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Jan 10, 2019

मैं रिक्शावाला-छोटी बहन १९५९

महमूद ने १९७४ में एक फिल्म बनाई थी जिसमें
स्वयं एक रिक्शा वाले की भूमिका निभाई थी और
खूब रिक्शा चलाया था. १५ साल पहले की फिल्म
छोटी बहन में भी उन्होंने रिक्शा चलाया था और
एक गीत भी उन पर फिल्माया गया जिसे रफ़ी
ने गाया.

हल्का फुल्का गीत है और इसमें थोड़े कटाक्ष भी
हैं. गीत की शुरुआत ही कटाक्ष से होती है जब
नायक घोड़े की टाप वाले अंदाज़ में अपने पैर
चलाता है. गीत की पंक्ति ‘है चार के बराबर’ उसकी
पुष्टि करती है या उनका अभिनय गीत की पंक्तियों
की पुष्टि करता है, जैसा चाहें समझ लें.

सवारी को स्टेशन छोड़ने के बाद अगली सवारी
के लिए गुहार लगाता है. एक सवारी जेबें झाडती
हुई निकल जाती है. स्टेशन के बाहर रिक्शे वाले
सवारियों के दिमाग पर इतना जोर डालते हैं कि
कई सवारियां तो उनकी बक-बक को बंद करने के
लिए ही उनके रिक्शे में बैठ जाते हैं. ये सिलसिला
आज भी जारी है बस रिक्शे में इंजिन लग गया है.
कोई तीन टांग वाला है तो कोई चार टांग वाला.

जहाँ घोडा होना चाहिए वहाँ आदमी है.धूल उड़ाती
कार जब बाजू से गुज़रती है तो नायक सोचता है-
कहाँ थे कहाँ आ गये. समय किसे कहाँ ला पटके
और किसे कौन से आसमान पर बिठला दे, ये
प्रारब्ध के लेखे के सिवा कौन बतला सकता है.

संसाधन और उदारता के बीच व्युत्क्रमानुपाती
सम्बन्ध है. जैसे जैसे पैसे बढते जाते हैं, दिमाग
का एक कोना जो उदारता को प्रेरित करता है
सिकुड़ता जाता है. दुनिया का अधिकांश धन कुछ
प्रतिशत लोगों के पास ही है. इस विसंगति पर भी

प्रश्न है इस गीत में जिसका जवाब तो हम भी
खोज रहे हैं आज तक. गीतकार हैं शैलेन्द्र और
संगीतकार शंकर जयकिशन.



गीत के बोल:

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

दूर दूर दूर कोई मुझको बुलाये
मुझको बुलाये
क्या करूँ दिल उसे भूल न पाये
भूल न पाये
मैं रिश्ते जोडूं दिल के मुझे ही मंज़िल पे
कोई न पहुँचाये कोई न पहुँचाये

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

थी कभी चाँद तक अपनी उड़ान
अपनी उड़ान
अब ये धूल ये सड़क अपना जहान
अपना जहान
जो कोई देखे चौँकें ऊपर वाला भी सोचे
ये कैसा इंसान ये कैसा इंसान

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

रात दिन हर घड़ी एक सवाल
एक सवाल
रोटियां कम हैं क्यूँ क्यूँ है अकाल
क्यूँ है अकाल
क्यूँ दुनिया मे कमी हैं ये चोरी किसने की है
कहाँ है सारा माल कहाँ है सारा माल

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
…………………………………….
Main riksha wala-Chhoti Behan 1959

Artist: Mehmood

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May 29, 2016

जाऊं कहाँ बता ऐ दिल-छोटी बहन १९५९

समय का पता ही नहीं चलता. अभी सात साल पहले ही तो
ब्लॉग शुरू किया था. उस समय बहुत से लोगों ने ऐसे विषयों
पर ब्लॉग शुरू किया था. कुछ तो काफी आगे निकल गए और
कुछ बीच राह में ब्लॉग जगत से जुदा हो गए. उसी तरह से
जिंदगी भी कई पड़ावों से गुजर गयी. बहुत से लोग छूट गए,
बहुत से बिछड़ गए, कुछ ने हमसे दूरी बना ली बचे हुए कुछ से
हमने दूरियां बढ़ा लीं. समय की मांग जैसी होती है वैसा ही
जीव करता है.

