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Dec 26, 2019

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा-अपना घर १९६०

कहते हैं जो अपना स्वयं सम्मान नहीं करता उसका
सम्मान दूसरे भी नहीं करते. कुछ वैसे ही शरीर की
इन्द्रियों का भी उचित सम्मान आवश्यक है. ये तो
व्यक्ति पे स्वयं निर्भर है कि वो इनका उपयोग किस
प्रकार से और कितना करे..

शरीर की प्रमुख इन्द्रियों में आँखों को सबसे उच्च
स्थान दिया गया है. ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्रमा
को सीधे आँखों से ना देखें. धार्मिक दृष्टि से देखें या
वैज्ञानिक दृष्टि से, दोनों ही मामले से ये बात सटीक
है.

सुनते हैं फिल्म अपना घर से अगला गीत जिसे
मोहम्मद रफ़ी और आरती मुखर्जी ने गाया है.

प्रेम धवन की रचना है और रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि
का संगीत.




गीत के बोल:

कोई न हो इस जग में दाता
आँखों से मजबूर
दुनिया में रह कर भी हम है
इस दुनिया से दूर

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
हम है जहाँ पर उस दुनिया में
कभी न हुआ सवेरा
सूरज चाँद सितारे सबको
सूरज चाँद सितारे सबको
देखा हमने काला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
फिरते है अपने कंधे पर
अपनी लाश उठाये
जीवन भी इक बोझ बना है
जीवन भी इक बोझ बना है
कब तक जाये संभाला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कब तक यूँ ही सहते जायें
दुनिया के तानों को

नूर तो छीना दाता बहरा भी कर दे कानों को
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला तेरा खेल निराला
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
…………………………………………….
Aankhen badi hain nemat-Apna Ghar 1960

Artists:

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Jul 8, 2019

श्याम तेरी बंसी पुकारे-गीत गाता चल १९७५

श्याम की बंसी कितनी मोहक और मधुर रही होगी वो तो द्वापर
युग के भाग्यशाली लोग ही सुन पाए. उसका जो विवरण मिलता
है उससे यही मालूम होता है कि उनसे बड़ा बांसुरी बजाने वाला
सृष्टि ने न देखा और न ही आगे देखने को मिलेगा.

सुनते हैं श्याम की बंसी के विवरण वाला एक गीत सन १९७५ की
फिल्म गीत गाता चल से. इसे जसपाल सिंह और आरती मुखर्जी
ने गाया है. गीत के बोल और संगीत रवींद्र जैन के हैं. फ़िल्मी भजन
यूँ तो लोकप्रिय हो ही जाते हैं मगर इसकी बात कुछ खास है. इसके
बोल और धुन दोनों मोहक हैं.



गीत के बोल:

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम

सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

हो जमुना की लहरें बंसीबट की छैयां
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
जमुना की लहरें बंसीबट की छैयां
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
श्याम का दीवाना तो सारा बृजधाम
श्याम का दीवाना तो सारा बृजधाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम

सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

ओ कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाये वो इसी के गुण गाये
कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाये वो इसी के गुण गाये
कौन नहीं
कौन नहीं बसी की धुन का गुलाम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करें मीरा को यूँ ही बदनाम
………………………………………………………
Shyam teri bansi pukare-Geet gaata chal 1975

Artists: Sachin, Sarika

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Dec 2, 2017

वादियों में खो जाएँ-आरम्भ १९७६

अनजान फिल्मों से गीतों की श्रृखंला में आज पप्रस्तुत है फिल्म
आरम्भ से एक युगल गीत मुकेश और आरती मुखर्जी का गाया
हुआ. शकील अहमद के लिखे बोलों की तर्ज़ बनाई है संगीतकार
आनंद शंकर ने.

ऑफ बीट फिल्म आरम्भ का निर्देशन ज्ञान कुमार ने किया है
और इसमें किशोर नामित कपूर, राकेश पांडे और रमा विज़ जैसे
कलाकारों ने काम किया है.

आरती मुखर्जी बंगाल में एक बेहद लोकप्रिय नाम है और उन्होंने
कई हिंदी फिल्मों के लिए गीत गाये हैं. उनके प्रमुख लोकप्रिय गीतों
में तपस्या का दो पंछी, मासूम का दो नैना एक कहानी हैं.



