया
जबसे मिला है साथी नया
कैसी शर्म कैसी हया
जबसे मिला है साथी नया
मैं बेवफा, हो मैं बेवफा
किसी और के साजन की सहेली हो गयी
जिसके लिए सबको छोड़ा
उसी ने मेरे दिल को तोडा

प्यार नशा है ऐसा
जिसपे छा जाता है
आस पास भी उसको
कम ही नज़र आता है
प्यार नशा है ऐसा
जिसपे छा जाता है
आस पास भी उसको
कम ही नज़र आता है
माना के मेरे दिल में
प्यारी सी इक लड़की
आन बसी है फिर से
बन के शमा मेरे घर की
चाहा उसे तो क्या हुआ
इसमें किसी का जाता है क्या
चाहा उसे तो क्या हुआ
इसमें किसी का जाता है क्या
ओ बेवफा
ओ मैं बेवफा
किसी और के साजन की सहेली हो गई
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Jiske liye sabko chhoda-Sajan ki saheli 1981

Artists: Rekha, Rajendra Kumar, Vinod Mehra, Nutan

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