ब्लॉग शुरू करना सही रहा या नहीं ये तो वक्त ही बतलायेगा
मगर एक बात सही है कि समय खपाऊ काम है और ये हर
किसी के बस का रोग नहीं. आगे आने वाला समय हिंदी के
लिए अच्छा है इसलिए आशा की जा सकती है भविष्य सुनहरा
नहीं तो चांदिया अवश्य ही होगा. 

हर व्यक्ति एक सार्थक उद्देश्य की आस में जीता है. अब ये कुछ
भी हो सकता है-१० किलो खाना, १० किलो ह..ना,  १० बच्चे
पैदा करना, १० भैंस पालना, १० गाडियां खरीदना, १० फैक्ट्री
खोलना, १० मकान बनाना यैसा ही और कुछ. जीवन की जो
भी सार्थकता है वो इसी में है कि आप उपयोगी बने इस संसार
के लिए चाहे जिस रूप में हो. सुख बांटने में है न कि छीनने में
या चोरी करने में.

प्रस्तुत गीत है फिल्म छोटी बहन से जिसमें छोटी बहन हैं-नंदा,
भाई हैं रहमान और भाभी हैं श्यामा. गीत में जिस चांदनी का
जिक्र है वो श्यामा ही हैं. फिल्म एक बार ज़रूर देखें अगर आपने
ना देखी हो.




गीत के बोल:

जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल
दुनिया बड़ी है संगदिल
चांदनी आई घर जलाने
सूझे ना कोई मंज़िल
जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल

बन के टूटे यहाँ, आरज़ू के महल
ये ज़मीं, आसमाँ, भी गए हैं बदल
कहती है ज़िंदगी, इस जहाँ से निकल

जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल
दुनिया बड़ी है संगदिल
चांदनी आई घर जलाने
सूझे ना कोई मंज़िल
जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल

हाय इस पार तो, आँसुओं की डगर
जाने उस पार क्या, है किसे ये खबर
ठोकरें, खा रही, हर कदम पर नज़र

जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल
दुनिया बड़ी है संगदिल
चांदनी आई घर जलाने
सूझे ना कोई मंज़िल
जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल
………………………………………………………
Jaaoon kahan bata ae dil-Chhoti Behan 1959

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Jun 9, 2011

मैं रंगीला प्यार का राही-छोटी बहन १९५९

आइये एक हास्य गीत सुनें। गाने के बोल ज्यादा मजाकिया नहीं हैं
मगर ये फिल्माया गया है महमूद और शुभा खोटे की प्रसिद्ध जोड़ी पर।
फिल्म छोटी बहन के २ गीत आप सुन चुके हैं इस ब्लॉग पर। ये तीसरा
गीत है। गीत गाया है सुबीर सेन और लता मंगेशकर ने। इस गीत
को सुबीर जैसा गा रहे हैं वैसे ही बोल लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
भूल चूक लेनी देनी। हर दूसरा बंगाली गायक उन दिनों हेमंत कुमार
का दूर का रिश्तेदार सुनाई पढता। तांगा बहुत दिन से ना सड़क पे दिखा
और ना ही किसी बम्बैया गीत में, सो आज देख लेते हैं । उम्मीद है
इस गीत पर घोड़े ने भी खुश हो कर कुछ आवाजें ज़रूर निकाली होंगी।
ताँगे के नीचे लगी घंटी की आवाज़ तक सुना दी गई है गीत में।




गीत के बोल:

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा

तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
तेरी राह पर जो मैं रुक गया
मुझे रही ना अपनी खबर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
मेरे साथ चल मेरे हमसफ़र
अब तेरी मेरी एक डगर
अब तेरी मेरी एक डगर