गीत के बोल:

वादियों में खो जाएं हम तुम
आओ इन वादियों में खो जाएं हम तुम
हम तुम
ये समा है सुहाना
हाँ जी हाँ सुहाना
हो जाएं गुमसुम
हो हो हो हो वादियों में खो जाएं हम तुम
आओ इन वादियों में खो जाएं हम तुम
हम तुम
ये समा है सुहाना
हाँ जी हाँ सुहाना
हो जाएं गुमसुम

मुझे दोनों जहाँ की मिल गई हैं ख़ुशियाँ
तुम जो मिले हमराही मिले
दिल का ये चमन फिर लगा मुस्कुराने
अरमानों के हैं फूल खिले
सहारा तुम ही तो हो सहारा
हाँ जी हाँ सहारा
चलते जाएं हम

प्यारा ये समा है मौसम भी जवाँ है
चारों तरफ़ हुस्न की दास्ताँ है
मुझे लगता है जैसे हमें देख कर ये
लगा मुस्कराने ज़मीं आसमां है
दीवाना प्यार में हो के दीवाना
जैसे ये सारा ज़माना
अपनी धुन में ग़ुम

आ हाँ हाँ हाँ वादियों में खो जाएं हम तुम
आओ इन वादियों में खो जाएं हम तुम
हम तुम
ये समा है सुहाना
हाँ जी हाँ सुहाना
हो जाएं गुमसुम
ओ हो हो हो वादियों में खो जाएं हम तुम
...................................................................
Wadiyon mein kho jayen-Aarambh 1976

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Sep 15, 2017

मैं वही दर्पण वही-गीत गाता चल १९७५

राजश्री निर्मित फिल्म गीत गाता चल से एक मधुर गीत
सुनते हैं. रवींद्र जैन के गीत संगीत वाले इस फिल्म के
गाने आरती मुखर्जी ने गाये हैं. रवींद्र जैन की रेगुलर
सिंग्रेस हेमलता ने बस एक गीत गाया है फिल्म में वो
भी एक युगल गीत है जसपाल सिंह के साथ.

आरती मुखर्जी की आवाज़ में एक स्थायी कंपन है जो कम
गायिकाओं की आवाज़ में आपको मिलेगा. बेहद प्रतिभाशाली
आरती मुखर्जी ने हिंदी फिल्मों के लिए चुनिन्दा गीत ही गाये
हैं. सबसे ज्यादा गीत उन्होंने बप्पी लहरी और रवींद्र जैन के
लिए ही गाये हैं. बंगला संगीत में उनका बड़ा नाम है.

वीडियो गीत में एक अन्तरा कम है. वो अन्तरा ऑडियो गीत
में उपलब्ध है. उपलब्ध ऑडियो गीत में एक अन्तरा कम है.



गीत के बोल:

मैं वही दर्पण वही
मैं वही दर्पण वही
ना जाने ये क्या हो गया
के सब कुछ लागे नया नया
के सब कुछ लागे नया नया
हो ओ ओ ओ मैं वही दर्पण वही

मैं तो गाने लगी गुनगुनाने लगी
ना जाने ये मैं किस ओर जाने लगी
तन वही मेरा मन वही
तन वही मेरा मन वही
ना जाने ये क्या हो गया
के सब कुछ लागे नया नया
के सब कुछ लागे नया नया
हो ओ ओ ओ मैं वही दर्पण वही

इक जादू की छड़ी तन मन पे पड़ी
हो ओ ओ ओ इक जादू की छड़ी तन मन पे पड़ी
मैं जहाँ की रह गई वहीं पे खड़ी हो ओ ओ ओ ओ
घर वही आँगन वही
रे मेरा घर वही आँगन वही
ना जाने ये क्या हो गया
के सब कुछ लागे नया नया
के सब कुछ लागे नया नया
हो ओ ओ ओ मैं वही दर्पण वही

कहीं दूर पपीहा बोले पिया पिया
हो ओ ओ ओ कहीं दूर पपीहा बोले पिया पिया
उड़ जाने को बेकल है मोरा जिया हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
दिल वही धड़कन वही
रे मेरा दिल वही धड़कन वही
ना जाने ये क्या हो गया
के सब कुछ लागे नया नया
के सब कुछ लागे नया नया

हो ओ ओ ओ मैं वही दर्पण वही
मैं वही दर्पण वही
ना जाने ये क्या हो गया
के सब कुछ लागे नया नया
के सब कुछ लागे नया नया
..............................................................
Main wahi darpan wahi-Geet gaata chal 1975

Artist: Sarika

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Aug 9, 2016

हमें उन राहों पर चलना है-मासूम १९६०

सुबीर सेन और आरती मुखर्जी का गाया एक गीत सुनते हैं
जिसमें कोरस का भी गायन है. राजा मेहँदी अली खान के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है रॉबिन बैनर्जी ने. सन १९६०
की फिल्म मासूम का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था.
फिल्म में सरोष ईरानी, हनी ईरानी, मनमोहन कृष्ण, मोहन
चोटी, केष्टो मुखर्जी, चमन पुरी जैसे कलाकार हैं.