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
जो आज है वो कभी ना था
ये चमन पे उजला निखर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
ये रंग है मेरे प्यार का
जो खिला है बन के बाहर
जो खिला है बन के बाहर

तेरे लिए ही संभाल के रखा था
प्यार भरा ये दिल
तेरे इशारों पे चलता रहेगा
ओ मेरे कातिल

मैं रंगीला प्यार का राही
दुर मेरी मंजिल
शोख नज़र का तीर तुने मारा
दिल हुआ घाईल

फुर्र्र्र या हा
ऐ हा हा हा हा हा
.................................
Main rangeela pyar ka raahi-Chhoti behan 1959

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Jan 20, 2010

ये कैसा न्याय तेरा-छोटी बहन १९५९

हिंदी फिल्मों में केवल इश्क मोहब्बत के गीत ही नहीं वरन
दर्शन, धर्म और समाज की विसंगतियों पर भी कई गीत बने
हैं। कुछ बेबसी को दर्शाते तो कुछ सामाजिक व्यवस्थाओं पर
कटाक्ष करते गीत, सभी कुछ मिलेगा आपको इस खजाने में।

एक गीत है फिल्म छोटी बहन से जो नंदा पर फिल्माया गया
है. इसको गाया है लता मंगेशकर ने। गीत लिखा है शैलेन्द्र ने
और धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने ।



गीत के बोल:

ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा
ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा

किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा
ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा

तकदीर हमसे रूठी, अपने हुए पराये
तकदीर हमसे रूठी, अपने हुए पराये
जाने कहाँ चले हैं, जाने कहाँ से आये
चारों तरफ अँधेरा, बरबादियों ने घेरा
किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

ये कैसा न्याय तेरा दीपक तले अँधेरा

हमने ना होए जाना, दुःख चैन क्या ख़ुशी क्या
हमने ना होए जाना, दुःख चैन क्या ख़ुशी क्या
है रात उम्र भर की, अंधों की ज़िन्दगी क्या
दिल पूछता है मेरा है कौन ये लुटेरा
किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

ये कैसा न्याय तेरा दीपक तले अँधेरा
ये कैसा न्याय तेरा दीपक तले अँधेरा

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Aug 5, 2009

भैया मेरे राखी के बंधन को- छोटी बहन १९५९

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना - ये गीत शायद फिल्मों का
सबसे प्रसिद्ध राखी त्यौहार का गीत है। रेडियो पर ही ये रक्षा बंधन
के अवसर पर १०-१२ बार बज जाता है।

फ़िल्म छोटी बहन(१९५९) में इसको नंदा और बलराज साहनी पर
फिल्माया गया है। लता मंगेशकर ने इस गीत को गाया है ।
इस अमर गीत को लिखा है शैलेन्द्र ने जिन्होंने कमाल के गीत
दिए हैं हिन्दी फ़िल्म जगत को। संगीत है शंकर जयकिशन का ।



गाने के बोल:

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना
भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना

देखो ये नाता निभाना , निभाना

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना
भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना

भैया मेरे............

ये दिन ये त्यौहार खुशी का
पवन जैसे नीर नदी का
भाई के उजले माथे पे
बहन लगाये मंगल टीका

झूमे ये सावन सुहाना

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना
भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना

भैया मेरे............

बाँध के हमने रेशम डोरी
तुमसे वो उम्मीद है जोड़ी
नाज़ुक है जो साँस के जैसी
पर जीवन भर जाए न तोडी

जाने ये सारा ज़माना
भैया मेरे , भैया मेरे
राखी के बंधन को निभाना ......

शायद वो सावन भी आए
जो पहला सा रंग न लाये
बहन पराये देश बसी हो
अगर वो तुम तक पहुँच न पाए

याद का दीपक जलाना

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना
भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना

भैया मेरे............
...............................................................
Bhaiye mere rakhi ke bandhan ko-Chhoti behan 1959

Artists: Balraj Sahni, Nanda

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