सत्येन बोस ने इससे पहले सन १९५४ में बच्चों वाली फिल्म
बनायीं थी जागृति जो काफी चर्चित रही और उस फिल्म के
गीत तो आज भी आप सुन सकते हैं.सन१९५४ की ही एक
फिल्म के लिए उन्होंने संगीतकार शैलेश को मौका दिया था
जिन्हें बाद में सवेरा फिल्म का संगीत तैयार करने का भी
अवसर मिला. बोस ने रोबिन बैनर्जी से केवल यही फिल्म
मासूम करवाई. ७० के दशक में बोस की अधिकांश फिल्मों
में लक्ष्मी-प्यारे का संगीत है.

इस गीत में सुबीर सेन का उच्चारण काफी हद तक साफ़ है.
उनसे काफी रिहर्सल कराई होगी संगीत निर्देशक ने इस गीत
के लिए अन्यथा वो ‘दुर मेरी मंज़िल’ और ‘दिल हुआ घायिल’
जैसा कुछ गाते. तब भी ‘इन’ और ‘उन’ शब्दों का मिश्रण
है गीत में.



गीत के बोल:

हमें उन राहों पर चलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
चढ़ना है हमें चंदा की तरह
सूरज की तरह नहीं ढ़लना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम हैं दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
हँसना ही नहीं फूलों की तरह
दीपक की तरह हमें जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
कभी ग़म हैं यहाँ कभी हैं ख़ुशियाँ
हर हाल में हम को पलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
.......................................................................
Hamen un rahon par-Masoom 1960

Honey Irani, Sarosh Irani, Manmohan Krishna

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Mar 3, 2009

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने-दो दिल १९६४

ये गीत ४५ साल पुराना है। विश्वास ही नहीं होता कभी कि ये गीत
इतने पुराने हैं। आज भी सुनो तो वैसे ही लगते हैं जैसे नए हों। ये
गीत आरती मुखर्जी और रफ़ी का गाया हुआ युगल गीत है। परदे
पर इसे राजश्री और विश्वजीत पर फिल्माया गया है। बोल लिखे हैं
कैफी आज़मी और संगीत तैयार किया है हेमंत कुमार ने । इस
फ़िल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था।



गीत के बोल:

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने
सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने
ओ रसिया, मन बसिया

तीखा तीखा कजरा लगाया तूने
काहे को जगाया जादू तूने
ओ सजनी सुख रजनी

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने

ओ रसिया मन बसिया
तूने प्यास जगा दी
नई आग लगा दी
मेरा अंग अंग जला जाए

ओ सजनी सुख रजनी
ज़रा नैन मिला ले
लगी दिल की बुझा ले
तेरे संग संग कोई आए
तेरा रूप सहा नहीं जाए

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने

कहे सारा ज़माना
मुझे तेरा दीवाना
सदा हार हार तुझे चाहूं

मेरी प्रीत पुरानी
हुयी तेरी दीवानी
पिया बार बार तुझे चाहूं

तेरे अंग....?? का मुझे आए

तीखा तीखा कजरा लगाया तूने

ओ रसिया मन बसिया
मेरे नैन नशीले
मेरे होंठ रसीले
जिया झूम झूम मेरा गाये

ओ सजनी सुख रजनी
ये फिजा भी शराबी
ये हवा भी शराबी

तुझे चूम चूम इधर आए
मुझे दूर कहीं लिए जाए

सारा मेरा कजरा छुड़ाया तूने
गरवा से कैसे लगाया तूने

ओ, तीखा तीखा कजरा लगाया तूने
काहे को जगाया जादू तूने
ओ सजनी सुख रजनी
ओ रसिया, मन बसिया
ओ सजनी सुख रजनी
ओ रसिया, मन बसिया
.......................................................................
Saara mera kajra-Do  Dil 1964

Artists: Biswajeet, Rajshri

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